View as
लॉकडाउन — बत्तीसवां दिन 00:17:52 लॉकडाउन — बत्तीसवां दिन Video Duration : 00:17:52 प्रेम रावत के साथ (हिंदी में अनुवादित)

प्रेम रावत:

सभी को नमस्कार! मुझे आशा है कि आप अच्छा कर रहे होंगे, स्वस्थ रहते हुए, खुश रहते हुए। मैं बस कुछ ही मिनटों का समय लेना चाहता हूं और हर किसी का स्वागत करता हूं, जो इन प्रसारणों को सुन रहा है और इन प्रसारणों को सुनने वाला है। पूरी दुनिया में इन प्रसारणों को सुनने वाले 173 देश हैं — भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका, स्पेन, यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस, अर्जेंटीना, इटली, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, कोलंबिया। जर्मनी, ब्राजील, नेपाल, स्विट्जरलैंड, दक्षिण अफ्रीका, मलेशिया। चिली, पुर्तगाल, ग्रीस, मैक्सिको, नीदरलैंड, पेरू।

युरग्वे, आयरलैंड, न्यूजीलैंड, डेनमार्क, स्वीडन, इक्वाडोर, ऑस्ट्रिया, ताइवान, श्रीलंका, मॉरीशस, वेनेजुएला, इज़राइल, (शालोम), जापान, स्लोवेनिया, कोट डी आइवर, बेल्जियम, फिनलैंड, सिंगापुर, हांगकांग, मोरक्को, बेनिन, त्रिनिदाद और टोबैगो, नॉर्वे, संयुक्त अरब अमीरात, बोलीविया, थाईलैंड, घाना, निकारागुआ।

दक्षिण कोरिया, रियूनियन, क्रोएशिया, इंडोनेशिया, कैमरून, बोस्निया और हर्जेगोविना, सर्बिया, पैराग्वे, कोस्टा रिका, यूक्रेन, ग्वाटेमाला, फिलीपींस, फिजी, पोलैंड, फ्रेंच पोलिनेशिया, जर्सी, सऊदी अरब, लेबनान।

पनामा, वियतनाम, साइप्रस, लाओस, मेडागास्कर, ग्वाडालूप, रूस, लिथुआनिया, कतर, डोमिनिकन गणराज्य, प्यूर्टो रिको, तुर्की, कुवैत, ओमान, युगांडा, बुल्गारिया, पाकिस्तान, सेनेगल, अल सल्वाडोर, नाइजीरिया, ट्यूनीशिया, चीन, हंगरी, केन्या, केन्या।

कंबोडिया, रोमानिया, बांग्लादेश, जमैका, बहामास, मिस्र, मोंटेनेग्रो, माल्टा, नाइजर, टोगो, अंडोरा, कांगो, किंशासा, जॉर्डन, अंगोला, लक्जमबर्ग, बहरीन, इराक, कुक आइलैंड्स, गैबॉन, जिंगिया, बारबाडोस, माली, बुर्किना फासो।

क्यूबा, एस्टोनिया, आइसलैंड, लातविया, मलावी, तंजानिया, न्यू कैलेडोनिया, केप वर्डे, फरो आइलैंड्स, सैन मैरिनो, कोसोवो, जिम्बाब्वे, आर्मेनिया, भूटान, अल्जीरिया, होन्डुरस, ईरान, केमैन द्वीप, माल्डोवा, मार्टीनिक, अल्बानिया, ग्रेनाडा, गाम्बिया —बहुत सारे देश।

उत्तरी मैसेडोनिया, स्लोवाकिया, तिमोर-लेस्त, अरूबा, बेलारूस, क्यूरकाओ, जॉर्जिया, फ्रेंच गुयाना, ग्वेर्नसे, गिनी, सिंट मार्टेन, मालदीव, मोजाम्बिक, पापुआ न्यू गिनी, फिलिस्तीन, सेशेल्स, सोमालिया, सीरिया, समोआ।

सेंट बार्थेलेमी, बेलीज, कांगो, ब्राजील, इथियोपिया, गुवाम। और गुयाना, कजाकिस्तान, सेंट किट्स एंड नेविस, लाइबेरिया, म्यांमार, नामीबिया, रवांडा और सूडान।

इसलिए मैं — दक्षिण सूडान का स्वागत करता हूं — और इन प्रसारणों के लिए आप सभी का स्वागत करता हूँ। मुझे आशा है कि आप कोरोना वायरस की इस स्थिति में आगे बढ़ने के बाद भी उनका आनंद ले रहे हैं, जहां मुझे लगता है कि बहुत सारे लोग सिर्फ — यह उनके लिए बहुत अधिक है।

यह एक बात और कोई कहता है कि “आप लॉकडाउन में हैं” — और आप वास्तव में लॉक होने का अनुभव करते हैं। इसलिए मुझे लगता है कि यहां बड़ी असमानता है — सिर्फ इसलिए कि कोई कहता है कि यह एक लॉकडाउन है, क्या आप लॉकडाउन महसूस करते हैं ? कोई कहता है “हम दुर्भाग्यशाली हैं,” और इसलिए क्या आप दुर्भाग्यशाली महसूस करते हैं ? और यही मुख्य बात है।

क्योंकि मैं बहुत सारे डॉक्टरों को जानता हूं और मैं उनसे बात करता हूं। मैं कहता हूं “एक स्पष्टता है। कोई आपके पास आता है — और वह बीमार नहीं हैं; वह बीमार महसूस नहीं करते; वह बीमार नहीं हैं…”

और मैंने कहा “मुझे पता है कि आपका यह काम पता लगाना है कि उनके साथ कुछ गलत है।” लेकिन आपको व्यक्ति की स्पष्टता को भी देखना होगा। यदि वह बीमार हैं, तो उन्हें बताएं कि वह बीमार हैं। लेकिन अगर वह बीमार नहीं हैं, तो कम से कम, वहां से शुरू करें। और इसके विपरीत; यदि कोई व्यक्ति आपके पास आता है और आपको लगता है कि वह बीमार नहीं हैं, लेकिन वह बीमार हैं, तो आपको वहीं से शुरू करना होगा।

कभी-कभी हम कुछ की स्पष्टता को भूल जाते हैं। स्पष्ट बात यह है कि हम जीवित हैं; जो कुछ भी इस धरती पर होने के बारे में बहुत भाग्यशाली है, हर एक दिन यह स्वांस आती है, हर एक दिन यह स्वांस आती है और यह सुंदर है। यह समझने के लिए स्वीकार करना महत्वपूर्ण है। वह हर दिन, सचेत होने के लिए थोड़ा प्रयास करने के लिए। क्योंकि जब आप इस दुनिया को देखते हैं… और मैं प्रशिक्षण पर काम कर रहा हूं, (और मुझे आशा है कि मैं जल्द ही इसे पूरा करने में सक्षम होऊंगा) और यह है कि — यह थोड़ा पानी से भरा हुआ है, पीस एजुकेशन प्रोग्राम वह है जिसे मैं आगे लाऊंगा।

क्योंकि हमारी सीमाएं हैं और शांति शिक्षा कार्यक्रम में जिन चीजों की आवश्यकता होती है उनमें से यह एक है कि वो लोग, जो भाग लेने जा रहे हैं अपनी शिक्षाओं में भेजते हैं, (जो उन्होंने सीखा है या जो उन्होंने समझा है), इसलिए हम इसे साझा कर सकते हैं… अगर आप नाम नहीं चाहते तो, मैं नहीं बताऊंगा — लेकिन कम से कम यह वो है जो आपने सीखा है। क्योंकि वो है जो अन्य लोगों को प्रदान करता है जैसे, "उस व्यक्ति को यह मिल गया” या “यह व्यक्ति इससे बाहर हो गया।" और ऐसा भी हो सकता है “शायद मुझे चाहिए, मुझे कोशिश करनी चाहिए; मुझे इसका अनुकूलन करना चाहिए।” इसलिए यह वास्तव में एक अद्भुत पल प्रदान करता है। लेकिन एक मुख्य बात यह है कि हम परिणामों से दूर होने की कोशिश कर रहे हैं।

आप जानते हैं कि क्या परिणाम होते हैं, उन कार्यों से जो हम करते हैं या किसी और के कार्यों से। लेकिन हम चाहते हैं — लेकिन हम उन परिणामों की तरह नहीं हैं जो खराब हैं। हमें ऐसे परिणाम पसंद आते हैं, जो अच्छे हैं। इसलिए जब बुरा हो या जब भयानक समय आता है, जब दुःख का समय आता है हम सबकुछ देखते हैं और हम यह सोचते हैं "यह कौन कर रहा है; मेरे साथ ऐसा क्यों हो रहा है ?" मुझे पता है कि बहुत से लोग वास्तव में ऐसा महसूस करते हैं; यह ऐसा है जैसे उन्हें बाहर निकाल दिया गया।

आपको बाहर नहीं निकाला गया है, किसी को भी आपको दंडित करने की कोशिश नहीं की जा रही है। लेकिन जो आपको महसूस करना है वो यह है कि अन्य लोगों के कार्य और उसके परिणाम आपके नियंत्रण में नहीं हैं — लेकिन वे क्रियाएं जो आप करते हैं, आपको उन्हें नियंत्रण में करना होगा और उन परिणामों को आप कम करने के लिए कुछ कर सकते हैं। ये वही परिणाम हैं जिन्हें आप कुछ कम कर सकते हैं और ये वही हैं जो इसके बारे में है। पूरी तरह से जीवन जीना सही मायने में जीवन को जीना है, सचेत रूप से यह जानना है कि यह क्या है जो आप करते हैं। क्योंकि यह एक बहुत ही एक्शन-ओरिएंटटेड है, जो कुछ भी आप करते हैं — वह नहीं जो आप सोचते हैं।

देखिये, सोच अलग है। और मैं इस बारे में एक प्रशिक्षण में बात करने जा रहा हूं (मुझे नहीं पता कि यह कौन-सा है।) लेकिन यह है। यह एक ऐसी बात है जो मेरे पास थी जो कि “अब क्या महत्व है इसका ?” क्योंकि इतने सारे लोग “अब” इसके बारे में बात करते हैं “यह महत्वपूर्ण है।” लेकिन “आज,” आज का महत्व है, आज “अभी” इसका एक पूरक है। और "अब" का क्या महत्व है ?

आज का, अब का वह समय है, जो आप कार्य करते हैं। जब आप कुछ करते हैं, जैसे ही आप कुछ करते हैं, जैसे ही कोई कार्यवाही होती है वह विचारों के दायरे से बाहर होती है। विचार, आप जितना चाहे उतना कर सकते हैं। विचारों के साथ, आप कल (आने वाले कल) की यात्रा कर सकते हैं। विचारों के साथ, आप कल (बीते कल) की यात्रा कर सकते हैं। लेकिन उन क्रियाओं के साथ आप कल (आने वाले कल) नहीं जा सकते और उन क्रियाओं के साथ आप कल (बीते कल) नहीं जा सकते। इसलिए इसका महत्व यह है कि यह वह जगह है जहां आपके कार्य होंगे — और जो आप करते हैं वह सीधे जिम्मेदार होगा, जो परिणाम पैदा करेगा। और वह नकारात्मक परिणाम हो सकते हैं (जो आप पसंद नहीं करते; आप पीड़ित होने जा रहे हैं)। मैं कर्म के बारे में बात नहीं कर रहा हूं; मैं वहां नहीं जा रहा हूं। मैं उन कार्यों के बारे में बात कर रहा हूं, जो अब हम करते हैं।

यह किस प्रकार का कार्य है और कितना जटिल है — यह बहुत बड़ा है! आप किसी को कैसे देखते हैं। आप अपनी पत्नी को गलत तरीके से देख सकते हैं या आपकी पत्नी आपको गलत तरीके से, गलत समय पर देख सकती है और यह खत्म हो गया है। यह अच्छा है, यह अच्छा नहीं है। तो आप अपने कार्यों के लिए स्वयं जिम्मेदार हैं। आप अपने कार्यों के लिए जिम्मेदार हैं, जो आपके लिए अच्छे परिणाम ला रहे हैं — अच्छे परिणाम और साथ ही बुरे परिणाम भी। आप चाहते हैं, जितना संभव हो उन चीजों को करना जो अंततः (अन्य लोगों की कीमत पर नहीं) आपको अच्छे परिणाम लायेंगे; आप में पूर्णता लायेंगे; आप में खुशी लायेंगे; आप में समझ लायेंगे।

मेरा मतलब है कि मैं बहुत से लोगों को देखता हूं — और कुछ लोग जिन्हें मैं नहीं जानता; मैं उन्हें टेलीविजन पर देखता हूं, शायद यह एक साक्षात्कार है; शायद वे बात कर रहे हैं या जो भी हो। और फिर आप उनके बारे में पढ़ते हैं "वह ऐसा कर रहे हैं और वे हैं, किसी के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं और वहां से आगे बढ़ना है।"

लेकिन एक बात जो है अमानवीय है, इनमें से कुछ लोग वो हैं, जो बहुत खुश नहीं हैं। मेरा मतलब है, एक व्यक्ति है जो, लोग टेलीविजन पर इस व्यक्ति को बहुत बार देखते हैं — और वह एक बहुत शक्तिशाली व्यक्ति है, क्योंकि वह जानता है वह एक बहुत शक्तिशाली देश से जुड़े हैं। लेकिन वह खुश टूरिस्ट नहीं है। मेरा मतलब है, जब भी आप उसे देखते हैं वह सिर्फ एक खुश टूरिस्ट नहीं है — भले ही स्थिति-वार, वह शीर्ष के शीर्ष के शीर्ष पर हो। इसलिए इसका उस सूत्र से कोई लेना-देना नहीं है जो कुछ लोग खींचते हैं। “यदि आपके पास यह है, तो आप स्वचालित रूप से खुश हैं — आप सफल हैं।”

नहीं, सफलता एक ऐसी चीज है जिसे महसूस किया जाता है। यदि आप सफल नहीं महसूस कर रहे हैं, तो कोई व्यक्ति आपको बता सकता है कि आप सफल हैं। कोई भी साथ नहीं आ सकता और आपको बता सकता है कि यदि आप खुश नहीं हैं तो आप खुश हैं ("ओह, नहीं, नहीं, नहीं आप खुश हैं; आप खुश हैं।) तो ये बातें व्यक्तिपरक हैं। वह आपके ऊपर हैं! उद्देश्य नहीं है।

जब समाज कुछ ऐसा लेता है जो बहुत व्यक्तिपरक होता है और इसे कुछ बहुत ही उद्देश्य में बदलने की कोशिश करता है तो, सामान का एक पूरा बंच होता है जो कि अच्छा नहीं है। तो सीखने का यह सूत्र शुरू होता है "हां, हां, आपको यह सूत्र सीखना होगा; आपको यह सूत्र सीखना होगा कि यह क्या है।" और यही इस बारे में है। यदि आप सफल होना चाहते हैं तो आपको यह करना होगा और फिर आप सफल हो जाएंगे।”

खैर, संयुक्त राज्य अमेरिका में, लोगों को कॉलेज खत्म करने के लिए और स्कूल की पढ़ाई खत्म करने के लिए ऋण लेना पड़ता है। जिसके बाद वे पैसे बनाने की कोशिश करते हैं और वहीं वे अभी तक शुरू नहीं हुए हैं और वे पहले से ही कर्ज में हैं। और शेष जीवन के लिए, वे कर्ज में रहने और कर्ज में रहने और कर्ज में रहने वाले हैं। पूरी अर्थव्यवस्था आधारित है ताकि आप कर्ज में डूबे रहें — अब तक आप सिर्फ एक गुलाम की तरह काम करते रहते हैं, बस एक गुलाम की तरह काम करते हैं और उसे चुकाने की कोशिश करते हैं। और आप इसे कभी चुकाने में सक्षम नहीं होंगे। क्योंकि यह केवल अधिक जटिल और अधिक मिश्रित और अधिक मिश्रित होता रहता है। और यही होता है। इसलिए आप कुछ ऐसा करने की कोशिश कर रहे हैं जो बहुत ही व्यक्तिपरक है। इसे बहुत ही उद्देश्य पूर्ण बनाइए — “और ये करिए, ये, ये और ये।”

लोग मेरे पास आते हैं — और वे अपने जीवन में शांति चाहते हैं; वे सद्भाव चाहते हैं; वे तृप्ति चाहते हैं; वे स्पष्टता चाहते हैं; वे आशा चाहते हैं; वे यह सब चाहते हैं। लेकिन वे सोचते हैं कि इसका उद्देश्य — “हम एक बटन दबायेंगे और यह होने लगेगा। “नहीं, यह व्यक्तिपरक है। यह पूरी तरह से आप महसूस करते हैं। यदि आप अपने जीवन में उस खुशी को महसूस नहीं करते हैं तो आपको वह आनंद नहीं मिलेगा। बस। आपको इसे महसूस करना होगा; आपको इसे समझना होगा। यही शांति है। शांति एक ऐसी चीज है जिसे आपको महसूस करना है — कुछ ऐसा नहीं है जिसके बारे में आपको सोचना है। “क्या, क्या मुझे अब शांति है ?”

कबीर के कथन इससे भरे हुए हैं जो आपको बताता है कि "यह बात है” और आप बस जाओ, यह बात है, “यह बात है; यह है” — यह नहीं है। जबतक आपके पास वह सच्चा एहसास नहीं होगा, जबतक आपके जीवन में वह सच्ची समझ नहीं होगी तबतक कुछ भी फर्क नहीं पड़ने वाला है। आप कोशिश करने जा रहे हैं — लेकिन इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।

इसलिए यह — तीन चीजें हैं, जिनके बारे में मैं हमेशा बात करता हूं, "अपने आपको जानें; अपना जीवन सचेत रूप से जीयें।" क्योंकि वह एकमात्र बाधा है जो आपके पास है — आपके कार्यों और उन परिणामों के बीच जो आप नहीं चाहते हैं। तो उन क्रियाओं को करने का, उन परिणामों को कम करने के लिए आपके पास सिर्फ एक तरीका है, यदि आप चेतना का अभ्यास करना शुरू करते हैं, तो जो हो रहा है उसके बारे में जागरूक होना होगा — "आप क्या करने वाले हैं; आप क्या कहने वाले हैं; क्या होने जा रहा है" — इसके लिए इसे थोड़ा-सा विचारते हैं कि “क्या होने जा रहा है ?”

क्या होने जा रहा है, आप अगर अपने बच्चे को यह बताने जा रहे हैं कि “आप देर से आए हैं ?” ठीक है, यह तुम्हारे साथ हुआ है; यह आपको कैसा लगा। आपको वास्तव में यह मिला है, क्योंकि आपके साथ वास्तव में ऐसा ही हुआ है; "आप लेट हैं; आप लेट हैं; आप लेट हैं; आप लेट हैं।"

एक समय आपको अपने आपसे सवाल पूछना होगा — "यहां कौन है ?" आपके माता-पिता चले गए होंगें; वे इस पृथ्वी पर नहीं हो सकते हैं — लेकिन वे निश्चित रूप से आपके पास एक विरासत छोड़ गए हैं। और आप बस बैठे हुए हैं और इसको नष्ट कर रहे हैं। और लोगों को लगता है कि यह पूरी तरह से ठीक है, क्योंकि इसमें कुछ भी गलत नहीं है। इसके बारे में अच्छी तरह से सोचें, “क्या आप ऐसा करना चाहते हैं ? आप क्या करना चाहते हैं ?” और यह सच है कि — आपके द्वारा की गई कार्रवाईयां हैं और हो सकता है आप उन कार्यों के बुरे परिणामों से गुजर रहे हैं।

लेकिन अब आप क्या करना चाहते हैं ? क्या आप बदलना चाहते हैं या आप इसे दोहराना चाहते हैं ? और उन नकारात्मक परिणामों के दुख को दोहरा रहे हैं ? यह आप पर निर्भर है। यह आपके ऊपर है। और यह हमेशा आपके ऊपर रहेगा। और यह बहुत ही व्यक्तिपरक है कि आप क्या महसूस करते हैं, जो आप अपने जीवन में समझते हैं।

इसलिए सुरक्षित रहें; अच्छा महसूस करें और सबसे महत्वपूर्ण बात, खुश रहें। धन्यवाद!

लॉकडाउन — इकत्तीसवां दिन 00:17:34 लॉकडाउन — इकत्तीसवां दिन Video Duration : 00:17:34 प्रेम रावत के साथ (हिंदी में अनुवादित)

प्रेम रावत:

सभी को मेरा नमस्कार! और मुझे आशा है कि आप ऐसे कठिन समय में अच्छा कर रहे हैं — और अच्छी तरह से होंगे। इसलिए आज मैं आपसे इस बारे में सिर्फ एक बात करना चाहता हूं कि बहुत समय पहले मैं इस कथन से रूबरू हुआ (या उद्धरण या आप इसे कुछ भी कह सकते हैं) और यह कुछ इस तरह से हुआ कि “हर चीज पर सवाल करना” और इसलिए मैंने सोचना शुरू किया कि “यह बहुत ही दिलचस्प है; हर चीज पर सवाल करो। और क्या मैं इससे सहमत हूं ?” मैं मानता हूं कि — हमें सवाल करना चाहिए। लेकिन एक ही समय में, हमें उत्तरों की आवश्यकता है — क्योंकि बिना कोई उत्तर मिले प्रश्न करने का कोई अर्थ नहीं होगा। और किस क्षेत्र में, किस स्पेक्ट्रम में आप सवाल करना चाहेंगे ?

तो यहां, यहां मेरे लिए यह है कि — "हां, हम हर चीज पर सवाल करते हैं। अब कुछ प्रश्नों के लिए, भले ही मुझे उत्तर मिल जाए, क्या मुझे परवाह है ?” मेरा मतलब है, मेरा मतलब है कि मैं ऊपर देख सकता हूं; मैं एक हवाई जहाज को आसमान में उड़ता हुआ देख सकता हूं। और यह कहना काफी सामान्य होगा, “मुझे आश्चर्य है कि वह हवाई जहाज कहां जा रहा है ?” कोई मेरे पास आता है और कहता है, “वह हवाई जहाज सिंगापुर जा रहा है।” यह होता है, “ठीक है, कोई बड़ी बात नहीं है।” या यह दिल्ली जा रहा है; “क्या बड़ी बात है ?” — या यह मुंबई जा रहा है; “क्या बड़ी बात है ?”

लेकिन फिर वह सवाल हैं जो जाहिर हैं हमें पूछने की जरूरत है और उन सवालों के जवाब पाने की जरूरत है — वो सवाल हैं — “मैं कौन हूं ? मैं यहां क्यों हूं ? मैं क्या हूं ?” मैं एक इंसान हूं। मुझे उत्तर की आवश्यकता है; मुझे अपने जीवन में बार-बार उत्तर की आवश्यकता है कि “मैं एक इंसान हूं।” मैं क्या चाहता हूं ? मुझे जरूरत है। मेरी जरूरतें बहुत बुनियादी हैं; मेरी जरूरतें बहुत मौलिक हैं। “और इस दुनिया के बारे में क्या ?” मुझे इस दुनिया की हर चीज पर सवाल उठाने की जरूरत है। और कमाल की बात यह है कि ज्यादातर समय हम दुनिया पर सवाल नहीं उठाते हैं; हम खुद से सवाल करते हैं। हमें दुनिया से कोई जवाब नहीं मिलता; हम इस पर सवाल भी नहीं उठाते हैं, लेकिन हमें दुनिया से कोई जवाब भी नहीं मिलता है। हमारी धारणायें हैं : “यह वही है जिसके लिए यह है; यह वही है जिसके लिए यह वही है; जिसके लिए यह है।”

अचानक एक असमानता, एक तरह का असंतुलन; जहां सवाल पूछे जा रहे हैं… और क्या सवाल पूछना अच्छा है; मुझे लगता है प्रश्न पूछना अद्भुत है। लेकिन आपको उन सवालों को पूछना होगा जिससे आपको जवाब मिल सके, खासकर जब वह सवाल आपके अस्तित्व से, इस धरती पर आपके मौलिक अस्तित्व से संबंधित हों। मैं पैदा हुआ था; मैं एक अंधकार से बाहर आया। मैं इस दुनिया में मौजूद हूं; मैं इस समय मौजूद हूं। मुझे समझ नहीं आता कि वह समय कितना कम है। मैं अपनी संभावनाओं को नहीं समझता कि वो संभावनाएँ मेरे लिए कितनी बड़ी हैं।

मुझे पता है कि एक दिन मुझे जाना है — लेकिन मुझे इसका मतलब समझ में नहीं आता कि “जाने का मतलब,” कहां जाना है ? मैं कहां जा रहा हूं ? क्योंकि वह पहले से ही निर्धारित है। “यदि आप एक अच्छे व्यक्ति हैं, तो आप स्वर्ग जाने वाले हैं।” और यह पूरी तरह से उस पर निर्भर करता है, जिस धर्म का आप पालन कर रहे हैं।

धर्म की बात यह है कि आप धर्म में बहुत बार पैदा हुए हैं। आप एक धर्म का चयन नहीं करते; आप एक धर्म में पैदा हुए हैं। और एक बार जब आप एक धर्म में जन्म लेते हैं; तो आप कुछ नहीं कर सकते। किसी और को अलग लग सकता है, जो आपको पूरी तरह से सामान्य लगेगा। जब कोई ईसाई हिंदू धर्म के संस्कारों का पालन करता है, तो वह बहुत अलग दिखता है। लेकिन एक हिंदू के लिए, यह पूरी तरह से सामान्य है; यह पूरी तरह से सही है; बिल्कुल सही है। यह कैसे होता है। जब कोई दूसरे लोग ईसाइयों को अपने धर्म का पालन करते हुए देखते हैं, तो उन्हें लगता है “यह अजीब है; यह गलत है।” लेकिन एक ईसाई जो उसमें पैदा हुआ है, जिसने इसे बहुत कम उम्र से देखा है। उसके लिए सबकुछ सामान्य लगता है।

इसलिए हम अपने विश्वासों में, अपने उद्देश्यों, अपने विचारों में — लेकिन हम वास्तव में सवाल नहीं उठा रहे। मैं धर्म के बारे में बात नहीं कर रहा हूं; मैं उन चीजों पर सवाल नहीं उठा रहा हूं। मैं पूछताछ के बारे में बात कर रहा हूं कि “मैं कौन हूं ? मैं यहां क्यों हूं ? मेरी जरूरतें क्या हैं ? मेरी समझ क्या है ? मुझे अपने जीवन में क्या चाहिए ? आज — मेरे लिए क्या महत्वपूर्ण है ? मेरे लिए आज का मूल्य क्या है ? मेरे लिए कल का क्या मूल्य होगा; मेरे लिए कल के क्या मूल्य हैं ?” क्योंकि यदि कल का मूल्य, आज के मूल्य से अधिक है, तो मैं सही मायने में यह नहीं समझता कि आज, कल और कल सभी क्या हैं। यदि कल का मूल्य मेरे लिए आज के मूल्य से अधिक है, तो मैं इन तीन चीजों को नहीं समझता जो कि “आज, कल और कल हैं।” मुझे नहीं मिला; मैं इसका मूल्य नहीं जानता।

आज का दिन मेरे लिए सबसे महत्वपूर्ण है — क्योंकि मैं आज कुछ कर सकता हूं। आज यहां मेरे कर्म हो रहे हैं। वहीं कल की यादें हैं, सोच-विचार हैं। कल चिंतन, विचार, उद्देश्य हैं — लेकिन कोई भी क्रिया कल नहीं हो सकती है या कोई भी कार्य कल में नहीं हो सकता है। क्योंकि होने वाली क्रियाओं के लिए — आज का होना बेहद जरूरी है। तो क्या मेरी गतिविधियां एक सुविचारित विचार के परिणाम हैं ? या वो ऐसा नहीं है ? (कुछ दिन अच्छे हैं; कुछ दिन अच्छे नहीं हैं; कुछ घंटे अच्छे हैं; कुछ घंटे अच्छे नहीं हैं; कुछ मिनट अच्छे हैं; कुछ नहीं हैं।) क्योंकि अगर मैंने सोचा नहीं है कि यह क्या है जो मुझे करना चाहिए… और मैं कहता हूं कि "स्पष्टता" — सभी चीजों को पूरी तरह से समझने के लिए होती है।

जब हमारी आर्मी को कोई संकेत मिलता है कि एक ऐसा एरिया है, जहां मौसम खराब है या कुछ हालात खराब हैं। बेशक, आपको एहसास होता है जब आप एक हवाई जहाज उड़ाते हैं तो आपके पास ये सब जानकारी होती है — और आपके पास अपना रडार होता है — लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आपके पास आपकी आंखें हैं। आप उपग्रह चित्र देख रहे हैं, अपने प्रदर्शन पर आप उपग्रह चित्र — और इसे देख रहे हैं, आप देख रहे हैं कि यह कितना करंट है। बेशक, मेरे पास अपना आईपैड भी था और मैं इसे देख रहा हूं और यह मुझे करंट बता रहा था। लेकिन तब मेरी आंखें हैं। और अगर, आप जानते हैं तो सबकुछ कहते हैं, “नहीं, इसके बारे में चिंता मत करो; सबकुछ ठीक है,” और मैं खिड़की से बाहर देख रहा हूं और मैं कुछ इस तरह से जा रहा हूं कि मुझे पता है कि यहां मौसम खराब है। तो बस यही समय है फैसले का।

तो मैंने एक फैसला किया — मैंने रास्ता बदला और मैंने एक छोटा-सा गोला बनाया। मैं उस तूफान में आगे जाना नहीं चाहता था। तो मैंने एक आसान-सा रास्ता पकड़ा; मैं वापस आया। ये सारी चीजें करने में मुझे ऐसे बीस से पच्चीस मिनट करीब लगे — और मैं वापस अपने रूट पर था। और by the way, मुझे कुछ रास्ता सूझा और मैंने रास्ते को अपने अनुरूप ढ़ाल लिया।

इसलिए जब आप उड़ते हैं तो आप चीजों के सभी पहलुओं को देखते हैं; सिर्फ यह नहीं कि आप हवाई जहाज में चढ़ते हैं, इंजन को क्रैंक करते हैं और उड़ान भरते हैं। नहीं, आप एक नजर डालते हैं कि “मैं कहां जा रहा हूं जब ऐसा होगा ? अगर मैं एक इंजन खो दूंगा, तो मैं कहां तक जा सकता हूं और मैं कहां जा रहा हूं ? मेरे पास कितना ईंधन होगा; क्या मैं इसे पूरा कर पाऊंगा ? मेरे पास कितना भंडार होगा ?" तो अब आपने क्या नतीजा निकाला ? इसलिए सारी जानकारी जो ली जाती है; यह एक संसाधित है; यह एक संसाधित है। एक तस्वीर ली जाती है। और फिर यह एक योजना बन जाती है, जिसके साथ आप सहमत होते हैं। तो जो भी जानकारी भेजी गई है कि "हां, हम ऐसा कर सकते हैं, यह हमारे लिए आवश्यक ईंधन की मात्रा है।” और जब मैं अपनी ईंधन का आदेश देता हूं, तो मैं हमेशा मार्ग देखता हूं — और अगर मौसम बहुत खराब हो या रास्ता बदलना पड़े या अशांति हो या जो भी हो और हमें नीचे जाना पड़ सकता है तो आप थोड़ा अतिरिक्त आदेश देते हैं। थोड़ा अतिरिक्त हमेशा अच्छा होता है।

निश्चित रूप से विमान में अंगूठे का नियम यह है कि आपातकालीन स्थिति में — “आपके पीछे रनवे ट्रक में ईंधन और आपके ऊपर की ऊंचाई आपके लिए अच्छी नहीं होती।” आपके पास जितनी ऊंचाई हो सकती है, उतनी ही आपको जरूरत है। आपको उस ईंधन की आवश्यकता है, जिसे आपने ट्रक में छोड़ा था और आप इसे अपने पंखों में रखना चाहेंगे। और रनवे जितना अधिक आपके पास है, उतना ही बेहतर है कि आप जो भी कर रहे हैं। तो क्या यह जीवन में लागू नहीं होता है ? यह लागू होना चाहिए। वो सिद्धांत है कि — “हमें किसी भी घटना और किसी भी संभावना के लिए तैयार रहना चाहिए।” लेकिन एक ही समय में हम ऐसा नहीं कर सकते। यह हम चले। यह हम चले। हम लॉन्च कर रहे हैं, इससे पहले ही रॉकेट ने अपने पैडल को उतार दिया है। हम जा रहे हैं, हम जा रहे हैं। विचार तो पहले से ही है; आप सुबह उठते हैं और “तबतक मैं चला जाता हूं।” इसलिए आप जाते हैं — और आप बस का इंतजार कर रहे हैं; आपने अपना घर छोड़ दिया है; आप ऐसा कर रहे हैं — और यह वैसे ही है जैसे आप इस तूफान में फंस गए हैं। आपको पता नहीं क्या करना है।

अब मैं आपसे ये सब क्यों कह रहा हूं ? क्योंकि यह भव्य समय है; यह एक बेहतरीन समय है उन चीजों में से कुछ चीजों पर सवाल उठाने का — सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इनमें से कुछ महत्वपूर्ण प्रश्न जो आपको खुद से पूछने की जरूरत है। सिर्फ इसके लिए किसी के शब्द ना लें। तो लोग जो सवाल पूछते हैं उनके पास एक जवाब होता है — यह जवाब नहीं कि "हां, हां, भगवान सिर्फ रहस्यमय तरीके से काम करता है और मैं इसे स्वीकार करता हूं।" नहीं, नहीं, “यह क्या चल रहा है ?” क्योंकि यहां मैं हूं; यह मेरी जिंदगी है! मैं वह हूँ जिसे ऑप्शन दिए गए हैं, यह करने के लिए या नहीं करने के लिए।

मैं महाभारत का वह योद्धा हूं जो भारत के उन महान युद्ध में था। और एक विकल्प दिया गया है — और कृष्ण कह रहे हैं "देखो तुम्हें सबकुछ देखना है और उसके बाद ही उसे यह चुनाव करना चाहिए।" और जब अर्जुन अंत में इसके पूरे पक्ष को देखता है, तो वह लड़ने के लिए तैयार हो जाता है। तो मुझे सबसे पहले कहना होगा कि मेरे जीवन में एक समय था, मैं अर्जुन की पसंद से बिल्कुल सहमत था। “मैं लड़ने नहीं जा रहा हूं; मैं उन सभी लोगों को जानता हूं…मैं लड़ाई नहीं कर रहा हूं।” ऐसा होता है, “यह एक अच्छा विकल्प है; लड़ाई मत करो" लेकिन यहां पूरे मामले को देखिए। पूरा कारण समझिए — कि इन लोगों ने खुद को अपने खिलाफ कर लिया है कि क्या सही है और क्या ठीक है; क्या सही है, क्या ठीक है।

वैसे भी, वह महाभारत था, वह बीता हुआ कल है। आने वाला कल वही होगा, जो होना होगा। लेकिन आज आपके साथ काम करना है, काम करना है। यह वो जगह है जहां आपके कार्य किए जाएंगे। क्योंकि आज वह जगह है जहां कार्यवाही होगी, “अब” वह जगह है जहां कार्यवाही होगी, तो अब का महत्व है। दो मिनट पहले, केवल विचार हो सकते हैं। जहां तक आप अपने विचारों के साथ जा सकते हैं। लेकिन क्रियाओं के लिए, आप अभी की स्थिति में बंद हैं।

इसलिए यदि आप अभी की स्थिति में बंद हैं तो, अपनी सारी सोच पर ध्यान केंद्रित ना करें या भाग लें और समझें कि आप क्या हैं — क्योंकि आप जहां कार्य करने जा रहे हैं और अब आप जहां पर कार्य करते हैं या यहां जो भी करते हैं, उसके परिणाम आपको भविष्य में भुगतने पड़ेंगे — और आपका वह अतीत बन जाएगा। और ज्यादा से ज्यादा यह प्रक्रिया हो रही है और ज्यादा “आज” मडल्ड होने जा रहा है।

तो हर चीज पर सवाल; पूर्ण रूप से; कोई दिक्कत नहीं है। कुछ सवालों के जवाब आपको कभी नहीं मिलेंगे, जो उन सवालों की परवाह करता है, शायद वो बहुत तुच्छ हैं। लेकिन फिर भी वो महत्वपूर्ण प्रश्न हैं, जो आपको स्वयं से पूछने चाहिए — और आपको उत्तर प्राप्त करने होंगे। यह विकल्पों का सवाल नहीं है; आपको उन उत्तरों को प्राप्त करना होगा। और उन उत्तरों को स्पष्ट करना होगा, सफल होना होगा, सही होना होगा। इसे सही मानना है, अपने दिल से, उन सवालों के जवाब को स्वीकार करना है।

क्योंकि तुम्हारे भीतर एक सागर है, उत्तर का एक महासागर है। यह वही है जो मैं कहता हूं कि — "आपके अंदर उत्तर का एक महासागर है।" और इसका जवाब है कि आपको सही लग रहा है कि आप उस महासागर से आने वाले हैं जो आपके भीतर है। और वही महासागर आपके भीतर है। इसलिए मुझे उम्मीद है कि चीजें आपके लिए सुधार कर रही हैं। इसे एक दिन एक समय लो। देखो, “तुम नहीं जानते क्या हो रहा है नीचे; सड़क पर क्या होगा, सड़क पर क्या होने वाला है,” सड़क, जो भी हो। लेकिन एक दिन, एक समय में, अच्छा महसूस करें। खुश रहें, सुरक्षित रहें, अब के महत्व को समझें। वह नहीं बदला है।

कोरोना वायरस या नहीं, लॉकडाउन या नहीं, उस दिन के संबंध में कुछ भी मतलब नहीं है कि आप पैदा हुए थे और उस दिन जब आप जाने वाले थे। उनके संबंध में, इसका मतलब कुछ भी नहीं है। यह अभी भी मान्य है। और हर क्षण यह स्वांस तुम्हारे भीतर आती है, तुम्हारे लिए एक उत्सव है जिसे तुम्हें हर एक दिन मनाना शुरू करना होगा।

तो सुरक्षित रहें और सबसे महत्वपूर्ण बात धन्यवाद; मैं आपसे बाद में बात करूंगा।

लॉकडाउन — तीसवां दिन 00:19:52 लॉकडाउन — तीसवां दिन Video Duration : 00:19:52 प्रेम रावत के साथ (हिंदी में अनुवादित)

प्रेम रावत:

सभी को नमस्कार! आशा करता हूँ आप सब लोग अच्छी तरह होंगे, अच्छी तरह महसूस कर रहे होंगे; अच्छा काम कर रहे होंगे। तो मैं एक सवाल पढ़ रहा था जो मेरे एक बहुत करीबी दोस्त से आया था — और एक चीज जो वह जानना चाहते थे वह है, “सबसे उपयुक्त कहानी क्या होगी जो इस कोरोना वायरस से संबंधित हो या जो इस मौजूदा हालात से संबंधित हो ?”

इसलिए मैंने उस बारे में सोचना शुरू कर दिया और उनमें से एक चीज जो मेरे लिए बहुत स्पष्ट हो गई थी, वह यह था कि हम इसमें से एक बड़ी चीज बना सकते हैं और — हम करते हैं — हम… ऐसा नहीं है कि मैं कोई छोटा करने की कोशिश कर रहा हूं; यह मैं नहीं कर रहा हूं। यह ऐतिहासिक है; यह बहुत बड़ा है।

जब आप कुछ एनिमेशन के जरिए यह देखते हैं कि यह कैसे और सबकुछ कैसे फैला है, यह सिर्फ एक फैलाव है, यह एक ट्रेन के एक्सीडेंट की तरह है — और आप एक मील से ट्रेन को देख सकते हैं। लेकिन फिर भी, आपको अपनी जरूरतों पर ध्यान देना होगा। और आपको यह समझना होगा कि आप सब क्या हैं, क्योंकि सबकुछ बदल नहीं गया है। परिस्थितियां बदली हैं; बाहरी परिस्थितियां बदल गई हैं, लेकिन आप कौन हैं और किसी भी कोरोना की वजह से आपको बदलने की जरूरत नहीं है। और हाँ, यह हमारा स्वभाव है कि जब हम किसी चीज से वंचित होते हैं, जब कोई चीज हमसे छीन ली जाती है तो हम उसे और ज्यादा याद करते हैं; हम उसे और अधिक पसंद करते हैं; हम उसे और अधिक चाहते हैं।

इसलिए आप इस तथ्य के बारे में जानते हैं कि बहुत से लोग हैं मुझे पता है कि वह रहने वाले कमरे में बैठते हैं और टेलीविजन देखते हैं — या वीडियो गेम खेलते हैं या संगीत सुनते हैं या किताब पढ़ते हैं — लेकिन जब आप बाहर नहीं जा सकते, तो ऐसा लगता है कि हम सब बाहर जाना चाहते हैं; हम सभी समुद्री तट पर जाना चाहते हैं; हम सभी इस प्रकार की चीजें करना चाहते हैं। तो यह बहुत ही दिलचस्प है।

इसलिए, वापस मुख्य चीज पर आते हैं, जो कि नहीं बदली है — जो है आपकी जरूरतें, आपकी इच्छा, आपका दिन —अस्तित्व के लिए। और वह नहीं बदला है। तो सबसे उपयुक्त कहानी क्या होगी ? काफी सोच-विचार के बाद — और मुझे इस एक को दिमाग से बाहर खींचना पड़ा, बहुत गहराई तक। लेकिन यह एक ऐसी कहानी है जिसे मैं बहुत पहले बता देता। और मैंने इस कहानी को लंबे, लंबे समय से नहीं बताया। लेकिन कहानी बहुत, बहुत ही छोटी है; यह यह बहुत ही संक्षिप्त है। एक दिन एक राजा था और वह नशे में धुत हो गया — और वह अपने नशे में हाथी के ऊपर चढ़ गया। वो दोनों जा रहे थे — जहां भी वो जाना चाहते थे, जहां भी हाथी उसे ले जाना चाहता था — और हाथी जहाँ जाना चाहता था वहां जाता था। वो दोनों बहुत ही बुरी हालत में थे; वो नशे में थे, किसी के नियंत्रण में नहीं थे; कोई भी वास्तव में प्रभारी नहीं था, ऐसा कह सकते हैं; किसी को पता नहीं था कि क्या करना है। जब वो जा रहे थे, हाथी किसी चीज पर जा गिरा और राजा जो हाथी के पीठ पर बैठा था, हाथी से कुँए में गिर गया। और जैसा कि वह गिर रहा है कुँए में, एक पल के लिए, वह एक पल के लिए शांत हो गया और वह एक बेल को पकड़ लेता है, यह बहुत ही मजबूत बेल है; वह इसे पकड़ लेता है — और वह जीवित है; वह ठीक है। और इसलिए उस क्षण वह निश्चित रूप से “यहां क्या चल रहा है” इसके बारे में सोच रहा है — और उसे आराम मिल रहा है। वह बहुत शांत होता है। अचानक ही वह अपनी स्थिति का आकलन करने लगता है।

वह कुएं के बीच में है; उसने बेल को पकड़ा हुआ है। और वह ऊपर देखता है — और वह दो चूहों को देखता है, (एक काला चूहा है और एक सफेद चूहा है।) और वो इस बेल को काटने में बहुत व्यस्त हैं। इसलिए वह यह देखने के लिए नीचे देखता है कि नीचे क्या है, और नीचे सांप और बिच्छू हैं, जो चारों तरफ फैले हुए हैं, जो बहुत ही घातक और जहरीली चीजें हैं — यह उसके लिये अच्छी बात नहीं है।

वो यहां बीच में है; इस बेल पर उसकी पकड़ है और वह इस कुंए में है। वह ऊपर देखता है — और दो चूहे हैं जो बस उस पर जा रहे हैं, बेल को काटने की कोशिश कर रहे हैं, बेल को काटने की कोशिश कर रहे हैं। वह नीचे देखता है, जहां बेल के काटने पर वह निश्चित ही गिरने वाला है, और ये जहरीले सांप और बिच्छू और खतरनाक चीजों के अलावा वहां कुछ भी नहीं है।

तो बस एक मिनट के लिये वहां रूकें — कहानी वहीं समाप्त होती है। क्योंकि इस कहानी से आप कुछ प्राप्त कर सकते हैं, जिसके बारे में आपको सोचना है। तो आप राजा हैं, जाहिर है; आप राजा हैं — और आप जिस पर सवारी करते हैं, वह आपकी छोटी-सी दुनिया है, हाथी है। और हाथी नशे में है — और आप हैं।

तुम किस नशे में हो ? बेहाशी! आप जीवित हैं — लेकिन आप किसी भी चीज के प्रभारी नहीं हैं। सिवाय आपको चीजों के बारे में शिकायत करने, चीजों को देखने "ओह हां, मुझे आश्चर्य है कि ऐसा क्यों है यह क्या हो रहा है," इसके अलावा भगवान को दोष देना, इस व्यक्ति को दोष देना। उस व्यक्ति को दोष देना, इसे दोष देना। तो यह बहुत ही — बहुत ही रूपक (metaphoric) है। यहाँ का रूपक वास्तव में यही होगा कि इस कहानी में आप राजा हैं। अचेतना वह है जिस पर आप प्रवृत्त (inebriate) होते हैं।

हम हर दिन जीते हैं — और हम इसे बहुत अधिक बनाना चाहते है। “मैं जाता हूँ; मैं इस समय उठता हूं…” आप जानते हैं संयुक्त राज्य में कितने लोग सोचते हैं कि उनकी अलार्म घड़ियों को एक विशेष समय पर सेट किया गया है और वह कहां रहती हैं ? और स्थिति यह है कि शनिवार और रविवार को, (यदि उस दिन छुट्टी है तो) वह इस अलार्म को बंद कर देते हैं — लेकिन फिर सोमवार और उस दिन से वही दिनचर्या शुरू हो जाती है। कुछ लोगों ने अपनी कॉफी भी टाइम के साथ सेट की है — क्योंकि वो जानते हैं कि उन्हें हर एक दिन, एक ही समय में उठना होगा।

तो हम इस पैटर्न में रह रहे हैं — और मैं यह निर्णय लेने की कोशिश नहीं कर रहा हूं कि क्या यह सही है, क्या यह गलत है; मैं इसे केवल कहानी के समानांतर प्रस्तुत कर रहा हूं — इसलिए इसका कुछ अर्थ निकालने की कोशिश कीजिए। फिर हमने अपनी जो छोटी-सी दुनिया बनाई है — वह बहुत बेहोशी की दुनिया है। यह हमारे फैसले नहीं हैं; दुनिया ने हमें जो ये फोन दिए हैं, ये सुंदर-सुंदर चीजें दी हैं — और हम देखते हैं और हम चाहते हैं "हां, हां, मैं उनमें से एक चाहता हूं; मुझे उनमें से एक चाहिए; मुझे उनमें से ये चाहिए; मुझे वो चाहिए।"

हम साथ चल रहे हैं और हम देखते हैं कि बेचने के लिए एक बिल बोर्ड पर एक सुंदर घर है या ऐसे ही बहुत कुछ है — और यह बहुत पसंद है "हां मैं भी यही चाहता हूं।" और हम एक कार देखते हैं, यह वास्तव में बहुत अच्छा है और यह बहुत पसंद है, “हां, मैं भी यही चाहता हूँ…”

इसलिये पूरी दुनिया बस हमें धक्का दे रही है, हमें धकेल रहा है, हर दिन हमें धक्का दे रहा है। हालांकि फिर से हमारी ओर से बेहोशी की एक जबरदस्त मात्रा होती है। क्योंकि वो लोग, वो बोर्डरूम में बैठते हैं — मेरा विश्वास करते हैं और वो बैठते हैं और वो बाहर काम करते हैं “हम कोड को कैसे क्रैक कर सकते हैं कि लोग इसके लिये जायेंगे ? जो हम उन्हें बताने जा रहे हैं…?” मेरा मतलब है, उन्हें सचमुच बैठना होगा और कहना होगा "ठीक है हम उन्हें बताने जा रहे हैं कि यह सबसे बडी कार है।” इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि कार अच्छी है। राईट ? इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि “यह सॉफ्ट ड्रिंक जो हम उन्हें देने जा रहे हैं, वह अच्छी है।” यहां तक कि यह उनके लिये हानिकारक भी हो सकता है, लेकिन यह बात नहीं है।

मुद्दा यह है, “हम कोड को कैसे क्रैक कर सकते हैं ? हम कन्विन्स कैसे कर सकते हैं” — ब्रेन डिगर्ज़ — “हम कन्विन्स कैसे कर सकते हैं और इस विचार को थोप सकते हैं कि वो वास्तव में ऐसा कर रहे हैं ?” जरूरत नहीं है — “ये चाहते हैं ?”

इसलिए, फिर से हमारी ओर से बेहोशी की एक बड़ी मात्रा कि हम इसे स्वीकार करते हैं और हम कहते हैं "ओह हां, यह ठीक है जो मैं चाहता हूं।" तो हम हाथी हैं जो कि नशे में हैं; हमें राजा मिला है जो हाथी के पीछे बैठा है, जो नशे में है। और किसी को पता नहीं है कि वो कहां जा रहे हैं, बेहोशी में ये दोनों ही बहुत बेहोश हैं। हाथी कम देखभाल नहीं कर सकता था और राजा कम देखभाल कर सकता था।

अगली बात कुछ घटित होती है, कुछ, कुछ हो जाती है और हाथी गिर जाता है; (कोरोना वायरस, कोविड-19 होता है) हाथी का गिर जाना। अचानक, राजा खुद हाथी से गिरकर कुएं में जा रहा है, (इस दुनिया का कुआं जिसमें हम रहते हैं।) और लटक गए। एक बेल है — और हम उस बेल पर लटके हुए हैं, हम लटके हुए हैं, हम उस बेल पर लटके हुए हैं। हम ऊपर देखते हैं और वहां दो चूहे हैं (रात और दिन; वह काला और एक सफेद) वो उस बेल को काटने में व्यस्त हैं। उस कुएं के तल पर क्या है ? वहां उस कुएं के तल पर सांप हैं (जो हमारे निर्णयों के परिणाम हैं, जो हमने किए हैं।)

यह आगे-पीछे चलता रहता है। और वहां वह अधर में है। यदि वह कुछ नहीं करता है, तो वह गिरने वाला है क्योंकि उन दो चूहों को निश्चित रूप से उस बेल के माध्यम से काट दिया जाएगा। अगर वह कुछ नहीं करता है, तो यह उसका भाग्य है; वह गिरने वाला है और वह अपने पूरे जीवन में अपनी बेहोशी, अपने या अपने बेहोशी के परिणामों के परिणाम के लिए यह सब उसके परिणाम हैं उसकी बेहोशी के, पूरी जिंदगी भर के लिए।

क्योंकि कुएं के तल पर क्या एक दिन का परिणाम है; यह इस जीवन को बिना सोचे-समझे अंजाने में किए जाने में परिणाम हैं, अचेतन रूप से, अचेतन रूप से, अचेतन रूप से, अचेतन रूप से। विचित्र नजारा है। एकमात्र उम्मीद है अगर कोई रस्सी फेंक सकता है — और आप स्विच कर सकते हैं। क्योंकि खेल सेट है। वो चूहे व्यस्त हैं काटने में; वो लापरवाह हैं। दिन और रात, समय बीत रहा है (जो कि वहां सहजीवन है।) सहजीवन उस समय का है, जो दिन और रात के लिए सिर्फ नॉनस्टॉप हैं…

तुम एक घड़ी खरीदते हो — तुम एक घड़ी खरीद कर बताओ क्या ? खैर, यह पता लगाने के लिए कि “जब मैं ऐसा करने जा रहा हूं; जब मैं यह करने जा रहा हूं; जब मैं वो करने जा रहा हूं।” लेकिन आप वास्तव में बैठ नहीं गए और उस घड़ी को देखा और जाना "ओ माई गॉड यह बात मुझे बता रही है कि मेरे पास इस पृथ्वी पर मौजूद रहने के लिए इतना कम समय है।" तो अब यह सवाल नहीं है। आप जानते हैं कि मैं एक प्रलय का दिन चित्रित कर रहा हूं। क्योंकि एक संभावना है, किसी भी समय, हमें एहसास होता है कि “मैं यहां हूं; मैं उन परिणामों की परवाह नहीं करने के लिए इतना व्यस्त हूं कि मैं भूल गया हूं कि यह क्या है, जो मेरे जीवन में इन परिणामों के कारण है।”

मुझे लगता है कि एक और सवाल है जो किसी से पूछा जा सकता है, (मुझे नहीं पता) लेकिन जो जेल में कैदी हो सकता है। और मूल रूप से वह जो कह रहा है वह यह है कि "देखो मैंने वही किया, लेकिन मैं हर एक दिन परिणाम भुगत रहा हूं।" मैं आपसे जो कहना चाहूंगा वह है “आप हर दिन परिणाम भुगत रहे हैं। लेकिन ऐसा क्या है जो इसे इतना बुरा बना रहा है ? क्या ये बाकी सब है ? या यह आप हैं ?”

आप इसे कैसे समझते हैं ? क्योंकि आप उसे बदल सकते हैं। आप इसे अपने जीवन में एक और अवसर के रूप में देख सकते हैं, जो वास्तव में आपके अंदर से परिवर्तन कर सकता है। तो क्या केवल आप उस स्थिति का सबसे अच्छा, एक अद्भुत लाभ उठाते हैं…

देखो — मैं बहुत सारे कैदियों से मिलता हूं और मैं अक्सर जेल जाता हूं। और जेल यह बात है — यह एक लॉकडाउन है। “तुम वहां नहीं जा रहे हो; तुम वहां नहीं जा रहे हो, आप इन कारावासों में रहने वाले हैं।”

और यह कोरोना वायरस क्या कर रहा है, हम सभी के साथ लॉकडाउन; यह क्या कर रहा है, “तुम यहां नहीं जा सकते; वहां नहीं जा सकते; ऐसा नहीं कर सकते; वैसा नहीं कर सकते।” आपकी आजादी छीनी जा रही है। इसकी वजह से… कल मैंने ऐसे लोगों को देखा, जो लॉकडाउन का विरोध कर रहे थे। मैंने महसूस किया कि उनमें से बहुत से लोग, (उन सभी में से नहीं) लेकिन उनमें से बहुत से लोग बताना नहीं चाहते कि उन्हें क्या करना है। यह नहीं कि वो क्या करते हैं या क्या नहीं करते हैं — यह सिर्फ यह बताना नहीं चाहते कि क्या नहीं करना है। इसलिए कोई व्यक्ति उनके साथ आता है और उनसे कहता है "ओह आपको इस कमरे में रहना है" — वो नफरत करते है। वो ऐसा नहीं करना चाहते हैं।

लेकिन वास्तव में, थोड़ा सामान्य ज्ञान का उपयोग करके कहें, “परिस्थितियों के अनुसार, वास्तव में देना अच्छा नहीं है…” कब तक ? जबतक तुम बहुत-सी बात सुन सकते हो; आप सुनते हैं "ओह, एक टीका है, जिसे विकसित करने में दो साल लग सकते हैं; एक टीका विकसित करने में बारह महीने लग सकते हैं।” वे इस पर काम कर रहे हैं। वे इस पर काम कर रहे हैं और उम्मीद करते हैं, यह उम्मीद करते हैं कि वह वैक्सीन या किसी तरह की दवा बना सकते हैं। ऐसा नहीं है कि लोग बैठे हैं और बिल्कुल कुछ नहीं कर रहे हैं। इस चीज का इलाज खोजने या इस चीज से किसी तरह की राहत पाने के लिए काम करने वाले लोगों की एक बहुत बड़ी मात्रा है। क्योंकि आर्थिक रूप से यह बहुत बड़ा टोल है — यह एक आर्थिक, बहुत बड़ा संकट है। लेकिन इसमें क्या किया जा सकता है ?

इसलिए कहानी में वापस आते हैं, इस राजा के लिए वास्तव में एक तरीका है किसी के साथ आने और उसे बचाने का और साधन प्रदान करने के लिए जिससे वह बाहर निकल सके — और राजा हर एक दिन के मूल्य को समझ सके। यह समझने के लिए कि वे परिणाम उसकी प्रतीक्षा कर रहे हैं जबतक कि वह वास्तव में अपने तरीके नहीं बदलता है — उनमें से सिर्फ एक तरीका है और वह तरीका है बेहोश नहीं होना है, ना कि पहले स्थान पर प्रच्छिन हो जाना है। यह सुनिश्चित करने के लिए कि उसका हाथी भी प्रबुद्ध नहीं है।

तो इसलिए मुझे लगता है कि मैं इस बात को एक साथ रखने की कोशिश कर रहा हूं — और यह वास्तव में यह है कि हम इसे कैसे मान रहे हैं। और हमें जो देखने की जरूरत है वह वास्तविकता है। वास्तविकता सरल है — और वास्तविकता सुंदर है। क्योंकि यह प्रकृति उस वास्तविकता की प्रकृति है। ऐसा लग सकता है कि यह क्रूर है; यह अजीब लग सकता है; “यह ऐसा प्रतीत हो सकता है, ऐसा लग सकता है” — लेकिन वास्तव में, यह बहुत सुंदर है। आप जीवित हैं। स्वांस आपके अंदर आ रही है। आप मौजूद हैं। अपनी जरूरतों को समझिए। आपकी जरूरतों को पूरा करना है, शांति में रहना है, यह बहुत ही सरल है। और जब आप उसके साथ तालमेल बिठा सकते हैं, तो आपके पास एक अलग जीवन होगा। और मैं जिस बारे में बात कर रहा हूं वह बहुत अधिक समझ में आएगा।

क्योंकि जिसे हम सामान्य मानते हैं — बस उन सभी चीजों को कीजिए और अपना समय बर्बाद मत कीजिए। यह एकमात्र ऐसी चीज है जिसे हम बर्बाद नहीं कर सकते, वह है समय। क्योंकि वह एक वस्तु है, जो वापस नहीं आ रही है। गर्लफ्रेंड आ सकती है; नई बीवी आ सकती है; नए बच्चे मिल सकते हैं, अगर आप कोशिश करें। लेकिन समय को पाने का कोई भी रास्ता नहीं है। एक जॉब, दो जॉब, आप तीसरी जॉब की कोशिश कर सकते हैं; उस जॉब की कोशिश कर सकते हैं। यदि ये काम नहीं करते हैं, तो वो कोशिश कर सकते हैं। लेकिन समय, आप इसके बारे में कुछ नहीं कर सकते हैं। कोई रिवाइंड बटन नहीं है, कोई स्टॉप बटन नहीं है।

इसलिए मुझे आशा है कि यह आपके लिए किसी संदर्भ में रखता है। और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह एक राहत की भावना है, आराम की भावना है "आप ठीक हैं; क्या आप ठीक हैं।" अंदर जाइए और समझ लीजिए कि आप कौन हैं। अपनी आंखों से खुद को देखिए, दुनिया की आंखों से नहीं — बल्कि अपनी आंखों से देखें कि ये सब क्या है। मुझे लगता है कि आपको सुखद आश्चर्य मिलेगा। तो सुरक्षित रहें; खुश रहें। धन्यवाद! मैं आपसे बाद में बात करूंगा।

लॉकडाउन — उन्तीसवां दिन 00:18:20 लॉकडाउन — उन्तीसवां दिन Video Duration : 00:18:20 प्रेम रावत के साथ (हिंदी में अनुवादित)

प्रेम रावत:

सबको नमस्कार! उम्मीद है आप सब ठीक हैं; सेहतमंद हैं — और इस लॉकडाउन में भी आनंद ले रहे हैं। और दोबारा से, सवालों के साथ आगे बढ़ते हुए, “मैं देख सकता हूं कि मेरे बच्चे जीवन में कहां पर हैं; मेरी पिक्चर को उन्होंने खराब कर दिया है पूरी तरह से। पिता होने के नाते मेरी जिम्मेदारी है कि यह देखूं कि वह सही रास्ते पर चलें। मैं यह कैसे करूं ? मुकेश!”

जी अच्छा, दिलचस्प सवाल है। आप इस लॉकडाउन में अपने बच्चों के साथ हैं और देख रहे हैं कि वह कैसे उस तरीके से नहीं हैं जैसा आप ने उन्हें बड़ा होते हुए सोचा था। तो, मैं आपको इसका जवाब देने की कोशिश करता हूं। क्या आप बच्चों को कहते रहते हैं कि उन्हें कैसा होना चाहिए — या आप उन्हें बातचीत का हिस्सा बनाते हैं अपने साथ ? क्या आप उनकी सलाह लेते हैं, यह पूछकर कि क्या किया जाना चाहिए — और उन्हें समझाना कि क्या होगा आगे ? और फिर उन्हीं से समाधान भी पूछना ताकि उनकी मदद से कार्य पूरा हो। और सिर्फ उनसे समाधान ही नहीं पूछना, लेकिन उनकी मदद भी करना ताकि उनकी सलाह लेते हुए और उनकी बातें मानना भी; उस सलाह को लेना।

तो आपके बच्चों के साथ, आप उन्हें बताते हैं कि क्या करना है — और उम्मीद करते हैं कि वो मानेंगे। आप अपने दोस्तों के साथ, जबकि, बिल्कुल वैसा ही करते हैं, जैसा अभी मैंने आपको बताया है; आपकी जो भी समस्या है वह बताते हैं — उनके साथ बैठकर समाधान पर सलाह-मशवरा करते हैं। और फिर उनकी सुनते हैं और वही करते हैं, अगर आपको सलाह अच्छी लगती है तो।

अब इसमें थोड़ा-सा समय लगेगा। आपके बच्चे पहले ही दिन अच्छे जवाब नहीं देने वाले — क्योंकि उन्हें जवाब नहीं मालूम है। उन्हें भरोसा करना होगा आप पर। पर उनकी क्षमता को कम मत समझिए। उन्हें बेवकूफ मत समझिए सिर्फ इसलिए क्योंकि आप पिता हैं। तो उन्हें आप इज्जत दीजिए — और वो आपको इज्जत देंगे। इज्जत लेने के लिए इज्जत देनी भी पड़ती है। इसमें दो लोग लगते हैं कि एक ही बात पर अमल करें और बात आगे बढ़े।

तो उनसे उनकी सलाह पूछिए कि "यह कैसे होगा; वह कैसे होना चाहिए ?" ऐसा ही तो करते हैं आप जब हॉस्पिटल जाते हैं। आप डॉक्टर के पास जाते हैं और कहते हैं "डॉक्टर मेरे हाथ में दर्द है। मैं क्या करूं कि यह ठीक हो जाए ?" फिर डॉक्टर आपको सलाह देता है और आप वह बात मान लेते हैं। अगर डॉक्टर आपसे कहे कि "मैं आपका हाथ काटने वाला हूँ," तो आप कहेंगे, "जी नहीं, यह तो बस खरोंच है। और यह बताइए कि आप मेरा हाथ क्यों काटना चाहते हैं ?" और वह कहता है कि "मुझे हाथ काटना पसंद है।" तो आप कहेंगे "नहीं, मुझे आप एक डॉक्टर के तौर पर पसंद नहीं हैं; मैं किसी और के पास जाऊंगा।"

इसमें वह भरोसा लगता है जो आप अपने परिवार के साथ बनाते हैं, अपनी पत्नी के साथ, बच्चों के साथ। अपने परिवार में तानाशाह होना चाहते हैं आप। पर मेरी मानिए, यह आप पर ही भारी पड़ जाएगा। आप इस समय (मुझे नहीं पता कि आपके बच्चे कितने बड़े हैं), लेकिन अगर आप पिक्चर्स को फाड़ने की बात कर रहे हैं, सुनिए, आपका साम्राज्य बिखरने वाला है — अगर आप चीजें ऐसे नहीं करते जिसमें बच्चे को समाधान का हिस्सा बनाना है… मैंने बच्चों को समाधान निकालते देखा है, जो ढंग से बात भी नहीं कर सकते थे, वो बच्चे, इतने छोटे। आपको उनसे पूछना है "तो तुम्हें क्या लगता है; क्या लगता है यह कैसे होगा ?" और वो समाधान निकाल लेंगे, “हम क्या कर सकते हैं।”

अगर बच्चा स्कूल में अच्छा नहीं भी कर रहा, जैसे कि "तुम कैसे स्कूल में अच्छा करने वाले हो ?" और उनकी बात सुनकर; फिर उन्हें सोचने देना कि क्या वह सोचने लायक नहीं हैं ? वह बिल्कुल सोचने लायक हैं — और मेरी मानिये आप हैरान होंगे; आप बहुत, बहुत हैरान हो जाएंगे; जब आपको पता चलेगा कि वह काफी सोचने की क्षमता रखते हैं। तो कृपया, सबसे पहले, अपने बच्चों को इज्जत दीजिए — अगर आप उनसे इज्जत चाहते हैं तो — और उन्हें फैसले लेने की प्रक्रिया में शामिल कीजिए अपने साथ।

पता है, ऐसे मत बन जाइये — सभी नेता बुरे नहीं होते, लेकिन कुछ नेता, वो आते हैं — और आपका वोट लेने के लिए कुछ भी कह देते हैं। फिर उसके बाद आपको किनारे कर देते हैं बिल्कुल दरकिनार। (मुझे नहीं पता क्यों, किसी भी वजह से।) तो ऐसे मत बनिए; ऐसे बिल्कुल मत बनिए। एक पिता का यह मतलब नहीं होता, एक पिता बनिए। आप एक तानाशाह नहीं हैं; आप एक पिता हैं; आपको गुलाम इकट्ठे नहीं करने अपने लिए। आपको गुलाम नहीं बनाने। आप एक पिता हैं — और आपको देखना है कि बच्चों को फैसला लेने की प्रक्रिया को सिखाना भी है, बाकी सभी चीजों के अलावा।

मैं देखना चाहता हूं कि इतने लोगों ने जो बनाया है, अपने सामने एक असंभव कार्य — क्योंकि वह नहीं चाहते, “बच्चों को शामिल करना” — क्योंकि जब शामिल करते हैं, फिर एक समूह बन जाता है, एक टीम। जब आपका परिवार होता है — फिर आपके पास सिर्फ परिवार नहीं, एक टीम होती है। और जब वो टीम है, आपको साथ मिलकर काम करना है। यह कमाल का होता है; यह बढ़िया है। और साथ में काम करना बढ़िया हो सकता है, कितना सुंदर हो सकता है यह। तो आपको इस बात पर काम करना होगा। उम्मीद है इसका मतलब कुछ बना होगा। यह रहा एक रफैल से — "मैं और कुछ नहीं चाहता बस यह कि जीवन के हर पल में उपस्थित रहूँ। क्या हम अपनी भूमिका प्यार के साथ रहते नहीं निभा सकते, अपने जीवन में हर रोज के काम करते हुए भी क्या यह संभव है कि दोनों को साथ में लाएं काम और तज़ुर्बा दोनों को, क्या हम इतने सक्षम बन सकते हैं ?"

हां, हम अपना किरदार निभा सकते हैं — पर ये सब सचेतना से ही करना होगा। पर फिर, सबसे पहले मुझे एक सवाल पूछना है आपसे, "क्या इसकी भी कोई पिक्चर आपने मन में बनाई हुई है कि यह कैसा दिखता है ?" क्योंकि अगर है, आप खुद को फंसा रहे हैं; आप विफलता के लिए तैयार हो रहे हैं। कई लोगों में यह बात होती है, जैसे कि "अब आप पर ऐसा होने वाला है, अब यह स्थिति आने वाली है और सब लोग आजाद होंगे और यह होगा।" और कई लोग दुनिया में ऐसे हैं जो इस तरह की बातें करते हैं। पर यही बातें हमें धोखा देती हैं और इन बेहद आसान-सी चीजों को असल में नामुमकिन बना देती हैं। तो कृपया पहले इस पिक्चर को छोड़ दें। और फिर, फिर जो होगा वो होने दीजिये, बस यही बात है। आप समझ रहे हैं….

तो एक और सवाल, "मैं इस जीवन में आया और मुझे बहुत ही ज्यादा घबराहट है,” यह भेजा है सिलेस्ट ने; “मैं सोचता हूं क्या खुद को बदल सकता हूं मैं ?"

हां, आप घबराना छोड़ दीजिए। आप जितना अपने जीवन के नियंत्रण में हैं और जो कुछ भी हो रहा है उसके भी नियंत्रण में, उतना ही घबराने की वजह कम होंगी आपके जीवन में। और हां, बिल्कुल, कभी-कभी ज्यादा घबराहट हो जाती है, इसके लिए फिर आपको डॉक्टर के पास जाना पड़ता है फिर मनोवैज्ञानिक से मिलना पड़ता है जो आपकी मदद कर पायें। लेकिन जितना आप जीवन को नियंत्रित करते हैं, घबराहट उतनी ही कम होगी आपके जीवन में। तो मुझे उम्मीद है इससे मदद मिलेगी।

"क्या कुछ शब्द हैं प्रेरणा के” — यह विक्टोरिया ने भेजा है — “क्या कुछ शब्द हैं प्रेरणा देने के लिए ताकि मैं हर रोज को अपने नियंत्रण में कर पाऊं ?" हां, आश्वस्त रहें। समझें कि नियंत्रण का अर्थ क्या है!

ऐसा नहीं कि अचानक से ही, आप वो मिक्की माउस बन जाएंगे, वह जादूगर जो उंगली हिलाकर झाड़ू को उसकी जगह से बुलाता है ताकि अपने आप फर्श साफ होने लग जाये और बाल्टी में पानी भरने लगता है और ऐसी ही चीजें। यह इसके बारे में नहीं। यह आपके बारे में है पूर्ण होना है अस्तित्व से — खुद को समझें, यह कहना कि "हां, ठीक है, अगर यह काम नहीं किया मैंने, मैं ठीक रहूंगा तब भी। मैं ठीक हूं। मैं ठीक हूं।" “ऐसा नहीं कि अगर यह नहीं हुआ तो मैं खत्म हो जाऊंगा।” ऐसे काम नहीं चलेगा। “मैं तब भी ठीक रहूंगा, मैं ठीक रहूंगा।”

अगर आप बीन्स उबाल रहे हैं; यह एक आपदा है; बीन्स सब जगह फैल गए हैं — परेशान ना हों; पिज्जा ऑर्डर कीजिये। अंत में, आपको खाना ही तो चाहिए बस। उस दिन बीन्स मत खाइए; बीन्स को अगले दिन बना लीजिए। जो सीखा है उससे कल बेहतर बनाइए और अच्छी बीन्स बनाइए, मुसीबत मत होने दीजिये।

कभी-कभी इतना आसान होता है। कभी-कभी बिल्कुल, यह इतना आसान नहीं होता — लेकिन हर रोज, इसकी अहमियत को समझें — और आपका किस पर नियंत्रण है। आपको पता होना चाहिए कि किस पर नियंत्रण है और किस बात पर नियंत्रण नहीं है। और कई लोगों को पता ही नहीं होता कि किस पर नियंत्रण नहीं है और वह उन्हीं चीजों पर नियंत्रण पाने की कोशिश करते हैं; ऐसे विपत्ति आ जाती है। एक मुसीबत आ जाती है। आपको किस पर नियंत्रण करना है ? जो महसूस करते हैं। यह स्थिति नहीं है; यह आपकी प्रतिक्रिया है। यह तो बिल्कुल साफ है। तो अपने जीवन में हर रोज मेहनत कीजिए, सचेत रहें और आगे बढ़ते रहें।

"मैं अभी समझा कि जीवन में फंसा हुआ हूं, कोविड वायरस की वजह से नहीं — क्योंकि मैं तो इसके बीच ही था; मुझे वायरस था, पर मैं ठीक हो गया — कुछ लक्षण थे, कुछ गंभीर नहीं थे। मेरी परेशानी है, मैं समझ नहीं पा रहा कि क्या चल रहा है। हिम्मत मुझमें है, इसलिए मैं उठकर काम पर जाता हूं। लेकिन बुजुर्ग अकेले मर रहे हैं और उनके पास कोई मौका नहीं है इंटेंसिव केयर की अनुमति न मिलना उम्र की वजह से, एक संख्या है बस — सच में। मैं ऐसे लोगों को जानता हूं जो 86 या 92 की उम्र में 50 वालों से ज्यादा चुस्त हैं। और एक डॉक्टर होने के नाते, मेरी जिम्मेदारी खबर देने की है बस, यह नहीं कि बीमार हैं, लेकिन परिवार को बताना। यह बहुत बुरा है। मैं इस शर्म को कैसे संभालूं ? मैं जानता हूं मेरे हाथ में नहीं है; लेकिन इतनी शर्म क्यों आ रही है ?"

नहीं, आपको शर्म नहीं आनी चाहिए। आपको शर्म नहीं आनी चाहिए। आप एक अजीब स्थिति में हैं, काफी अजीब स्थिति है।

अर्जुन ने युद्धभूमि में कहा, उसके बीच में — और अर्जुन ने बिल्कुल यही कहा था कि "मैं नहीं लड़ना चाहता; मैं जानता हूं इन लोगों को। मैं इन्हें मारने के लिए जिम्मेदार नहीं होना चाहता। यह बहुत ही बुरा होगा तो मैं यह नहीं करूंगा।"

फिर कृष्ण ने कहा "करो — करो जो तुम्हें करना है; अपना काम करो। परिणाम की चिंता मत करो; अपना कर्म करो।" सिर्फ यह बात… यह है इंडिया में बहुत बड़ी चीज — और गीता में एक खंड है पूरा कर्म पर, जिसमें लिखा है "कर्म करो; फल की चिंता मत करो!"

आप डॉक्टर हैं; अपना काम कीजिए। आपने इतने लोगों की मदद की है। आप मदद करना जारी रखिये। शर्म को बीच में मत आने दीजिये। क्या हो रहा है ? बुरे फैसले। शायद इतिहास इसका गवाह बनेगा, इस पर सोचेगा, बुरे फैसले जो कुछ नेता ले रहे हैं, अजीब-सी बातें, अजीब से निष्कर्ष। और मुझे लगता है यह चलेगा बहुत, बहुत लंबे समय तक।

क्योंकि लोगों के पास अपना गुस्सा या अपना डर या जो भी वो व्यक्त करना चाहते थे उसके लिए उनके पास संसाधन नहीं थे, पहले के समय में — लेकिन अब वह संसाधन हैं। और इसलिए मुझे लगता है यह बहुत, बहुत लंबे समय तक चलेगा। मैं आपको कहूँगा कि शर्म बिल्कुल महसूस मत कीजिये; आपको शर्म नहीं आनी चाहिए। आप में हिम्मत होनी चाहिए, आगे बढ़ने के लिए — और इस हिम्मत को लें, शंका को दूर करें; मैं यही कहता हूं, “दूर हटाइए शंका को!” यह शर्म यहां से हटा दीजिए। यह हृदय से नहीं आती; यह दिमाग से आती है। यह तर्क और वजह खोजने से आती है।

लेकिन इस आग के बीच में यह समय सोचने का नहीं है कि आग कहां से शुरू हुई; कैसे शुरू हुई। सबसे अच्छी बात है, आग से लड़ें। तो अब मैं यही कह सकता हूं कि — आप डॉक्टर हैं — “आप शर्म का एहसास मत कीजिए; इसे हटाइए आगे बढ़ें और लोगों की मदद करें, जितनी हो सके उतनी मदद करें। उन्हें प्यार दें, उनकी देखभाल करें — उन्हें वो दीजिए, वह आराम जो सिर्फ आप ही दे सकते हैं।” तो आपके साथ अच्छा हो।

यह है मलेशिया से यसोथा ने भेजा है मेरा सवाल है — "जिन लोगों को वायरस लगता है वह हॉस्पिटल वार्ड में जाते हैं और अगर हालत बुरी हो तो आईसीयू में अगर वह जिन्दा नहीं बचते, तो मृत्यु हो जाती है। परिवार के लोगों को देखने नहीं दिया जाता। क्या यह सच में वही है कि आप अकेले आए हैं और आप अकेले जाते हैं और हॉस्पिटल के लोग ही आपको दफना देते हैं ? यह बहुत उदास करने वाला है; मरीज के लिए बुरा लगता है, वह अपने परिजनों को देखना चाहते हैं, पर नहीं देख सकते। आप क्या सोचते हैं ? अगर हृदय पूर्ण हो, फिर उनको क्या बुरा नहीं लगेगा ?"

अब मैं इसमें कुछ मतलब बताता हूं। मैंने यह नियम बिल्कुल नहीं बनाया कि वह एक-दूसरे को नहीं देख पायें — पर एक बात मैं जानता हूँ कि प्यार सीमाएं नहीं जानता; प्यार दीवारें नहीं जानता; प्यार दूरी नहीं जानता; प्यार ऊंचाई नहीं जानता; प्यार गहराई नहीं जानता। प्यार के लिए कुछ भी असंभव नहीं है। उसे रुकावट नहीं पता। आप जिनसे प्यार करते हैं; उनसे प्यार करते रहेंगे और हमेशा करते ही रहेंगे।

क्या होता है — जब आप यहां उन्हें याद करते हैं। कम से कम, वो जो चले गए हैं वो उदास तो नहीं हैं। उन्हें नहीं पता; वो तो चले गए हैं। यही तो मतलब है “जाने का” वो जा चुके हैं। उस दिमाग को छोड़ गए हैं जो तर्क देता रहता है, आंखें जो पहचानती हैं; आंखें जो देखती हैं, कान जो सुनते थे… और जब यह एक अलग दुनिया में हैं, उस विचार से, उस तर्क से। आपको उन्हें प्यार करना है; यही तो है आपके हिसाब से उनकी याद, जो वो पीछे छोड़ गए हैं। वो आप में रहते हैं, आपके मां-बाप दादा-दादी, वो आपके भीतर रहते हैं।

हां, यह बहुत बुरा है, एक दुर्घटना। पर यही तो करता है यह दानव। सबसे अच्छी बात प्यार करना है। आप क्या कर सकते हैं — आपको यही याद रखना है, किसी भी स्थिति में, “क्या है, जो मैं खुद कर सकता हूं ?” यह नहीं कि “मैं क्या नहीं कर सकता।” यह तो समय की बर्बादी होगी। पर इस स्थिति में, हर रोज जब यह चल ही रहा है, आपको याद रखना है कि आप क्या कर सकते हैं। आप अब भी प्यार कर सकते हैं, प्यार, प्यार और प्यार।

आप सुरक्षित रहें और आप खुश रहें!

लॉकडाउन — अठाईसवां दिन 00:22:38 लॉकडाउन — अठाईसवां दिन Video Duration : 00:22:38 प्रेम रावत के साथ (हिंदी में अनुवादित)

प्रेम रावत:

सबको नमस्कार! उम्मीद है आप सब ठीक हैं और सुरक्षित हैं।

तो आज कुछ सवालों के जवाब दूंगा मैं — और पहला सवाल है कार्मे मोंटेयो से। और सवाल यह है "आपने इंसान की असली प्रकृति की बात की है। आपने समझाना बीच में छोड़ दिया था” — मैं शायद बह गया और कुछ सोचने लगा। “तब से मेरे हृदय में यही बात है कि आप क्या बता रहे थे। क्या आप इस बात को बता पाएंगे ?"

एक व्यक्ति की असली प्रकृति — यह एक दिलचस्प सवाल है। क्योंकि हम इतना कुछ देखते हैं आसपास जो कि है, जिसे हम प्रकृति मान लेते हैं — बुरा, लालची, गुस्सा और ये सभी चीजें प्रभाव डालती हैं कि कैसे एक व्यक्ति को हम देखते हैं। लेकिन क्या हो अगर ये सब हटा दिया जाए और जो रह जाए वह हो केवल एक व्यक्ति की असली प्रकृति, उस इंसान की ? तो अब मैं क्या बात कर रहा हूं “मैं हवा में बात कर रहा हूं या कुछ सच्चाई की बात ?”

तो यहां संभावना क्या है; पहले यह समझते हैं। जी हां, गुस्सा तो है ही — लेकिन वहीं गुस्से का विपरीत भी है और वह क्या है कि व्यक्ति में वह क्या बसता है ? अपनापन, प्यार, समझ — और इसका जवाब होगा "हां, ये सब भी एक व्यक्ति में बसता है।” और फिर डर क्या है ? यह डर, अब इसका विपरीत भी एक व्यक्ति के भीतर ही है जो है हिम्मत।

देखिए — जब एक बच्चे को देखते हैं; एक बच्चा जिसका मन बिल्कुल साफ है, जिसने ये बुरी बातें नहीं सीखी हैं, फिर वह बच्चा एक बिल्कुल ध्यान केन्द्रित तरह से रहता है और वह एकाग्र रहता है उस स्थिति में वह खुश रहने की कोशिश करता है, संतुष्ट रहता है। और सिर्फ तभी रोता है जब कुछ गलत होता है। और जब कुछ सही हो, तो बच्चा नहीं रोता। जब बच्चा देखना चाहता है, जब वह उस उम्र में आते हैं, जब वह खोज करते हैं। तो वह अपनी खुशी एक कमाल की ताकत से दिखाते हैं उस खोजने की उम्र में कुछ लेने की कोशिश में, किसी चीज को पकड़ने के लिए। लेकिन हां, उसी चीज को पाने की खुशी में। तो मेरे लिए, जब हम देखना शुरू करते हैं उन विशेषताओं को — जो फिर वह व्यवहार, वह प्रकृति, एक व्यक्ति की असली प्रकृति में जो होंगी वो सारी बातें, वो सारी चीजें।

एक व्यक्ति आगे बढ़ेगा, हर पल जब वह बढ़ सकता है, पूर्ण होने के लिए और उन सरलता वाली बातों के लिए। उन बातों की ओर जाने में, यह देखने में और सराहना करने में। क्योंकि जब आप सराहना करने लगते हैं, इससे आपको बदले में कुछ मिलता है।

जब आप बैठकर समुद्र के किनारे लहरों को एक ताल में आता हुआ देखते हैं और जाते हुए और आते हुए और जाते हुए… उनको जोड़ों में देखते हैं, तो एक अवकाश लेने जैसा होता है, फिर एक और जोड़ा आता है। फिर बीन बजाने वालों के नृत्य की तरह, वह लहरों पर आते हैं… और जब भी मुझे एक मौका मिलता है यह देखने का, मुझे यह कमाल का लगता है। क्योंकि यही तो है, “वाह, हर चीज एक-दूसरे के समय को समझकर उसके अनुसार ही चलती है।” तो फिर यह होगी इंसानी प्रकृति, उसके समक्ष झुक जाना जिससे आप जीत नहीं सकते। जिसे जीतना नहीं है, वह झुक जाता है, देता है, बदलता नहीं है — और यह बहुत अच्छा है। आप बड़ी लहरों को आता देखते हैं — खासकर उत्तरी कैलिफोर्निया में, लहरों के बड़े-बड़े झुंड आते हैं — बिना रुके हुए आते हैं और यह बिना रुकावट चल रहे है और यह पत्थरों से टकराते हैं। और आप देखते हैं कभी-कभी जब आप ऊपर हैं तो, दो, तीन सौ फीट पर ऊपर से ये लहरें आपको छूना चाहती हैं। जैसे कि वाह, यह कमाल की ताकत — बिना झुके हुए, बहुत, बहुत ताकतवर — और यह पानी, यह पानी की ताकत। और दोनों में बहस चल रही है। अंत में पानी जीत जाएगा। और हम यह कई जगहों पर देख सकते हैं। पर जबतक यह नहीं होता, यह वहीं रहता है

इंसान की असली प्रकृति होगी करुणामय। यह होगी खुशी को खोजना। एक इंसान द्वारा सुंदरता पहचान पाना और हर चीज के समय को समझना और उसके सामने झुकना जिसे वह बदल नहीं सकता। यह जानना कि कब झुकना है, कब नहीं झुकना — एक पेड़ की तरह। वह वहीं पर है। लेकिन वह जानता है कि जब हवा चलनी शुरू हो जाती है, अगर वह वहां पर रहना चाहता है तो उसे झुकना होगा। अगर वह वहीं रहना चाहता है। और यह एक कला है; यह है प्रकृति की असली कला — पूरी प्रकृति में। किसी पर कुछ भी हावी नहीं होता।

यह पहले की बात है, यह संरक्षण की पूरी बात — और महाभारत के समय में भी यह बात थी, जब अर्जुन का सपना है और जंगल के सभी जानवर कहने आते हैं कि "सुनिए, तुम बहुत अच्छे शिकारी हो, तुम हमें खत्म कर रहे हो — यहां से कृपया चले जाओ! कहीं और जाओ।" और यह जो बात है कि "हां, इंसान हमें खत्म कर देंगे..,” यह हमारी प्रकृति में नहीं है; उससे हमें कोई लाभ नहीं होगा। हमें लाभ मिलेगा उन चीजों का ख्याल रखने से और देखने से कि ये चीजें बढ़ती रहें हमेशा।

तो, असल में, इंसान की असली प्रकृति होगी एक बहुत ही आम, करुणा से पूर्ण, समझ से पूर्ण। और जिसकी मदद हो सके, उसकी मदद करना — और उसके समक्ष झुकना, जिसे कोई मदद नहीं चाहिए। तो उम्मीद है (मैंने आसानी से समझाने की कोशिश तो की है आपको), उम्मीद है मदद मिलेगी। मैं ऐसे ही देखता हूं इंसानी प्रकृति को। बिल्कुल, जी हां, किसी भी तरह से सोच लें, मैं इंसान की बुरी प्रकृति को नहीं बता रहा हूं; लेकिन वह भी मौजूद है। पर मैं क्या कर रहा हूं, जब मैं बुरी प्रकृति को बताता हूं, मैं इंसान की अच्छी प्रकृति को भी अपनाता हूं। और ऐसा ही है।

यह भी अपनाया जाना चाहिए इसको हमें बढ़ावा देना चाहिए, बुरी बातों को नहीं। हम बुरी बातों को फैलाना जानते हैं। हम इसमें माहिर हैं। हम ऐसा इतने वर्षों से करते ही आए हैं, हम बन चुके हैं बहुत, बहुत ही अच्छे और बहुत, बहुत ही अच्छे बुराई को लेकर बढ़ाने में। कभी कभी हम अच्छाई को भूल ही जाते हैं।

और यह कि अच्छाई को सामने कैसे लाएं ? यह आसान है — आप एक बच्चे में अच्छाई कैसे उभारते हैं ? आप उस बच्चे को अपने साथ खोज की प्रक्रिया में साथ ले चलें, और यह नहीं कि उन्हें बैठकर बस यह बताएं कि क्या करना है और क्या नहीं करना है और यही सब बातें। उन्हें समाधान ढूंढने दें; उन्हें जवाब ढूंढने दीजिये। अगर आप उन पर भरोसा करते हैं — इसमें थोड़ा समय लगता है — लेकिन एक बार वह समझ गए कि आपको भरोसा है, फिर वह सही बात जरूर करेंगे, फिर वह सही सलाह देंगे आपको, अपने लिए भी साफ-समझ की बात। तो उम्मीद है कि मैंने आपकी मदद की है।

तो एक और सवाल है काला न्यूजीलैंड से — यह है, "मैं रोज के कार्य में वर्तमान में कैसे रहूँ ? क्या मुझे इसके प्रति काम करना होगा या यह अपने आप हो जायेगा ?" अब इसमें भी बहुत सुंदरता है।

अगर आप सचेतना से जी रहे होते — और इसका प्रयोग वर्षों से करते आए होते, यह आपकी प्रकृति का हिस्सा बन गए होते। लेकिन, अब हमने किस ओर कार्य किया है — और शायद, शायद हमारी दुनिया ऐसी है कि हमें विकल्प नहीं मिला है — लेकिन हमें अचेतना में जीना और कार्य करना है। और अब अचेत होकर जीना हमारी प्रकृति में आ गया है। अगर हम सचेतना से जीना चाहते हैं, हमें अभ्यास करके उसे अपनी प्रकृति में लाना होगा, अभ्यास, अभ्यास और अभ्यास और अभ्यास और अभ्यास। हमें एक लंबा समय लगा वर्षों, वर्षों, वर्षों का अभ्यास, जब बेहोशी में हम जीते रहे थे। अब सचेत जीने में भी थोड़ा अभ्यास लगेगा ही।

पर बिल्कुल, सचेत जीवन में एक इनाम छुपा हुआ है। और इसका यह मतलब होता है। ऐसा नहीं कि… हर एक रोज, मुझे लगता है सभी का एक लक्ष्य होता है जैसे कि, “मुझे उस स्तर पर जाना है, मुझे उस जगह तक पहुंचना है।” लेकिन जीवन में कुछ बातें होती हैं जहां सीमाएं नहीं होती हैं। आप जीवन में हर रोज सचेत जीने की कोशिश करते हैं, थोड़ा और थोड़ा और थोड़ा और थोड़ा। आप कामयाबी अपनाते हैं और विफलता को भी साथ ही अपनाते हैं यह है सचेतना से जीना। यह सिर्फ कामयाबी के बारे में नहीं, यह होगा कामयाबी और विफलता दोनों को अपनाना। फिर सचेत जीवन सही लगने लगता है आपको।

अगर कोई यह हासिल करना चाहता है, वह “प्रिंटर” की बात, एक पिक्चर प्रिंट करता है जिसमें "हां, ओके, एक दिन आप परफेक्ट होंगे।" नहीं, समझिये कि आप परफेक्ट ही हैं। और यह परफेक्ट होने की कोई परिभाषा नहीं है, जो किसी और ने बनाई हो जो आपको परफेक्ट बनाती हो। आपको परफेक्ट क्या बनाता है, आपकी कमियों और साथ ही मूलभूत इच्छा के साथ कुछ अच्छा करने की कोशिश, कुछ खुश रहने की कोशिश, शांति में रहने की, यह आपको पूर्ण बनाता है; यह आपको परफेक्ट बनाता है — आपकी कमियों के साथ भी। इसलिए उम्मीद है कि आपको मेरे इस जवाब से मदद मिलेगी, क्योंकि यह ऐसा ही है मेरे विचारों में।

एक और सवाल भेजा है, एना रोजालीस ने, "अपने भीतर शांति कैसे रखें जब हम देखते हैं कि बाकियों को दूसरों की तबाही का लाभ मिल रहा है — हम एक हैं और तबाह हो रहे हैं ?"

तो अब यह दिलचस्प सवाल है — क्योंकि यह सच है। एक प्रणाली बनाई गई है जिसमें कुछ लोगों में बाकियों से ज्यादा ताकत है। यह एक, सिर्फ एक रात में नहीं हुआ है; यह हुआ धीरे, धीरे, धीरे, धीरे — हम लोगों को सशक्त करते रहे; हमने उन्हें बहुत ताकत दे दी।

हमने अधिकारियों को बहुत ताकत दी। फिर उन्होंने ताकत का इस्तेमाल करके कुर्सी दोबारा लेनी चाही ताकि जो कोई भी हो कुर्सी हासिल करने में मदद करे — उनसे थोड़ा और ताकतवर ही सही। है ना ?

तो ऐसे लोग हैं जो सरकार में होने की वजह से ताकतवर हैं; फिर वो लोग हैं जो उनसे ज्यादा ताकतवर हैं — और वो लोग उन लोगों को कुर्सी जीतने में मदद करते हैं और वो उनकी मदद करते हैं बदले में ताकतवर बने रहने में। इसलिए अचानक से एक दौड़ की तरह ही — और उस दौड़ में, बाकी सभी प्रतिभागी निकलते जाएंगे। और बस वही अंत में रह जाएंगे, जो एक-दूसरे की मदद करेंगे ताकतवर रहने में। और बाकी सारी आबादी; उनको भूल जाइये; वह पीछे रह जाएंगे।

लेकिन इसे देखते क्यों नहीं, इस तरह कि “ये ऐसा कैसे बना ?” आसान है। यह ऐसा कैसे बन गया ? क्योंकि हमने ध्यान देना छोड़ दिया — हमने वह ताकत छोड़ दी और उनके हाथों में सौंप दी। हमने कहा "इसके साथ चलो। मुझे परेशान नहीं होना; मुझे अपना जीवन चाहिए — मैं व्यस्त हूं! मैं बहुत व्यस्त हूं। अपने परिवार का ख्याल रखने में, अपनी स्थिति बेहतर करने में; मुझे इससे परेशान नहीं होना है — तुम इसे ले लो; तुम लेकर आगे चलो; इस ताकत से जो करना चाहते हो वो करो।” अब इसका नतीजा है ये सब। और जब नुकसान होता है, आपने देखा कैसे। दुनिया की हालत जरा आप देखिये!

यहां इससे यह पता चलता है — जिसमें वह लोगों को दिखाते हैं; जो जमा करते हैं, एक शो आता है ऐसा जमा करते हुए। वो इकठ्ठा करते हैं और इकट्ठा और इकट्ठा और ऐसी हालत हो जाती है जहां आप उनके घर में घुस भी नहीं सकते, क्योंकि वहां पर इतना कुछ सामान इकट्ठा हो जाता है और इकट्ठा होता रहता है।

कुछ लोग ऐसा करते हैं, बस, वो पैसे के साथ करते हैं ये सब; वो जमा करते हैं। जब भी कोई धोखा होता है, कोई भ्रष्टाचार का मामला है, कोई रिश्वत दी जाती है, रिश्वत में क्या होता है ? इसमें एक गरीब व्यक्ति की जेब से पैसे लेकर, (उसके मुंह से छीनकर) किसी ऐसे को देना जिसे उसकी जरूरत नहीं है, जिसे उसकी सराहना भी नहीं है। तो हम इस दुनिया में क्या देखते हैं… नहीं देख सकते — मतलब कि खासकर, अब अगर आप अपने शहर में देखें, आप साफ नीला आसमान देखेंगे, सबकुछ जो कमाल का है… और अगली बार, जब चीजें साधारण हो जाएं, (अगर कभी होती हैं तो) और आकाश प्रदूषण से भरा हुआ है, भगवान को दोष मत दीजिएगा। क्योंकि वह हमारा किया होगा। बिल्कुल, हमारा किया-धरा होगा।

आपको लगता है धरती पर काफी खाना नहीं उगता है ? जी नहीं, धरती पर इतना खाना उगता है कि हम सबका पेट आसानी से भर सकते हैं। अगर कोई भूखा रहता है, यह किसकी गलती से होता है ? यह हमारी गलती से होता है। और ध्यान रहे — मैं कह रहा हूं, “हमारी।” यह उसकी गलती नहीं, यह उनकी गलती नहीं, यह उनकी नहीं। यह हमारी गलती है सबकी।

तो हां, जो आप कह रहे हैं यह बिल्कुल ठीक बात है। हमने यह होने दिया है। हमने इसकी आज्ञा दी है।

जब अगली बार एक मौका हाथ लगे, कोई मौका सामने आये तो उसके बारे में सोचें, दोबारा सोचें। हम इसे कैसे छोड़े ? हम बेवकूफों की तरह टीवी के सामने बैठते हैं, — सब दिमाग में जाने देते हैं, सब कूड़ा… मैं उन्हें कहता हूं "ब्रेन डिगर्ज़।" यह हर रोज दिमाग में घुसते हैं — और वो बताते हैं, कोशिश करते हैं कि "यह सही है और वह सही है; वो थोपते हैं अपनी बातें हम पर।"

बहुत समय पहले की बात है एक चैनल होता था — सिर्फ एक। और यही चैनल न्यूज़ एजेंसी इस्तेमाल करती थीं और फिर इसी से न्यूज़ आगे जाती थीं — कोई कॉमेंट्स नहीं होते थे। और आप ड्रामा, जो भी होता था वह देखते थे, चाहे जो भी हो। और यह बहुत ही बोरिंग चीजें हुआ करती थीं। और अगली बात जो आपके सामने है; वह वही फुटेज आप देख रहे हैं; जो एडिट की हुई है या बदली हुई है; यह चमकाई हुई है और इसे कुछ और ही बना दिया है…।

हर रोज सुबह बैठकर फैसला लेते हैं और सोचते हैं कि उनके अनुसार खबर क्या होनी चाहिए, क्या खबर है क्या नहीं। अगर उसमें कुछ दुर्घटना है। तो अचानक से ही आप बैठे हैं और आपको वह दिखती रहेगी — दुर्घटना, दुर्घटना, दुर्घटना, दुर्घटना।

किसी ने मुझे किसी और का एक लिंक भेजा जिसने एक यूट्यूब चैनल शुरू किया हुआ है कहीं पर, जहां सिर्फ अच्छी खबरें ही आती हैं। अब अच्छी खबर हो या बुरी हो — मेरा मतलब, दुर्घटना तो होनी ही है। (क्योंकि हम ही बनाते हैं उन्हें।) तो आप चाहते हैं सच्चा, ईमानदार सुझाव; सत्य जानना चाहते हैं आप — और आप एक टीवी को देखकर कहते हैं कि "यह है सत्य।" अब वह एक बुरा दिन होगा। आपको ऐसे सत्य कभी नहीं मिलेगा। आपको सत्य किसी ऐसे कागज के टुकड़े से नहीं मिलेगा जो आपने पकड़ा हुआ है। जिसे चमकाया हुआ है जो कि दूसरों की सोच के तले दबा हुआ है। और जितना ज्यादा सोच है, उतना ही ज्यादा खोजना और खोजना और वह कुछ लेकर बस खोजने लग जाते हैं — एक अच्छी कहानी बना देते हैं, सुनने में अच्छी लगती है, देखने में मजेदार बना देते हैं वो लोग। और मान लीजिए मेरी बात, जो कुछ भी है सिर्फ पैसा कमाने के लिए ही किया जा रहा है। यही उनकी प्राथमिकता होती है। और वो कमाते भी हैं; वो पैसा कमाते हैं।

तो दोबारा, यह इस बात पर आ जाता है कि जिस दुनिया में हम रहते हैं, अगर आपको इसके बारे में कुछ पसंद नहीं, ऐसा नहीं कि यह आपको दिया गया है। हमने यह परिस्थिति बनाई है; हमने यह बनाई है स्थिति। तो उम्मीद है कि इससे मदद मिलेगी। (पता नहीं कैसे), पर हां, और मैं बस वह बता रहा हूं जो मैं देखता हूं, बस इतना ही…।

यह भेजा है शुभम ने, इंडिया, दिल्ली से, "कभी-कभी इस लॉकडाउन से, छोटी-छोटी बातों में मैं परेशान और गुस्सा हो जाता हूं, इरिटेट हो जाता हूं। कैसे सबकुछ संभालूं ?"

मैं सोचता हूं क्या आप लॉकडाउन से पहले भी परेशान होते थे — क्योंकि मुझे थोड़ा शक़ है कि यह परेशानी काफी समय से चलती आ रही है — अब यह बस नजर ज्यादा आ रही है आपको, क्योंकि आप लॉकडाउन में हैं उस स्थिति में हैं दोबारा और दोबारा।

और परेशानी संभालना — आप परेशान हो सकते हैं। कोई बात नहीं यह सचेतना का हिस्सा है; यही तो है इसका मतलब — हां, आप बहुत परेशान हो सकते हैं। और चीजें आपको परेशान करेंगी। केवल आपको खुद से बस यही पूछना होगा कि “क्या आप परेशान होना चाहते भी हैं ?”

तो अगर चीजें आपको परेशान कर रही हैं, तो वो सब चीजें नियंत्रण में हैं, आप नहीं। उनका नियंत्रण चल रहा है। अगर आप परेशान नहीं होना चाहते, फिर आपको नियंत्रण रखना होगा, उन बातों को नहीं। तो आपको जीवन पर नियंत्रण रखना होगा। और यही करना होगा इसमें — जीवन पर नियंत्रण पाएं, अपने जीवन पर।

तो उम्मीद है आप सुरक्षित रहेंगे, सेहतमंद रहेंगे, अच्छे से — और सबसे जरूरी बात, सचेत रहेंगे। धन्यवाद!

लॉकडाउन — सत्ताईसवां दिन 00:18:26 लॉकडाउन — सत्ताईसवां दिन Video Duration : 00:18:26 प्रेम रावत के साथ (हिंदी में अनुवादित)

प्रेम रावत:

सभी को नमस्कार! उम्मीद है, दोबारा, आप ठीक होंगे। और मुझे पता है घोषणा हो रही हैं; लॉकडाउन आगे बढ़ सकता है — लेकिन इस बारे में बुरा ना मानें या चिंतित ना हों, कुछ और दिन। क्योंकि देखिए, उद्देश्य है सुरक्षित रहना, ठीक से रहना। फिर इस मौके को लेना कुछ समझना, कुछ ऐसा, जो बहुत, बहुत जरूरी है।

क्योंकि यही तो समय है; सवाल यह नहीं कि इस समय में क्या हो रहा है, लेकिन समय तो समय है यह एक तरीका है देखने का। आप इसे बर्बाद कर सकते हैं — और इसका कोरोना वायरस से कोई लेना-देना नहीं है; इसका वैश्विक घटनाओं से कोई लेना-देना नहीं है — या कुछ ऐसा कर सकते हैं जिससे इस जीवन में कुछ मदद मिलेगी आप सबको।

अब दो बातें हैं जो मैं करना चाहता हूं। एक बात है, (जो मैंने पहले इन ब्रॉडकास्ट में कही भी है।) हम समस्या सुलझाने में इतना उलझे हुए हैं; हमारा सिर रेत में घुस गया है — और मैं इसे थोड़ा समझाना चाहता हूं। तो आपके सामने दो चीजें हैं। एक बात है जरूरी कि आपके कर्म — आपने कुछ किया, (आपने कुछ अचेत होकर किया या कुछ जान-बूझकर किया फ़र्क नहीं पड़ता) लेकिन आप इस दुनिया में जो भी कुछ करते हैं, उसके नतीजे तो होंगे ही। तो एक है क्रिया और फिर उसका परिणाम, वह आता है। अब जब मैं कहता हूं "जीवन सचेतना से जीयें।" मेरा मतलब है कि आपको वह कार्य करने हैं जिनका प्रभाव सकारात्मक होगा। परिणाम कुछ ऐसा हो जो आपको पसंद आए कुछ ऐसा जिसमें आनंद आए — जिसका शांति से सरोकार हो, जिसका लेना-देना हो पूर्ण होने से, जिसका सरोकार हो समझ के साथ, स्पष्टता के साथ।

लेकिन होता क्या है ? (मैं इसी बारे में सोच भी रहा था) वह यह कि हम परिणाम से इतना जुड़ जाते हैं कि कार्य के बारे में बिल्कुल भूल ही जाते हैं। इसलिए अगर वह कार्य खुद को दोबारा दोहराता है, उसका वही परिणाम होगा दोबारा और दोबारा और दोबारा और दोबारा। अब यह कितना दूर तक जाता है — हे प्रभु, हर जगह जहां तक आप सोच सकते हैं। आप इसे घर-परिवार की परिस्थिति में सोच सकते हैं, जो परिवारों में झगड़े होते हैं, घर में हाथ उठाना, हिंसा, (जो बहुत बड़ी बात है, काफी बड़ी) चिढ़ाना (ये बहुत गंभीर चीजें हैं।) खून, अपराध, छोटे से लेकर बड़े जुर्म तक, सबकुछ। यह दोबारा, एक है क्रिया और फिर आता है उसका परिणाम। और सभी लोग बुरे परिणाम के बारे में सोच रहे हैं — जो बुरे नतीजे आएंगे — वह असल में कर्म के बारे में भूल ही जाते हैं। जबतक आप कर्म नहीं बदलेंगे, बार-बार वही परिणाम आने वाले हैं और दोबारा और दोबारा और दोबारा और दोबारा और दोबारा। और सोच में पड़ जाएंगे आप कि "मुझे जीवन में सजा क्यों मिल रही है; मैं क्या गलत कर रहा हूं, ? क्या गलत किया मैंने ?"

ऐसा नहीं कि आपने कुछ गलत किया था पिछले जीवन में या आप कुछ गलत करने वाले हैं या फिर आप श्रापित हैं या किसी ने आप पर नजर लगा दी है या कुछ ऐसा या कुछ वैसा या लाखों बहाने हैं — आप किसी सीढ़ी के नीचे से निकलते हैं या जो भी। लेकिन आप क्या कर रहे हैं ? आप जो भी बेहोशी से करेंगे, जो भी करेंगे…

मैं इस तरह से बताता हूं, आप जो भी करें उसका परिणाम आता है। इसमें कोई संदेह नहीं। हर क्रिया का परिणाम होता ही है। जी बिल्कुल, अगर वह अच्छा नहीं है, आप उसे हटा देना चाहेंगे; आप वहां से निकलना चाहते हैं; आप चाहते हैं…ऐसे, जैसे कोई इंसान फंस गया हो और फिर वह सिर्फ एक ही बात सोच रहा हो कि "यहां से कैसे निकलूं ?" अगर कोई एक व्यक्ति है जो स्कूल जाता है और उन्हें मिले, बच्चे के अंक बहुत ही बुरे आए हों — और वह कहते हैं "हे भगवान, मैं क्या करूं; मैं अपने माता-पिता को दिखाऊं या नहीं दिखाऊं ? अब मैं क्या बहाना मारूं ?" सही कार्य करने की बजाय, जो कि होता “मुझे पढ़ना चाहिए — और मैं यह कर सकता हूँ। मुझे और पढ़ना होगा।” यह देखना कि मैं अपनी क्रिया दोबारा क्यों दोहरा रहा हूं, क्योंकि मैं उस क्रिया पर पूरा ध्यान नहीं दे रहा। और यही क्रिया परेशानी की जड़ बन रही है।

तो यह बहुत, बहुत दिलचस्प है। हम अपने जीवन में, हम जीवन जीते हैं; हम अपने काम में पूरा दिन लगे रहते हैं — और हम सिर्फ परिणाम के बारे में सोचते रहते हैं। हम यह नहीं सोचते कि परेशानी क्यों हो रही है। जैसे कि आप जवान थे; और आपका चालान कटता था। (क्योंकि अब देखिए, मुझे भी पता है मेरा भी चालान कटता था।) और मैं क्यों चालान कटवा रहा था ? और एक दिन — मैंने यह कहानी पहले भी बताई है कि एक दिन मुझे रोका गया और मुझे लगा कि मैं नीचा दिख रहा हूं; मजेदार नहीं था। उस पल में मैंने, जो भी, मैं उस समय बहुत तेज चला रहा था, तो रोके जाने पर वह चीज बिल्कुल रुक गई।

और हां बिल्कुल, मैं पुलिस अफसर से झूठ नहीं बोलना चाहता था; गाड़ी काफी तेज थी। फिर मैंने फैसला किया कि "अब और बिल्कुल नहीं! मैं तेज नहीं चलाऊंगा।" जब गाड़ी चलाता हूं क्रूज कंट्रोल के साथ ही चलाता हूं। और मैं रख लेता हूं, तीन, चार मील की रफ्तार गति सीमा से ऊपर। और वह वैसा ही रहता है — और ऐसा नहीं कि मैं इससे जल्दी पहुंच जाऊंगा या कुछ मुझे गाड़ी काफी तेज चलानी पड़ती, बिल्कुल पागलों की तरह।

आप हमेशा फ्लाइट ले सकते हैं, अगर आपको कहीं पहुंचने की जल्दी है। लेकिन अपने आपको इतना समय दें कि आपको देर हो ही ना। तो पूरी बात यह है कि हां, जब आपको रोका जा रहा है और आप सोचें कि "हे भगवान यह बहुत ही बुरा है," हां, कान लाल हो जाते हैं और मुंह लाल हो जाता है; रक्तचाप बढ़ जाता है। और सब आपको देख रहे हैं; आपको शर्म आ रही है… आप बस वहां से निकलना चाहते हैं। “जी हां, सर, मेरी गलती है; मैं दोबारा ऐसा नहीं करूंगा और ये सब बातें। पर आप अपने काम पर ध्यान नहीं देते। आपको जीवन में अपने कार्य पर ध्यान देने की जरूरत है और सिर्फ परिणाम पर नहीं। क्योंकि परिणाम तो वैसे ही होते हैं जैसे आपके काम होते हैं।

अगर आप अपने जीवन में शांति के बीज बोने में समय नहीं लगा रहे हैं — और फिर आप सोचेंगें "मुझे शांति क्यों नहीं मिल रही है ?" अब, क्योंकि आपने कभी शांति के बीज नहीं लगाए हैं। आप शांति पाने के लिए कुछ प्रयास नहीं कर रहे थे। आप बस दुनिया में भागते रहे हैं, डोडो की तरह, बस भागते रहना, भागते रहना, भागते रहना, भागते रहना, भागते रहना, भागते रहना।

यह ऐसा है कि मैं अखबार में एक कहावत देख रहा था और वह बहुत दिलचस्प थी। उस वक्त कहावत में यह लिखा था कि "आप इतना पैसा कमाते हैं — और आप इतनी मेहनत करते हैं। और फिर अंत में क्या होता है कि आप बूढ़े हो जाते हैं, बीमार पड़ जाते हैं और आप वह सारा पैसा लेकर अस्पताल को दे देते हैं।" क्योंकि अब आप बीमार पड़ गए हैं — इससे अच्छा कुछ समय निकालकर कुछ अच्छा कर लेते आप। और यह है — दोबारा, मैं किसी के लिए बहाना नहीं बना रहा; मेरी कोशिश नहीं है किसी पर उंगली उठाने की या ऐसा ही कुछ। लेकिन यह बहुत सीधी-सी बात है कि ऐसे कुछ नेता हैं जो अपना काम बहुत ही अच्छे ढंग से कर रहे हैं लेकिन फिर कुछ ऐसे नेता भी हैं जिन्हें कुछ भी नहीं आता — हां, उनके ओहदे को बदलने की जरूरत है इस समय, सच में। वह काम नहीं जानते हैं। मतलब, बस दिमाग खराब हो चुका है, बिल्कुल दिमाग खराब है। अब मैंने काफी कह दिया है।

लेकिन आपका क्या ? आप अपने जीवन के नेता हैं। आप कैसे सबकुछ चला रहे हैं ? दुनिया के नेताओं को भूल जायें; बड़ी संस्थाओं को भूल जायें; इस सबको भूल जाइये — आप कैसे संभाल रहे हैं ? क्या आप सचेत हैं ? क्या आप खुद को समझने का प्रयास कर रहे हैं ? क्या हृदय में कृतज्ञता भरी हुई है ? या आप बस अपने बाल खींच रहे हैं; ये सब क्या है, लॉकडाउन कब खत्म होगा ? ये सब खत्म होगा, यह क्यों हो रहा है; यह कैसे हो रहा है ? मैंने कुछ नहीं सोचा था ऐसा, ये क्यों हो गया मेरे साथ ? मेरा खर्च क्यों बढ़ रहा है… ?

लोग ऐसे ही करते हैं वो क्रूज़ बुक कर रहे हैं, उन्होंने बहुत सारे क्रूज़ बुक किए होंगे। ऐसे में अच्छा विचार नहीं है। लेकिन आप क्या करें ? अगर आपको नहीं पता कि आप कौन हैं, आप क्या करेंगे ?

मैं जहां भी मुड़ता हूं (आप चाहे ये चैनल देखिये या वो चैनल देखिये) यही मुद्दे हैं। और कुछ तो हैं “मज़ाकिया” से लोग, मैं उन्हें कहूंगा जो अच्छा मज़ाक कर लेते हैं, वो कुछ ऐसा बनाने की कोशिश कर रहे हैं जिससे मज़ा आए या ऐसा ही कुछ हो। बढ़िया, ठीक है। पर सवाल यह नहीं कि आपका समय कैसे पूरा हो सकता है। आपको समय का सदुपयोग करना है। जो विचार आपके लिए महत्व हैं उन पर ही आपको ध्यान देना है। ऐसी चीजें करिए और ऐसे समय बिताइए जिससे आपको खुशी और आनंद प्राप्त होता है — आपके लिए यह है एक जरूरी बात। ऐसे नहीं कि समय बिताने के लिए कुछ भी ढूंढ लिया आपने, नहीं आपका समय सिर्फ आपका होना चाहिए, किसी और का नहीं और किसी और के बारे में नहीं — आपको समय अच्छे से बिताना है।

मैं यही एक बात सोच रहा था। और दूसरी बात यह है, मैं यह कहता रहता हूं कि “यह एक प्रिंटर है, जो पिक्चर्स प्रिंट करता है।” तो एक कहानी है और मैंने यह पहले भी सुनाई है।

तो कहीं बाढ़ आ गई — और एक घर में महिला थी और बाद में बाढ़ आ गई, अगली बात यह हुई कि वह थोड़ा-सा ऊपर चली गई। तो वह अपने किचन में खड़ी थी टेबल पर — और बाढ़ का पानी वहां पर अंदर आ गया। तो वह सीढ़ियों से ऊपर चली गयी और बाढ़ का पानी फिर और ऊपर आता रहा और बढ़ता रहा और बढ़ता रहा, बढ़ता रहा, बढ़ता रहा, बढ़ता रहा। यह सब होता रहा और वह छत पर पहुंच गई। अब ऊपर जाने की जगह नहीं बची थी। और बाढ़ का पानी आता जा रहा है। तो ईमानदारी से, उसने भगवान को याद किया। उसने कहा "भगवान नीचे आयें और मेरी मदद करें — मैं आपको पूजती आई हूं; मैं आपसे प्यार करती हूं; मुझे लगता है आप महान हैं। मैं परेशानी में हूं — मैं बहुत, बहुत सराहना करूंगी अगर आप इस वक्त नीचे आएं और मेरी मदद करें।"

तो फिर क्या हुआ कि एक नाव वहां आ गई। और वो बचावकर्मी हैं और उन्होंने कहा कि "आईये; हमारे साथ आइये; बाढ़ का पानी आ रहा है; हम आपको ले जाएंगे।” महिला कहती है, "नहीं, मैं भगवान का इंतजार कर रही हूं; वह मुझे आयेंगें बचाने।"

तो अब पानी और थोड़ा ऊपर आ चुका है। अब उनके पांव गीले हो गए हैं और वह और ऊपर नहीं जा सकतीं। तो वह फिर से प्रार्थना करती हैं कि "भगवान मुझे बचाइए! मैं सबसे बड़ी भक्त हूं आपकी और मैं आपसे प्यार करती हूं। मैं बहुत पूजा करती हूं। मैं वफादार रही हूँ और मैं संकट में हूँ। तो कृपया करें मुझे बचाएं।"

तो कुछ मिनटों के बाद, एक और नाव आती है — बचावकर्मी कहते हैं "आ जाइए; समय है जाने का! अब बहुत देर हो रही है, आ जाइए।" और वह कहती है, "नहीं, मेरे भगवान मुझे बचाएंगे।"

कुछ ही मिनट के बाद, वहां फिर वही हुआ। पानी और ऊपर आ गया और अब इतना ऊपर आ गया कि छाती तक पहुंच गया। वह फिर पूजा करती हैं कि "भगवान मुझे बचाइये! यह आखिरी मौका है मुझे बचाइये कृपया।"

फिर एक और नाव वहां पर आती है वो कहते हैं "आइए हमारे साथ नाव पर आइए! यह आखिरी है; यह आखिरी मौका है। आप यहां ज्यादा देर नहीं रूक पाएंगी।" वह कहती हैं "नहीं मेरे भगवान अभी आएंगे और मुझे बचाएंगे।" और फिर उसके बाद पानी काफी ऊपर आ जाता है, वह बह जाती हैं और उनकी मृत्यु हो जाती है। वह स्वर्ग में जाती हैं। पीटर वहां पर हैं; संत पीटर वहां पर उनका स्वागत करने के लिए आए हैं और वह गुस्से में हैं। वह कहती है “मुझे भगवान से बात करनी है।"

संत पीटर कहते हैं "क्या मैं आपकी मदद कर सकता हूं किसी तरह ?" तो वह कहती हैं कि "मदद नहीं, मुझे भगवान से बात करनी है।" तो संत पीटर भगवान से कहते हैं कि "अभी-अभी कोई आया है वह बहुत गुस्से में हैं और आपसे बात करना चाहता है।" तो भगवान कहते हैं "अंदर बुलाइए!"

वह अंदर जाती हैं और कहती हैं "आप कैसे भगवान हैं ? तीन बार मैंने आपको बुलाया, प्रार्थना की ताकि आप मुझे बचायें और आप एक बार भी नहीं आए।" तो प्रभु कहते हैं कि "देखिए मेरी बात गौर से सुनें। मैंने तीन बार नाव भेजी और आपने उनमें से एक भी नाव नहीं ली।” प्रिंटर ने एक पिक्चर बनाई, जो महिला ने सोच ली थी कि वैसे ही वह बचेगी। पर ऐसा नहीं होने वाला था। तीन नाव वहां पर आईं — वह एक में भी नहीं बैठी और अंत में वह डूब गई।

जी! तो अब एक अच्छी कहानी है, मज़ाकिया है — पर प्रिंटर के बारे में ध्यान आकर्षित करती है यह। क्योंकि हम प्रिंटर का पालन करते हुए यह बात भूल जाते हैं पूरा दिन कि यह प्रिंटर प्रिंट करता रहता है और ज्यादा पिक्चरें और ज्यादा पिक्चरें।

अपना जीवन सचेतना से जीयें और इसका मतलब होगा कि आप खुद को अलग करें; खुद को बचायें उस पिक्चर से जब भी आप उसके करीब जा रहे हों। आपको अपने हृदय का पालन करना है; आपको अपने जीवन में पूर्ण होने की प्यास के पीछे चलना है, स्पष्ट होना और उस शांति में होना। यही तो है आपकी हृदय की प्यास।

मन की तलाश नहीं जो कहती है कि "मुझे यह चाहिए; मुझे वह चाहिए; वह चाहिए।" मतलब, अच्छा यह बड़ी बात नहीं है, आप कभी-कभी ऐसा भी कर सकते हैं। लेकिन अगर आप हर वक्त ऐसा चाहते हैं और हृदय का पालन नहीं करते, यह थोड़ी समस्या की बात हो जाती है। तो अच्छे रहें! सुरक्षित रहें और आप रहें सचेत। आनंद लें; इस समय का लाभ उठाएं। मैं आपसे फिर बात करूंगा। धन्यवाद!

Log In / Create Account




TimelessToday

Log In or Create an Account



OR




Please enter the first name. Please enter the last name. Please enter an email address. Please enter a valid email address. Please enter a password. Passwords must be at least 6 characters. Please Re Enter the password. Password and Confirm Password should be same. Please agree to the privacy policy to continue. Please enter the full name. Show Hide Please enter a Phone Number Invalid Code, please try again Failed to send SMS. Please try again Please enter your name Please enter your name Unable to save additional details. Can't check if user is already registered Please enter a password Invalid password, please try again Can't check if you have free subscription Can't activate FREE premium subscription Resend code in 00:30 seconds
Activate Account

You're Almost Done

ACTIVATE YOUR ACCOUNT

You should receive an email within the next hour.
Click on the link in the email to activate your account.

You won’t be able to log in or purchase a subscription unless you activate it.

Can't find the email?
Please check your Spam or Junk folder.
If you use Gmail, check under Promotions.

Activate Account

Your account linked with johndoe@gmail.com is not Active.

Activate it from the account activation email we sent you.

Can't find the email?
Please check your Spam or Junk folder.
If you use Gmail, check under Promotions.

OR

Get a new account activation email now

Need Help? Contact Customer Care

Activate Account

Account activation email sent to johndoe@gmail.com

ACTIVATE YOUR ACCOUNT

You should receive an email within the next hour.
Click on the link in the email to activate your account.

Once you have activated your account you can continue to log in

You haven't marked anything as a favorite so far. Please select a product Please select a play list Failed to add the product. Please refresh the page and try one more time.