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लॉकडाउन — ग्यारहवां दिन 00:18:04 लॉकडाउन — ग्यारहवां दिन Video Duration : 00:18:04 प्रेम रावत के साथ (हिंदी में अनुवादित)

प्रेम रावत:

सबको नमस्कार! उम्मीद है सब ठीक हैं, अच्छे हैं!

मैं आज आपसे बात करना चाहता हूं उम्मीद के बारे में अच्छा महसूस करना। क्योंकि यह ऐसा है जो आप कर सकते हैं। आपको इससे डरना बिल्कुल नहीं है; जी नहीं आपको ऐसा नहीं लगना चाहिए कि "हे भगवान पता नहीं यह सब क्या हो रहा है” — हालांकि यह बहुत बुरी चीज है, लेकिन आपको इससे झुकना नहीं है। आपको जानना होगा कि आप ही हैं अपने खजाने के स्रोत और आपके भीतर एक बहुत कमाल का खजाना है। आपके भीतर उम्मीद है; आपके भीतर स्पष्टता है; आपके भीतर समझ है; और यही वह चीजें है जो आपको इस वक्त चाहिये। मेरा मतलब आपके पास और क्या विकल्प हैं ?

तो कुछ तो होना ही है; सच है आपको महसूस करनी है। मेरा मतलब यही तो है वह कि आप क्या करने वाले हैं ? हालात कुछ ठीक नहीं लग रहे हैं। आप जानते हैं कि हम लगभग पूरा नहीं पर लगभग 8 लाख पार कर चुके हैं, बहुत जल्द हम 10 लाख को भी पार कर जाएंगे और बहुत ज्यादा मृत्यु दर है इतना बुरा नहीं, लेकिन फिर भी बहुत ज्यादा है मेरी मानिये। और बहुत-सी बुरी खबरें आ रही हैं "यह भी बुरा है; वह भी बुरा है और बाकी सबकुछ" और हां, यह सच है कि हम नेताओं पर इतना ज्यादा निर्भर रहते हैं समाधान देने के लिए और वो लोग बस और उनमें से नेता तो अच्छे हैं, कुछ नेता अच्छे हैं इसमें सवाल नहीं। पर कुछ नेता अपने में व्यस्त हैं और ध्यान नहीं दे रहे फिलहाल कुछ नहीं कर पा रहे वो लोग। क्योंकि वह जो भी करें और वो सिर्फ और ज्यादा भ्रमित हो जाते हैं — मेरा मतलब सच में कोई नेतृत्व नहीं है उनके पास।

तो आगे क्या होगा ? आपको दूर ही रहना है हां, स्थिति इतनी अच्छी नहीं है। "पैसा कहां से आने वाला है ? नौकरियों की सुरक्षा कहां से मिलेगी ? इन सारी बातों का क्या होने वाला है ?" जी हां, यह अच्छे सवाल हैं। सच में बहुत अच्छे सवाल हैं और मैं क्या कर सकता हूं ? मैं कोई कारखाना खोलकर सबको नौकरियां नहीं दे सकता हूं — काश मैं ऐसा कर पाता। तो मैं क्या कर सकता हूं ? अब शायद मैं आपको उम्मीद का एक स्रोत बता सकता हूँ, स्पष्टता का एक स्रोत, समझ का एक स्रोत, रोशनी का एक स्रोत, जो आपके भीतर है। हालांकि ऐसा नहीं है कि आपके सभी सवालों के जवाब मिल ही जाएंगे, लेकिन आप एक इंसान के नाते कहीं ज्यादा पूर्ण हो जाएंगे, आगे बढ़ने को ज्यादा तैयार होंगे आप, इस कोरोना वायरस से लड़ने में ज्यादा सक्षम होंगे आप, असल में चाहे जो भी हो उसका सामना कर पाएंगे और यह कमाल की बात होगी।

यह कितना अच्छा होगा ना, क्योंकि जीवन में बुरे दिन तो आते ही हैं, वह बात जिससे कोई भी खुश नहीं रहता। बातें जो हमें पसंद नहीं हैं, वो होती हैं और जब वो होती हैं हम गिर जाते हैं। हम कहते हैं कि "हे भगवान अब क्या होने वाला है ?" और यही सब तो है असल सवाल कि "अब क्या होने वाला है ? मैं बर्बाद हूं; मैं खत्म हो गया हूँ; मैं ऐसा हूं; मैं वैसा हूँ!" और कितना आसान है हम लोगों के लिए नकारात्मकता की ओर चले जाना और शायद हम कहते हैं कि "अब यही हमारी सच्चाई है!" लेकिन एक और सच्चाई भी है और मैं आपको उस सच्चाई से अवगत करवाऊंगा। इस बुरी स्थिति में इतने अंधकार के बीच में भी आपको असल में क्या होना चाहिए, एक रोशनी की किरण और एक बात कहूं और यह रही अच्छी खबर वह रोशनी, वह किरण, वह स्रोत आप में हैं — आप ही हैं वह देवदूत जो आए हैं और जो कि बचाएगा अपने आपको आप ही! आप ही वह आशा की किरण हैं जिसे आप ढूंढ रहे हैं, वह उम्मीद, वो पता होना कि "हाँ यह रही वो किरण!" और जब आप समुद्र में जाते हैं और आप जमीन देखते हैं तो अलग खुशी मिलती है। यह एक अलग ही भावना होती है — आप जमीन देख सकते हैं। आप जानते हैं कि आप कहां हैं "यह रही जमीन और अगर कुछ होता है तो हमें इस जगह जाना है; हम यहीं पर जाएंगे।" लेकिन जब आप और आगे बढ़ते हैं और कोई जमीन नहीं होती और आप देखते हैं सिर्फ पानी, पानी और पानी हर जगह, पानी, पानी, पानी हर एक जगह पर और यह सब एक जैसा ही दिखता है! हां बिल्कुल सब एक जैसा ही दिखता है तो "हम कहां जा रहे हैं ?"

अब इस क्षण में आपको एक बात पर ध्यान देना होगा और अगर आपके पास अच्छा नहीं है। ऐसा कुछ भी अगर आपके पास कम्पस नहीं है — क्योंकि वह कम्पस हमेशा चुंबकीय उत्तर की दिशा में दिखाएगा और चुंबकीय उत्तर क्या है ? यह आपको बताता है कि "यहां उत्तर उस दिशा में है और आपको इस दिशा में पूरब में देखना है और उसी दिशा में जाएं और पूरब में जाएं और फिर आप दक्षिण में जाएंगे और फिर आप पश्चिम में जाएंगे और आपको उत्तर जाना होगा तो इस तरफ घुमियेगा, बस कम्पस की मानिये।" आपके पास कम्पस है ? जी हां, आपके पास एक कम्पस है आपके ही भीतर, यहाँ नहीं वहां पर — वह कम्पस जो हमेशा सच्चाई की ओर दिखाता है। केवल सच्चाई! सच्चाई है कि "आप जीवित हैं" सच्चाई है "आपका अस्तित्व" और जबतक आपका अस्तित्व है आपके पास कमाल की उम्मीद है आप जो चाहें वह कर सकते हैं। आपको जो भी पसंद ना हो वह आप बदल सकते हैं यह है संभावना।

एक उदाहरण जो मैं हमेशा देता हूं — जानते हैं राम के जीवन में सबकुछ अच्छा नहीं था। कुछ हजार वर्ष पहले उनके जीवन में सबकुछ अच्छा नहीं था — आपने कहानी तो सुनी है जिस दिन उनका राज्याभिषेक होना था उनको कह दिया गया कि "आपको राजा नहीं बनाएंगे पर आपको 14 वर्षों के वनवास के लिए चले जाना है।" जी हां, 14 वर्षों तक के वनवास के लिए! उनकी बस अभी-अभी शादी हुई थी और उन्होंने अपनी पत्नी से कहा कि "सुनो सीता मैं तुमसे 14 वर्षों के बाद मिलूंगा।" तो उन्होंने कहा "जी नहीं मैं आपके साथ ही आउंगी।" और उन्होंने अपने भाई को देखा तो वह भी बोले "हाँ भैया मैं आपके साथ ही रहूंगा।"

तो यह तो बहुत बुरा था, है ना! आप राजा भी नहीं बनेंगे और आपको वनवास के लिए भी 14 वर्षों के लिए वन में जाना है, आपको वहीं पर रहना है, कोई तकनीकी नहीं, अब आपको इस जंगल में जाना है, आप कहां जा रहे हैं ? किसी एक जगह नहीं बस घूमते रहना है, खाना ढूंढना है सच में! पेड़ों से खाना या झाड़ियों से कोई बेर, फल, सब्जियां जो भी आपको मिले वो। यह है वनवास! क्या इससे और बुरा हो सकता है ? जी हाँ और बुरा होता है। क्या होता है फिर ?

अब इस सबके बीच में सीता जी का अपहरण हो जाता है और उन्हें रावण उठा ले जाता है और चला जाता है लंका। अब राम को यह भी नहीं पता कि सीता कहाँ है। तो वह कुछ लोगों से मिलते हैं और उनको पता लगता है कि "देखिये सीता लंका में है। रावण उन्हें वहां ले गया है तो आप वहां क्यों नहीं जाते ?" फिर वह चले जाते हैं और आपको लगेगा यह काफी बुरा है ? जी नहीं, अब इसके आगे और क्या होने वाला है ? यह राजा, रावण, लंका का राजा, वह बहुत ताकतवर है, विशाल है, वह शक्तिशाली है। वो युद्ध कैसे हो पाएगा ? उसकी तो सेना है; राम के पास कोई सेना नहीं है। राम के पास कोई सेना नहीं है। रावण की बहुत बड़ी सेना है और सिर्फ इतना ही नहीं रावण की सेना में दैत्य हैं, राक्षस! तो अब राम इस चुनौती का सामना कैसे कर पाएंगे किस तरह से ?

तो बातें बिगड़ती जाती हैं, बिगड़ती जाती हैं, बिगड़ती जाती हैं, बिगड़ती जाती हैं, लेकिन राम उम्मीद नहीं हारते। वह हार नहीं मानते। वह खुद को संभालते हैं और एक सेना इकट्ठी करते हैं और वह — इस बात पर आप हंसना मत शुरू कीजिएगा — जो सेना राम इकट्ठी करते हैं उसमें वानर और भालू हैं। जी हां, और उनके पास पुल बनाने की कोई तकनीक नहीं है, तो वह पत्थर लेते हैं और वह उनसे एक पुल बनाते हैं ताकि लंका जा पाएं, इस टापू पर, लंका जाने के लिए। उम्मीद न हारना बहुत जरूरी हो जाता है और उम्मीद हारने की कोई वजह नहीं है और इसलिए आपको वह कंपस चाहिए। वह कम्पस जो हमेशा एक दिशा में दिखाता है कहते हुए कि "वह रही, वह रही, वह रही आपकी किरण, वह रही आपकी रोशनी, वो रही, वो रही, वह है जहां आपको जाना है।” आपको हारना नहीं है। आपको झुकना नहीं है, आपको नकारात्मकता से डरना नहीं है, यह बहुत-सी बार ऐसा होगा।

पता है जब हमें नकारात्मकता ही दिखती रहेगी "अरे यह समस्या है, वह समस्या है", लोग डरे हुए हैं और फिर आप समझते हैं, जानते हैं कि सोशल मीडिया मददगार नहीं है। इससे कोई भी मदद नहीं मिलती है और आपको वह फैसला लेना है, आपको समझना है कि क्या है नकली और क्या है असली। और मैं यहाँ आपको बुराई के बारे में बताने नहीं आया, मैं आपको अच्छाई के बारे में बताने आया हूँ। हमेशा आपको बताने कि जीवन में आपके एक संभावना है कि आप पूर्ण हो सकते हैं। संभावना है कि आगे बढ़ सकते हैं आप सब लोग हमेशा, हमेशा जबतक यह स्वांस आप में है आप आगे बढ़ते रहें। यह कितना कमाल है, यह कितना अद्भुत है कि इस वक्त में भी जब सारी उम्मीद खत्म हो जाती है और बहुत सारे लोग मुझे भरोसा है बैठे हुए हैं कि "हे भगवान क्या पता इससे बुरा तो और कुछ हो नहीं सकता।” हाँ शायद, इससे बुरा कुछ नहीं हो सकता पर इसकी वजह से आपको ज्यादा प्रयास करना है। ये और प्रयास करने की बात पर — आपके साथ क्या-क्या हुआ था जब आप पैदा हुए थे ? क्या आपको पता है आपके साथ क्या हुआ था ? आपने क्या कुछ झेला है मुझे किसी ने बताया यह रॉकेट के चलने जैसा है, एक बहुत बड़ा रॉकेट चलता है इतनी ताकत लगती है इसमें — आप इतनी ताकत लगाते हैं गर्भ से बाहर आने के लिए इस दुनिया में।

जो बदलाव आप देखते हैं सच में, जो शायद करोड़ों सालों के बाद हुआ है वो एवोलूसशन कि पानी में पूरी तरह से डूबे हुए होने से लेकर ऑक्सीजन तक ऐसा सिर्फ कुछ घंटों में ही हो जाता है और इसमें खतरा बहुत ज्यादा होता है। इसमें काफी खतरा होता है। सबकुछ आपके विरुद्ध होता है, एक तरह से सबकुछ आपके विरुद्ध होता है। आप कमजोर हैं; आप हल्के हैं; आप इस दुनिया में पहले कभी नहीं आए होते और अनजान होने की बात करें तो आप कदम रखते हैं। आप जा रहे हैं एक अनजान जगह पर बिल्कुल आपको कुछ नहीं पता। आपका दिमाग भी काम नहीं कर रहा, उस तरह नहीं जैसे काम करना चाहिए जब आप फैसले ले सकते हैं और ऐसे ही बाकी चीजें यह बस एक एहसास है और आप आगे बढ़ते हैं और इसमें यह कमाल की ताकत लगती है और आप गर्भ से बाहर आते हैं। इतना सारा पानी होने के साथ और मां पर निर्भर होने के अलावा और मां से जुड़ा होना उस अम्बिलिकल कॉर्ड के जरिए आपको सबकुछ अपने आप करना होता है। आपको अपने आप स्वांस लेनी होती है।

तो आपको यह बताने की वजह क्या है ? आप मुश्किलों से जूझ चुके हैं। आपने संकट पहले भी देखे हैं तो इस चुनौती का सामना करें और इस बेहद अंधकार भरे समय में भी अपनी रोशनी को खोजिये, खुशी को ढूंढिए, उम्मीद ढूंढिए; समझ ढूंढिए; स्पष्टता ढूंढिए अपने हृदय में और आपका अस्तित्व जी हां, और सिर्फ रहिये नहीं विकास कीजिए, अच्छा महसूस करें और कृतज्ञता रखें! तीन बातें — खुद को जानें, जीवन सचेतना से जीयें और हृदय को कृतज्ञता से पूर्ण रखें। इन्हें मत भूलिए, इन्हें मत भूलिए ये बहुत ही जरूरी बातें हैं। जानिए कि आप कौन हैं क्यों ? ताकि आपको पता हो कि ये खजाना आपके भीतर है इससे आपको और शक्ति मिलेगी; यह आपको सशक्त करेगा आगे बढ़ने के लिए आपको यही तो करना है। इससे अच्छा है कि आप पागल हो जाते हैं कि "हे भगवान जानते हैं अब मैं कहां जाऊंगा और दिमाग काम करना और सोचना बंद कर देता है मुझे वहां जाना है, मुझे यहां जाना है।”

देखिये आप ही अपनी परिस्थिति के निर्माता हैं या तो आप खुद के लिए स्वर्ग बना सकते हैं या फिर अपने लिए नरक बना सकते हैं यह आपके ऊपर है। मेरा सुझाव क्या है ? अपने लिए स्वर्ग बनाइये, उसकी स्थापना कीजिये और मज़े करें। आनंद लें! सभी बातों का! अस्तित्व की खुशी इस पर विचार करें! इस पर विचार करें कि धरती हजारों-हजारों मील प्रति घंटे की रफ्तार से घूम रही है और हम बिल्कुल सुरक्षित हैं। यहाँ सब कुछ ठीक है। आप समझिये इसे यह स्वांस आप में आ रही है यह आपकी ताकत है बाकि सबसे ज्यादा शक्तिशाली है।

तो उम्मीद है आपका दिन अच्छा बीते और बढ़िया तरीके से बीते। आप सुरक्षित रहें; सेहतमंद और खुश रहें। यह सब बहुत जरूरी है, जी हां!

मैं आपसे फिर मिलूँगा। धन्यवाद!

लॉकडाउन — दसवां दिन 00:21:06 लॉकडाउन — दसवां दिन Video Duration : 00:21:06 प्रेम रावत के साथ (हिंदी में अनुवादित)

प्रेम रावत:

हेलो, हेलो, हेलो, सभी को! उम्मीद है आप सब ठीक हैं, सुरक्षित भी और सेहतमंद हैं कोरोना वायरस के इस समय में। तो मैं कुछ बातें करना चाहता हूँ पता है वो बातें जो मैं पूरा दिन सुनता रहता हूं। काफी अनिश्चितता है। कई गलतफहमी फैली हुई हैं। एक हाथ पर, हाँ, जो भी होता है उसका प्रभाव हम पर पड़ रहा है। जी बिल्कुल होता है और उनमें से कुछ गलत फैसले, हाँ बिल्कुल प्रभाव डालते हैं। क्योंकि आप देखिए अमेरिका को, पहले स्थान पर पहुंच गया है गलत कारणों की वजह से, पहले नम्बर पर और जब आप चीन और अमेरिका की आबादियों की तुलना करते हैं तो यह चीन से काफी कम है पर चीन काफी बेहतर है अमेरिका से, (और फिर हाँ मैं संख्या को देख रहा था, मैं राजनीतिक स्थिति में नहीं जा रहा हूं।)

तो हमें खुद ही कुछ फैसले लेने होंगे और वो कौन से फैसले होंगे जो हमें लेने हैं ? अब इस परिस्थिति में मैं निर्धारित बातें नहीं कह सकता, लेकिन खुद से एक वादा जरूर कर सकता हूं कि खुद में अच्छा महसूस करूंगा यह सुनिश्चित कर सकता हूँ मैं। क्योंकि मैं इस बारे में कुछ कर सकता हूं। मैं शायद कोरोना वायरस के बारे में कुछ ना कर पाऊं। मैं शायद परीक्षण के बारे में कुछ ना कर पाऊं। मैं लाखों और चीजों के बारे में शायद कुछ ना कर पाऊं, पर अर्थव्यवस्था भी है उसमें एक, पर जो भी हो मैं जहां भी जाऊं, जहां भी जिस भी परिस्थिति में मैं चला जाऊं, क्योंकि पता है यह आसान नहीं है और सब जानना चाहेंगे यह बात। सबको बहुत अच्छा लगेगा यह कहना कि “हां यही तो होगा यह।” पर बहुत मुश्किल है, क्योंकि इसमें है एक गलती फिर एक गलती फिर एक गलती — और मुझे भरोसा है कि वो गलतियां करते ही जायेंगे।

पर काफी समय पहले से जब अरब क्रांति हुई और मैं कुछ राजनैतिक नेताओं से मिल रहा था वहां पर। मैं इटली में था, मुझे याद है एक महिला वह अरब क्रांति की घटनाओं से बहुत प्रभावित थीं और उन्होंने मुझसे कहा कि “लोग कैसे जीवित रहेंगे ? लोग कैसे ठीक रह पाएंगे ? यह कितना बुरा है।” और मैंने कहा, “यही तो एक बात है अंत में जो सही होती ही है, वह है जनता। हम संभल जाते ही हैं कई राज्य, कई राजा, कई शासक आए और चले गए, कई सभ्यताएं आईं और चली गईं, लेकिन अंत में जनता जीवित रही।” और यह बहुत बड़ी बात है।

जानते हैं आप, जब आप इन महान साम्राज्य को देखते हैं जो नष्ट हुए हैं, पर लोग आगे बढ़े और वो बदल गये। उन्होंने खुद को जीवित रहने दिया है। तो मैं क्या कर सकता हूं ? अब सबसे पहले मुझे हिम्मत से काम लेना होगा, कमजोर बनकर नहीं। क्योंकि कमजोरी की वजह से हो सकता है कि मैं उस वक्त में मौजूद संभावनाओं को देख ही ना पाऊं। और दूसरी बात यह है, सबसे जरूरी बात — परिवर्तनशील बनना होगा।

कल रात मैं इसी बारे में सोच रहा था जैसे कि आप इन पेड़ों को देखें कुछ पेड़ बहुत ही सख्त होते हैं। वह लचीले नहीं होते वो टूट जाते हैं, बस खत्म, कट जाते हैं। और वो पेड़ जो हवा में भी लचीले रहते हैं तूफान में भी बचते हैं। क्योंकि वो मुड़ सकते हैं। क्योंकि वो झुक सकते हैं, क्योंकि वो हिल सकते हैं। अब हां बिल्कुल, जानते हैं जिस तरह हम खुद को देखते हैं “अब मैं हिल नहीं सकता मैं तो बस मैं ऐसा ही हूं।” हम अपने आपको एक पत्थर की भांति देखते हैं, पर जब वह तूफान आता है पत्थर बने रहना अच्छा नहीं हैं। सबसे अच्छी बात होगी लचीला बनना।

मैं आपको उदाहरण देता हूं। जब मैं ब्राजील में था हां बिल्कुल, मैं स्पेन से निकला और ब्राजील तक गया और स्पेन छोड़ने की बजह थी अर्जेन्टीना में जाना और फिर अर्जेन्टीना के बाद मुझे युरग्वे जाना था। और सबकुछ तय था और हम कुछ इवेंट्स करने वाले थे। एक जेल में जाने वाले थे और सबकुछ बढ़िया होने वाला था। तो मैं इसके इंतजार में था और मैं बार्सिलोना से उड़कर ब्राजील तक गया और मैं ब्राजील में था और फिर अचानक से यह ऐसा था कि शायद दूसरे दिन मुझे अर्जेंटीना जाना था, अर्जेंटीना की फ्लाइट लेनी थी मैं शायद साढ़े 4 घंटे या 4 घंटे दूर था ब्यूनस आयर्स (Buenos Aires) से और फिर अचानक से यह हुआ कि “अर्जेंटीना कोई नहीं जा रहा लॉकडाउन हो गया है।” और अब मुझे युरग्वे नहीं जाना क्योंकि मैं वहां जाकर इवेंट्स करूं और सभी लोग मुझे देखें और फिर इस कोरोना वायरस के फैलने की और संभावना बढ़े मैं यह नहीं चाहता था। यह कोविड-19 मुझे नहीं चाहिए, तो मैंने ना जाने का फैसला लिया।

तो अब मैं क्या करूंगा शायद वह हमें ले जाएं, शायद कुछ होने वाला है और यह परेशान करने वाला था, क्योंकि यह ऐसा था कि “ओके तो चलिए अफ्रीका चलते हैं। हम दक्षिण अफ्रीका चलते हैं!”

“नहीं आप दक्षिण अफ्रीका नहीं जा सकते।” क्योंकि जब तक उन्हें पता चला कि हम दक्षिण अफ्रीका जा रहे हैं अगले दिन खबर आ गयी कि “आप दक्षिण अफ्रीका नहीं जा सकते वहां पर लॉकडाउन है” और मैंने कहा कि “अब एक मिनट रुकिए। मैं क्या करूंगा ? अब मैं यहां पर क्या करूंगा ?” और फिर अचानक से ही मैंने देखा एक परिस्थिति बदल रही है। यह पानी की तरह है यह बदलती है, बदलती है, बदलती है, बदलती है, बदलती है, बदलती रहती है और जैसा कि आप जानते हैं बदलाव ऐसी ही चीज है। ज्यादातर लोग बदलाव से डरते हैं वो नहीं समझते इस बदलाव में क्या है। वो बस कह देते हैं “मुझे नहीं बदलना। मैं नहीं बदलना चाहता।”

इस पल में मेरी मानिए मैं भी बदलाब नहीं चाहता था। मेरा एक प्लान था! मेरा प्लान था मैं कई चीजें करूं सिर्फ मैं ही नहीं था। उसमें वो सब लोग भी शामिल थे अर्जेंटीना में जो मुझे देखने आने वाले थे। प्लान में वो लोग भी थे। उसमें वो सभी लोग थे जो वहां पर मंच लगाने वाले थे, माइक लगाने वाले लोग, ऑडियो ठीक करने वाले, वीडियो वाले, वो सब लोग जो वहां काम करने वाले थे और फिर जेल में जाने की जितनी अनुमति ली थी हमने वहां, मेरी विजिट के लिए। इसमें बहुत सारी तैयारियां की गई थीं। और वो बहुत देर से इंतजार कर रहे थे, काफी वक्त से कि मैं वहां पर आऊं, राह देख रहे थे, लेकिन “देखिए स्थिति को देखें यह आपके हिसाब से नहीं चल रही है समझ सकते हैं प्लान।” तो क्या था प्लान ?

हमारे पास कैमरा है और कैमरा यहां है और यह कैमरा पिक्चर बनाता है मैं नहीं कहता “पिक्चर लेता है” ध्यान रहे मैंने कहा “पिक्चर बनाता है” तो यह कैमरा यहां पिक्चर बनाता है और यह पिक्चर बहुत-बहुत ताकतवर होती हैं इन्हें कम नहीं समझना चाहिए — और यही वह वजह है कि मेरी उम्मीदें हैं उन पिक्चर्स की वजह से जो यहां बनती हैं तो मेरी ये सभी उम्मीदें थीं तो सबसे पहले प्रतिक्रिया “इसे करने की कोशिश करो पर यह तो नहीं हो सकता। आप नियंत्रण से बाहर हैं स्थिति बदल रही है। आप को पानी की तरह बनना ही है।”

जब आप पैक करें और सफर पर जायें पैक करके आपको तरल चीजों का ध्यान रखना होता है क्योंकि अगर आप ढक्कन ढंग से बंद ना करें तो पानी बह जाएगा। सबकुछ बह जाएगा, क्योंकि यही तो पानी की विशेषता है। इसे बहुत कम जगह चाहिए होती है। यह ऐसा ही है। कोई भी मौका मिलते ही यह बह जाता है और जहां जाना है वहां चला जाएगा। तो अचानक से ही यह ऐसा था। “अब एक मिनट रूकिये मैं इससे लड़ क्यों रहा हूं क्योंकि असल में मुझे वैसा ही बन जाना है जैसे कि परिस्थिति की मांग हो फिर कोई समस्या नहीं होगी। फिर कोई समस्या नहीं होगी।”

अब एक पायलट की तरह हम ऐसा हमेशा करते हैं। मेरा मतलब, अगर आपके रास्ते में एक तूफान आने वाला है आप आगे नहीं जाते आप कहेंगे “मैं इसके आस-पास घूम के जाऊंगा।” आप अपने रेडार पर देखते हैं, अपनी सैटेलाइट पिक्चर को देखते हैं और आप जानते हैं एक अच्छा जानकारी पूर्ण फैसला लेते हैं कि कौन-सा रास्ता सबसे अच्छा है। आप एक बार हवा को देखेंगे और अगर हवा एक तरफ बह रही है तो आप तूफान वाली दिशा में नहीं जाएंगे। अगर आप जा सकते हैं तो विपरीत दिशा में जायें और अगर उसी दिशा में गये तो आपको काफी आगे जाकर घूमने का मौका मिलेगा और आप एक अच्छा जानकारी पूर्ण फैसला लेते हैं कि पता करें कि पार होगा या नहीं होगा। “क्या आपको आस-पास से जाना है ?” और हां बिल्कुल इसमें से होकर गुजरना अच्छा फैसला नहीं होगा।

अगर यह छोटा है तो कोई बात नहीं, पर अगर बड़ा है तो आपके इंजन को नुकसान हो सकता है। फिर अगर जा सकते हैं तो इसके बीच से निकलकर जाएं। फिर आप क्या करेंगे इसमें नीचे तो आप जाना नहीं चाहते तो आप इसके आसपास से निकल कर जायें। इसके पास से निकलेंगे तो मैंने देखा “मुझे लचीला बनना होगा। मुझे जाना है, लेकिन इस स्थिति में एक ही काम करना है स्थिति मेरे अनुसार से काम नहीं करेगी मुझे इसके अनुसार चलना है।” और फिर मतलब साफ होने लग गया जैसे कि “हां मेरे जीवन में यही तो दिशा है, मुझे लचीला बनना है।”

अब इस परिस्थिति में कहना आसान है लेकिन जब ऐसी परिस्थिति नहीं होती क्या मैं तब भी समझूंगा कि मुझे लचीला होना है, सोचिए ? या मैं बस वहां पिक्चर बनाता रहूंगा यह जो ऊपर कैमरा है यह पिक्चर बनाता रहे यह पिक्चर लेता नहीं, यह पिक्चर बनाता है और पिक्चर काफी कमाल की होती हैं यह। मैं चाहता हूं कि चीजें एक निर्धारित ढंग से हों! बस इतना ही! “अगर उस तरह से काम नहीं हुआ तो मुझे बुरा लगता है।” और ऐसे लोग भी हैं जो कहेंगे कि “अमीर और ताकतवर लोग उनके पास एक पिक्चर है और वो इस पर काम करते हैं।” हां कुछ अमीर और ताकतवर लोगों ने अपनी सारी संपत्ति नष्ट कर दी। क्योंकि उनके दिमाग में एक पिक्चर थी और यह हर रोज चलती और बदलती रहती है। यह हर रोज चलती है, यह पिक्चर बनती है और फिर होता है कि “मैं उस तरह करने की कोशिश करूंगा जिस तरह यह पिक्चर बनी हुई है।”

पर यह इसके बारे में नहीं है। यह इस पिक्चर को दोबारा बनाने के बारे में नहीं कुछ और है जो बना के लिया जा चुका है। एक पिक्चर है जो पहले से ही ले ली गई है और वह पिक्चर है आपका अच्छा रहना। आपकी सुरक्षा, आपकी ताकत, आपकी हिम्मत, आप देखिए, यही-यही तो बात है इस दुनिया में हर कोई आपकी बुराईयों के बारे में जानता ही है। आपको भी इनके बारे में पता है, कोई सवाल ही नहीं। आपको गुस्से के बारे में पता है, आपको डर का पता है, आपको संदेह का पता है, अनिश्चितता के बारे में जानते हैं। दुनिया में किसी को भी यह समझाने की जरूरत नहीं है, लेकिन इन बाकी चीजों के बारे में नहीं जानते जो आप में ही हैं। और अफसोस की बात है ये बाकी बातें सच में ताकतवर होती हैं। करुणा — अपने आप में ही, अपने आप से, क्योंकि अगर यह करूणा आप में नहीं है, आप दूसरों के प्रति करुणा नहीं दिखा पायेंगे।

मैं जानता हूं कि आप सबसे अच्छा वर्ताव करना चाहते हैं क्योंकि यही आपको सिखाया गया है। पर इसकी शुरुआत कैसे होती है, करूणा आपके लिए भी होनी चाहिए। पहली बात वह स्पष्टता इससे पहले कि आप किसी और को स्पष्टता दिखाएं वह स्पष्टता आपके खुद के भीतर होनी चाहिए वरना अगर आप ही देख ना पाएं तो इसमें वाहन चालक के लिए कौन-सी अच्छी खबर है अगर बाकी सबकी नजर ठीक हो,पर उसी की ना हो ? इस तरह कब तक चलेगी वह गाड़ी; इस तरह कब तक चलेगी वह कार; इस तरह कब तक चलेगी वह फ्लाइट सुरक्षित ढंग से अगर पायलट को ही कुछ नहीं दिख रहा और बाकी सबको दिख रहा है ?

तो आप जानते हैं कि यह सावधानी उन्हें ऑक्सीजन मास्क के लिये बरतनी होती है। अगर आपके पास एक बच्चा है या बच्चे हैं तो आप पहले अपना मास्क पहनिये क्योंकि अगर ऑक्सीजन की कमी से आप बेहोश हो गए तो आप छोटे बच्चे की मदद कभी नहीं कर पाएंगे। तो सबसे पहले आप में स्पष्टता होनी चाहिए, सबसे पहले आप में करुणा होनी चाहिए, आप में वह समझ होनी चाहिए और फिर उसके बाद सिर्फ उसके बाद ही आप यह किसी और को दिखा पाएंगे। तो यह ऐसा बन जाता है; यह है उन बातों के बारे में आप एक इंसान होने के नाते आप में कुछ लक्षण हैं, लेकिन क्योंकि — जो भी आप जानते हैं शायद आपको किसी ने नहीं सिखाया कि आप में यह ताकत है लेकिन आपको पता है कि आप में है। अब समय है उन्हें इस्तेमाल करने का और अगर आप करेंगे अगर आप स्पष्टता रखें, अगर आप समझदारी दिखाएं, अगर आप सभी संदेह को निकाल दें और स्पष्टता हो फिर परेशानी नहीं हो सकती। समय बीतने पर परेशानी नहीं रहेगी आप कदम ले पाएंगे। कम से कम वो बातें जो आपके मन में बनती हैं अगर आप उन्हें ठीक तरफ से देख पायें। ऐसा होता है मैंने हर जगह देखा है, हर जगह मेरा मतलब और मैं यह उदाहरण की तरह बताता हूं।

एक बार मेरे पोते का जन्मदिन था और हम उसके लिए सोचकर कुछ तोहफे लेकर आए। हमने सोचा था कि हम उसे जन्मदिन की पार्टी के बाद देंगे और कुछ ऐसे तोहफे थे जो उसने पार्टी से पहले ही खोल लिए थे और वह मेरे पास आता है और वह कहता है “यह मेरा सबसे खराब जन्म दिवस था” और फिर मैंने कहा “क्या!” और फिर उसने अपना तोहफा खोलना शुरू किया और उसने कहा कि “अच्छा नहीं यह अच्छा जन्म दिवस था।” यह कहां से आया ? ये बात कहां से आयी ? क्योंकि उसके पास उसके दिमाग में कुछ था। उसके मन में था कि उसका जन्मदिन कैसा होना चाहिए! और वह उसके हिसाब से नहीं जा रहा था। वह कुछ बदल गया था।

आप उन लोगों को देखें जिनकी शादी होती है और एक नया शो हुआ करता था उसे कहते थे “ब्राइडजिल्लास” और दुल्हन पागल हो रही होती थी क्योंकि उनके मन में एक धारणा थी कि शादी ऐसे होती है और जब वह उसके हिसाब से नहीं जा रही होती थी तो यह कैमरा जो यहां ऊपर लगा हुआ है यह कुछ कमाल की पिक्चर लेता है और फिर आप सबकुछ इसके हिसाब से सोचने लगते हैं, “यह कैसे हुआ; यह कैसे हुआ; यह कैसे हुआ; यह कैसे हुआ; यह कैसे हुआ ?” और आपकी दुनिया इसके आसपास घूमने लगती है तो इन परिस्थितियों में भी यह शायद थोड़ा मज़ाकिया है क्योंकि इस समय आपको नहीं पता कि क्या उम्मीद रखनी है। इस स्थिति की कोई तस्वीर है ही नहीं लेकिन अब धीरे-धीरे जैसे समय बीत रहा है पिक्चर सामने आ रही हैं “यह ऐसा होना चाहिए; यह वैसा होना चाहिए; यह ऐसा होना चाहिए!”

क्यों परिवार एक साथ नहीं रह पाते और एक-दूसरे को नहीं झेल पाते इन्हीं तस्वीरों की वजह से “मेरी आपसे यह उम्मीद है, मेरी आपसे यह उम्मीद है” ऐसी उम्मीद थी, ये सब उम्मीदों के बारे में है।” और उन्हें हटा दें अगर तो अचानक से व्यक्ति सरल हो जाता है और स्थिति आसान हो जाती है, जो बदल सकती है, बदलती है जो साथ चल सकती है और यही तो हैं आप, यही तो है संभावनाएं आप ऐसे हो सकते हैं। आपको यह दूसरा व्यक्ति नहीं बनना है, जो हमेशा ही भ्रमित रहता है, जो सोचता है, परेशान है और अजीब-सा रहता है और खोजता रहता है कि “यह कहां है; वह कहां है; यह कैसे होता है; यह कैसे काम करता है और यह कैसे चलता है ?”

आपको ऐसा नहीं करना है। आपको हिम्मत रखनी है। आपको स्पष्टता रखनी है और जो भी परिस्थिति हो जो भी मुश्किलें आपकी ओर आयें, मैं यह आपको बताना चाहता हूं कि आप में इतनी हिम्मत और साहस है कि आप कोई भी परेशानी या कोरोना वायरस आपकी ओर अगर आए तो आप उसको झेल सकते हैं। आप सहन कर सकते हैं उसे; आप सामना कर सकते हैं; आप अपना ख्याल रख सकते हैं; आप सुरक्षित रह सकते हैं। हां बिल्कुल यह दो दीवारों के बीच में है, वो दीवारें जो आपका जीवन, आपका अस्तित्व, आपके लिए सबकुछ होना चाहिए। क्योंकि यह है। यह उनके बीच में है। यह सबसे कीमती तोहफा है, सबसे सुंदर तोहफा जो आपको दिया गया है पहले से ही आपको दिया जा चुका है और आप कर्ताधर्ता हैं। कितने खुशकिस्मत हैं आप कि आप कर्ताधर्ता हैं उस तोहफे के जिससे अच्छा और कुछ हो नहीं सकता और यह है जीवन — इसे कहते हैं इंसान होना, जो चाहता है आजाद होना, जो चाहता है संतुष्ट होना, जो चाहता है शांति से जीना! शांति से रहें। खुश रहें। हृदय की आकांक्षा पूर्ण करें और आप जीवन का महत्व समझ जायेंगे।

तो एक बार फिर उम्मीद है कि आप ठीक रहें। सुरक्षित रहें। आप सब सेहतमंद रहें। खुश रहें।

धन्यवाद।

लॉकडाउन — नौवां दिन 00:16:31 लॉकडाउन — नौवां दिन Video Duration : 00:16:31 प्रेम रावत के साथ (हिंदी में अनुवादित)

प्रेम रावत:

सबको नमस्कार! मुझे उम्मीद है आप सब ठीक हैं। मुझे पता है कि कुछ लोग यह वीडियो देख रहे हैं, ऐसे भी कई लोग हैं जो यह वीडियो देख रहे हैं जिन्हें बीमारी लग चुकी है। मुझे उम्मीद है कि आप जल्द ठीक हो जाएंगे। गंभीर समय, गंभीर मुद्दे, लेकिन अच्छा महसूस करना अब भी महत्वपूर्ण है। अच्छा सोचना अब भी जरूरी है। सुरक्षित होना अब भी जरूरी है और अच्छा होना अब भी जरूरी है।

"यह तो बस केवल इस समस्या के बारे में नहीं होना चाहिए?" नहीं, क्योंकि यह वह समस्या है जो हमारे लिए हद से ज्यादा बढ़ सकती है। जी हां! बिल्कुल हाथों से बाहर निकल सकती है, अगर हम इसे सही ढंग से नहीं देखते और इसके अनुपात हैं "हां यह गंभीर हैं लेकिन इसी समय में कुछ और भी चल रहा है। इस महामारी के अलावा भी एक आपातकालीन स्थिति है यह कोरोना वायरस महामारी और वह है आपका जीवन, आपका अस्तित्व, आप।" यह आपके जीवन के सफर में एक हिचकी है। आपकी समझ, आपका अपना रास्ता और वह मंजिल जो आपने अपने लिए चुनी है। तो सवाल यह उठता है, हां बिल्कुल है कि "वह क्या है जो आपने अपने लिए चुना है ?

बहुत सारे विचार हैं, बहुत सारे मुद्दे हैं, लेकिन इस समय वो बातें जो सच में जरूरी हैं उनके बारे में कुछ भी हो सकता है। क्योंकि यह नहीं है..... एक तरह से आप बीमारी के बारे में कुछ नहीं कर सकते हैं और कैसे यह फैलती है और बाकी चीजें भी, लेकिन फिर भी बिल्कुल सावधानियां लेते रहिए। जी हाँ! और यह बहुत सशक्त कर सकता है आपको — आपके लिए ही अपने हाथ धोएं, दूरी बनाए रखें, बीमारी ना लें और ना ही बाकी लोगों को बीमारी दें। बिल्कुल पहले बीमार ना हो जायें, लेकिन अगर बीमारी हो जाए फिर भी हिम्मत रखें और स्पष्टता और समझ भी। इनकी जरूरत पड़ेगी आपको। और मैं इन्हीं बातों पर चर्चा करना चाहता हूं।

तो मेरे लिए यह वो मुद्दा नहीं है जिसमें "क्या मैं भूकंप को रोक सकता हूँ ?" नहीं, लेकिन घर मजबूत करने में मदद जरूर कर सकता हूं और यही जरूरी है। तो अगर भूकंप आया या भूकंप नहीं भी आया कम से कम घर तो मजबूत है ना, लचीला है इतना कि जो भी हो वह ठीक रहेगा और हमें इसी बारे में बात करनी है। यही हमें समझना है। क्योंकि आपके पास क्या है ? आधार पर नजर डालिये — मूलभूत आधार पर। आपके पास जीवन है और आप इन परिस्थितियों में आपके पास अब भी आपका कमाल का अस्तित्व है। आप जीवित हैं! जी हाँ! आप महसूस कर सकते हैं, आप समझ सकते हैं, आपका एक हृदय है। आप नफरत से अधिक करुणा को मानते हैं। आप दर्द से ज्यादा खुशी को चाहते हैं। दुख से ज्यादा, आप संदेह से ज्यादा, स्पष्टता चाहते हैं — आप ऐसा ही करते हैं और आप यह इसलिए करते हैं, क्योंकि जो आप हैं, आप एक इंसान हैं। शायद आपका कोई निर्देश-पत्र नहीं है, लेकिन आपकी बहुत सारी पसंद जरूर हैं और इस दुनिया में आपको उथल-पुथल से ज्यादा शांति पसंद है।

यह बात है कि "अंत में हमें खुद पर नियंत्रण रखना ही है!" और इससे मेरा क्या मतलब है ? क्योंकि पूरा दिन हम अपने अच्छे होने की जिम्मेदारी को किसी और की वजह से दरकिनार करते हैं — "ओह! डॉक्टर मेरा ख्याल रखेगा, ओह! यह नहीं तो वह मेरा ख्याल रखेगा, सरकार मेरा ख्याल रखेगी।" इस वक्त कुछ जो नेता हैं (अब वह सभी नहीं बिल्कुल) पर कुछ नेता वह इतने बुरे हैं मेरा मतलब वह तो बस सोच ही नहीं रहे। अकल्पनीय है यह! ऐसे लोग भी हैं जो ज्यादा काम कर रहे हैं। स्वास्थ्य विभागों में वो लोग जो काम कर रहे हैं और उनकी तारीफ हो रही है और मैं भी उनकी तारीफ करता हूं और उन्हें कुछ नेताओं के फैसलों के परिणाम भुगतने पड़ रहे हैं जिन्हें कुछ नहीं पता कि वह क्या कहते हैं, उन नेताओं को कुछ नहीं पता कि वह क्या कर रहे हैं और अंत में यह एक मौका नहीं है आरोप लगाने का। यह मौका है अपने अस्तित्व को संभालने का।

मैं यह कहता आया हूँ आज नहीं — हमेशा से ही कि आपको अपना जीवन संभालना है। जी हां! आपको ही, आप ही वह देवदूत हैं जो खुद को बचाने आए हैं और मैं यह कितने समय से कहता आया हूं, कितनी बार कहा मैंने। पर अब इस पर कोई सवाल नहीं रहा और कोई भी संदेह नहीं रहा है। क्या आप की तकनीकी आपको बचाएगी ? जी नहीं! नया फोन खरीदने से कुछ नहीं मिलेगा। कोई व्यक्ति कुछ नया लाता है उससे ज्यादा फर्क नहीं पड़ता और अब आप आधार पर लौट आइए। क्यों ? जी हां! 6 फुट की दूरी रखें, अपने हाथ अच्छे से धोएं, दूरी, दूरी, दूरी! वाह! आपका मतलब, "और अब कोई सरकार मेरी मदद नहीं कर सकती अगर मैं दूर नहीं रहा ?" जी नहीं! "मुझे अपने खुद के साथ उठना होगा!" जी हां!, "क्या मुझे अपनी बातों को सुधारना पड़ेगा ?" जी हां! "और मैं इन सबको कैसे झेलूँगा, यह अलग रहने का समय और बाकी सब कुछ।" अब देखिए, यही तो आपको करना है।

अब सवाल आता है कि “अच्छा, लेकिन "अब क्या आपको पता है आप कौन हैं ?" और इसलिए मैं कहता हूं, पता है, तीन बातें कर सकते हैं "आप खुद को जानिये; अपने जीवन को सचेतना से जीयें......" और यह एक बड़ा मुद्दा बन गया है "जीवन सचेतना से जीयें।" आपको सिर्फ अपना जीवन जीने को नहीं मिलता पर आपको इसे सचेतना से जीना है, आपको जागरूक रहना है "मैं क्या चाहता हूं, मैं क्या कर रहा हूं और वह कौन है, क्या चल रहा है ?"

"अपने जीवन को अच्छे से जीयें" और तीसरी बात "जीवन में कृतज्ञता लाएं।" क्योंकि इससे सब झेलना मुमकिन हो जाता है — कृतज्ञता से! हृदय से धन्यवाद देना — इस सबके बीच में भी महसूस करना कि "वाह! मैं जीवित हूं" और हर रोज जब मैं जीवित हूं धन्यवाद दीजिये, सराहना कीजिये।

तो इस बात का यह रहा सार — आप! और आपको आना है और फिर आपको वयस्क बन जाना है। शायद ऐसी ही चीज के लिए — हम सब बिल्कुल किसी और को जिम्मेदारी सौंप देते हैं जैसे कि "कोई और मेरा ख्याल रखेगा।" बहुत सारे लोग हैं वह तो बस — "ओह हां! मेरी सारी समस्या हल हो जाएंगी, अगर मैं चर्च के भीतर चला जाऊं। मेरी सभी समस्याएं सुलझ जाएंगी, अगर मैं मंदिर चला जाता हूँ। मेरी सभी परेशानियां खत्म हो जाएंगी अगर मैं मूर्ति के समक्ष झुक जाता हूं।" लेकिन अब आप नहीं जा सकते। तो अब आप क्या करने वाले हैं ? यह कितना सरल है कि जिसकी आपको आराधना करनी है वह आपके भीतर ही है। वाह, मेरा मतलब, शानदार! ऐसी समस्या आ भी गई तो कोई बात नहीं। वह शांति का समुद्र आपके भीतर है — वाह बढ़िया! वह स्पष्टता का समुद्र आपके भीतर ही है, जबरदस्त! और यही समय है जानने का, समझने का और महसूस करने का।

वह एक बात कि समुद्र में एक बूंद है यह सभी जानते हैं, लेकिन एक बूंद में समुद्र है यह बहुत कम लोग जानते हैं। यह समय है बूँद में समुद्र ढूंढने का। क्योंकि वह बूंद कबीर के अनुसार आप स्वयं ही हैं! वह आप हैं। इस बूँद में समुद्र खोजिए। और इस समय जो कुछ भी चल रहा है यह रुक जाएगा। आपको तथ्य जानने होंगे, झूठ नहीं। हर कदम जो आप लेंगे वह तथ्य के साथ होना चाहिए, झूठ के साथ नहीं। आपको स्पष्ट होना है; आपको होना ही है — सच में यह समय है स्पष्टता की अहमियत समझने का। यह समय है सचेतना की अहमियत समझने का। यह समय है पूर्ण होने की अहमियत समझने का। और यही समय है अस्तित्व की अहमियत को समझने का और हिम्मत रखने का, कमजोरी नहीं। क्योंकि आप ये गलतियां करते हैं और ऐसे तो कोरोना वायरस का ही फायदा होने वाला है।

आदर्श स्थिति! हां! यही होगी एक आदर्श स्थिति कि आप महामारी से बच सकें और फिर अपनी सेहत का ध्यान रखें जबतक कि कोई समाधान या फिर कोई दवाई नहीं बन जाती और खत्म हो जाए यह बीमारी। वह होगी एक आदर्श स्थिति, पर कुछ लोग इतना इंतजार नहीं कर सकते; उनके पास तो है ही नहीं। लेकिन दोबारा, आपके पास — आप देखिए आपको समझना होगा आपके भीतर एक डॉक्टर है, सच में। वह सभी बातें जो आप में है आपके भीतर एक डॉक्टर भी है — और एक लैबोरेट्री है जिसमें लगातार परीक्षण होते रहते हैं। "अच्छा! मुझे ये नहीं पता! अच्छा! मुझे वो भी नहीं पता! मुझे कोरोना वायरस नहीं पता।" मुझे इसके लिए ऐन्टीबाडीज नहीं निकालनी होंगी और यही वह पहला डॉक्टर है जो कुछ भी करता है। और यह क्या करता है ? कई जगहों पर जहां यह देखते हैं, इसे पता है आपको यह लक्षण है तो यह भेजते हैं कि "घर जाइये, जी हां दूर रहिए!" ताकि आपका यह डॉक्टर आपका इलाज कर पाए।

पर वह डॉक्टर कब काम करेगा जब आप हिम्मत रखेंगे, जब आप भीतर से खुशी रखेंगे, जब आप में होगा आनंद, जब आप में होगी स्पष्टता। इन बुरी परिस्थितियों में भी और यह बहुत ताकतवर है; यह शक्तिशाली समय है। क्योंकि मैंने जो भी अब तक कहा वह सच हो रहा है और मैं नहीं कहता कि "मैं सही था और आप गलत" — यह मेरी बात नहीं है, पर मेरा कहना है कि "सुनिए जो मैंने कहा है, सुनिए जो मैं कह रहा हूं, क्योंकि जो मैं कह रहा था उससे आपको मदद मिलेगी।" और वो लोग जो बातें सुन रहे थे उनको पता है कि मैं क्या कह रहा था।

तो आपके भीतर की अच्छाई को उजागर कीजिए। उस अच्छाई को बाहर आना ही होगा इस वक्त। वह दो भेड़िए जो आप में लड़ते हैं — उसमें से अच्छे भेड़िए को बढ़ावा दीजिए। यह वह समय नहीं है कि आप प्रयोग कर रहे हैं कि "क्या होगा अगर मैंने बुरे भेड़िए को बढ़ावा दिया। ?" जी नहीं, यह समय है जब आप अच्छे भेड़िए को बढ़ावा दें। बस! यह समय सवालों का नहीं है; यह समय नहीं है उन लाखों मुद्दों को उठाने का; यह समय है जानने का, यह मानने का समय नहीं है; यह समय है कि आप जानिए, जानिए कि अहमियत क्या है जानने की। यह समय है कि आप उभरकर आएं, खुद में वयस्क बनें। अपनी समझ में आप विकास करें। अपनी समझ में — और खुद को तलाशें, खुद को आप जानें। सचेत जीवन जीयें और हृदय को कृतज्ञता से पूर्ण करें। मेरे लिए यह एक जीत का मंत्र है, एक कमाल का जीतने का मंत्र।

तो सुरक्षित रहिए; अच्छे रहिए आप! और मैं आपसे फिर से मिलूंगा! धन्यवाद!

लॉकडाउन — आठवां दिन 00:18:31 लॉकडाउन — आठवां दिन Video Duration : 00:18:31 प्रेम रावत के साथ (हिंदी में अनुवादित)

प्रेम रावत:

सबको नमस्कार! मुझे उम्मीद है आप ठीक होंगे बिल्कुल और दोबारा आज भी हम सवालों के जवाब देंगे। एक और सवाल है आज के लिए कहते हैं "मैं अपनी पत्नी के साथ, सास और बेटी के साथ हूं और 8 साल की लौरा। लौरा और मैं इस समय का पूरा फायदा उठाते हैं। और मैं उसे बताता हूं आपके विचार और आपकी बातें उसे पसंद आती हैं लेकिन मेरी पत्नी और सास काफी घबराए हैं। मैं उनकी मदद करना चाहता हूं, लेकिन मुझे पता नहीं कैसे क्या आप बताएंगे? शुक्रिया!" यह सवाल भेजा है पेड्रो ने।

अच्छा सवाल है पेड्रो, क्योंकि मुझे लगता है कि कई लोग काफी डरे हुए हैं कि क्या होने वाला है और यह काफी बड़ी बात नहीं है। जब इसके बारे में आप सोचते हैं आपको बस कुछ सावधानियां बरतनी है। अब जो मैं समझा हूं वह ये कि यह वायरस एक कॉमन-कोल्ड वायरस है और इसके काफी हल्के लक्षण होते हैं अगर परेशानी ना हो पहले से ही तो यह काफी बिगड़ सकता है। यही है मेरी समझ जो मैंने डॉक्टर से बात करके समझा है। लेकिन असल में अगर आप अपने हाथ साफ रखें और मुंह को न छुएं, उस व्यक्ति से दूर रहें जिसे शायद यह बीमारी हो सकती है और ऐसी जगह में ना रहें जहां उनकी छींक की वजह से कीटाणु फैल गए हों। फिर आपको चिंता करने की जरूरत नहीं है बिल्कुल।

तो अगर आप अलग हैं और बाहर नहीं निकल रहे और दूरी बनाई हुई है सभी से। आप हाथों को साफ रख रहे हैं, अपनी नाक मुंह और आंखों को नहीं छू रहे तो आपको डरने की जरूरत नहीं है। इस बात से हो सकता है कि किसी के जीवन में फर्क पड़े या ना पड़े, लेकिन सच में जो बात उन्हें समझनी है वह यह है कि यह जीवन ही है और इस जीवन के प्रति सराहना होना अब भी एक अहम बात है। परेशानी नहीं होगी अगर वह सावधानी रखें वह ठीक रहेंगे लेकिन पता है और शायद ऐसी परिस्थितियों में लोग काफी भ्रमित हो जाते हैं। लेकिन सुनिए, आपको सड़क पर जाते हुए ये सावधानियां रखनी है।

बहुत बार जब अमेरिकी इंग्लैंड जाते हैं और वह सड़क की दूसरी तरफ ड्राइव करते हैं और यह मुमकिन है कि वो ट्राफिक को देखने के लिए गलत दिशा में देखें और वह देखते हैं कि “ओह हां! खाली है” और वह आगे चलते हैं जबकि हो सकता है कि गाड़ी सामने से आ रही हो। तो सावधानियां हमें ध्यान में रखनी ही है अगर हम यह सावधानी नहीं रखेंगे, हम वो एक अहम काम नहीं कर पाएंगे जो हमें करना है। तो यह मुद्दा है बातों को प्राथमिकता देने का। डरना हमारी प्राथमिकता नहीं हो सकता, क्योंकि यह आपके शरीर को और थका देगा यह ठीक नहीं होता। और जब ऐसा होगा मेरा मतलब —घबराहट, लोग इस बात पर घबराए हुए हैं और वह सो नहीं पा रहे हैं। यह शायद आपके इम्यून सिस्टम के लिए सबसे बुरा है। आपको अच्छी नींद लेनी जरूरी है ताकि रोग प्रतिरोधी क्षमता अच्छी रहे ताकि आप बीमार ना हों। देखिये! अच्छी खबर यह है कि आप सावधानी ले सकते हैं और इससे आप सुनिश्चित होंगे की बीमारी आपको नहीं लगेगी। यह इतना ही आसान है बस और इसलिए डरने की कोई वजह नहीं है।

"प्रिय प्रेम! मेरा एक सवाल है। कृपया हम क्या दे सकते हैं खासकर बच्चे और पोते-पोतियों को ऐसे समय में करुणा, प्यार और अपनेपन के अलावा ?" — यह पूछा है बारबरा ने विएना से।

हैलो बारबरा! अच्छा सवाल है आपका। "हम उन्हें क्या दे सकते हैं ?" पहली बात हमारा परिवार जिनके साथ हम इस स्थिति में बंद हैं। एक बात मैं बताना चाहता हूं "सबको थोड़ी-थोड़ी जगह दीजिए, सबको एक स्पेस दीजिए।" यह बात अगर हम नहीं करते हैं अगर पालन नहीं करते हैं (खासकर अगर हम घर की छोटी जगह में बंद हैं तो) यह सच में सभी को पागल कर सकता है। तो कृपया उस कोमलता के साथ कुछ अच्छा करें और यह नहीं कि "ओह हां, मैं आपसे अच्छा व्यवहार करूंगा!” पर इसका असल मतलब देखें और इसका असल मतलब तब निकलेगा जब आप एक-दूसरे को समझेंगे, एक-दूसरे को कुछ जगह देंगे और यह बहुत-बहुत-बहुत जरूरी है। तो मैं बस कहता हूं कि एक-दूसरे के साथ खुश रहिए। बैठे रहने के अलावा और एक-दूसरे में गलती निकालने से अच्छा, क्योंकि परिवारों को गलती निकालना बहुत अच्छे से आता है। वह बस बैठे-बैठे — "अच्छा! यह तरीका नहीं है काम करने का यह गलत है, वह गलत है "..... और ऐसे ही यही सब और यह किसी को अच्छा नहीं लगता है। बिल्कुल भी नहीं।

यह करने से अच्छा है कि आप सबको स्पेस दें, सबकी इज्जत करें। हम घर के बाहर सबकी इज़्जत करने को आतुर रहते हैं, लेकिन यह एक अच्छा समय है खुद को आपस में इज्जत देने का। एक-दूसरे को कुछ स्पेस दें, एक दूसरे को समझिये; एक-दूसरे को अपनापन दें, जब भी जरूरी हो। एक-दूसरे को समझिए आप सभी लोग और उनके साथ होने की सराहना कीजिए। जब आप किसी की सराहना करते हैं कुछ बहुत ही सुंदर निकल कर आता है और आपको एक-दूसरे के साथ की सराहना करनी चाहिए इसलिए नहीं क्योंकि आप उन्हें पसंद करते हैं, पर आप बताते नहीं लेकिन आप पसंद तो करते ही हैं ना। तो यह एक अच्छा समय है यह सब करने का। जब आप ऐसी परिस्थिति में हैं जब लॉकडाउन की स्थिति है।

"मेरा सवाल है मैं कुछ चैट ग्रुपस में हूं और लोग काफी परेशान हैं और सभी के मन में निराशा और उदासी है। मैं उन्हें बताना चाहता हूं कि बहुत कुछ सुंदर है आसपास लेकिन मैं थोड़ा चिंतित हूं क्योंकि उनका नज़रिया मुझसे अलग है वह सराहना नहीं कर पाएंगे और मैं किसी को बुरा महसूस नहीं करवाना चाहता इस गंभीर बात को कुछ छोटा बताकर। क्या सिर्फ उन्हीं के साथ अपने मन की बात साझा करूं जिनको मैं जानता हूं और मेरा नज़रिया भी जानता हूं या उनके साथ साझा करूं जिन्हें मैं नहीं जानता ?" और यह सवाल डेविड ने पूछा है। मैं नहीं जानता आप कहां से हैं डेविड, पर यह अच्छा सवाल है।

और यह वजह भी कि यह अच्छा सवाल है वह ये कि "क्या आप लोगों को अच्छी खबर देते हैं ?" और आप इसे आसान नहीं समझते काफी लोगों के लिए बहुत गंभीर स्थिति है और यह बहुत ही गहन बात है। क्योंकि यह उन वायरस में से एक है, जो वैसे तो हमें वायरस का पता है जैसे कॉमन-कोल्ड होता है — पर यह वह है जिसके बारे में हमने कुछ नहीं जानकारी ली। इसका तज़ुर्बा नहीं है हमें और यह प्रबल हो गया है बहुत ज्यादा बढ़ गया है और यह एक-दूसरे पर आरोप लगाने का समय बिल्कुल नहीं है। इन बातों में पड़ना लेकिन यह समय है एक-एक कदम देखकर रखने का और यह उदास और परेशान होने का समय बिल्कुल नहीं है लोग इनसे छुटकारा चाहते हैं। पता है मेरा सुझाव आपके लिए यह होगा कि कोशिश करें कि यह कैसा जाता है शायद आपको 100% न मिले, शायद आपको 10% मिले, शायद आपको 5% सफलता मिले। लोग सकारात्मक संदेश की सराहना करते हैं। यह बहुत अच्छा होगा, क्योंकि यह परेशान और उदास होने का समय नहीं है। मेरा मतलब यूं ही बैठकर परेशान होते रहना। "मेरी नाव डूब रही है, मैं डूब रहा हूं; मेरी नाव डूब रही है, मैं डूब रहा हूं" ऐसा बोलने से आप बचेंगे नहीं। कुछ करिए! भगवान के लिए कुछ कीजिए! और सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि इस बात पर एक सच्चाईपूर्ण दृष्टिकोण रखिये। सभी बातों पर गौर कीजिए सिर्फ एक बात पर ही नहीं।

क्योंकि देखिये मैं यह कई बार कहता हूं आप गाड़ी चला रहे हैं और आपको एक चिह्न दिखता है जिस पर लिखा है "गति सीमा।" "50 मील प्रति घंटा" आप क्या करते हैं ? आप क्या करते हैं ? क्या आप अपना सिर स्पीडो मीटर के ऊपर रखकर आप कहते हैं कि यह है सीमा और इसने दाएं या बाएं या ऐसे या वैसे की बात नहीं की थी। दूसरी गाड़ी को मारना भी नहीं कहा था मैं सुनिश्चित करूंगा कि 50 मील प्रति घंटे पर ही चलाऊं और यह बिल्कुल सही करूं तो यह आपको किसी परेशानी में जरूर डाल देगा और यही होता है।

कई बार लोग सिर्फ एक ही बात पर ध्यान देने लगते हैं और जानते हैं जैसे कि मैं हमेशा एक सवाल उठाता हूं "लोगों को डरावनी पिक्चर देखना क्यों पसंद है ?" मेरा मतलब, उनमें से कुछ बहुत बुरी होती हैं, पर लोगों को अच्छा लगता है। उन्हें डरना अच्छा लगता है और यह एक "सुरक्षित डरना" होता है। पर उन्हें डरना ही है और इसलिए शायद यह एक और बात है जो लोगों के मन में है "ओह! जैसे कि, हां उदासी और परेशानी ही है इसमें और जैसे कि यह बुरा है, यह खराब है, हम सब मरने वाले हैं.... और ऐसा ही कुछ।" लेकिन बात यह है इंसानों ने बहुत कुछ देखा है। महामारियां पहले भी फैली हैं ऐसी चीजें हुई हैं जिन्हें औषधि विज्ञान कुछ भी नहीं कर पाया उनको। हम आज काफी-काफी अच्छी स्थिति में हैं कम से कम हम इससे समझ सकते हैं और हमारे पास यह समझने के लिए अच्छा तरीका है। अब क्या सभी सरकारें वही करती हैं जो उन्हें करना चाहिए मुझे नहीं लगता। और देखिये मैं उनकी बुराई करने के लिए यहां नहीं आया। हमें स्थिति से बाहर निकलना ही है और बस यही बात जरूरी है।

और इसलिए हां, "उदासी और परेशानी" के ही बारे में नहीं है। मैं जानता हूं ऐसे लोग भी हैं मैं उनसे मिलता ही रहता हूं कि आप एक ट्रैफिक पर रुकें हैं तो आप पाएंगे कि वह संगीत बजा रहे हैं और वह मेरी गाड़ी से नहीं आ रहा वह किसी दूसरी गाड़ी से आ रहा है। वह अपने संगीत को लेकर बहुत ही खुश हैं और वह चाहते हैं कि पूरी दुनिया उसे सुने। मेरा मतलब उनकी खिड़की के शीशे नीचे हैं। वह बस तेज-तेज संगीत चला रहे हैं। और जैसे ही देखते हैं कि "मेरे पास क्या है वह गाना बजाकर खुश हैं...।"

आप मजे करें। हम मजे करते हैं। आप इस संदेश का आनंद लें, मजे लीजिए। आप "उदासी और परेशानी" का हिस्सा मत बनिए। बिल्कुल भी नहीं! अगर लोगों की मदद करना चाहते हैं, हां, बिल्कुल मदद कीजिये शायद सराहना करेंगें वो लोग। शायद ना करें अगर नहीं करते तो आप चुप हो जाएं। अगर करते हैं तो मदद कीजिये। यह इतना ही आसान है शायद मैंने इसे ज्यादा ही आसान बना दिया है। तो उम्मीद है आपको मदद मिलेगी।

एक और है — इनका सवाल है "यह कैसे समझें कि आप दोबारा अचेतना में जा रहे हैं इससे पहले कि आप समझें और आप ड्रामा और भावनाओं में बह जाते हैं ?" धन्यवाद! कैरेन ने पूछा है।

हैलो कैरेन! यह अच्छा सवाल है! काफी अच्छा सवाल है यह। और मैं बता दूं कि यह स्थिति के हिसाब से है जो आज हमारे समक्ष आ गई है। यह हर रोज के संदर्भ में है जो हम देखते हैं। तो सवाल है "हम कैसे पहचानें कि आप अचेतना में जा रहे हैं?"

क्योंकि आप बहुत तेजी से जा रहे हैं, चीजें बहुत तेजी से हो रही हैं। इसे धीमा करें, धीमा करें, एक-एक कदम करके बढ़िए आप लोग। जीवन ऐसे ही जीया जाना चाहिए सिर्फ इसलिए क्योंकि दुनिया एक ही बात मानती आई है कि "देखते हैं आप कितना कर सकते हैं, आप कितना आगे बढ़ते हैं, आप कितना हासिल कर सकते हैं।" देखिए मैं उन लोगों में से था जो कहते थे कि 150%, 200%, पर सच्चाई है ऐसी कोई चीज नहीं है 200% जैसी। तब से मेरी समझ है कि आराम से कीजिए, एक-एक कदम करके चलिए! आप क्या कर रहे हैं ? आप क्या करने वाले हैं ? कुछ दिमाग लगाइए यही तो है सचेत होना। मेरा तज़ुर्बा क्या है ? मेरी भावना क्या है ? मैं कहां जा रहा हूं ? मैं जो करने वाला हूं उसका परिणाम क्या होगा ? अगर लोग ऐसा कर पाते हे भगवान! अचानक से आपको जेलों की जरूरत ही नहीं पड़ती आपको इन सबकी जरूरत नहीं पड़ती। बंदूके निकालना और यह सभी चीजें जो आजकल होती हैं।

अगर लोगों के जीवन में बस इतना होता बहुत ही आसान से धीमे-धीमे चलना, बहुत आराम से करना, आंखों को खोलकर काम करना, बंद आंखों से नहीं। समझना कि आप क्या करने वाले हैं और यह हैं तरीके। क्योंकि जब वह गति आएगी, गति यही तो करती है आप जो करने वाले हैं उसके प्रति आपको अंधा बना देती है। क्या कमाल का तरीका है अभ्यास करने का। क्या कमाल का तरीका है हर रोज अभ्यास करने का। जबतक आप लॉकडाउन में हैं ताकि आप धीमे होने का अभ्यास करें। आप मत कीजिए ऐसे नहीं कि इतनी तेज आखिर जाना ही क्यों है। इसकी कोई वजह नहीं है।

तो यह कमाल का सवाल था। आप धीमे चलिए। इसे समझिए और देखिए कि आप क्या कर रहे हैं। ध्यान दें कि क्या चल रहा है! सोचकर कीजिए वह काम जो आप करने वाले हैं उन्हें बस कर देना और परिणाम के बारे में बाद में सोचना। तो उम्मीद है इससे मदद मिलेगी। यह रही एक और बात जो सोचने लायक है। "अचेत जीवन की वजह से विनाश!" “क्या यह संभव है कि परिस्थिति खराब होने की वजह से हम आज खुश होना छोड़ ही दें ? कहने की जरूरत नहीं है, मुझमें बहुत खालीपन आ गया है इस समय ?" — मिशेल

देखिए मुझे बुरा लगा कि आप में खालीपन आ गया है, नहीं होना चाहिए। क्योंकि आप तो सचेत थे। आप इससे बच सकते थे। पूरा मुद्दा यह है कि जीवन में — बात यह नहीं कि चीजों को गायब कैसे किया जाए कि आपकी मुश्किलें चली जाएं। बात यह है उनके पास से निकलने की, अपनी मुश्किलों के पास से होकर गुजर जाना। जी हां! सच में आसपास से! आपको पर्वत को देखकर नहीं कहना होता कि "मुझे तो पर्वत के ऊपर से जाना होगा।" जी नहीं! उसके आसपास का तरीका निकालिए यह कितना आसान होगा, कितना अच्छा होगा, करने में कितनी सरलता होगी और ऐसा ही होना चाहिए।!

बेहोश मत रहिए क्योंकि जीवन आपको ऐसे नहीं देखना चाहता। जीवन चाहता है कि आप सचेत रहें और सराहना करें हर रोज सबकुछ जो आपके आसपास चल रहा है। मुझे नहीं पता अगर मैंने कभी कहा हो "बेहोशी का परिणाम सर्वनाश है" — और मैं मानता हूं कि यह काफी-काफी करीब बात है सच्चाई के। और हमेशा एक बात ध्यान रखें कि आप कुछ भी बदल नहीं सकते। आपके पास विकल्प है किसी भी क्षण आप पहाड़ से नीचे आ सकते हैं और कह सकते हैं कि मैं इसके पास से जाने का रास्ता निकालूं, इसके आसपास। मैं अपनी परेशानी के पास से होकर निकल जाऊंगा। इनके समाधान निकाल कर ही रहूंगा। यह विकल्प आप कभी भी चुन सकते हैं — हमेशा ही और क्या इससे समय बर्बाद होगा ? जी नहीं! यह शायद आपको कहीं ज्यादा समय बचाकर देगा।

तो उम्मीद है इस जवाब से मदद मिले और कृपया एक जगह फंसिये नहीं; परेशान मत रहिए आप बाहर निकल सकते हैं। आपने इसमें फंसना सीखा है तो आप बाहर भी निकलना सीख सकते हैं और फिर एक बार बाहर आए ? सबसे जरूरी बात होगी कि "बचिये-बचिये और बचिये।"

तो आज केवल इतना ही समय है हमारे पास आपसे कल बात करूंगा। धन्यवाद!

लॉकडाउन — सातवां दिन 00:19:30 लॉकडाउन — सातवां दिन Video Duration : 00:19:30 प्रेम रावत के साथ (हिंदी में अनुवादित)

प्रेम रावत:

हैलो! हैलो! नमस्कार सभी को! उम्मीद है आप ठीक हैं। और इस वीकेंड में मुझे लगा कि कुछ जवाब देने का यह अच्छा समय है। तो मेरे पास कुछ सवाल हैं और सबसे पहला सवाल जो भेजा है वह है संजय की ओर से जो हैं (मुझे नहीं पता वह कहां से हैं उन्होंने नहीं लिखा) — पर वह कहते हैं "मैं आपका धन्यवाद देता हूं कि लॉकडाउन में आपने विचार साझा किए इससे मुझे सच्चाई समझने में बहुत मदद मिली है। यह अच्छा है हिम्मत और उम्मीद मिली है और यही तो चाहिए था मुझे कि आपको हिम्मत मिले और आपको उम्मीद मिले। सरकारी कर्मचारी और कई लोग निर्देश दे रहे हैं और सुझाव ताकि कोरोना वायरस से बचा जा सके। अगर आप भी ऐसा ही कुछ बताएंगे तो अच्छा रहेगा — संजय!"

लिखने के लिए धन्यवाद संजय और मैं जो आपको बताऊंगा वह यह है कि देखिए! मैं डॉक्टर नहीं हूं और मैं किसी भी तरह से वायरस विशेषज्ञ नहीं मैं यह नहीं कहता, लेकिन मैं आपको एक बात जरूर बता सकता हूं कि जो भी मैंने सुना है और समझा है वह दो बातें हैं "किसी को भी बीमारी ना दें और किसी से भी बीमारी ना लें!" बस इतना ही अगर आप बीमार हैं तो किसी को मत दीजिए संक्रमण और किसी से बीमारी मत लीजिए अगर वह बीमार हैं। इसमें जो भी हो बहुत-बहुत आसान है — अपने हाथ धोएं, आप बाहर जाते हैं अपने हाथ धोएं, आराम से रहें, अच्छा सोचिए, सुरक्षित रहिए, धैर्य रखिए, आपको धैर्य की जरूरत पड़ने वाली है धैर्य की जरूरत है और धैर्य रखें। आप अच्छा सोचें और इसे हिम्मत से लड़ें कमजोरी से नहीं, लेकिन हिम्मत से। तो उम्मीद है और हां मैं जो बात कर रहा हूं वह यह है कि आप इस स्थिति में भी मज़े कर सकते हैं, क्योंकि अच्छा समय जिसकी मैं बात कर रहा हूं वह आपके भीतर है उसे खोजिये। तो अच्छा समय बिताएं, हमेशा अपने साथ हिम्मत और धैर्य रखें और वह उद्देश्य हो आपका कि किसी को बीमार नहीं करना है चाहे जो भी हो जाए बस इतना।

"उनका क्या जो अहम सेवाएं दे रहे हैं। आपके पास उनके लिए कुछ शब्द हैं इस बार ?" — केसी ने पूछा है!

लिखने के लिए धन्यवाद दोबारा। वह कमाल की सेवा कर रहे हैं। वह अपने जीवन को खतरे में डाल रहे हैं ताकि इस स्थिति में हमें कुछ अच्छा मिल पाए कुछ साधारण जीवन की तरह। पहली बात, मैं दुनिया के उन सभी लोगों का धन्यवाद कहना चाहता हूं जो यह काम कर रहे हैं और दूसरा, शायद जैसा कि मैंने संजय को कहा, हम सभी को हिम्मत और धैर्य दिखाना होगा और यही दो बातें इस धरती पर इंसान होने के नाते हमें अभ्यास में लानी होंगी खासकर कोरोना वायरस के चलते — ऐसा होगा यह समाधान। अलग रहकर ठीक होने में लगभग 14 दिन लगते हैं और उस समय को बिताना पागल जैसा ना होना इसमें धैर्य लगता है, काफी पेशेंस!

तो सच में पहली बात दोबारा मैं धन्यवाद कहता हूं सभी लोगों का जो इस समय सेवाएं दे रहे हैं। सुरक्षित रहिये आप लोग बिल्कुल! मैं आप में बहुत हिम्मत देखता हूं और कृपया धैर्य रखिए! करते रहिए जो काम आप कर रहे हैं ताकि हम सब जीवित रह पाएं और हमारा जीवन साधारण बन पाए और दोबारा मेरी ओर से आप सभी को धन्यवाद!

"इस ज्ञान को साझा करने के लिए आपका धन्यवाद! मेरा एक सवाल है हालांकि लोगों को अभी जबरदस्ती अलग रहना पड़ रहा है। कई लोगों को यह समय एक छोटे बच्चे के साथ बिताना है या बच्चे के साथ और अपने लिए समय नहीं निकाल पा रहे और ज्यादा परेशानी है, खीझ रहे हैं बच्चों को समझ नहीं आता कि यह क्या चल रहा है वह बाहर जाना चाहते हैं और दोस्तों के साथ खेलना चाहते हैं। मैं आपकी मां-बाप के लिए सलाह की सराहना करता हूं और इस समय के लिए आपके पास कोई सलाह है ? सप्रेम और धन्यवाद वेंडी!"

मेरी सलाह है कि अगर आप परेशान होंगी और बच्चे यह देखेंगे तो वह समझ जाएंगे। ऐसे मत कीजिए अगर आप ऐसा करेंगी तो कुछ गलत है। जब उन्हें लगता है कि कुछ गलत चल रहा है तो बस खत्म! मेरी मानिये खत्म है और उस समय एक परेशान माँ-बाप बच्चे को लेकर कहता है "तुम मत रोओ!" मेरा मतलब, वह बच्चा रोएगा ही, तो धीरज रखिए सब ठीक है। यह आपके बच्चे हैं, आप इनके आसपास हैं जो भी उनके साथ जुड़िये। इनका सबको देखने का एक अलग नज़रिया होता है वह समस्या को नहीं देखते, वह तो बस समाधान ही देखते हैं और समाधान है हम अच्छा समय क्यों नहीं बता सकते! आप अच्छा समय बिता सकते हैं कोरोना वायरस नहीं कर सकता, यह किसी भी तरह से अच्छे समय पर वार नहीं करता। आपको केवल जानना होगा कि अच्छा समय क्या है और हम आमतौर पर इतने व्यस्त रहना सीख गए हैं कि इस समय में अच्छा वक्त हम देख ही नहीं पा रहे हैं।

एक समय था जब टीवी नहीं होता था, एक समय था जब यह सारे मनोरंजन के साधन नहीं थे (समझते हैं ना)। एक समय था कोई आईपैड नहीं थे, कोई आईफोन नहीं थे और सेलुलर फोन, कोई सुपर कम्प्यूटर्स भी नहीं थे कुछ नहीं था। और तब लोग क्या करते थे ? तो लोग खुद सोचते थे और शांत समय का भी अहमियत जानकर उसका इस्तेमाल करते थे, पर अब इसे सज़ा की तरह देखा जाता है। मेरा मतलब, सच में अजीब है पर एक बच्चा कुछ गलत करता है और हम कहते हैं कि "अपने कमरे में जाओ और बैठो और सोचो इस बारे में।" क्या कहा इसमें सज़ा क्या है यह तो अच्छी बात है। आपको लगता है यह सजा है पर यह अच्छी बात है। कोई बैठकर सोचे, अच्छे से सोचे अपने दिन के बारे में, क्योंकि सब इतना तेज है आजकल तो आपको शायद दोबारा सोचना पड़े जो आपको और सभी को पता था, पर अब आप भूल गए हैं। तो बात है उस बच्चे के साथ समय को खोजना और फिर अच्छा समय बिताना उसके साथ या शायद एक कहानी लेकर उसे अलग-अलग ढंग से सोचना और अलग-अलग चीजें समझना, सोच को बढ़ाना, बच्चे को बस यही तो चाहिए। जबतक उनकी सोच खुली रहती है तब तक सबकुछ अच्छा रहता है। मैं तो ऐसा ही सोचता हूं हमेशा, तो ऐसा नहीं कि मां-बाप को सलाह देने में मैं विशेषज्ञ हूं, पर मुझे उम्मीद है आप समझेंगे कि मैं क्या कह रहा हूं और धन्यवाद — धन्यवाद लिखने के लिए।

यह रहा एक और सवाल "मैं स्पष्टता को कैसे चुनूं, मैं शांति को कैसे चुन सकता हूं ? करुणा, समझ, प्यार को मैं कैसे एक अच्छा जीवन जीयूं जिसमें सुरक्षा, शांति, खुशी और आनंद हो। स्पष्ट सच्चाई की बात पर ध्यान रहे और ज्यादा ?"

देखिए! अब आप जो भी हैं धन्यवाद! आपका नाम यहां नहीं है लेकिन यह अच्छा सवाल है और सबसे जरूरी बात यह है कि जिन बातों के बारे में आपने कहा — करुणा, अपनापन यह आपके भीतर ही हैं। यह आप में ही हैं। आप जानते हैं कि गुस्सा क्या है और गुस्सा कैसा दिखता है यही है यह भावना यह भीतर आकर फैलती है आप लाल हो जाते हैं, रक्तचाप बढ़ जाता है, दिल धड़कने लगता है, आप गुस्से में हैं। आपको मालूम है गुस्सा क्या है और गुस्से के खत्म होने के बाद आप भी पता है सोच कर कह सकते हैं कि "हां मुझे गुस्सा आया था", लेकिन करुणा से भी वाकिफ़ हैं आप। आप जानते हैं नफरत क्या है पर आप जानते हैं कि जितना नफरत को जानते हैं क्या आप उतना ही करुणा को जानते हैं ? क्या आप अपनेपन को उतना ही जानते हैं ? क्या आप शांति को जानते हैं ? क्या आप उतना ही खुशी को जानते हैं ? क्या आप वैसे ही आनंद को जानते हैं ? अगर नहीं जानते तो यह है समस्या, क्योंकि आपको पता होना चाहिए यह बातें हर समय आप में ही हैं। यह सभी बातें आपके भीतर हैं, हर क्षण। ऐसा नहीं कि आप अपनी खुशी पीछे छोड़ देते हैं, ऐसा नहीं कि अपनापन पीछे छोड़ देते हैं, ऐसा नहीं कि खुशी को पीछे छोड़ देते हैं, जहां भी जाते हैं, जो भी करते हैं यह सब आपके भीतर रहता है सबकुछ। गुस्से की तरह, नफरत की तरह, भ्रांति की तरह हमें इन बातों को गहराई से समझना है और जब हम इन्हें सच में समझना शुरू कर देते हैं फिर हमारे भीतर कुछ होता है, जो इन बातों को चुनना शुरू कर देगा बाकी चीजों से पहले, अपने आप ही चुन लेगा जो हैं गुस्सा और डर और बाकी सबकुछ।

इतने सारे लोगों को कोरोना वायरस हो गया है यह बड़ी बात है लोग डरे हुए हैं। और लोग क्यों डरे हुए हैं ? "ओह! मेरे साथ क्या होने वाला है और जब आप संख्या को देखते हैं — और मैं इसे आज सुबह देख रहा था कहीं ज्यादा लोग प्राकृतिक कारणों से मरे हैं, इस कोरोना वायरस के मुकाबले। लेकिन यह सही नहीं, यह अच्छा नहीं — मैं नहीं बोल रहा, पर जब आप देखते हैं उन संख्या को जो हर रोज दिख रही है यह कोई बहुत बड़ी बात नहीं है। यह संख्या इतनी बड़ी नहीं है हालांकि यह बढ़ते जा रहे हैं और बढ़ते जा रहे हैं और भी ज्यादा बढ़ रहे हैं, दोबारा विश्व के नेता इतना अच्छा काम नहीं कर रहे जितना उन्हें करना चाहिए। लेकिन बावजूद इस सबके क्या लगता है इस चीज से, डरने से इस कोरोना वायरस से क्या होगा! कुछ भी नहीं। आपको क्या करना है, जैसा मैंने कहा एक लक्ष्य होना चाहिए, "बीमारी किसी को ना दें और किसी से ना लें!"

तो हम कुछ बातों को अच्छे से जानते हैं, लेकिन हम कई ऐसी बातें हैं जिन्हें नहीं भी जानते। खुद को जानने से ऐसा होता है कि आप इन बातों को जान जाएंगे। “जी हां! कहिए मुझमें गुस्सा है और मुझे गुस्सा नहीं पसंद है, लेकिन मुझमें अपनापन है एक खुशी है” और जैसे-जैसे आप जानेंगे यह चुनने में और आसान होता जाएगा समझ यही है आपकी अहमियत और यही उदाहरण मैं देता हूं वह यह कि — “एक छोटे डिब्बे की क्या अहमियत है, एक छोटा डब्बा ?” और शायद इसमें क्या है, इस डिब्बे में पता है इसमें सिर्फ एक अंगूठी है और उसकी कीमत होगी लगभग 2 लाख डॉलर तो फिर डिब्बे की कीमत क्या हुई ? अब शायद डिब्बे की कीमत है 50 डॉलर (10 डॉलर, 20 डॉलर या जो भी) लेकिन जबतक अंगूठी उस डिब्बे में है उस डिब्बे की कीमत भी 2 लाख डॉलर है।

यही है जो आपको समझना है। उस डिब्बे से अंगूठी निकालें और उस डिब्बे की कीमत है 50 डॉलर (5 डॉलर, 10 डॉलर या जो भी) पर जबतक अंगूठी डिब्बे में है तो डिब्बे की कीमत भी अंगूठी जितनी ही है और फिर ? यही बात आपके साथ भी होती है। जबतक आप में वह चीज है जिसे कहते हैं “जीवन”, आपकी कीमत असंख्य है और उसे हटा दें और हां बिल्कुल कुछ नहीं बस यह एक डिब्बा है और फिर यही रहेगा तो उन बातों से परिचित रहें जो आप में है उन बातों से प्यार करें और फिर आप इस जीवन का आनंद ले पाएंगे और ज्यादा और ज्यादा।

एक और सवाल — "धन्यवाद प्रेम! क्या आप उनसे कुछ कहेंगे जिन्हें यह बीमारी हो गई है ? मैं लॉकडाउन क्लिप्स कई लोगों को भेज रहा हूँ, जो आपको नहीं जानते हैं यह कितना अच्छा है, सबके लिए।"

जी हाँ! अब मैं यह कह सकता हूं दोबारा वही पुरानी बात यह कीजिए — अगर आपको बीमारी है उन्होंने आपको बताया होगा कि वायरस है धैर्य रखें, अच्छा सोचें, अच्छी नींद ले और इसका हिम्मत से सामना करें। हौसला रखिए इस समय, डर नहीं इसका सामना हिम्मत से करें आप बेहतर हो जाएंगे। बहुत से लोग चाहते हैं कि आप ठीक हों, लेकिन वह उम्मीद आपके भीतर से आनी चाहिए। यह सब हिम्मत से करें, यह धैर्य से करें, इसे पूरा होने दें, जरूरी कदम उठाते रहिए। अच्छा सोचें और वह सब करें जो जरूरी हैं और मुझे उम्मीद है कि आप जल्द ठीक होंगे और वह बहुत अच्छा दिन होगा।

अब किसी और ने भी लिखा है — "हाय प्रेम! मैं आपका धन्यवाद करता हूं उसके लिए जो आपने समझाया और मदद करने के लिए!” “मेरी बेटी ने मुझसे कुछ वर्षों पहले पूछा था कि वह 7 या 8 साल की थी कि पापा जब मैं मर जाऊंगी तो आपको याद रखूंगी और जब आप मर जाएंगे तो मुझे याद रखेंगे ? मैं कुछ गलत नहीं कहना चाहता था तो मैंने उससे कहा कि अच्छा सवाल है लेकिन मैं नहीं जानता था मैं तब से काफी सोच रहा हूं तो मेरे लिए यह सवाल बन गया है — क्या हृदय की यादें होती हैं या यह सिर्फ अभी के पल में ही जीता है!"

देखिए जब आप किसी से प्यार करते हैं और उस व्यक्ति के साथ होते हैं आपको उनसे क्या मिलता है ? वह क्या देते हैं आपको जब आप उन्हें देखते हैं ? आप उनसे प्यार करते हैं वह आपको खुशी देते हैं तो इसका मतलब क्या हुआ “खुशी — वह खुशी लाते हैं ?”

अब खुशी कैसे दिखती है ? क्या उस पर उनका नाम लिखा होता है ? या यह आपको अच्छा महसूस करवाती है ? उस व्यक्ति के साथ होना, उनके बारे में सोचना और यही बात हृदय अच्छे से जानता है वह भावना, वह अच्छाई, वह खुशी जो दूसरा व्यक्ति देता है आपको, शायद बढ़ावा देता है वह इस खुशी को बढ़ाते हैं। हां बिल्कुल, चाहे जो भी हो अगर आपने एक-दूसरे को खुशी दी है उन्होंने आपको और आपने उन्हें, फिर आपके साथ खुशी हमेशा रहेगी किसी लेबल या नाम के बिना हमेशा। क्योंकि हृदय तो पूर्ण है, जी हां भरा हुआ और शायद आप न ही लें। जब आप किसी के घर जाते हैं और कमाल का खाना खाते हैं। आप उस खाने को एक हफ्ते के बाद भी अपने साथ नहीं ले जाते हैं। 2 हफ्ते, 3 हफ्ते लेकिन खाते समय बिताया हुआ अच्छा समय आपको याद रहता है और जीवन भी बिल्कुल ऐसा ही है तो मुझे उम्मीद है इससे आपको जवाब मिला होगा।

मैं कोई एक बात नहीं बोल रहा मैं जानता हूं, पर हृदय पूर्ण होने के बारे में ही है और अगर वह आपको खुशी देती हैं और आप उन्हें और यही बात रिश्तों में अहम होती है कि हम यह समझते हैं कि इसमें आखिर है क्या! “मैं कैसे उस दूसरे व्यक्ति को खुशी दे सकता हूं और मैं कैसे उस व्यक्ति से मिलने वाली खुशी को ग्रहण कर सकता हूं!”

फिर बस यही महत्वपूर्ण बात रह जाती है! सिर्फ यह! और यह तोहफा आप उन्हें देंगें जिसकी कीमत नहीं है — रूपए के तौर पर इसकी कीमत नहीं लगाई जा सकती इसकी कीमत असंख्य है और वो खुशी जो आपको देती हैं वह उसकी अहमियत असंख्य है, इसकी कोई सीमा नहीं।

तो उम्मीद है मदद मिलेगी आपको। आपका धन्यवाद और मैं आपसे जल्द मिलूंगा। ऐसे कई और भी सवाल हैं असल में, लेकिन हम उनके लिए भी समय निकालेंगे!

तो मैं आपसे कल मिलूंगा धन्यवाद!

लॉकडाउन — छठा दिन 00:15:21 लॉकडाउन — छठा दिन Video Duration : 00:15:21 प्रेम रावत के साथ (हिंदी में अनुवादित)

प्रेम रावत:

नमस्कार! आप सभी को नमस्कार !

मुझे उम्मीद है आप ठीक हैं। मुझे पता है यह मुश्किल समय है हालांकि मैंने कुछ मुद्दों पर बात की है। जैसे-जैसे सवाल आने शुरू हुए हैं, वह इकट्ठे हो रहे हैं, लेकिन जो भी हो रहा है लोग उससे काफी डरे हुए हैं और मैं इस वक्त आपसे बस इतना कहना चाहता हूं कि देखिए, जानते हैं नियम आसान है "वायरस ना ही दीजिये, वायरस मत लीजिये" — इतना आसान है, पर आपको यह करना पड़ेगा। दूर रहना अच्छा है। पर सवाल आता है कि आप अकेलेपन में क्या करेंगे ?

यह अफसोस की बात है सबसे पहले यह कि हमें यह सब देखना पड़ रहा है, क्योंकि खुद के साथ रहना प्राकृतिक होना चाहिये। खुद के साथ रहना अच्छा लगना चाहिए, कमाल होना चाहिए यह बुरा नहीं होता है लेकिन, अफसोस ऐसा है बिल्कुल नहीं। यह है — "हे भगवान! अब मैं क्या करूंगा!" लोग पागल हो रहे हैं और यह हो रहा है और वह हो रहा है। लेकिन मेरी मानिये जो मुद्दा है वह यह है कि सबसे पहले तो आप यह वक्त कैसे बिताना चाहते हैं ? बहुत आसान है —"हिम्मत रखिए, डर को छोड़ दीजिए!" ऐसे नहीं कि हे भगवान! अब क्या होगा, अब क्या होगा, अब क्या होगा, अब क्या होगा!" नहीं, हिम्मत रखिए!

दो चीजें चाहिए आपको — अगर आप चाहते हैं कि यह समय आराम से निकल जाए, जल्दी भी, जो भी दो चीजें चाहिए। ‘धैर्य’ — आपने सोचा आप में है क्यों ? यह आपकी परीक्षा है ‘धैर्य’ और दूसरी बात 'हिम्मत' — बस यही दोनों चाहिए और यह समय बीत जाएगा। स्पष्टता आपके भीतर ही है, उसे ढूंढिए और बाहर मत देखिए उसे अंदर तलाशिये। खुशी आपके भीतर है, खुशी को तलाशें। वह सुंदर खजाने को जो दबे हुए हैं, अब आपको उसकी जरूरत है। देखिए! अब उनकी जरूरत है आपको। पहले पता है, मैं आता था, बैठता था, लोगों से बात करता था आपके भीतर है यह। लोग कहते थे “हां हां हां!” अब आपको उनकी जरूरत है, क्योंकि इसके बिना आप क्या करेंगे ? हम क्या करेंगे ? यह बुरा हो सकता है इसलिए ढूंढिए, उस धैर्य को खोजें, हिम्मत को खोजें। खुशी अब भी आप में ही है और आप इस समय को अच्छा बना सकते हैं, अकेलेपन में, हां आप इसे कमाल का समय बना सकते हैं।

यह सब मुझे हमेशा उस व्यक्ति की याद दिलाता है जो एक व्यक्ति — वह जेल में था और वह बंद था। वह पीस एजुकेशन प्रोग्राम को सुन रहा था और वह मानता भी था। और मैं हमेशा स्वांस की बात करता हूं और यह कैसे शांति देती है और स्वांस हमारी कितनी सुंदर है और ये सब चीजें। एक दिन वह गया और अपने कारावास के बिस्तर में लेट गया और यह तज़ुर्बा वह किसी को सुना रहा था और उसने कहा कि "प्रेम हमेशा स्वांस की बात करते रहते हैं, तो मैं स्वांस पर ध्यान दे रहा था। मैंने जैसे ही स्वांस पर ध्यान देना शुरू किया और ध्यान दिया, मैं शांति से भरने लग गया — कितना सुंदर है यह, कितना कमाल का, जबरदस्त है। उसने कहा, अचानक से ही इतनी शांति मिली मुझे, शांति का एहसास हुआ, जो पहले मुझे कभी नहीं हुआ था।"

मेरे लिए यह हमेशा से था कि "हे भगवान! इस व्यक्ति को शांति का तज़ुर्बा हुआ जेल में बंद रहते हुए भी।" उनका क्या जो जेल में बंद नहीं हैं। हां, वो — वह भी तज़ुर्बा कर सकते हैं। मैं कुछ करने के लिए तत्पर हूं और हम इसकी संभावना को देख रहे हैं कि जितने भी लोग लॉकडाउन में हैं, शायद हम सभी मेरे साथ पीस एजुकेशन प्रोग्राम को देख सकते हैं और मैं मदद करूंगा उनकी, पीस एजुकेशन प्रोग्राम को करने में। मेरा मतलब, यह कमाल की बात होगी सच में। क्योंकि यह उन पर कमाल का काम करता है, जो जेल के अंदर बंद हैं और एक तरह से हम सभी जेल के अंदर बंद हैं। यह ऐसा है कि हम सभी घरों में हैं, लेकिन बंद ही तो हैं, तो हम इसकी संभावना को देख रहे हैं मेरा मतलब, यह कमाल का हुआ, यह कमाल होगा।

लेकिन उस वक्त तक कृपया डरिये नहीं, बिलकुल मत डरिये, हिम्मत रखिये आप सभी लोग, धैर्य रखिये; समझ रखिये यह भी गुजर जायेगा वक्त। जी बिलकुल, यह चला जाएगा। और जहां तक सवाल है आपके परिवारजनों का और उनके साथ समय बिताने का — चाहे पसंद हो या ना हो वह आपका ही हिस्सा हैं और ठीक है, यह अच्छा है कि आप उन्हें स्वीकारें, उन्हें प्यार करें। आपको केवल उनके प्रति एक जिम्मेदारी का भाव ही नहीं रखना है कि “देखिए मुझे यह करना है; मुझे वह करना है; अब मुझे यह पता करना है; मुझे ऐसे पता करना है; यह करना है।” नहीं! बस वह रहिये, जो आप हैं और उन्हें वैसा रहने दीजिए जैसे वह हैं। बहुत-बहुत अच्छे तरीके हैं सब से जुड़ने में।

क्या लगता है कि लोग पुराने समय में क्या करते थे उस वक्त ? मेरा मतलब, हम वह सब भूल गए हैं "आइए! यहां आइए एक कहानी सुनते हैं या एक कहानी पढ़ते हैं, एक कहानी पर चर्चा करते हैं।" किसी बात पर खुश होते हैं। मैं खुशकिस्मत था लगता है मुझे — जब मैं बड़ा हो रहा था तब टीवी नहीं था, ऐसा नहीं कि इसका आविष्कार नहीं हुआ था। यह बस इंडिया में, यह नहीं आया था और मैं क्या करता था ? कहानी सुनता था मैं उनसे खुश होता था कोई भी ऐसा, जो मुझे कहानी सुना सकता था मैं उन पर ध्यान देता था। यह कितना अच्छा होता था। एक समय था जब टीवी नहीं था और उस समय इंडिया में जब रेडियो आया ही था, यह कभी-कभी आता था और यह कभी-कभी नहीं आता था। शायद एक घंटा या डेढ़ घंटा या फिर दो घंटे और फिर यह बंद हो जाता था — आप क्या करते थे उस समय ? कुछ समझते हैं, आप कुछ खोजते थे। आजकल तो इतना कुछ आता ही रहता है कि हम अपने आपको भूल गए हैं। इस तकनीकी का प्रयोग किए बिना रहना और इस फोन के बिना रहना और सोशल मीडिया के बिना रहना — हम यह सब बातें भूल गए हैं और एक समय की बात है लोग बस ऐसे ही थे और वह खुश भी थे। मेरा मतलब, कुछ बुरी बातें थीं, क्योंकि नालियां नहीं थीं शायद और सबकुछ बदबू देता था थोड़ी-सी लेकिन उन सबके अलावा, हे भगवान, लोग कहते हैं "मैं तो पागल हो रहा हूं!"

पर आप पागल कैसे हो सकते हैं, आप जीवित हैं। यहां पर कुछ कमाल का चल रहा है और फिर ऐसे लोग हैं जो उम्मीदों में बंधे हुए हैं कि उनकी उम्मीदें क्या हैं और एक-दूसरे से उनकी उम्मीदें और फिर वह साथ नहीं आ पाते। क्योंकि उम्मीदें बीच में आ जाती हैं। यह समय उम्मीदों का नहीं है। यह समय है जीने का। आप हो सकते हैं, जी हां! रह सकते हैं। आप एक इंसान हैं सबसे पहली चीज जो आप हैं वह, "आप एक इंसान हैं" और अब यह कहना ही अजीब-सा लगता है, पर मुझे कहना ही पड़ेगा, क्योंकि यही तो आप भूल गए हैं कि "आप एक इंसान हैं" और अगर हम यही भूल जाएं कि हम इंसान हैं तो हम क्या बन गए ?

बहुत-सी कंपनियां हैं, वह सब ज्यादा तकनीकी बनाती जा रही हैं, बनाती जा रही हैं और भी ज्यादा और असल में उनमें से एक — पर बात यह है हमें फर्क नहीं पता कि “जरूरत और चाहत क्या है ?” हम चाहत के गुलाम बन चुके हैं यह हम भूल गए हैं कि हमारी जरूरत क्या है ? एक बहुत ही बड़ी कंपनी है, यह दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी में से एक है और वह बहुत-सी चीजें बनाते हैं और उसमें से एक भी चीज की हमें जरूरत नहीं है और वह बहुत-बहुत बड़ी कंपनी है। मेरा मतलब, बहुत ही बड़ी, आर्थिक रूप से बहुत बड़ी। लोग बस उनके लिए पागल से हैं और उनकी बनाई गई एक भी चीज हमें असल में चाहिए। यह हैरानी की बात है, चौंकाने वाली बात है और इतनी सारी चीजें जिन पर हम आकर्षित होते रहते हैं। हम नहीं समझते कि वह चीजें, जिन्हें हम सच में आकर्षण कहते हैं वह हमें भटकाती हैं। क्योंकि अगर वह आपको खुद से दूर ले जाती हैं — यही परिभाषा है ध्यान भटकाने की, जो आपसे आपको दूर ले जाए। यही है परिभाषा ध्यान भटकाने की।

आपको खुद के पास घर लौटना ही होगा। आपको वह अच्छाई महसूस करनी है, जो आपके हृदय में है; वह खुशी, जो हृदय में है; वह स्पष्टता, जो आप में नृत्य करती है; वह शांति, जो आपके भीतर है; वह धैर्य, जो आप में है; वह हिम्मत, जो आपके भीतर है; आपको उन चीजों को जानना ही है और यही वह मौका है यह सब करने का। यही मौका है वह करने का। जब मैं यह देखता हूं जैसे कि "हे भगवान! यह कोरोना वायरस अच्छा कैसे है ?" यह अच्छा नहीं है, सच मानिये अच्छा नहीं है। पर फिर मैंने एक फुटेज देखी — एक मछली पोर्पोइस (Porpoise) वेनिस इटली में प्रदूषण इतना कम हो गया है कि यह पोर्पोइस मछली यहां पर वापस आ गई है। आप पानी के भीतर देख सकते हैं, आप समुद्र की गहराई देख सकते हैं। जी हां! आप मछलियां देख सकते हैं; आप स्वॉनस (Swans) देख सकते हैं और ऐसा है, “हम्म!” फिर मैंने देखा जैसे चाइना का प्रदूषण बिल्कुल चला गया है जैसे कि “हम्म!”

हमने क्या किया है ? हमने क्या बनाया है ?” हमने अपनी चाहत की वजह से एक दैत्य बनाया है और यह धरती को नष्ट कर रहा है, हमें तबाह कर रहा है और इसके अलावा कुछ नहीं।

जब आप इस कोरोना वायरस के कुछ आंकड़ों को देखते हैं, हजारों-हजारों-हजारों की तादाद में लोग ठीक भी हुए हैं और कुछ लोगों को कम लक्षण दिखते हैं, काफी कम। कुछ जगह हैं जहां पर लोग मर रहे हैं वह मर रहे हैं हॉस्पिटल्स के ना होने की वजह से और इसलिए क्योंकि सही चिकित्सक उपकरण नहीं है वहां पर। पर, जो भी हो रहा है शायद यह एक तरीका है याद दिलाने का कि हम इंसानों की तरह हमें लौटना है उस कमाल की चीज पर जो कहलाती है "इंसानियत!" हमें दोबारा इंसान बनना है, हमें समझना है कि हम कौन हैं और जरूरतें हमारी क्या हैं ? चाहत नहीं, हमारी जरूरतें। शायद यही एक बढ़िया तरीका है पुरानी चीजों पर लौटने का, उस तक लौटने का जो हमारे भीतर पहले से है।

तो मेरे दोस्तों चाहे जो भी हो बस याद रखिए — “धैर्य रखें; हिम्मत से काम लें!” आपके भीतर कमाल की चीजें हैं वह। अब समय है उसे साझा करने का, उसे बाहर लाने का, समय है खजाना निकालने का और यही है संभावना; यह मौका। तो ख्याल रखिये; सुरक्षित रहिए; सेहतमंद रहिये — और सबसे जरूरी बात खुश रहिये आप सभी!

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