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हिम्मत का समय: छटी कड़ी (वीडियो) 00:15:52 हिम्मत का समय: छटी कड़ी (वीडियो) Video Duration : 00:15:52 श्री प्रेम रावत द्वारा, हिम्मत, आशा और विवेक का हार्दिक संदेश

हिम्मत का समय (छठा भाग)

प्रेम रावत जी : Ok.. So Thank you again for joining Dr. Kiran. And I understand you are in Seattle.

डॉ. किरण : Yes, I am, जी मैं...I am in Seattle.

प्रेम रावत जी : हिंदी में स्विच कर देते हैं। और आप — कहां से ग्रेजुएट किया आपने मेडिकल स्कूल ?

डॉ. किरण : जी, मैंने मेडिकल ट्रेनिंग अपनी भारत में, अहमदाबाद शहर में बी.जे. मेडिकल कॉलेज है वहां से की थी मैंने। प्रेम रावत जी : अच्छा!

डॉ. किरण : और उसके बाद रेजीडेंसी ट्रेनिंग भी मेरी इंटरनल मेडिसिन में वहीं उससे जुड़ी हुई सिविल हॉस्पिटल है अहमदाबाद में, वहां मैंने अपनी पूरी की थी।

प्रेम रावत जी : जी, जी। तो आपको तो यह ज्ञात होगा ही कि हिन्दुस्तान में इस कोरोना वायरस को लेकर के बहुत ही गड़बड़ हो रही है और बहुत लोग परेशान हैं क्या किया जाये। और एक चीज मैं यह चाहता था कि आज कुछ आप जरा समझायें कि यह कोरोना वायरस क्या है और इससे डरने की जरूरत नहीं है। इससे सावधान होने की जरूरत है।

डॉ. किरण : जी, जी! तो यह जो कोरोना वायरस कि एक परिवार है viruses का जो, जिसमें से एक वायरस जिसे SARS-CoV-2 के नाम से पहचाना गया था, वह 2019 में सबसे पहले पाया गया था, तो तब से लेकर के कोई ऐसा — मैं मानती हूं ऐसा कोई देश नहीं है जो इस वायरस के संक्रमण से बचा रहा हो। लेकिन यह जो है, यह लहरों में कई देशों में देखा गया है तो कई देशों में एक, पहली लहर आयी, फिर वह उतर गयी, फिर दूसरी लहर आयी। तो हिन्दुस्तान में अभी जो है वह दूसरी लहर से जूझ रहे हैं सब। तो यह जो वायरस है यह जुकाम से लेकर के एक Severe acute respiratory syndrome जिसे कहते हैं वो symptoms में पूरा उसका रेंज करता है। मगर जो समझने वाली बात है कि 85 से 90 प्रतिशत लोगों में यह बहुत ही सौम्य, माइल्ड इंफेक्शन करता है, जिन्हें कोई दवा, कोई hospitalization या कोई बहुत ज्यादा मेडिकल केयर की जरूरत नहीं पड़ती। यह अपने आप ही ठीक हो जाता है। और अब तक जो दुनिया में लगभग 170 मिलियन cases दर्ज़ किये गए हैं उसमें से 150 मिलियन से ऊपर cases रिकवर हो चुके हैं। और इसका जो mortality मतलब मृत्यु रेट है वह 2 प्रतिशत से भी कम है। तो इससे हमें कंट्रोल करने की जरूरत है, पर इससे बिलकुल भी घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है।

प्रेम रावत जी : यह आपने बहुत अच्छी बात कही कि डरने की बात नहीं है. डर, लोग डर जाते हैं, क्योंकि बहुत कुछ सुना है लोगों ने और कई जो इत्तला करते हैं लोगों को, वो गलत इत्तला की है, मतलब इससे कि मर जायेंगे, ये कर जायेंगे और जो मैंने सुना है उसका — वह तो बहुत साधारण-सा एक हल है उसका कि मास्क पहनो, छह फीट की दूरी रखो लोगों से और अपने हाथ धोओ.....

डॉ. किरण : जी!

प्रेम रावत जी : .... तो ये करने से आदमी बच सकता है इससे।

डॉ. किरण : जी बिलकुल, जी बिलकुल आपने एकदम सही कहा कि लोगों में डर और पैनिक बहुत ही फैल रहा है, लेकिन कोरोना से बचने के ये आपने जो बताये वो बहुत-ही सरल रास्ते हैं। और एक अब और हमारे में add हो गया है इसमें जो है कि वैक्सीनेशन्स, हमारे पास अब उपलब्ध हैं। तो जैसे-जैसे लोगों के, जैसे-जैसे वैक्सीन्स और उपलब्ध होंगी, वैसे-वैसे इसका ट्रांसमिशन और भी कम होता जायेगा। तो ये मास्किंग और जितना हो सके, जितना जरूरी हो उतना ही घर से बाहर निकलें, जबतक कि इसका कंट्रोल न आये और हाथ धोये रखना, surfaces को disinfectant से साफ करते रहना और अपना जो इम्यून सिस्टम है उसे सशक्त, मजबूत रखना। क्योंकि आखिर में यह इम्यून सिस्टम ही है जो इस वायरस से लड़ता है बाकी सब दवाइयां तो जरा कुछ हेल्प करती हैं।

प्रेम रावत जी : तो यह स्वयं मनुष्य की अपनी शक्ति है अगर उसका जो इम्यून सिस्टम है वह अच्छा है तो उससे हैंडल किया जा सकता है। एक बात हमारे सुनने में आयी एक डॉक्टर कह रहे थे कुछ इसके बारे में कि जिन लोगों के ट्रांसप्लांट हुए हैं जैसे, किडनी ट्रांसप्लांट हुई है या हार्ट ट्रांसप्लांट हुआ है तो उन लोगों पर क्योंकि उनको दवाई लेनी पड़ती है ताकि रिएक्शन न हो इम्यून सिस्टम का तो उसकी वजह से वो बहुत ही डेंजर में हैं, खतरे में हैं कि उनको यह वायरस न लगे।

डॉ. किरण : जी, जी बिलकुल, सही कहा आपने। क्योंकि ये जिन लोगों का ट्रांसप्लांट हुआ है किसी भी ऑर्गन (organ) का तो उन्हें ऐसी दवाइयां दी जाती हैं ताकि उनका इम्यून सिस्टम उस organ को रिजेक्ट न करे। तो इसलिए उनका इम्यून सिस्टम दवाइयों से दबाया जाता है और इसलिए जब उन्हें अगर यह वायरस लगे तो इम्यून सिस्टम already दबा हुआ होता है। तो वो इतना, उसका डटकर मुकाबला नहीं कर पाते हैं। इसलिए उनलोगों को खास उससे सावधानी बरतने की जरूरत है और कुछ जो कैंसर के मरीज हैं जो कि कीमोथेरेपी पर हैं या जिन्हें हृदय की तकलीफ है या डायबिटीज़ जिनका कंट्रोल नहीं है वे सब भी इसमें सीवियर बीमारी गंभीर रूप से होने में उन्हें खतरा बना रहता है।

प्रेम रावत जी : यह बात मैं इसलिए कह रहा था क्योंकि कई लोग हैं जो मास्क नहीं पहनना चाहते हैं। तो मैं उनको यह कहना चाहता हूं कि भाई, तुम नहीं पहनना चाहते हो तो कोई बात नहीं मत पहनो, परन्तु औरों के लिए तो पहनो। क्योंकि तुम उनको यह बीमारी दे सकते हो।

डॉ. किरण : जी बिलकुल, हर नागरिक की यह जवाबदारी होनी चाहिए कि खुद को तो बचायें पर सामने वाले को भी बचाना बहुत जरूरी है, आप उन्हें ना दें यह बीमारी। क्योंकि यह जो वायरस है यह जितना टाइम फैलता रहेगा या उसका ट्रांसमिशन चलता रहेगा, उतना इस वायरस को मौका मिलेगा अपना रूप बदलने का, mutate होने का। तो इसलिए यह बहुत जरूरी है कि हर तरीके से हम इसका ट्रांसमिशन रोकें। नहीं तो हम ऐसी स्थिति में शायद पहुंच सकते हैं जहां हमारी जो अभी वैक्सीन्स हैं, वो उतना अच्छे से काम न करें। तो हमें यह बिलकुल रोकना है।

प्रेम रावत जी : तो मतलब यह तो मानवता की बात है। यह तो सभ्यता की बात है कि कम से कम अगर हम नहीं पहनना चाहते हैं मास्क तो भाई, घर में रहो; बाहर मत जाओ और अगर बाहर जाओ तो मास्क पहनकर जाओ ताकि तुमको न लगे वह बात अलग है, परन्तु और लोगों को जिनको यह डायबिटीज़ है या हार्ट की बीमारी है या ट्रांसप्लांट है, तो उनको बहुत खतरा हो सकता है इस चीज से।

डॉ. किरण : जी बिलकुल, जी बिलकुल, आपने बिलकुल सही कहा। यह हर एक की एक नैतिक जवाबदारी होनी चाहिए कि आप जो, समाज में जिन्हें इसका खतरा ज्यादा है उनकी सुरक्षा के बारे में भी आप सोचें और मास्क पहनना उसके लिए बहुत ही जरूरी है। तो मैं मानती हूं कि हर एक को पहनना चाहिए मास्क।

प्रेम रावत जी : और यह नहीं है कि सिर्फ यहां लगाया हुआ है मास्क और नाक में नहीं लगाया या फिर यहां लगाया हुआ है और मुँह में नहीं लगाया। उसको अगर पहनना है तो ठीक ढंग से पहनना है और ऐसा मास्क पहनना है जो वायरस को ट्रांसमिट न करे। के एन-95 जैसे मास्क हैं, क्योंकि जो पतले-पतले मास्क होते हैं जो सिर्फ कपड़ा लगाते हैं तो कपड़े में बहुत बड़े-बड़े छेद होते हैं अगर उसको मैग्नीफाइंग गिलास से देखा जाए तो उसमें बड़े-बड़े छेद हैं तो उनसे वायरस निकल जायेगी। परन्तु कुछ ऐसा होना चाहिए ताकि उसमें किसी भी रूप से वायरस निकल न पाए।

डॉ. किरण : जी, जी आपने बिलकुल सही कहा। तो ये मास्क जो है उसका उचित फिट होना बहुत जरूरी है। तो नाक और मुँह दोनों ही ढकना चाहिए। एक अच्छी सील होनी चाहिए तो हवा साइड से अंदर न जाये सिर्फ मास्क के थ्रू ही जाए। और यह आपने बिलकुल सही कहा कि एन -95 या के एन-95 मास्क जो होते हैं तो वो ज्यादा अच्छा फिटरेशन, ज्यादा अच्छा सुरक्षा देते हैं। कभी अगर न भी मिल पायें आपको किसी कारण से तो आजकल कहते हैं कि डबल मास्किंग का करना भी उचित रहेगा। तो जिससे कि हम एक और लेयर सुरक्षा का उसमें डाल सकें ताकि आप सुरक्षित ज्यादा रह सकें।

प्रेम रावत जी : हिन्दुस्तान में मैंने यह देखा है कि लोग छूते हैं चीजों को और फिर अपने को छूते हैं या आँख साफ कर रहे हैं या कान खुजा रहे हैं या नाक खुजा रहे हैं, तो ये सारी चीजें इन पर ध्यान जाना चाहिए लोगों का कि कहीं भी हाथ लग गया तो वायरस उसमें लग सकती है और उनको खतरा हो सकता है।

डॉ. किरण : जी बिलकुल, तो यह जो वायरस है उसका जो सबसे बड़ा mode of transmission जो हम कहते हैं, वो ड्रॉपलेट, मतलब बड़ी बूंदों से होता है, तो ये बड़ी बूंदें नीचे settle हो जाती हैं तो जिन surfaces पर, जो surfaces बहुत use होते हैं तो उन पर यह वायरस काफी टाइम तक रहता है। तो अगर उसको छुआ और फिर अपने मुँह के आस-पास आप ले गए तो आपको वह वायरस आपके शरीर में अंदर जाने की संभावना बनी रहती है। इसलिए यह कहते हैं कि जो ऐसे surfaces हों उन्हें बार-बार साफ करते रहें।अपने मुँह के आस-पास हाथ न ले जाएं जितना हो सके, क्योंकि यह वायरस नाक और मुँह से सबसे ज्यादा, सबसे आसानी से शरीर में अंदर प्रवेश करता है और जितना बार-बार आपको जितनी बार याद आये पानी और साबुन से अपने हाथ साफ करते रहें। तो ये जो बेसिक कोविड का जो प्रोटेक्शन है, उससे रहता है।

प्रेम रावत जी : हां, तो बड़ी अच्छी बात कही आपने कि इससे सचमुच में हम बच सकते हैं अगर थोड़ा-सा हम लिहाज़ करें, परहेज करें तो बहुत आसानी से हम इससे बच सकते हैं और सबकुछ ठीक हो सकता है।

डॉ. किरण : जी बिलकुल!

प्रेम रावत जी : यह तो बहुत shock का कारण बन गया है हिन्दुस्तान में कि कितने लोग चले गए हैं, परन्तु बुढ़ापे में लोग चले जाते हैं क्योंकि या फिर डायबिटीज़ है या हार्ट कंडीशन है ये सबकुछ है, परन्तु फिर भी जितने लोगों को यह वायरस सारे संसार में हुआ है उसकी mortality रेट मतलब, मरने की जो रेट है वह बहुत ही कम है अगर थोड़ा-सा भी लिहाज़ और डॉक्टरों ने तो बहुत अच्छा काम किया है इसके ऊपर।

डॉ. किरण : जी, वहां पर जो हेल्थ केयर है वह बिलकुल ही स्ट्रेच हो चुका था, पर डॉक्टर्स फिर भी अपनी पूरी जी-जान से मेहनत कर रहे हैं, पूरा काम कर रहे हैं। लेकिन लोगों को भी मैं यह आश्वस्त करना चाहूंगी कि आपने जैसे कहा, mortality रेट उसका बहुत कम है — ये हमने इतने cases देखे इसलिए हम इतना सुन रहे हैं, पर इस बीमारी का जो बेसिक mortality रेट है वह कम है, तो हमें पैनिक या डर की जरूरत नहीं है, हिम्मत रखनी है। और ये जो बेसिक हाइजीन चीजों का और जो भी directives आते हैं हमारे, हमें फॉलो करने चाहिए और अपने आपको बचाया बिलकुल जा सकता है।

प्रेम रावत जी : और यह सुनने में भी आया है कि एक चीज है "ब्लैक फंगस" तो उसके बारे में आप कुछ कहेंगे ?

डॉ. किरण : जी, तो यह ब्लैक फंगस जो हम मेडिकल अपनी भाषा में उसे "Mucor Mycosis" कहते हैं, तो यह इन्फेक्शन नया नहीं है। यह कोविड के पहले भी पाया जाता था। बहुत कम देखा जाता था क्योंकि सिर्फ जिन लोगों में इम्यून सिस्टम फिर से जिनमें कम हो जैसे कि डायबिटीज़ के मरीज जिनका शुगर कंट्रोल में नहीं है, कैंसर के मरीज जो कीमोथेरपी पर हैं या जो ट्रांसप्लांट के patients हैं, immuno separation पर उन सब में देखा जाता था यह ब्लैक फंगस। लेकिन अब जब से यह कोविड की दूसरी लहर आयी है भारत में तो हम इसके cases बढ़ गए हैं यह सुन रहे हैं और उसमें एक बहुत बड़ा कारण जो इसका यह भी माना जाता है कि कोविड हमारे immune system को suppress करता है, को दबाता है और इसलिए ऐसी बीमारियों का उभरना आसान हो जाता है। इसलिए उसमें आजकल हम ज्यादा सुन रहे हैं इस Mucor Mycosis के बारे में।

प्रेम रावत जी : और मैं तो लोगों को यह भी कहना चाहूंगा अगर आप इस बात से सहमत हैं कि जो लोग सुनते हैं, तो हर एक चीज जो सुनते हैं उस पर विश्वास न करें, क्योंकि अफवाह फैलाने वाले बहुत हो गए हैं और गलत-गलत बात करते हैं।

अब देखिये, लोगों को भक्ति करनी है परन्तु जिस भगवान को वो पूजना चाहते हैं कहीं जाकर के, वह तो उनके अंदर है।

विधि हरि हर जाको ध्यान करत हैं, मुनिजन सहस अठासी।

सोई हंस तेरे घट माहीं, अलख पुरुष अविनाशी।।

वो तो वहीं बैठा है। उसकी पूजा करने के लिए कहीं जाने की जरूरत नहीं है। भक्त बनने के लिए भक्ति की जरूरत है, परन्तु भक्त बनने के लिए कहीं जाने की जरूरत नहीं है। भक्ति जिसकी करनी है वो भी तुम्हारे अंदर है, वो हमारे अंदर है और सबकुछ जिसकी जरूरत है वह सब हमारे अंदर है। तो आराम से, देखकर के एक-एक कदम ख्याल से रखकर आगे बढ़ें तो ये सबकुछ ठीक हो सकता है।

डॉ. किरण : जी, आपने बिलकुल सही कहा। जैसा कि आप कहते हैं कि "भगवान आपके अंदर ही है। जिस भी चीज की आपको जरूरत है वह आपके अंदर ही है।" तो बिलकुल आपने सही कहा कि आप जहां बैठे हैं वहीं बैठकर आपको जो चाहिए आप पा सकते हैं। तो कहीं बाहर जाने की जरूरत नहीं है और ऐसी, ऐसी परिस्थिति में तो आप अपने और दूसरे दोनों के बचाव, समाज के बचाव के लिए सबसे अच्छी बात तो यही होगी कि जहां जरूरी न हो, आप बाहर, घर के बाहर न जाएं।

प्रेम रावत जी : बड़ी अच्छी बात कही आपने और आपका बहुत-बहुत धन्यवाद कि आप ये सारी चीजें लोगों के सामने ला सकें। और हमारे श्रोताओं को हमारा नमस्कार!

डॉ. किरण : जी, धन्यवाद!

हिम्मत का समय: छटी कड़ी (ऑडियो) 00:15:52 हिम्मत का समय: छटी कड़ी (ऑडियो) Audio Duration : 00:15:52 श्री प्रेम रावत द्वारा, हिम्मत, आशा और विवेक का हार्दिक संदेश

हिम्मत का समय (छठा भाग)

प्रेम रावत जी : Ok.. So Thank you again for joining Dr. Kiran. And I understand you are in Seattle.

डॉ. किरण : Yes, I am, जी मैं...I am in Seattle.

प्रेम रावत जी : हिंदी में स्विच कर देते हैं। और आप — कहां से ग्रेजुएट किया आपने मेडिकल स्कूल ?

डॉ. किरण : जी, मैंने मेडिकल ट्रेनिंग अपनी भारत में, अहमदाबाद शहर में बी.जे. मेडिकल कॉलेज है वहां से की थी मैंने। प्रेम रावत जी : अच्छा!

डॉ. किरण : और उसके बाद रेजीडेंसी ट्रेनिंग भी मेरी इंटरनल मेडिसिन में वहीं उससे जुड़ी हुई सिविल हॉस्पिटल है अहमदाबाद में, वहां मैंने अपनी पूरी की थी।

प्रेम रावत जी : जी, जी। तो आपको तो यह ज्ञात होगा ही कि हिन्दुस्तान में इस कोरोना वायरस को लेकर के बहुत ही गड़बड़ हो रही है और बहुत लोग परेशान हैं क्या किया जाये। और एक चीज मैं यह चाहता था कि आज कुछ आप जरा समझायें कि यह कोरोना वायरस क्या है और इससे डरने की जरूरत नहीं है। इससे सावधान होने की जरूरत है।

डॉ. किरण : जी, जी! तो यह जो कोरोना वायरस कि एक परिवार है viruses का जो, जिसमें से एक वायरस जिसे SARS-CoV-2 के नाम से पहचाना गया था, वह 2019 में सबसे पहले पाया गया था, तो तब से लेकर के कोई ऐसा — मैं मानती हूं ऐसा कोई देश नहीं है जो इस वायरस के संक्रमण से बचा रहा हो। लेकिन यह जो है, यह लहरों में कई देशों में देखा गया है तो कई देशों में एक, पहली लहर आयी, फिर वह उतर गयी, फिर दूसरी लहर आयी। तो हिन्दुस्तान में अभी जो है वह दूसरी लहर से जूझ रहे हैं सब। तो यह जो वायरस है यह जुकाम से लेकर के एक Severe acute respiratory syndrome जिसे कहते हैं वो symptoms में पूरा उसका रेंज करता है। मगर जो समझने वाली बात है कि 85 से 90 प्रतिशत लोगों में यह बहुत ही सौम्य, माइल्ड इंफेक्शन करता है, जिन्हें कोई दवा, कोई hospitalization या कोई बहुत ज्यादा मेडिकल केयर की जरूरत नहीं पड़ती। यह अपने आप ही ठीक हो जाता है। और अब तक जो दुनिया में लगभग 170 मिलियन cases दर्ज़ किये गए हैं उसमें से 150 मिलियन से ऊपर cases रिकवर हो चुके हैं। और इसका जो mortality मतलब मृत्यु रेट है वह 2 प्रतिशत से भी कम है। तो इससे हमें कंट्रोल करने की जरूरत है, पर इससे बिलकुल भी घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है।

प्रेम रावत जी : यह आपने बहुत अच्छी बात कही कि डरने की बात नहीं है. डर, लोग डर जाते हैं, क्योंकि बहुत कुछ सुना है लोगों ने और कई जो इत्तला करते हैं लोगों को, वो गलत इत्तला की है, मतलब इससे कि मर जायेंगे, ये कर जायेंगे और जो मैंने सुना है उसका — वह तो बहुत साधारण-सा एक हल है उसका कि मास्क पहनो, छह फीट की दूरी रखो लोगों से और अपने हाथ धोओ.....

डॉ. किरण : जी!

प्रेम रावत जी : .... तो ये करने से आदमी बच सकता है इससे।

डॉ. किरण : जी बिलकुल, जी बिलकुल आपने एकदम सही कहा कि लोगों में डर और पैनिक बहुत ही फैल रहा है, लेकिन कोरोना से बचने के ये आपने जो बताये वो बहुत-ही सरल रास्ते हैं। और एक अब और हमारे में add हो गया है इसमें जो है कि वैक्सीनेशन्स, हमारे पास अब उपलब्ध हैं। तो जैसे-जैसे लोगों के, जैसे-जैसे वैक्सीन्स और उपलब्ध होंगी, वैसे-वैसे इसका ट्रांसमिशन और भी कम होता जायेगा। तो ये मास्किंग और जितना हो सके, जितना जरूरी हो उतना ही घर से बाहर निकलें, जबतक कि इसका कंट्रोल न आये और हाथ धोये रखना, surfaces को disinfectant से साफ करते रहना और अपना जो इम्यून सिस्टम है उसे सशक्त, मजबूत रखना। क्योंकि आखिर में यह इम्यून सिस्टम ही है जो इस वायरस से लड़ता है बाकी सब दवाइयां तो जरा कुछ हेल्प करती हैं।

प्रेम रावत जी : तो यह स्वयं मनुष्य की अपनी शक्ति है अगर उसका जो इम्यून सिस्टम है वह अच्छा है तो उससे हैंडल किया जा सकता है। एक बात हमारे सुनने में आयी एक डॉक्टर कह रहे थे कुछ इसके बारे में कि जिन लोगों के ट्रांसप्लांट हुए हैं जैसे, किडनी ट्रांसप्लांट हुई है या हार्ट ट्रांसप्लांट हुआ है तो उन लोगों पर क्योंकि उनको दवाई लेनी पड़ती है ताकि रिएक्शन न हो इम्यून सिस्टम का तो उसकी वजह से वो बहुत ही डेंजर में हैं, खतरे में हैं कि उनको यह वायरस न लगे।

डॉ. किरण : जी, जी बिलकुल, सही कहा आपने। क्योंकि ये जिन लोगों का ट्रांसप्लांट हुआ है किसी भी ऑर्गन (organ) का तो उन्हें ऐसी दवाइयां दी जाती हैं ताकि उनका इम्यून सिस्टम उस organ को रिजेक्ट न करे। तो इसलिए उनका इम्यून सिस्टम दवाइयों से दबाया जाता है और इसलिए जब उन्हें अगर यह वायरस लगे तो इम्यून सिस्टम already दबा हुआ होता है। तो वो इतना, उसका डटकर मुकाबला नहीं कर पाते हैं। इसलिए उनलोगों को खास उससे सावधानी बरतने की जरूरत है और कुछ जो कैंसर के मरीज हैं जो कि कीमोथेरेपी पर हैं या जिन्हें हृदय की तकलीफ है या डायबिटीज़ जिनका कंट्रोल नहीं है वे सब भी इसमें सीवियर बीमारी गंभीर रूप से होने में उन्हें खतरा बना रहता है।

प्रेम रावत जी : यह बात मैं इसलिए कह रहा था क्योंकि कई लोग हैं जो मास्क नहीं पहनना चाहते हैं। तो मैं उनको यह कहना चाहता हूं कि भाई, तुम नहीं पहनना चाहते हो तो कोई बात नहीं मत पहनो, परन्तु औरों के लिए तो पहनो। क्योंकि तुम उनको यह बीमारी दे सकते हो।

डॉ. किरण : जी बिलकुल, हर नागरिक की यह जवाबदारी होनी चाहिए कि खुद को तो बचायें पर सामने वाले को भी बचाना बहुत जरूरी है, आप उन्हें ना दें यह बीमारी। क्योंकि यह जो वायरस है यह जितना टाइम फैलता रहेगा या उसका ट्रांसमिशन चलता रहेगा, उतना इस वायरस को मौका मिलेगा अपना रूप बदलने का, mutate होने का। तो इसलिए यह बहुत जरूरी है कि हर तरीके से हम इसका ट्रांसमिशन रोकें। नहीं तो हम ऐसी स्थिति में शायद पहुंच सकते हैं जहां हमारी जो अभी वैक्सीन्स हैं, वो उतना अच्छे से काम न करें। तो हमें यह बिलकुल रोकना है।

प्रेम रावत जी : तो मतलब यह तो मानवता की बात है। यह तो सभ्यता की बात है कि कम से कम अगर हम नहीं पहनना चाहते हैं मास्क तो भाई, घर में रहो; बाहर मत जाओ और अगर बाहर जाओ तो मास्क पहनकर जाओ ताकि तुमको न लगे वह बात अलग है, परन्तु और लोगों को जिनको यह डायबिटीज़ है या हार्ट की बीमारी है या ट्रांसप्लांट है, तो उनको बहुत खतरा हो सकता है इस चीज से।

डॉ. किरण : जी बिलकुल, जी बिलकुल, आपने बिलकुल सही कहा। यह हर एक की एक नैतिक जवाबदारी होनी चाहिए कि आप जो, समाज में जिन्हें इसका खतरा ज्यादा है उनकी सुरक्षा के बारे में भी आप सोचें और मास्क पहनना उसके लिए बहुत ही जरूरी है। तो मैं मानती हूं कि हर एक को पहनना चाहिए मास्क।

प्रेम रावत जी : और यह नहीं है कि सिर्फ यहां लगाया हुआ है मास्क और नाक में नहीं लगाया या फिर यहां लगाया हुआ है और मुँह में नहीं लगाया। उसको अगर पहनना है तो ठीक ढंग से पहनना है और ऐसा मास्क पहनना है जो वायरस को ट्रांसमिट न करे। के एन-95 जैसे मास्क हैं, क्योंकि जो पतले-पतले मास्क होते हैं जो सिर्फ कपड़ा लगाते हैं तो कपड़े में बहुत बड़े-बड़े छेद होते हैं अगर उसको मैग्नीफाइंग गिलास से देखा जाए तो उसमें बड़े-बड़े छेद हैं तो उनसे वायरस निकल जायेगी। परन्तु कुछ ऐसा होना चाहिए ताकि उसमें किसी भी रूप से वायरस निकल न पाए।

डॉ. किरण : जी, जी आपने बिलकुल सही कहा। तो ये मास्क जो है उसका उचित फिट होना बहुत जरूरी है। तो नाक और मुँह दोनों ही ढकना चाहिए। एक अच्छी सील होनी चाहिए तो हवा साइड से अंदर न जाये सिर्फ मास्क के थ्रू ही जाए। और यह आपने बिलकुल सही कहा कि एन -95 या के एन-95 मास्क जो होते हैं तो वो ज्यादा अच्छा फिटरेशन, ज्यादा अच्छा सुरक्षा देते हैं। कभी अगर न भी मिल पायें आपको किसी कारण से तो आजकल कहते हैं कि डबल मास्किंग का करना भी उचित रहेगा। तो जिससे कि हम एक और लेयर सुरक्षा का उसमें डाल सकें ताकि आप सुरक्षित ज्यादा रह सकें।

प्रेम रावत जी : हिन्दुस्तान में मैंने यह देखा है कि लोग छूते हैं चीजों को और फिर अपने को छूते हैं या आँख साफ कर रहे हैं या कान खुजा रहे हैं या नाक खुजा रहे हैं, तो ये सारी चीजें इन पर ध्यान जाना चाहिए लोगों का कि कहीं भी हाथ लग गया तो वायरस उसमें लग सकती है और उनको खतरा हो सकता है।

डॉ. किरण : जी बिलकुल, तो यह जो वायरस है उसका जो सबसे बड़ा mode of transmission जो हम कहते हैं, वो ड्रॉपलेट, मतलब बड़ी बूंदों से होता है, तो ये बड़ी बूंदें नीचे settle हो जाती हैं तो जिन surfaces पर, जो surfaces बहुत use होते हैं तो उन पर यह वायरस काफी टाइम तक रहता है। तो अगर उसको छुआ और फिर अपने मुँह के आस-पास आप ले गए तो आपको वह वायरस आपके शरीर में अंदर जाने की संभावना बनी रहती है। इसलिए यह कहते हैं कि जो ऐसे surfaces हों उन्हें बार-बार साफ करते रहें।अपने मुँह के आस-पास हाथ न ले जाएं जितना हो सके, क्योंकि यह वायरस नाक और मुँह से सबसे ज्यादा, सबसे आसानी से शरीर में अंदर प्रवेश करता है और जितना बार-बार आपको जितनी बार याद आये पानी और साबुन से अपने हाथ साफ करते रहें। तो ये जो बेसिक कोविड का जो प्रोटेक्शन है, उससे रहता है।

प्रेम रावत जी : हां, तो बड़ी अच्छी बात कही आपने कि इससे सचमुच में हम बच सकते हैं अगर थोड़ा-सा हम लिहाज़ करें, परहेज करें तो बहुत आसानी से हम इससे बच सकते हैं और सबकुछ ठीक हो सकता है।

डॉ. किरण : जी बिलकुल!

प्रेम रावत जी : यह तो बहुत shock का कारण बन गया है हिन्दुस्तान में कि कितने लोग चले गए हैं, परन्तु बुढ़ापे में लोग चले जाते हैं क्योंकि या फिर डायबिटीज़ है या हार्ट कंडीशन है ये सबकुछ है, परन्तु फिर भी जितने लोगों को यह वायरस सारे संसार में हुआ है उसकी mortality रेट मतलब, मरने की जो रेट है वह बहुत ही कम है अगर थोड़ा-सा भी लिहाज़ और डॉक्टरों ने तो बहुत अच्छा काम किया है इसके ऊपर।

डॉ. किरण : जी, वहां पर जो हेल्थ केयर है वह बिलकुल ही स्ट्रेच हो चुका था, पर डॉक्टर्स फिर भी अपनी पूरी जी-जान से मेहनत कर रहे हैं, पूरा काम कर रहे हैं। लेकिन लोगों को भी मैं यह आश्वस्त करना चाहूंगी कि आपने जैसे कहा, mortality रेट उसका बहुत कम है — ये हमने इतने cases देखे इसलिए हम इतना सुन रहे हैं, पर इस बीमारी का जो बेसिक mortality रेट है वह कम है, तो हमें पैनिक या डर की जरूरत नहीं है, हिम्मत रखनी है। और ये जो बेसिक हाइजीन चीजों का और जो भी directives आते हैं हमारे, हमें फॉलो करने चाहिए और अपने आपको बचाया बिलकुल जा सकता है।

प्रेम रावत जी : और यह सुनने में भी आया है कि एक चीज है "ब्लैक फंगस" तो उसके बारे में आप कुछ कहेंगे ?

डॉ. किरण : जी, तो यह ब्लैक फंगस जो हम मेडिकल अपनी भाषा में उसे "Mucor Mycosis" कहते हैं, तो यह इन्फेक्शन नया नहीं है। यह कोविड के पहले भी पाया जाता था। बहुत कम देखा जाता था क्योंकि सिर्फ जिन लोगों में इम्यून सिस्टम फिर से जिनमें कम हो जैसे कि डायबिटीज़ के मरीज जिनका शुगर कंट्रोल में नहीं है, कैंसर के मरीज जो कीमोथेरपी पर हैं या जो ट्रांसप्लांट के patients हैं, immuno separation पर उन सब में देखा जाता था यह ब्लैक फंगस। लेकिन अब जब से यह कोविड की दूसरी लहर आयी है भारत में तो हम इसके cases बढ़ गए हैं यह सुन रहे हैं और उसमें एक बहुत बड़ा कारण जो इसका यह भी माना जाता है कि कोविड हमारे immune system को suppress करता है, को दबाता है और इसलिए ऐसी बीमारियों का उभरना आसान हो जाता है। इसलिए उसमें आजकल हम ज्यादा सुन रहे हैं इस Mucor Mycosis के बारे में।

प्रेम रावत जी : और मैं तो लोगों को यह भी कहना चाहूंगा अगर आप इस बात से सहमत हैं कि जो लोग सुनते हैं, तो हर एक चीज जो सुनते हैं उस पर विश्वास न करें, क्योंकि अफवाह फैलाने वाले बहुत हो गए हैं और गलत-गलत बात करते हैं।

अब देखिये, लोगों को भक्ति करनी है परन्तु जिस भगवान को वो पूजना चाहते हैं कहीं जाकर के, वह तो उनके अंदर है।

विधि हरि हर जाको ध्यान करत हैं, मुनिजन सहस अठासी।

सोई हंस तेरे घट माहीं, अलख पुरुष अविनाशी।।

वो तो वहीं बैठा है। उसकी पूजा करने के लिए कहीं जाने की जरूरत नहीं है। भक्त बनने के लिए भक्ति की जरूरत है, परन्तु भक्त बनने के लिए कहीं जाने की जरूरत नहीं है। भक्ति जिसकी करनी है वो भी तुम्हारे अंदर है, वो हमारे अंदर है और सबकुछ जिसकी जरूरत है वह सब हमारे अंदर है। तो आराम से, देखकर के एक-एक कदम ख्याल से रखकर आगे बढ़ें तो ये सबकुछ ठीक हो सकता है।

डॉ. किरण : जी, आपने बिलकुल सही कहा। जैसा कि आप कहते हैं कि "भगवान आपके अंदर ही है। जिस भी चीज की आपको जरूरत है वह आपके अंदर ही है।" तो बिलकुल आपने सही कहा कि आप जहां बैठे हैं वहीं बैठकर आपको जो चाहिए आप पा सकते हैं। तो कहीं बाहर जाने की जरूरत नहीं है और ऐसी, ऐसी परिस्थिति में तो आप अपने और दूसरे दोनों के बचाव, समाज के बचाव के लिए सबसे अच्छी बात तो यही होगी कि जहां जरूरी न हो, आप बाहर, घर के बाहर न जाएं।

प्रेम रावत जी : बड़ी अच्छी बात कही आपने और आपका बहुत-बहुत धन्यवाद कि आप ये सारी चीजें लोगों के सामने ला सकें। और हमारे श्रोताओं को हमारा नमस्कार!

डॉ. किरण : जी, धन्यवाद!

दिल का दायरा (ऑडियो) 01:01:50 दिल का दायरा (ऑडियो) Audio Duration : 01:01:50 “मनुष्य होना” श्री प्रेम रावत द्वारा | एपिसोड 10

मनुष्य होना श्रंखला की दसवीं कड़ी में, चार्लवुड, सरी, यु.के में हुए, दूसरे लघु कार्यक्रम के दौरान, प्रेम रावत जी ने अनुभव की महत्ता और कल्याण की भावना पर ज़ोर देते हुए बात की।

दिल का दायरा (वीडियो) 01:01:50 दिल का दायरा (वीडियो) Video Duration : 01:01:50 “मनुष्य होना” श्री प्रेम रावत द्वारा | एपिसोड 10

मनुष्य होना श्रंखला की दसवीं कड़ी में, चार्लवुड, सरी, यु.के में हुए, दूसरे लघु कार्यक्रम के दौरान, प्रेम रावत जी ने अनुभव की महत्ता और कल्याण की भावना पर ज़ोर देते हुए बात की।

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