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लॉकडाउन 3 00:15:14 लॉकडाउन 3 Video Duration : 00:15:14 प्रेम रावत जी द्वारा हिंदी में सम्बोधित (26 मार्च, 2020)

प्रेम रावत जी:v

मेरे श्रोताओं को मेरा बहुत-बहुत नमस्कार!

आज मैं चर्चा करूंगा उन चीजों की, क्योंकि काफी लोगों ने प्रश्न भेजें हैं। और अभी उन क्वेश्चनस को, उन प्रश्नों को असेम्ब्ल (assemble) किया जा रहा है, परन्तु मैंने देखा कि काफी लोग अभी भी घबराये हुए हैं इस कोरोना वायरस की वजह से। और कई लोग इस बात में भ्रमित हैं कि उन्होनें बहुत कुछ सुना है, "ऐसा करना चाहिए, ऐसा करना चाहिए, ऐसा करना चाहिए; ये करना चाहिए; वो करना चाहिए!" तो मैं डॉक्टर तो हूँ नहीं, परन्तु मैं इस बात को, जो मैंने समझी है और मैंने काफी डॉक्टरों से भी बात की है।

तो इस समय में अगर हम कुछ कर सकें तो वो दो चीजों का हम ध्यान दें। और वो है — "एक तो किसी को यह बीमारी दें ना और किसी से ये बीमारी लें ना!" बस! ना दो, ना लो! तो वह कैसे संभव होगी ?

वह तभी संभव होगी जब आप और लोगों के पास आएंगे नहीं, जाएंगे नहीं और आइसोलेशन में रहेंगे। हाथ धोइये, शरीर को धोइये, साफ रहिये और घबराने की कोई बात नहीं है। घबराने से कोई चीज सिद्ध नहीं होती है। घबराने से कोई चीज ठीक नहीं होती है। घबराने से कोई चीज अच्छी नहीं होती है। यह घबराने का समय नहीं है। यह तो सब्र रखने का समय है। सब्र रखिये अपने होश-हवाश से और जो अंदर से आपकी ताकत है, जिसे करेज़ (courage) कहते हैं, जिसे हिम्मत कहते हैं, यह उससे काम लेने की जरूरत है। उन चीजों की जरूरत है। घबराने से कुछ नहीं होगा, डरने से कुछ नहीं होगा। क्या कर रहे हैं आप — अब मैं आपको एक — आज सवेरे मैं जब सोच रहा था इसके बारे में, तो मैंने एक उदाहरण सोच

मैंने देखा है ये, कहीं अगर चूहा दिखाई दे जाये घर में, तो लोग क्या करते हैं ? उस चूहे से दूर भागते हैं या तो कोई मेज़ है उस पर चढ़ जाएंगे या कुर्सी है उस पर चढ़ जायेंगे। उससे दूर भागेंगे। बस यही करना है! दूर भागना है ताकि वो बीमारी आप तक ना पहुंचें। यह सबसे साधारण बात है और इस बात का ध्यान रहे कि आपके अंदर वह ताकत है, जिससे कि आप इन परिस्थितियों में, इस समय में अच्छी तरीके से, आनंद से यह समय गुजार सकते हैं।

देखिये सब्र की बात है! यह भी एक दिन नहीं रहेगी। सब्र की बात है! सब्र करना है, यह नहीं है कि “अब क्या होगा, अब क्या होगा, अब क्या होगा, अब क्या होगा!" क्योंकि मन है —

मन के बहुत तरंग हैं, छिन छिन बदले सोय।

एक ही रंग में जो रहे, ऐसा बिरला कोय।।

इधर-उधर की बातें नहीं, पर स्पष्ट बात। जो समझ में आये, जिससे कि फिर हम अपने जीवन के अंदर उस आनंद को न भूलें। ठीक है, परिस्थिति ठीक नहीं है, बहुत कुछ हो रहा है। फिर भी हृदय को तो आनंद चाहिए। और वह आनंद उस हृदय को अब भी मिल सकता है। वह आपके अंदर है, वह बाहर से नहीं आएगा, वह आपके अंदर है, उसका आप आनंद लें। उसको आप खोजें कि, "कहाँ है वो चीज, जो आपके अंदर है ?"

जिन लोगों को यह ज्ञान है, उनलोगों के लिए तो बड़ी सरल बात है। उनको मालूम है कि वह चीज कहाँ है! जैसे मैंने पहले भी कहा है कि "अपने आपको जानो, यह बात बहुत जरूरी है। अपने आपको समझो, यह बात बहुत जरूरी है।" क्योंकि अगर ये चीजें हम नहीं समझ सके इस जीवन के अंदर तो कब समझेंगे। जो कुछ भी हो रहा है, यह तो एक मौका है। इसका भी आप फायदा उठा सकते हैं। अगर आप चाहें तो इसका भी आप फायदा उठा सकते हैं। ये परिस्थितियां अच्छी नहीं हैं। बाहर जो यह परिस्थिति है, वह अच्छी नहीं है। परन्तु अंदर जो परिस्थिति है, वह तो अच्छी है। तो अगर आपको बाहर नहीं पसंद है तो आप अन्तर्मुख होइये। अंदर की तरफ जाइये, अपने हृदय की तरफ जाइये।

जो बातें हमको संत-महात्माओं ने कितने ही वर्षों से, कितने ही हजारों-हजारों वर्षों से वो बात कही है कि —

नर तन भव वारिधि कहुं बेरो।

इस भव सागर से पार उतरने का यह साधन है।

सनमुख मरुत अनुग्रह मेरो।।

इस स्वांस का आना-जाना ही मेरी कृपा है।

तो क्या आपके ऊपर यह कृपा नहीं हो रही है ? यह स्वांस जो आपके अंदर आ रहा है, जा रहा है, क्या उस परमेश्वर की, जो आशीर्वाद है वह आपके ऊपर नहीं आ रहा है ? आ रहा है! पर इस बात को आप समझिये। अपने आपको इन परिस्थितयों के कारण, यह कहना कि मेरा यह दुर्भाग्य है, ये है, वो है। ये बातें सब अच्छी नहीं हैं। इनकी जरूरत नहीं है। जरूरत है उस चीज की, कि वो दिया, जिस दीये से मेरे अंदर का अंधकार मिट सकता है, वह दिया मेरे अंदर है। उसको जलाना बहुत जरूरी है। जब वह जलेगा तो उसके प्रकाश से जो अँधेरा है वो खतम होगा। उसका नाश होगा। जब अँधेरे का नाश होगा तो क्या दिखाई देगा? जो स्पष्ट है, जो असली है। यह असली नहीं है।

2019 में अप्रैल में या मार्च में किसी को ख्याल भी नहीं था इसके बारे में कि कोरोना वायरस क्या होती है। उसके बाद फिर जब अंत का समय आया 2019 का, तब लोगों को खबर पड़ी कि "हां! ये चीज है, अब ये करना चाहिए, वो करना चाहिए। इससे इतने लोग मर गए!"

जब चाइना में लोग मर रहे थे तब फिर किसी को हिन्दुस्तान में यह डर भी नहीं था कि कुछ होगा। सब ठीक था। पर धीरे-धीरे-धीरे करके जब यह सारे संसार में फैलने लगा, तो लोगों को डर लगने लगा। पर डर की बात नहीं है। कितने ही हजारों-हजार लोग जिनको यह वायरस लगी, वो ठीक हो गए, वो ठीक हो गए। अब सारे नंबर, बहुत बड़े हैं नंबर, परंतु वो ठीक हो गए। तो सबसे बड़ी बात यही है कि हम अपने जीवन में क्या चाहते हैं ? कोई भी परिस्थिति आये, अच्छी से अच्छी परिस्थिति आये, खराब से खराब परिस्थिति आये। ऐसी भी परिस्थिति आये जिसमें डरने की बात हो, फिर भी मनुष्य डरे नहीं, हिम्मत से काम ले और वो हिम्मत की जो एनर्ज़ी (Energy ) है वह कहाँ से आएगी ? वह आपके घट से आएगी! वह आपके अंदर से आएगी।

आज यही चीजें मैं लोगों को बताता हूँ कि "भाई! बाहर की दुनिया एक है, अंदर की दुनिया एक है।" इसमें दो बातों को समझो — जो बाहर की दुनिया है यह बाहर की दुनिया है। इसमें सबकुछ बदलता रहता है। कोई चीज इस बाहर की दुनिया में स्थायी नहीं है। कोई कुछ करता है, कोई कुछ करता है, कोई कुछ करता है, कोई कुछ करता है।

परंतु यह अंदर की जो दुनिया है, जो अंदर की दुनिया है, यह स्थायी है। इसमें ये नहीं हो रहा है, वो नहीं हो रहा है, वो — इसमें एक चीज हो रही है। क्या हो रहा है कि —

सनमुख मरुत अनुग्रह मेरो।।

इस स्वांस का आना-जाना ही मेरी कृपा है।

अब लोग तो भागते हैं, "हमको ये कर दो, वो कर दो, वो कर दो।" उटपटांग बातें — "वहां बारह कुओं से पानी पी लो, ये कर लो, वो कर लो, तो तुम्हारा ये हो जायेगा, तुम्हारा वो हो जायेगा।"

लोगों को बेवकूफ बनाने की बात है। परन्तु तुम्हारे अंदर हर एक स्वांस में यह प्रभु की कृपा है। इसके बारे में कोई बात नहीं करना चाहता। इसके बारे में मैं बात करता हूँ। क्योंकि यह असली चीज है। इसके होने से आप हो, इसके न होने से आप नहीं होंगे।

जब आप पैदा हुए, तो सबसे बड़ी चीज क्या थी कि आप स्वांस ले रहे हो या नहीं ? उस समय जब आप आये बाहर तो ये नहीं था कि यह लड़का है या लड़की है। ना! स्वांस ले रहा है या नहीं ले रहा है ? यह जो बच्चा आया है, यह स्वांस ले रहा है या नहीं ले रहा है ? और जब अंत का समय आता है, तब फिर स्वांस पर ही बात आती है कि स्वांस ले रहा है या नहीं ले रहा है ? नहीं ले रहा है — तो गया! ले रहा है — तो ठीक है!

जब आप बच्चे थे, जब आप आये — स्वांस ले रहा है या नहीं ले रहा है यह बच्चा ? ले रहा है, तो ठीक है। नहीं ले रहा है, तो गड़बड़ है। और जब स्वांस ली, तब आप जिंदा हुए। जब सांस रुकी, आप गए! इसी के लिए कहा है कि "यही है मेरी कृपा।" और जब तक यह आ रहा है, जा रहा है आप में, तो आपको डरने की क्या जरूरत है। जब तक आप जिंदा हैं आपको डरने की कोई जरूरत नहीं है। डर से कुछ नहीं होगा। जीते जी आनंद से अपनी दुनिया, अपने जीवन को बितायें।

समझें कि यह कितनी अच्छी चीज आपको मिली हुई है। यह जो जीवन है, यह ज्ञान है, अपने आपको जानो। सचेत होकर के इस जीवन को बिताओ और हृदय में आभार को महसूस करो। उसका आनंद लो। नाम ही है सच्चिदानंद! ‘सच’ सब चीजों का आनंद के लिए, आनंद के लिए, आनंद के लिए, आनंद के लिए! और समय आएगा, यह भी चला जाएगा, यह कोरोना वायरस, यह डर, सब, सब नॉर्मल होगा। परंतु यह जो समय है, इसमें आप डर के इसको गवां सकते हैं, फेंक सकते हैं ?

पहचान करने की बात है। हर दिन जो आप बिता रहे हैं, आप अपने साथ बिता रहे हैं। अब लोगों के साथ यह भी दिक्कत है कि अपने रिश्तेदारों के साथ, अपनी वाइफ के साथ या अपनी मिसेज़ के साथ या अपने पति के साथ या अपनी बहन के साथ या अपने भाई के साथ या अपने बेटों के साथ या अपने पापा के साथ या अपनी मम्मी के साथ लोग समय बिता रहे हैं। अरे भई! इनसे तुम प्यार करते हो। इनसे नफरत कब से हो गयी चालू ? इनसे तुम प्यार करते हो। समझो इस बात को कि इनसे तुम प्यार करते हो! ये तुम्हारे ही हिस्से हैं। इनसे नफरत करके क्या मिलेगा तुमको ? जो कुछ भी है अगर तुम उनसे नफरत करते हो तो यह नफरत तुम्हारे अंदर से आ रही है।

तो अगर समझ में आया तो सबके साथ मिलकर-जुलकर आनंद से यह समय बिताया जाए। अगर बिता सके आनंद से तो वाह-वाह है। यह समय भी आसानी से बीत जाएगा। सब्र करो! यह सहनशक्ति लोगों में अब रह नहीं गयी है। सब्र करना लोगों को आता नहीं है और यह सब्र करने का एक मौका है। सीखने का एक मौका है। सब्र से, धीरज से, हिम्मत से काम लेने का यह समय है। और वही बात, चाहे यह हो या न हो आनंद लेना है। और जिनके पास यह आनंद लेने की विधि है, वह आनंद लें। जिनके पास नहीं है वो जानें कि जिस आनंद की उनको खोज है, वह अभी भी उनके अंदर है और रहेगा। जब तक यह स्वांस आ रहा है, जा रहा है, तब तक यह आनंद तुम्हारे अंदर है। आखिरी स्वांस तक तुम्हारे अंदर है। अगर कुछ न भी हो तो इस बात को समझो और अपने जीवन को सफल बनाओ।

तो सभी श्रोताओं को मेरा बहुत-बहुत नमस्कार!

लॉकडाउन 2 00:16:55 लॉकडाउन 2 Video Duration : 00:16:55 प्रेम रावत जी द्वारा हिंदी में सम्बोधित (25 मार्च, 2020)

प्रेम रावत जी:

मेरे श्रोताओं को मेरा नमस्कार!

इस माहौल में किस चीज के बारे में बात की जाए, तो ध्यान आता है — तो एक बात तो स्पष्ट है कि इस कोरोना वायरस से पहले लोगों का मन उनको परेशान करता था। और आज यह कोरोना वायरस है, लॉकडाउन है, ये सारी चीजें हैं और यह मन सबसे ज्यादा लोगों को परेशान करता है। तो एक दोहा है कि —

कुंभ का बाँधा जल रहे, पर जल बिन कुंभ न होय,

ज्ञान का बाँधा मन रहे, पर गुरु बिन ज्ञान न होय।

समझिये कि जो कुंभ है, जो मटका है, उसमें एक क्षमता है और वह क्षमता यह है कि वह बड़ी आसानी से जल को रख सकता है। जल इधर-उधर भागेगा नहीं, जो मटके में रहेगा वह मटके में रहेगा। परंतु बिना उस जल के वह मटका बन नहीं सकता, वह मटका तैयार नहीं हो सकता। उसमें — उससे पहले वह क्या है ? उससे पहले वह मिट्टी है, कुछ नहीं है। अगर उसमें जल डालें आप तो वह जल को रखेगा नहीं बल्कि गाड़ा बन जायेगा, कीचड़ बन जायेगा। और जब कुम्हार उस मिटटी को लेगा, उसमें जल मिलाएगा, पानी मिलाएगा; उसको मटका का आकार देगा, फिर उसको पकायेगा वो, तो अपने आप उसमें एक क्षमता आएगी कि वह उस जल को रख सके। इसी प्रकार यह उदाहरण दिया है कि जो मन है, ज्ञान उस मन को बाँध सकता है — मैं बताऊंगा ज्ञान, जो मन बाँधने की बात है, क्या है। परंतु गुरु के बिना वह ज्ञान नहीं होता है, जो उस मन को बाँध ले।

तो आज हो क्या रहा है ? वही हो रहा है, कोई इधर भाग रहा है; कोई उधर भाग रहा है। कोई किसी चीज के बारे में सोच रहा है; कोई किसी चीज के बारे में सोच रहा है। कोई यह सोच रहा है कि — मेरे साथ क्या होगा, मेरा क्या होगा; ये नहीं है मेरे पास; वो नहीं है मेरे पास। मैं जाऊँगा, क्या होगा — इस देश का क्या होगा; नेताओं का क्या होगा; पुलिस का क्या होगा। सब, सब लोग — मन जो है, कोई रोक नहीं है इसके लिए, यह भाग रहा है, भाग रहा है, भाग रहा है, भाग रहा है। कभी किधर भागता है; कभी किधर भागता है; कभी किधर भागता है।

सबसे बड़ी बात यह है कि इस मन के भागने में कोई समस्या है। तो अगर कोई समस्या है, तो सबसे बड़ी समस्या इस मन के भागने में यह है कि — यह मन लोगों को परेशान करता है, बिना बात के। अब जो होगा सो होगा, उसको तो कोई टाल नहीं सकता। पर लोगों को सब्र नहीं है कि देखें जो कहा जा रहा है, उसका पालन करें, आइसोलेट करें, घर में रहें, बाहर नहीं जाएँ। और कंटैमिनेशन जो होता है — अगर किसी को यह बीमारी है, कोरोना वायरस की या वायरस लगा हुआ है और वो जंप (jump) करे किसी पर तो अच्छी बात नहीं है।

तो साधारण सी बात है कि आप वहां मत जाइये जहां यह हो सकता है। संभव हो रहा है, कुछ समय लगेगा, बैठिये! परंतु यह मन ही है, जो बैठने नहीं देता है, घर में नहीं बैठने देता है, घर से बाहर भागता है कि — "तू भी आ जा, तू भी आ जा मेरे साथ, चलते हैं वहां चलें, वहां बड़ा मज़ा आता है, वहां बड़ा मज़ा आता है; वहां बड़ा मज़ा आता है!"

यह सबको मालूम है कि यह मन लोगों को सब जगह भगाता है और फिर जब भगाता है, भगाता है, भगाता है, जब दूर ले जाता है। तब किस चीज की याद आती है ? घर की याद आती है। और जब घर में बैठ जाते हैं तो किस चीज की याद आती है ? "वहां चलेंगे, वहां चलेंगे, वहां चलेंगे, वहां चलेंगे!"

स्पष्ट बात तो यह है कि यह परेशान करता है। तो "ज्ञान और मन का बाँधना", इसका मतलब क्या हुआ ?

जब मनुष्य अपने आपको जानता है, अपने आपको पहचानता है। जब वह ये जानता है कि मैं कहाँ हूँ और घर में अगर कोई — अगर आप बैठे हैं अपने घर में; अपने अपार्टमेंट में; अपने घर में, अपने मकान में और कोई दरवाजा खटखटाये, तो आपको अच्छी तरीके से मालूम है कि आपने नहीं खटखटाया है वो, तो कोई और है! कोई और दरवाजा खटखटा रहा है। अगर आपके घर में आपकी मिसेज़ हैं, आपकी घरवाली हैं और आप दोनों के दोनों बैठकर टेलीविज़न देख रहे हैं और दरवाज़ा कोई खटखटाये, तो आपको अच्छी तरीके से मालूम है कि आपने दरवाज़ा नहीं खटखटाया है और आपकी मिसेज़ ने दरवाज़ा नहीं खटखटाया है, तो कोई और है।

अच्छा! अगर आपका कोई बच्चा है, लड़का है और वह भी आपके साथ है और यही आपकी फैमिली है उस जगह — आप हैं; आपकी मिसेज़ हैं और आपका बच्चा है और आप सब बैठे हुए हैं एक ही कमरे में और कोई दरवाजा खटखटा रहा है तो आपको भी मालूम है कि आपने दरवाज़ा नहीं खटखटाया है; आपकी मिसेज़ ने दरवाज़ा नहीं खटखटाया है; आपके बच्चे ने दरवाज़ा नहीं खटखटाया है, तो कोई और होगा!

यह एक सिंपल सी बात है, बड़ी साधारण सी बात है, परंतु जब आप अपने आपको जानते ही नहीं है कि आप कहां हैं, कौन हैं, क्या हैं, तो जब कोई दरवाज़ा खटखटायेगा तो आपको यह भी नहीं मालूम है कि "यह मेरा कमरा है या किसी और का कमरा है।"

कौन खटखटा रहा है ? मैं तो नहीं खटखटा रहा या मैं खटखटा रहा हूँ ? अपने आपको जब मनुष्य जानता ही नहीं है, जब अपने आपको मनुष्य समझता ही नहीं है, तो जो कुछ भी उसके इर्द-गिर्द हो रहा है वह कैसे समझेगा कि क्या ठीक है उसके लिए, क्या गलत है उसके लिए। क्या अच्छा है उसके लिए; क्या बुरा है उसके लिए। समझ नहीं सकता। क्योंकि उसको मालूम ही नहीं है कि वह कौन है, क्या है ?

सबसे बड़ी चीज ज्ञान की यह है, इसे कहते हैं — आत्मज्ञान! और आत्मज्ञान की सबसे बड़ी चीज यह है कि "अपने आपको जानना! अपने आपको पहचानना!" और जबतक हम अपने आपको नहीं पहचानेंगे, अपने आपको नहीं समझ पाएंगे कि हम कौन हैं। तो ये सारी की सारी दुनिया जो हमारे इर्द-गिर्द है, इसका क्या तुक है, इसका क्या मतलब है हम नहीं समझ पाएंगे। और मन — यह भागेगा, यह भागेगा, कभी कहीं जाएगा, कभी कहीं जाएगा, कभी कहीं जाएगा! किसी चीज की और कोशिश करेगा, इच्छा करेगा और इन सारी चीजों में हम पड़े रहेंगे, जो हमारे पास है उसका भी हम आनंद नहीं ले पाएंगे, क्योंकि मन कहेगा — "नहीं और होना था!"

अब जैसे कोई गया, किसी ने सूट खरीदी या साड़ी खरीदी। तो खरीद कर ले तो आये, पर कहीं धक-धक होती है कि — "नहीं, उसके बगल में जो साड़ी थी, वो कहीं अच्छी न हो, इससे ज्यादा अच्छी न हो। तो ये सारी चीजें हमको परेशान कर रही हैं और इस समय जब यह कोविड19 है, जो यह कोरोना वायरस है। इससे जब लोग परेशान हो रहे हैं तो सबसे ज्यादा परेशानी इसकी यह नहीं है कि लोगों को बीमारी भी लग गयी। नहीं, अभी हो सकता है बीमारी लगी नहीं है और हो सकता है कि बीमारी लगे भी ना। परन्तु लोग परेशान हो रहे हैं, क्यों परेशान हो रहे हैं ? क्योंकि यह मन है और यह सब जगह भाग रहा है।

देखिये! आपके अंदर अच्छाई भी है; आपके अंदर बुराई भी है; आपके अंदर अंधेरा भी है; आपके अंदर दिया भी है; आपके अंदर उजाला भी है। और अगर आप चाहें तो उस उजाले को, उस दिये को जलाकर आप अपने हृदय में उजाला उत्पन्न कर सकते हैं। यह क्षमता आप में है। और इस क्षमता को यह समझिये कि यही आपकी असली ताकत है।

अपबल, तपबल और बाहुबल! अपबल — अपबल तो गया! तपबल — जो कुछ भी किया है लोगों ने, उसका बल — हां! मैंने ये किया, मैंने ये किया, मैंने ये किया, मैंने ये किया! मैं फलां-फलां देश का ये हूँ, मैं फलां-फलां देश का ये हूँ।

बात यह है कि कोरोना वायरस यह नहीं समझती हैं कि कितनी डिग्री आपके पीछे लगी हुई हैं। कितनी डिग्री आपकी दीवाल पर टंगी हुई हैं — उसको कोई मतलब नहीं है उनसे। आप जिंदा हैं और अगर उसको मौका मिला और अगर किसी कंटैमिनेशन के रूप से आप तक पहुंच गया वह कोरोना वायरस, तो फिर वह अपना काम कर देगा। उसके लिए यह नहीं है कि यह बहुत पहुंचे हुए संत हैं, यह बहुत पहुंचे हुए महात्मा हैं। यह बहुत पहुंचे हुए ये हैं; यह बहुत पहुंचे हुए वो हैं, उसके लिए कुछ नहीं।

तो अपबल, तपबल और बाहुबल! अब कोई बलि भी हो, वह कोरोना वायरस तो बहुत ही छोटा है, माइक्रोस्कोपिक है। आँख से देखेंगे तो दिखाई नहीं देगा। और वह इतना ताकतवर है कि बड़े-बड़े ताकतवरों को पलंग पर सुला दे, पलंग पर बिठा दे।

तो अपबल, तपबल और बाहुबल! और एक ही बल बचा है और वह बल है, चौथो बल है "राम!" वो अगर हमारे — वो हमारे पास है वह बल। जिस राम की बात हो रही है, वह राम —

एक राम दशरथ का बेटा, एक राम घट-घट में बैठा।

एक राम का जगत पसारा, एक राम जगत से न्यारा।।v

वह राम जो हमारे घट में बैठा है, उसको हम जान सकते हैं, उसको हम पहचान सकते हैं। उसकी मदद से, वही ज्ञान जो उस तक पहुंचा दे तो —

कुंभ का बाँधा जल रहे, पर जल बिन कुंभ न होय,

ज्ञान का बाँधा मन रहे, पर गुरु बिन ज्ञान न होय।

और इसलिए इस ज्ञान की जरूरत है, इसलिए इस ज्ञान की जरूरत है कि यह ज्ञान अगर हमको मिल जाए, तो फिर इस ज्ञान से हम अपने आपको पहचान सकेंगे, अपने आपको जान सकेंगे। और अगर हमने अपने आपको जान लिया तो फिर वाह ही वाह है।

चाहे कोई भी स्थिति आये, कोई भी स्थिति आये — अभी, मैं एक बात कहता हूँ सभी लोगों से — देखिये! अगर आप अपने आपको भाग्यशाली नहीं समझ रहे हैं और इन परिस्थितियों के कारण आप अपने आपको भाग्यशाली नहीं समझ रहे हैं, तो एक बात याद रखना, भगवान राम की बात — उस दिन उनका राज्याभिषेक होना था। दशरथ ने पहले ही अनाउंस (announce) कर दिया कि “अच्छा ठीक है अब समय आ गया है, अब राम का क्राउनिंग (crowning) होगा और राम राजा बनेंगे।” उस दिन सबलोग तैयारी में लगे हुए थे, सभी लोग खुश थे, सारे अयोध्या के वासी चाहते थे कि भगवान राम बनें। सभी चाहते थे। पर उस दिन, उस दिन क्या हुआ ?

एक तरफ तो वो खुशी है। सीता को भी खुशी थी। लक्ष्मण को भी खुशी थी। भगवान राम को भी खुशी थी। सारे अयोध्या वासियों को खुशी थी। दशरथ, जो इतने बलवान थे, 'दशरथ' — क्या ताकत थी उनकी, जैसे, नाम ही उनका था 'दशरथ' — दस रथों के बराबर उनकी ताकत थी, वह भी खुश थे। सभी लोग खुश थे कि आज भगवान राम का राज्याभिषेक होगा। पर उस दिन हुआ क्या ?

उस दिन उनको कहा गया कि, "तुम चौदह साल के लिए वनवास जाओ और तुम्हारा राज्याभिषेक नहीं होगा, भरत का होगा। भरत राजा बनेंगे और तुम चौदह साल के लिए वनवास जाओ।"

जिस दिन इतना खुशी का दिन हो और ऐसी खबर मिले। और यह हुआ, यह हुआ! और तुरंत छोड़कर भगवान राम ने कहा, "ठीक है! जैसा पिताजी चाहते हैं, मैं वैसा ही करूँगा।

सीता ने कहा - "मेरे से बात मत करो, मैं तो आउंगी तुम्हारे साथ। मैं तुम्हारी अर्धांगिनी हूँ, कैसे छोड़ दूँ।" वो जमाना अलग था, वो जमाना अलग था। और लक्ष्मण ने कहा, "मेरे को तो आना ही है तुम्हारे साथ।"

तो अगर अपने आपको तुम भाग्यशाली नहीं समझ रहे हो, समझ रहे हो कि "तुम्हारा दुर्भाग्य है, ये कैसे फँस गए तुम; ये क्या हो रहा है; ये क्या नहीं हो रहा है।"

तो जरा बैठो और सोचो! भगवान राम के बारे में सोचो कि "उनके साथ कैसा अनर्थ हुआ!" क्योंकि वो तो सबकुछ — मतलब उस दिन कितना हर्ष होगा। सभी लोगों को कितनी खुशी होगी। कितनी एक्साइटमेंट (excitement) जिसे कहते हैं और हुआ क्या — "चौदह साल के लिए वनवास जाओ और तुम्हारा राज्याभिषेक नहीं होगा भरत का होगा!"

तो भाई! विचारो, समझो और इस समय भी तुम्हारे अंदर एक दिया जल रहा है, उसके प्रकाश में; उस दिये के प्रकाश में, अँधेरा मत होने दो; उसको जलने दो और अपने जीवन में प्रकाश ही प्रकाश पाओ।

सभी लोगों को मेरा नमस्कार!

लॉकडाउन 1 00:15:02 लॉकडाउन 1 Video Duration : 00:15:02 प्रेम रावत जी द्वारा हिंदी में सम्बोधित (24 मार्च, 2020)

प्रेम रावत जी:

सभी श्रोताओं को मेरा नमस्कार!

आज मेरे को यह मौका मिला है आपलोगों तक इस वीडियो के द्वारा मेरा संदेश आप तक पहुंचें। तो मैं यही कोशिश करता हूँ कि जो कुछ भी मेरे हृदय में है आप तक मैं पहुंचाऊं। इन परिस्थितियों में लोग सचमुच में बहुत दुखी हैं, क्योंकि क्या करें? ये तो वो वाली बात हो गयी कि "मरता क्या नहीं करता!"

एक तरफ तो गवर्नमेंट है, कह रही है कि "ये मत करो, वो मत करो, घर में बैठे रहो!" ये लोगों की आदत नहीं है। आजकल तो ये रिवाज़ है कि बाहर जाएं, लोगों से मिलें, ये करें, वो करें। परंतु एक बात है सोचने कि आपको — ठीक है परिस्थितियां ठीक नहीं हैं, यह कोरोना वायरस है और ये सबकुछ है। आइसोलेशन जो है कि आप और लोगों से दूर रहें ताकि आप बीमार न पड़ें।

यह बहुत गंभीर बात है और सीरियस बात है। इस बात को गंभीर तरीके से लेना चाहिए। परंतु हम क्या करें ? अब एक तरफ तो जो कुछ भी हमसे कहा जा रहा है — डरने की बात है, डराने की बात है, ये मत करो, वो मत करो! नहीं तो ये हो जायेगा, नहीं तो वो हो जाएगा।

तो ये मैं कहने के लिए वीडियो नहीं बना रहा हूं। मैं यह कहने के लिए बना रहा हूँ कि आपके पास एक चीज है, आपका हृदय है, आपके अंदर एक चीज है, जो बहुत ही सुन्दर है और चाहे कोई भी बाहर परिस्थिति हो और दुःख देने वाली हो, परन्तु आपके अंदर जो चीज है, वह सुख देने वाली है, वह सुंदरता को पसंद करती है। जो — कैसी सुंदरता ? दुनिया की सुंदरता नहीं, वह आपके अंदर स्थित जो चीज है, जिसे हृदय कहते हैं। उसके अंदर वास करने वाली मधुर, वो चीज, जिसका सेवन करने से मनुष्य का हृदय और गद्गद होता है। जिसको एक्सपीरियंस करने से, जिसको महसूस करने से मनुष्य और खुश होता है और उसकी ख़ुशी दिमागी ख़ुशी नहीं है। पर वह ख़ुशी हृदय की ख़ुशी है। वह आपके अंदर है, वह सब मनुष्यों के अंदर है। चाहे कोई भी हो, कैसा भी हो, कुछ भी करता हो उसका बाहर की चीजों से कुछ भी लेना-देना नहीं है। उसका — तुम अंदर तक पहुंच सकते हो या नहीं उससे सबकुछ लेना-देना है।

मैं आजकल लोगों से कहता हूँ कि तीन चीजें करो — अगर तुम अपनी जिंदगी में कुछ नहीं कर सकते हो, तो कम से कम तीन चीजें करने की कोशिश करो। एक तो "अपने आपको जानो।" जिसका बहुत ही बड़ा महत्व है। क्योंकि जो अपने आपको नहीं जानता, उसको क्या मालूम कि वह कौन है, क्या है, काहे के लिए यहां आया है! न जानने के कारण उसके हजारों क्वेश्चनस हैं, उसके हजारों प्रश्न उठेंगे कि — मैं यहां क्या कर रहा हूँ; ऐसा कैसे हो रहा है मेरे साथ; ये कैसे हो रहा है; ये क्यों हो रहा है; ये क्यों हो रहा है; ये अच्छा क्यों है; ये बुरा क्यों है! ये सारे प्रश्न होंगें।

अगर अपने आपको नहीं जानते हैं, तो यही सबकुछ होगा, पर अगर अपने आपको आप जानते हैं, तो फिर इन चीजों से हटकर दुनिया की जो सारी चीजें हैं, जो हमेशा बदलती रहती हैं, इनसे हटकर एक और चीज है, जो आपके अंदर है, उसको आप जान सकते हैं।

तो एक, ‘अपने आपको जानिए!’ दूसरा, ‘सचेत होकर, (conscious), सचेत होकर के आप अपनी जिंदगी जीयें।’ ये नहीं है कि आँखें बंद कर ली; क्या हो रहा है; क्या नहीं हो रहा है किसी को नहीं मालूम। लोग करते हैं, आँखें बंद कर लेते हैं — ये दुःख की बात है; ये बुरा है; ये ऐसा है; ये वैसा है; मैं इसके बारे मैं कुछ जानना नहीं चाहता हूँ; मेरे को इसके बारे में कुछ मत बताओ; ये सब नकली है। लोगों के बहाने हैं — ये सब नकली है, ये अंदर की बात कुछ नहीं है;ये सबकुछ नहीं होता है।

कहानी आती है एक लोमड़ी की! एक बार एक लोमड़ी कहीं जा रही थी, तो उसने देखा कि एक टहनी पर अंगूर लगे हुए हैं, तो उसको भूख लगी।

कहा कि, "अंगूर खाऊंगी मैं, अच्छे होंगे!"

तो कूदी, तो अंगूर जहाँ लगे हुए थे, वो जगह थोड़ी ऊंची थी। तो वह कूद नहीं पायी।

फिर उसने कोशिश की कूदने की, फिर कूद नहीं पायी। फिर कूदने की कोशिश की, तो कूद नहीं पायी।

तो उसने कहा, "ना! ये अंगूर खट्टे हैं! यह अच्छे नहीं है, मेरे को नहीं चाहिए!”

तो यह बात हो जाती है लोगों की — जब नहीं पहुंच पाते है उस जगह, तो ये सब जो आप कह रहे हैं, जो मैं कह रहा हूँ कि, “ये सारी चीजें हैं!”

तो लोग कहते हैं, “ये हैं ही नहीं!” पर है!

और जबतक हम आँख नहीं खोलेंगे अपनी, क्योंकि ये आँख दुनिया को देखती है। अंदर की आँख, जो अंदर हो रहा है उसको देखेंगी। तो जब हम देख लेंगे उसको; जान लेंगें; तब हमारी जिंदगी के अंदर दूसरा रंग आएगा।

तो एक, "अपने आपको जानो, दूसरी, अपनी — ये जो जीवन है इसको सचेत होकर के, चेतना के साथ इसको बिताओ और तीसरी चीज — इस हृदय के अंदर आभार होना चाहिए — Gratitude, आभार!"

अगर ये तीन चीजें आपकी जिंदगी के अंदर हो गयीं, तो फिर वाह-वाह है! फिर आप ये नहीं कहेंगे कि, "मैं यहां क्यों हूँ ?"

फिर आप ये कहेंगे, "लाख-लाख शुक्रिया है कि मेरे को यह जीवन मिला!"

तब कोई भी परिस्थिति हो, बाहर कुछ भी हो रहा है — चाहे जंग लड़े जा रहे हैं; लड़ाईयां लड़ी जा रही हैं; कोरोना वायरस है; कोरोना वायरस नहीं है; आइसोलेशन है; आइसोलेशन नहीं है; कुछ भी हो रहा है। ऐतिहासिक समय है ये! ऐतिहासिक समय!

देखिये! ये बीस-बीस (2020) की बात हो रही है और कितनी टेक्नोलॉजी है, कितना घमंड था लोगों को, टेक्नोलॉजी, टेक्नोलॉजी, टेक्नोलॉजी, टेक्नोलॉजी,टेक्नोलॉजी!

"देखो! ऐसा फ़ोन है मेरे पास, ये मेरा ये कर देगा, ये-ये कर देगा,ये-ये कर देगा,ये-ये कर देगा!"

और मैं हमेशा ये कहता आया हूँ, ये सारी टेक्नोलॉजी, वेक्नोलॉजी तुम्हारे असली काम नहीं आएगी। असली काम जो तुम्हारा है, जो तीन चीजें अगर तुम कर पाए — एक, अपने आपको जानो, और दूसरा सचेत होकर इस जिंदगी को जियो, और तीसरा आपके हृदय में आभार भरे! ये तीन चीजें — इनको करने के लिए इन टेक्नोलॉजीज़ की जरूरत नहीं है। इन चीजों को पूरा करने के लिए आपको अंदर की तरफ मुड़ने की जो टेक्नोलॉजी है उसकी जरूरत है। और अगर ये आपने कर दिया, ये तीन चीजें अगर आपने कर दिया अपनी जिंदगी के अंदर तो फिर सब वाह-वाह हो जायेगी।

तो जैसा मैं कह रहा था, टेक्नोलॉजी में अब ये है, वो है, मेरे पास ये है; ये कर देंगें; वो कर देंगें और ये हो जाएगा और 5G आएगा और 6G आएगा और 7G आएगा। क्या-क्या नहीं होगा। सारी चीजें ये — कर लो, कर लो। 5G को बुला लो, क्या करेगा वो ? 5G को बुला लो, 6G को बुला लो, किसी G को बुला लो, क्या करेगा वो ? लोग मरेंगें। अमेरिका में कितने मर रहे हैं; स्पेन में कितने मर रहे हैं; इटली में कितने मर रहे हैं; ईरान में कितने मर रहे हैं, अभी और भी मरेंगे। क्योंकि इस टेक्नोलॉजी का तुमसे — तुम इस संसार के अंदर ज्यादा दिन नहीं हो। जैसे मैं पहले कहता ही आया हूँ कि यह जो समय हमारे पास है, यह ज्यादा नहीं है।

अगर हम सौ साल भी जीये तो 36000 — छत्तीस हजार पांच सौ दिन बनते हैं। तो ज्यादा नहीं बने हैं। जितने भी दिन हैं, एक-एक दिन अगर स्वीकार कर लिया हमने तो हमारी वाह-वाह होगी, हृदय से वाह-वाह होगी। आनंद में, क्योंकि उसका नाम क्या है, सत् चित् आनंद! सत् क्यों - कैसा सत्य ? जिसमें हम अपनी चेतना को, चित् को लगा सकें। क्यों लगा सकें ? क्यों करें ये सबकुछ ?

इसलिए कि उससे फिर हमारे जीवन में आनंद ही आनंद संभव है। उस आनंद के लिए, उस सच्चे आनंद के लिए हम ये कर सकते हैं। अगर हमको वह आनंद चाहिए, जैसे कबीरदासजी ने कहा है —

जल बिच कमल, कमल बिच कलियां, जा में भंवर लुभासी।

सो मन तिरलोक भयो सब, यती सती संन्यासी।।

लोग सब भ्रमण कर रहे हैं, सब घूम रहे हैं। कोई यहां जा रहा है, कोई वहां जा रहा है, कोई वहां जा रहा है, कोई वहां जा रहा है। और यह भी एक, कोरोना वायरस भी एक भौंरा है उसमें और वो भी भर्र-भर्र-भर्र कर रहा है, वो भी भौं-भौं-भौं कर रहा है। और उसी में सारे लगे हुए हैं आज। किसी को ये होश ही नहीं था कि ऐसा भी हो सकता है। लोग मूवीज़ बनाते थे, फिल्म बनती थी, ऐसा हो गया, वो हो जायेगा, ऐसा हो जाएगा, ऐसा हो जाएगा। पर किसी को यह नहीं था कि असली में होगा। अब हो गया।

हम भी अभी, दो दिन पहले, हम भी भ्रमण कर रहे थे। अब कहीं नहीं जा सकते और हमने उचित नहीं सोचा कि हम कहीं जाएं और लोग हमको मिलने के लिए आएं और फिर इससे कोरोना वायरस और फैले। तो हम नहीं चाहते थे। तो हम गए हुए थे बार्सिलोना में, बार्सिलोना में फिर मैड्रिड गए, मैड्रिड में बुक लॉन्च की नई वाली। उसके बाद हम बार्सिलोना वापिस आये फिर वहां कुछ प्रोग्राम किये तब सबकुछ नार्मल था। उसके बाद ऑस्ट्रिया गए, ऑस्ट्रिया में भी प्रोग्राम किये। फिर हमने सोचा कि अब यूरोप में तो जगह बंद होने लगी तो हमने सोचा कि चलते हैं, साउथ अमेरिका चलते हैं, तो हम ब्राज़ील पहुंचे और जैस ही ब्राज़ील पहुंचे, तो वहां दो दिन के लिए थे उसके बाद हमको जाना था अर्जेंटीना। तो जैसे ही अर्जेंटीना — जैसे ही अगले दिन चलना था उससे पहले ही उन्होंने कह दिया "नहीं! कोई नहीं आ सकता अर्जेंटीना में!"

तो उन्होंने कहा, फिर प्रोग्राम भी नहीं होंगें, तो हम क्या करें ? तो कुछ दिन ब्राज़ील में ही रहे। अर्जेंटीना से फिर उरुग्वे जाना था। तो वहां भी नहीं जा सके। फिर हमने सोचा, "चलो अफ्रीका चलते हैं!" तो अफ्रीका चलने के लिए तैयार हुए तो फिर वहां भी यही हो गया कि "नहीं! हम किसी को नहीं चाहते है कि कोई यहां आये!"

तो फिर हम यहां अमेरिका आये और दो दिन पहले वापिस घर में आये और अब कहीं नहीं जा रहे हैं। घर ही में हैं। तो हमने यही सोचा कि, "भाई! वीडियो बनाकर कम से कम लोगों तक हमारा सन्देश पहुंचे तो अच्छा रहेगा। अगर प्रोग्राम नहीं कर सकते हैं तो कोई बात नहीं, पर कम से कम लोग अपने घर में तो बैठे हुए हैं, तो वहां टेक्नोलॉजी है तो उसकी वजह से ये सब जा सकता है।

परन्तु हमारा विश्वास मनुष्यों पर है; हमारा विश्वास इस स्वांस पर है; हमारा विश्वास इस बात पर है कि मनुष्य के अंदर जो शक्ति है, वह असली शक्ति है और कोरोना वायरस आये, कोरोना वायरस नहीं आये, इससे हमको मतलब नहीं है। सावधान जरूर हैं हम और सभी को सावधान होना चाहिए। ताकि ये ज्यादा नहीं फैले। क्योंकि जो लोग हैं, इससे मर भी सकते हैं और यह अच्छी चीज नहीं है। ये हुई है, इससे प्रदूषण कम हुआ है कई जगह। जो छोटे-छोटे बच्चे हैं, उनके लिए अच्छा हुआ है क्योंकि यह उनको ज्यादा तकलीफ नहीं देती है और उनके लिए प्रदूषण भी कम हुआ है तो उनके लिए तो अच्छा है।

तो मैं कोशिश करूँगा कि जितनी भी मैं यह वीडियो बना सकूँ और आपलोगों तक यह पहुँच सके, आपलोग देख सकें इसको और अगर कोई प्रश्न आप मेरे से पूछना चाहते हैं या मेरे तक कोई चीज आप चाहते है, लिखित तो आप premrawat.com में वो अपने प्रश्न भेज सकते हैं, वो मेरे तक पहुंचेंगे। या फिर timeless today उसके द्वारा भी वो प्रश्न मेरे तक पहुँच जाएंगे।

तो मैं तो यही कोशिश करूँगा कि आप तक मेरा सन्देश पहुंचें और पहुंचें या न पहुंचें। कम से कम आप सुरक्षित रहें, आनंद में रहें और अच्छी तरीके से रहें, तो अगली वीडियो तक आपसे फिर मुलाकात होगी।

सभी को मेरा नमस्कार!

लॉकडाउन - पहला दिन 00:14:04 लॉकडाउन - पहला दिन Video Duration : 00:14:04 प्रेम रावत जी के साथ (हिंदी में अनुवादित)

प्रेम रावत:

सबको नमस्कार! मैं हूं प्रेम रावत। और जी हां! मुझे लगा कि इस वक़्त आपको, सभी को सम्बोधित करूं।

हम कोरोना वायरस में फंसे हुए हैं! और बहुत लोगों के लिए यह बेहद मुश्किल समय है और अगर किसी भी तरह से मैं भार कम कर सकूं, ये परेशानी, आपकी चिंता, तो जी हां, हम सभी चिंतित हैं। लेकिन अगर किसी तरह मैं वो भार कम कर पाऊं, जो लोग महसूस कर रहे हैं, तो बहुत अच्छा लगेगा।

तो क्या हो रहा है ? अब एक छोटा, छोटा-सा वायरस फैल रहा है और बहुत सारी बातें हैं; लोगों के कई विचार भी हैं; बहुत सारी गलत जानकारी भी है; अच्छी जानकारी भी है; बुरी जानकारी भी है……और देखा जाये तो स्पष्टता बिलकुल नहीं है। इस बारे में जानकारी नहीं है कि सच्चाई क्या है।

अब क्या कुछ बदला है ? देखिये! एक तरह से सबकुछ बदल गया है। लेकिन, हर व्यक्ति सुरक्षित महसूस करना चाहता है। सबको अच्छा महसूस करना है; आजादी महसूस करना चाहता है! तो उस तरह से कुछ भी नहीं बदला, क्योंकि इसमें तो जब सबकुछ ठीक था, जब कोरोना वायरस की परेशानी नहीं थी, लोग तब भी यही सोच रहे थे!

लेकिन आज, क्योंकि बोझ हमारे ऊपर है और अब है कि ये डर — ये डर आ गया है और बिलकुल आप डर को बढ़ने दे सकते हैं और ये डर भी यही चाहता है। लेकिन मैं आपको कुछ याद दिलाना चाहता हूं।

आपके भीतर कुछ कमाल का है, इसे कहते हैं “हिम्मत।” इस मुश्किल समय में, इस चिंतित करने वाले समय में हमें इस्तेमाल करनी चाहिए, अपनी हिम्मत, डर नहीं, इस वक़्त से निकलने के लिए। हमें वह रोशनी चाहिए, जो हमारे हृदय के भीतर चमकती है ताकि अँधेरे जंगल में उजियाला हो पाए।

हमें हर रोज एक उद्देश्य की भावना के साथ जीना होगा, स्पष्टता की भावना, समझ की भावना। भावना जो होगी, संदेह नहीं, पर स्पष्टता, और मैं इस बारे में हमेशा बात करता हूँ। लेकिन इस समय में हमारे भीतर के गुणों को हर रोज चमकना ही होगा, हर रोज!

ये इसके बारे में नहीं कि, जानते हैं “आज जरूरी नहीं।” नहीं, आज जरूरी है। अचानक से ही, पूरी दुनिया में हो गया है एक बंद, हर जगह एक बंद है। देखिये जैसे — तो आप क्या करेंगे? आप क्या सोचते हैं ?

और बहुत ज्यादा गलत जानकारियां हैं — टेलीविज़न पर, सोशल मीडिया में और ऐसे ही बाकी जगह पर। लेकिन आपके भीतर एक सत्य है — और आपको उस सत्य को बाहर आने देना है आपके भीतर एक सच्चाई है और आपको उस सच्चाई को बाहर आने देना है।

इसके विपरीत, मैं कहूंगा, सबकुछ अलग-सा है — क्योंकि इतना कुछ हो रहा है, जैसे एक परेशान करने वाली बात, ये कोरोना वायरस — और हमें सबसे अलग रहना है और ध्यान रखना है कि हम स्वस्थ रहें, लेकिन हमें स्वस्थ रहना ही है। सिर्फ शरीर से नहीं, लेकिन हमें यहाँ से भी स्वस्थ रहना है, दिमाग से।

ये सभी मुद्दे बहुत जरूरी हैं; जैसे कि “हम ये कैसे करेंगे ? हम कैसे अच्छाई को लेकर इसे पूरी तरह से बाहर आने दें ? हम इन मुश्किल हालातों में कैसे मजे करेंगे ?”

कभी-कभी जानते हैं, आपको बस पीछे हटना होता है और खुद से कहिये कि “ये सब किसलिए है ? मैं यहां हूँ, मैं इस पहेली का छोटा-सा हिस्सा हूं।” बिलकुल, आप बाकी लोगों को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहते, इसलिए आप नहीं चाहते कि आप बाकी लोगों में संक्रमण फैला दें और इसका सबसे अच्छा तरीका है कि दूर रहें, निर्देश दिए जा रहे हैं और इसमें कई बातें बिलकुल सही हैं।

आप किस पर निर्भर हैं ? देखिये! पहले तो आपको अपने भीतर देखना होगा। आपको खुद पर निर्भर रहना होगा, आपका हृदय, आपकी समझ, स्पष्टता के लिए चाह, खुश होने की उम्मीद, आपको इस पर निर्भर रहना ही होगा — आपको इसे अपनाना होगा कि यह एक बुनियादी सी चीज है!

डर में डूबना बिलकुल नहीं। लेकिन डूबना जैसे “हे भगवान! मेरे साथ क्या होने वाला है।” अब, आपको चिंता होनी चाहिए — लेकिन इस तरह से कुछ बहुत ही सुन्दर आपके हृदय द्वारा कहा भी जा रहा है, आपके द्वारा।

आपको इसमें खुद को शामिल करना है। खुद को अलग न करें, आपको खुद को इसमें शामिल करना है। आपको यहां उस सुंदरता को शामिल करना है, जो आपके हृदय के भीतर है।

क्योंकि क्या होने वाला है ? जानते हैं, हमने देखा, हमने चाइना की संख्या देखी है और यहीं से महामारी शुरू हुई है। लेकिन गौर से देखें तो उन्होनें बीमारी को रोका और उसे नियंत्रित कर पाए — उस वक़्त तक जबकि आज चलिए जो संख्या है लोगों की, जो मृत हो चुके हैं, नए लोग बीमार हो रहे हैं, वो संख्या कम है!

“क्या हम ये कर सकते हैं; क्या हम ये जंग जीत सकते हैं ?” हां हम ये जंग जीत सकते हैं। बात बस यही है अच्छा होता कि इतनी ज्यादा संख्या नहीं होती, जानते हैं कि मृत लोगों की संख्या, जो बढ़ती ही जा रही है!

लेकिन हम इंसानो को एक साथ रहना होगा; हमें एक साथ आना है और हमें एक अलग तरह से साथ में आना है, हमें मिलकर काम करना है — बस अपने ही साथ रहकर। आइसोलेशन में भी हमें पूर्ण होना है, हमें पूरा होना है और बेवकूफी भरी चीजें नहीं करनी हैं।

लेकिन इसी वक़्त, क्या इंसान इस दौर में जीतेंगे, इस जंग को ? और हां, हां जानते हैं, हां, हमें जीतना ही है; जीतना ही है। हमें आगे जाना है और हम कैसे जीत सकते हैं — समझदार होकर, स्पष्ट होकर, संदेह के बिना, गुस्से के बिना, उलझन के बिना, एक-दूसरे पर आरोप लगाए बिना। ये वक़्त है…

यह जो वायरस है, (जो जीवित वस्तु नहीं, बस चर्बी में लिपटा हुआ थोड़ा आर एन ए है।) इसने दुनिया में जो कुछ भी किया है वह सच में कमाल का है।

यह हमें बुला रहा है, अफसोसजनक और हानिकारक ढंग से कि हम साथ में आएं — हम सभी दुनिया भर में एक-दूसरे की मदद करें, अच्छी खबर फैलाएं, (अफवाह नहीं फैलाएं, गलत जानकारी नहीं फैलाएं), पर ये खबर देना कि “हिम्मत रखें! स्पष्टता रखें, अपने भीतर की अच्छाई का इस्तेमाल करें।”

और बस ऐसा ही करके मुझे लगता है कि हम इससे जीत सकते हैं और हम ये जंग सच में जीत सकते हैं। सच में जीतना और इससे हारेंगे नहीं, इसके सामने झुकेंगे नहीं, इससे चोट नहीं खाएंगे, पर साथ में आएंगे!

और यही वक़्त है खुद पर निर्भर करने का; करना, गलत बातें नहीं, पर जैसे निर्देश दिए गए हैं जानते हैं “आइसोलेट; घर पर रहें! बीमारी बाकी लोगों में न फैलाएं; दूरी बनाये रखें” — ये आसान निर्देश मानिये।

पर इसी वजह को देखते हुए, अपने हृदय पर ध्यान दें, खुद से मिलें, समझदारी लेकर आएं — और बस स्पष्टता से, स्पष्टता के जरिये देखें कि क्या चल रहा है, “हां! मैं जीवित हूँ और मेरी उम्मीदें नहीं बदली हैं!”

तो चाहे जो भी हो! और लोग जानते हैं उनके विचारों से “ये कैसे होगा और हम वो कैसे करेंगे!” और डॉक्टर्स, सच में साथ आ रहे हैं; मेडिकल स्टाफ एक साथ आकर लोगों की मदद कर रहा है। और हमें भी उनकी मदद करनी है। हमें एक-दूसरे की मदद करनी ही है।

यह वक़्त है कि इंसानियत काम करे और हम इंसान — उन सभी अच्छाइयों का अभ्यास करें, जो इंसानो में होती हैं। और एक-दूसरे के काम आएं, एक-दूसरे को कोमलता दिखाएं, एक-दूसरे को समझ दिखाएं, वक़्त है एक-दूसरे को समझने का, एक-दूसरे को संवेदना दिखाने का। यह वक़्त है स्पष्ट सोचने का। यह समय है हिम्मत का।

और अगर हम ऐसा कर पाएंगे तो मुझे लगता है हम बदलाव ला सकते हैं। अपने लिए, हर दिन जब हम जिंदा हैं। कोरोना वायरस के बिना भी, क्योंकि हमें अपनी दुनिया को बनाना है। कोरोना वायरस हो या न हो, हमें स्पष्टता में रहना है।

तो, उम्मीद है कि जितनी चीजें भी मैंने कहीं, आपको कुछ तो ठीक लगी होंगी और आप इसे हृदय तक ले जाएंगे। डरने की कोई भी जरूरत नहीं है, क्योंकि डर कुछ नहीं करता है, जानते हैं वह बस आपको झुका देता है।

आपको अभी चाहिए हिम्मत! परेशानी की जटिलता को समझिये; परेशानी की गंभीरता को समझिये, पर डर को बढ़ावा देने के बजाय स्पष्टता को बढ़ाइए; हिम्मत को बढ़ावा दें; समझ को बढ़ावा दें; संदेह को नहीं। और यहीं बातें हर रोज के जीवन में फर्क़ ला सकती हैं, जिन्हें हम जी रहे हैं।

अब, मुझसे जितना हो पायेगा, उतना संवाद करूँगा आपके साथ — और मेरी यह पहली कोशिश है मैं ये कर रहा हूँ। जानते हैं, बहुत ही आसान तरीके से मैंने अपना ट्राईपॉड सेट किया है; मैंने पाना आइफ़ोन इस पर लगाया है और ये ऐसे ही रिकॉर्ड हुआ है। मेरे पास अतिरिक्त लाइट्स नहीं है; मैं इस कमरे में हूं और ये बैकग्राउंड भी काफी सादा है।

मेरे लिए, पृष्टभूमि की अहमियत नहीं। जानते हैं, लाइटिंग से फर्क़ नहीं पड़ता — जबतक मैं आप तक पहुंचकर कुछ संतोष दे सकूं, कुछ समझ दे सकूं, आपको कुछ स्पष्टता दे सकूं। ताकि ये समय कुछ बेहतर हो पाए। जानते हैं क्योंकि ये मुश्किल समय है। इसमें कोई शक़ नहीं है।

और डर में जीना नहीं — लेकिन जीयें हिम्मत से, स्पष्टता के साथ, समझदारी के साथ। और हां, और हां, हम जीतेंगे, बिलकुल हम जीतेंगे, हम जीतेंगे।

मैं भी इससे प्रभावित हुआ हूँ बिलकुल वैसे ही, जैसे बाकी लोग। मैं यूरोप गया था। मैंने किये थे वहां पर कुछ इवेंट्स और फिर यूरोप एक लॉकडाउन में होने वाला था तो, मैंने सोचा कि चलिए, अब मैं साउथ अमेरिका में थोड़ा-सा वक़्त बिताऊंगा, क्योंकि उस वक़्त कोरोना वायरस के सिलसिले में वहां ज्यादा नहीं हो रहा था।

मैं ब्राज़ील में चला गया और मैं ब्राज़ील में ही था और फिर अगले दिन मुझे शायद अर्जेंटीना जाना था, पर अर्जेंटीना में भी लॉकडाउन लग गया।

फिर कुछ भी ना मीटिंग्स, ना कुछ और। और मैं उरुगुए नहीं जाना चाहता था, क्योंकि वहां पर भी मीटिंग करनी पड़ती मुझको और इस चीज को और फैलाऊं।

ऐसी कई सारी चीजें यहां पर हो रही हैं। और फिर, अंत में मुझे ज्यादा वक़्त पहले नहीं, मैं अमेरिका में आया और मैं अब तक घर नहीं गया हूँ। तो मैं अब भी 2000 मील दूर हूँ अपने घर से। पर मैं अमेरिका में हूँ। और मुझे उम्मीद है कि मैं घर जल्दी जा पाउँगा।

और हां, बिलकुल! बिलकुल! मैं अपने आपको अलग रखने वाला हूँ, पर इसका यह मतलब नहीं कि मैं आपसे बात नहीं कर सकता, इसका यह मतलब नहीं कि मैं संदेश नहीं दे सकता आपको, चाहे आप जहाँ भी हों।

और शायद, शायद मैं एक फर्क़ ला पाऊं और जितना भी हो पायेगा मैं उतना वक़्त आपके लिए उपलब्ध करूँगा। मुझे उम्मीद है कि ये ब्रॉडकास्ट आप तक पहुंचेंगे और आप मजे से सुनेंगे और आपका समय अच्छा बीतेगा। सच में!

धन्यवाद! आपसे फिर मिलूंगा।

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