View as
लॉकडाउन — चौदहवां दिन 00:27:05 लॉकडाउन — चौदहवां दिन Video Duration : 00:27:05 प्रेम रावत के साथ (हिंदी में अनुवादित)

प्रेम रावत:

सबको नमस्कार! उम्मीद है आप सब ठीक हैं, सुरक्षित हैं और अच्छे से हैं!

आज सोचा उन लोगों की बातें और सवाल आपको बताऊं जो पीस एजुकेशन प्रोग्राम अटेंड कर चुके हैं और हां, एक और बात हम पीईपी (PEP) की ओर काम कर रहे हैं आपको बस थोड़ा-सा सब्र रखना होगा। क्योंकि आमतौर पर जब पीईपी (PEP) खत्म होता है, जब पेप (PEP) आमतौर पर खत्म होता है लोग मिलते हैं और बातें करते हैं, बयान देते हैं विचार, सुझाव और हां, यह कोई अलग-सी चीज नहीं होती है। तो हम कुछ तरह से कोशिश कर रहे हैं कि — इसमें मैं रहूंगा लीड फैसिलिटेटर, जी हाँ और बाकी लोग अपने कॉमेंट्स और बाकी बातें लिखकर भेज पाएंगे यहां पर हमारे पास और फिर उनमें से कुछ मैं आपको सुना पाऊंगा। तो इसमें काफी सारी तैयारियां करनी पड़ती हैं, लेकिन हां हम इस पर काम कर रहे हैं और सबकुछ ठीक चल रहा है और मुझे लगता है कि यह अच्छा रहेगा।

तो यह रहा एक सवाल — और यह ज्यादातर जेल से आए हुए हैं कहते हैं कि “जीवन की सराहना करने का क्या मतलब है हर पल का आनंद लेना, हर रोज खुश होने का मौका देखना ?” यहां प्यार और करुणा है; यहां गुस्सा और नफ़रत है, लेकिन जीवन एक तोहफा है और मैं इसे जितना हो सके साफ समझना चाहता हूं ताकि हर रोज खुल के जी पाऊं।

“मेरे जीवन के बगीचे में वही उगता है जैसे मैं जीवन को जीता हूं हर किसी में बदलने की क्षमता है और यह मेरा समय है।”

इसका यही तो मतलब है, असल में आपने अपने सवाल का जवाब स्वयं ही दे दिया है। क्योंकि जीवन की सराहना करने में हर रोज खुश रहने में आपको एक अलग दृष्टिकोण से देखना ही होगा और यह है — और यह हिस्सा होगा इस प्रशिक्षण का जो मैं आपके लिए लेकर आऊंगा और एक बात जो मैंने आपके लिए सोची है उसे कहते हैं बदलना विपरीत ढंग से, “अनचेंज” क्या है ? “अनचेंज” का मतलब है कि एक समय था जब आप अपने हृदय की अच्छाई से परिचित थे। सबकुछ ठीक था! आपके पास वह दृष्टिकोण था; वह नज़रिया था; आपका दृष्टिकोण आपके पास अच्छाई देखने की क्षमता थी। आप चीजों को किसी भेद से नहीं देखते थे। आप सबकुछ सच्चाई की नजरों से देखते थे। क्योंकि हम सच्चाई को सच्चाई की आंखों से नहीं देखते; हम उन्हें अपनी आंखों से देखते हैं। और जबतक हम उस सच्चाई को देखना शुरु करते हैं तबतक हमारी आंखें हद से ज्यादा दूषित हो चुकी होती हैं। लेकिन जब हम सच्चाई को सच्चाई की नजर से देखते हैं, सबकुछ बदल जाता है — सबकुछ। पूरा दृष्टिकोण बदल जाता है।

तो एक चीज जो आपको करनी है वह है अनचेंज, इसका मतलब है कि इसमें कई सारे विचार पहले से ही लाए जा चुके हैं। और यह सभी आइडियाज यह विचार इनमें से कुछ तो ठीक हैं, पर कुछ ठीक नहीं हैं और आपको इन्हें छानना पड़ेगा, आपको इन्हें परखना होगा कि आप कैसे चाहते हैं कि आप बनें यह आपको देखना होगा। तो एक बात जो प्रशिक्षण में की जाएगी — वह होगी और शायद मैं यहां कुछ ज्यादा ही बातें बता रहा हूं पर फिर भी कि — “आपको नियंत्रण में रहना है” और आपको एक साफ नज़रिया रखना है, एक दृष्टिकोण कि “आपको क्या चाहिए अपने जीवन में ?” आपको क्या चाहिए, आपको क्या होना चाहिए, आपको कैसे अस्तित्व रखना है ? वह नहीं कि जो बाकी लोगों से आपकी उम्मीदें हैं या बाकी लोग आपसे क्या पसंद करते हैं। क्योंकि अब देखिए, यह एक बहुत ही अजीब-सी स्थिति है, क्योंकि हम कई अपेक्षाएं रखते हैं “हमें ऐसा होना चाहिए; हमें वैसा होना चाहिए; हमें यह बनना चाहिए,” हम सभी ये बातें जो हैं हमें बताई गई हैं समाज के द्वारा ताकि हम समाज में ढल पायें। समाज हमें बदलना चाहता है। लेकिन आमतौर पर उल्टा ही पड़ता है, क्योंकि हमारे बदलने के दौरान, हम खुद को खोने लग जाते हैं और जितना हम खुद को खोने लगते हैं, हम उतने ही अजीब बन जाते हैं और जितना अजीब महसूस करते हैं, हम समाज के विरुद्ध जाते हैं।

असल में, अगर आप खुद को जानते हैं, अगर आप उस खुशी को जानते हैं जो आपके भीतर है, अगर आप उस सुंदरता को जानते हैं, अगर आप समाज के सही हिस्से की तरह काम करना चाहते हैं, तो ये सब चीजें जरूरी हैं और समाज की तरह नहीं जो वह आपको बनाना चाहते हैं। तो मैं यहां समाज के लिए नहीं आया हूं; मैं आपके लिए आया हूं। मैं चाहता हूं कि आप मजबूत बनें। मैं चाहता हूं कि आप समझें कि “इसका क्या मतलब है कि सराहना करें जीवन की, हर पल को जीना।” और यह करने के लिए आपको बनना पड़ेगा या कहूं तो आपको फिर से बनाना पड़ेगा। क्योंकि यही तो है हिस्सा बदलने का। क्योंकि मैं कहता हूं कि आप अपने ही जीवन में, आप जानते हैं कि आप में सारी शक्तियां हैं। आप इन्हें जागृत करना बस भूल गए हैं। और इन्हें जगाना आप भूल गए हैं और हम साथ मिलकर इन्हें वापस जागृत कर सकते हैं और आधार होगा इस सबका करुणा! मैं प्रशिक्षण की और बातें नहीं करना चाहता, पर मैं बताए बिना रह भी नहीं पा रहा हूं।

और हां, बिल्कुल हम इस बारे में बात करेंगे जब प्रशिक्षण शुरू होगा, लेकिन खुद में सब्र रखना कितना जरूरी है, खुद की समझ के साथ, क्योंकि एक लंबा समय लगता है इसमें उस गड्ढे से बाहर आने में जिसमें हम फंसे हुए हैं। यह विकसित होने में समय लगता है फिर विकसित होना उस दृष्टिकोण का और सच्चाई की आंखों से सच्चाई को देखना। तो यह लगता है इसमें। “हर दिन का खुशी के मौके की तरह स्वागत करना,” आपको मौकापरस्त बनना पड़ेगा। आपको सच में समझना है कि यह सब क्या हो रहा है आपको वो बात समझनी है कि आप उस शॉपिंग सेंटर में हैं — जहां पर आपको बहुत सारा समय मिलता है, लेकिन आप वहां से कुछ ले जा नहीं सकते। आप असल में वहां से कुछ बाहर नहीं ले जा सकते। लेकिन आपको यह फैसला लेना ही है आप असल में कोई चीज बाहर नहीं ले जा सकते तो आप समझिए इस बात को कि इस शॉपिंग सेंटर में सबकुछ है जो आप सोच सकते हैं, लेकिन आप बाहर नहीं ले जा सकते और आप क्या ले जा सकते हैं ?

यही तो है वह असल बात और वह ट्रिक है कि आप अपने आप में मजे कर सकते हैं उस शॉपिंग सेंटर में और उस जगह पर। क्योंकि ऐसा है कि जैसे एक लॉटरी लग जाये; आपने लॉटरी जीती है — और इनाम में आपने जीता है कि आप शॉपिंग सेंटर में कुछ दिन बिता सकते हैं और शॉपिंग सेंटर में कमाल की दुकानें हैं पर आप कुछ ले जा नहीं सकते। आपको अनुमति नहीं है और — जब समय अंत होगा, तब आप अपने साथ कुछ नहीं ले जा सकते। तो आप क्या करने वाले हैं ? अब तरीका यह होना चाहिए कि आप रोज ज्यादा से ज्यादा आनंद लें, जितना ज्यादा आप कर सकते हैं। ताकि बाद में जब आप अपने साथ कुछ ले जाएं तो वह हो कृतज्ञता, वह हो वो धन्यवाद देना, वह हैं वो मजे जो आपने किए हैं “वाह यह कमाल का था यहां होना कितना अच्छा था” यह होगा तरीका और इसमें समय लगता है। समय लगता है इसे समझने में क्योंकि अपनी सही क्षमता से भटकने में हमें बहुत समय लगा है।

अब एक और सवाल — और यह है महिलाओं की जेल से वह कहते हैं कि “प्रेम आपने अपनी शांति कैसे खोजी ?”

बिलकुल वैसे ही जैसे आप खोजेंगे अपने भीतर। मेरा मतलब, मुझे शुरू करना था और दोबारा भीतर ध्यान देने में बहुत लंबा समय लगता है और मेरे पिताजी काफी दयालु थे कि उन्होंने मुझे रास्ता दिखाया एक शीशा। जब मेरे पास वह शीशा था तो मैं उसमें अपनी सच्चाई को देख सकता था, मेरी अपनी सच्चाई। तो फिर हां बिल्कुल, कॉमेंट यह है कि “यह मेरी पसंदीदा क्लास है कोशिश करता हूं कि मैं इसे मिस ना करूं। खुशी वह नहीं जो हमारे पास है वह है जिसका एहसास है।” आप समझ गए हैं, यही है बस! “खुशी वह नहीं जो आप में है लेकिन जिसका आपको एहसास है,” क्योंकि खुशी महसूस की जाती है। शांति वह नहीं जो आपके पास है, शांति वह है जो महसूस करते हैं। खुशी वह नहीं जो आपके पास है, खुशी वह है जो आप महसूस करते हैं। प्यार वह नहीं जो आपके पास है, लेकिन वह जिसका आपको एहसास है। स्पष्टता वह नहीं जो आपके पास है, लेकिन वह जो आप महसूस करें। कमाल है! यही तो है; आप समझ गए हैं।

“हम बाहर देखते हैं पूर्ण होने के लिए जबकि हमें भीतर देखना चाहिए।” बिल्कुल सही। यह एक महाविद्यालय से आया है, वयस्क शिक्षा “मैं दुनिया की चिंताओं को खुद से अलग कैसे करूं ?”

क्या आप ही हैं अपनी चिंता ? ये चिंता हैं — यही इसका मुद्दा है — चिंता तो हमेशा ही रहने वाली है। ऐसा नहीं कि, अगर आप अपनी चिंता से दो मिनट के लिए दूर हो जाएं तो वह गायब हो जाएंगी और आपको उन्हें ढूंढना जाना पड़ेगा। जी नहीं, वह आपको ढूंढ ही लेंगी। चिंता खोने की चिंता मत कीजिए। वह तो हमेशा ही रहने वाली है। आपको क्या करना है कि आपको अलग करना सीखना होगा। यह ऐसा है कि जब आपको नींद आती है और तब आप वही हैं। आप चाहे एक बस में बैठे हों और यह बस भरी हुई है; अनजान लोगों से। और हां बिल्कुल, अगर आपने कभी बस देखी है, तो आप जानते हैं इसमें ज्यादा आसानी से सफर नहीं किया जा सकता। यह ज्यादा शांत भी नहीं होती है और हां, गड्ढे आते हैं फिर यह ऊपर जाएगी; फिर नीचे जाएगी और कई बार बस में सीट भी आरामदेह नहीं होती… और अब आई नींद! तो शोर तो है ही यहां पर — सबकुछ आपके विरुद्ध चल रहा है; वहां शोर है; आप अनजान लोगों के बीच में है (यह काफी अच्छा वातावरण नहीं है, मतलब सोने लायक वातावरण बिल्कुल नहीं है।) आप एक छोटी-सी अजीब-सी कुर्सी में बैठे हैं जो आरामदेह नहीं है। सोने लायक नहीं है जी हां, क्योंकि उसके लिए लेटना होता है पर नींद आ जाती है। फिर क्या होता है ?

वो सभी चीजें जो आमतौर पर नींद के लिए अच्छी नहीं होतीं उनके मायने नहीं रखते। और धीरे-धीरे और धीरे-धीरे-धीरे आपकी आंखें भारी होने लग जाती हैं और भारी और भारी और आप सो जाते हैं। यही तो होना है। यही तो है वो, वह जरूरत, जरूरत को समझना (चाहत को नहीं, जरूरत को), अच्छा हो जाता है वह; वह प्यास (और मैं इस “प्यास” की बात करता हूं) प्यास इतनी बढ़ जाती है कि बाकी सभी चीजों को पीछे छोड़ देती है सभी चिंताएं वो सभी, सभी चीजें जो शांति के लिए अच्छी नहीं हैं। यह उनसे आगे बढ़ती हैं। यही तो है इसका अर्थ।

और अब सवाल यह है कि “यह जानना जरूरी है कि दुनिया में क्या हो रहा है पर इतना जरूरी नहीं कि भीतर क्या चल रहा है मैं कैसे इस बात पर ध्यान लगाऊं ?”

दोबारा, यह एक आदत है। क्योंकि एक समय पर आपको फर्क नहीं पड़ता था कि दुनिया में क्या हो रहा है, क्योंकि आप छोटे थे। आपको दुनिया की फिक्र नहीं थी; आपको नहीं पता था कि दुनिया क्या है। आपको सिर्फ अपनी फिक्र थी। अब आपने यह व्यवहार सीख लिया है और मैं ऐसा नहीं कहूँगा कि आपको दुनिया की फिक्र नहीं करनी चाहिए। नहीं, आपको पता होना चाहिए कि दुनिया में क्या चल रहा है। पर साथ ही पता होना चाहिए कि अंदर क्या चल रहा है आपके। यह है, दोबारा। यह वही वापस बदलना है जो हमें करना है अनचेंजिंग।

और अब सवाल है “सुनने में इतना आसान लगता है इस दुनिया में शांति नहीं है हम वापस कैसे जाएं ? क्या यह संभव है ?” जी हां! बिल्कुल, यह संभव है। अगर यह संभव नहीं है तो मैं अपना समय बर्बाद ही कर रहा हूं यहां पर।

और हां, ये थे कुछ सवाल और यह रहे कुछ कॉमेंट्स: “मुझे लगा इस क्लास में दर्शनशास्त्र की बात होगी कि दुनिया में शांति कैसे लानी है लेकिन प्रेम शांति की बात करते हैं जो हमारे भीतर है।” जी हां, “जितना मैं खुद में शांति ढूंढता हूं उतनी ही बाकियों में भी फैल जाती है।” हां, मैं यही तो कहता हूं। यह पहली बात है जिसकी मैंने बात की थी कि “जब समाज आपको एक ढांचे में ढालने का प्रयास करती है… वह जरूरी नहीं क्योंकि जब आप पूर्ण हो जाते हैं तो ज्यादा अच्छा होता है….।

देखिए बात यह है कि जब आप एक लैंप की तरह जलते हैं, मोमबत्ती की तरह जलते हैं। एक जली हुई मोमबत्ती बाकियों को जला सकती है। अगर आप एक बुझी हुई मोमबत्ती को मसल के उस आग के पास ले आएंगे जो बुझी हुई मोमबत्ती है वह किसी को बुझाएगी नहीं — पर इसके विपरीत जली हुई जो है वह बुझी हुई को जला सकती है और यह सबसे ताकतवर नियम है वह है यह बात कि — शांति लाने के लिए जिस पर मैं निर्भर हूं वह है यह दुनिया।

“प्रेम ने कहा कि ‘आपको चाहिए कि बस शांति मिल जाए’ जो कि बहुत गंभीर था आप देखते हैं, देखते हैं लेकिन यह तो आपके भीतर है।” हां आपके भीतर है! “एक गाने के बोल हैं कि ‘वो लोग जिन्हें लोगों की जरूरत है वह खुशकिस्मत हैं।’ प्रेम कहेंगे कि ‘लोग जो खुद को जानते हैं वह सबसे खुशकिस्मत हैं।” जी हां, आपने सही बात समझी।

“पीस एजुकेशन प्रोग्राम ने मुझे हैरान कर दिया है क्योंकि यह वह नहीं जो मैंने इसके बारे में सोचा था। मैं उन दर्शकों को देखता हूं जो पीछे बीते और मैं अचेत था जो प्रेम कहते हैं वह आसान है कि सबकुछ यहीं पर है। यह है भीतर देखने के बारे में और संतुष्टि खोजना सही है।” बिल्कुल सही है, सही है; सही है। आपको मिल गया है। देखिए, कितना आसान है। यह कितना आसान है।

“हमने यह सवाल कभी नहीं पूछे जो प्रेम पूछ रहे हैं। हम शायद अपने बारे में रुचि रखते थे पर फिर जीवन सामने आया। प्रेम मुझे आजाद होना बताते हैं सोचते हुए उनकी बातें मुझे हृदय के पास ले जाती हैं।” उम्मीद है। मुझे सच में उम्मीद है।

यह है दोबारा — यह एक चर्च से है, एक मिशनरी बैपटिस्ट चर्च। “मैं शांति की दुआ करता हूं लिंग भेद के साथ, रंगभेद और बाकी समाज की त्रुटियां मेरे देश में शांति हो!” हम सब चाहते हैं कि एक शांतिपूर्ण जीने का ढंग मिले सच मानिए, हम सब यही चाहते हैं, लेकिन यह अलग नहीं है। यह आपकी मांग जो है यह चाहत नहीं है, यह जरूरत है — और यह बात बहुत जरूरी है।

“क्या आपको लगता है हमारी परवरिश की वजह से बाकियों से हमारा विवाद होता है ?”

ऐसा नहीं है कि परवरिश क्या हुई है पर हमें क्या समझाया जिससे हम विवाद में पड़ जाते हैं और यही उस नियम को समझना पड़ता है हमें और हमें इस समझ को पलटना होगा और इसलिए मैं कहता हूं कि बदलना नहीं लेकिन विपरीत होना यह बहुत शक्तिशाली चीज है विपरीत बदलना “अनचेंज।” और हम अगर प्रशिक्षण लें तो शायद हम यह कर पाएंगे।

एक और सवाल जो था कि “मैं टीनएजर्स की मदद कैसे करूं ?”

उन्हें टीनएजर्स न मानकर उन्हें इंसान मानिए पहले और उनकी मदद कर पाएंगे आप मेरी मानिये। टीनेजर बच्चों जैसा बर्ताव नहीं चाहते हैं वह बस इतनी सी ही बात है याद है जब आप टीनेजर थे ? आप टीनेजर नहीं रहना चाहते थे आप बड़े बनना चाहते थे वयस्क। एक बच्चा जो बड़ा बनने की कोशिश कर रहा है एक टीनेजर जो टीनेजर की तरह नहीं रहना चाहता आप उसके दोस्त बन जाइए और टीनेजर को बच्चा मत मानिए और आप उसके दुश्मन नहीं बनेंगे यह इतना ही आसान है बस, मतलब उसके जैसा ही!

अब यह है मेट्रो रेंट्री फसिलिटी से फर्क पड़ता है कि “मैं क्या मानता हूं और क्या नहीं मानता मेरी स्पष्टता बहुत जरूरी है।” (यह एक भाव है) “मैं बाकियों के साथ अच्छा बर्ताव करके करुणा को बढ़ावा दे सकता हूँ।” बिल्कुल जी हां!

“मेरा 4 साल का बेटा अपने नए दोस्त के बारे में कुछ बता रहा था कि उसे ट्रांसफॉर्मर्स पसंद हैं और हरा रंग अच्छा लगता है। और भी कुछ मैंने पूछा ? उसने कहा कि ‘उसकी खाल हमसे काली है।’ मेरे लिए वह सबसे पहली बात होती पर मेरे बेटे के लिए यह आखरी बात थी।” बिल्कुल! यह अलग रंग होना, अलग ऐसे, अलग वैसे, यह वो अलग भाषा…

जब वह — सच मानिए पर उससे पहले कि आपको बोलना आता था कौन-सी भाषा होती थी ? और आप सबसे बात कैसे करते थे। आप अपनी मां से बात करते थे; आप उन्हें बताते थे कि “आप भूखे हैं।” आप बताते थे कि “कुछ ठीक नहीं है।” तो हां बिल्कुल, यह बहुत-बहुत ताकतवर बातें है, बहुत सुंदर बात है।

“मेरी आंखें खुल गईं” — और यह एक महिलाओं के ट्रैन्ज़िशनल सेंटर से सवाल आया है — “मेरी आंखें खुल गईं जब प्रेम ने कहा कि आपकी क्षमता एक पड़ा हुआ बीज है और मुझे पता था कि हम इसे शांति से बढ़ा सकते हैं। मुझे नहीं पता था कि वह मेरे भीतर है शांति।” और एक और है “मैं खुश हूं सिर्फ अस्तित्व नहीं है। फिर मेरा जीवन बेहतर है।” सच में!

“प्रेम ने बात की जीवन के नृत्य की। कभी-कभी छोटी बातों से भी हम घबरा जाते हैं। मैं अपनी शक्ति से ताकतवर रहना चाहती हूं पर मैं कहूंगी ‘मैंने कर दिखाया।‘”

जी हां, यह भीतर की शक्ति ही तो है जो आप में — आप में वह सब पहले से ही है। आपको उसे बस जागृत करना है। आपको उनको पहचानना है, सीखना है और खुद को जानना यही तो होता है इसका मतलब।

“अगर मैं जानता हूं कि अंदर से मैं क्या हूं फिर खुशी और माफ करना मुझसे दूर नहीं है सबकुछ बदलता है पर मैं तो वही रहता हूं जो मैं हूं।” जी हां! बिल्कुल और खासकर इन परिस्थितियों में यह तो सच है। “अगर मुझे पता है कि मैं अंदर से क्या हूं फिर माफ कर पाना और खुशी मेरे साथ रहेगी सबकुछ बदलेगा ही पर मैं वही रहूंगा जो मैं हूं।” यह सही है!

बाकी चीजें बदलेंगी, लेकिन आप नहीं। और इसलिए ना बदलना अनचेंज इसलिए ना बदलना।

“मैं प्यार के लिए कुछ भी करूंगा मैंने सब जगह देखा बस भीतर नहीं देखा जबतक हमने अपने अंदर देखना शुरु किया हमें नहीं पता कि हम कौन हैं।” जी हां! बिल्कुल! आपने बिल्कुल सही कहा।

“मैं बड़ा हुआ” यह एक और है — “मैं बड़ा हुआ और मेरे साथ बहुत बुरी चीजें हुई मैं भूल नहीं सकता। पर मेरी मर्ज़ी है कि मैं माफ कर दूं।” उन्हें और देखूं कि मैं कौन हूं असल में। मैं हर रोज बढ़ रहा हूं।” चाहे जो भी हो, चाहे जो भी हो जाए! “माफ करना!” “माफ करना” क्या होता है ? सोचिए। “माफ करना यह नहीं कि दूसरे को सही मान लिया जाए या उनको माफ कर दें।” माफ करना होता है उस बंदिश से खुद को मुक्त कर देना ताकि आप आजाद हो जायें ताकि आप आगे बढ़ पायें यह है माफ करना।

“माफ करना बहुत जरूरी है मैं किसी और के लिए नहीं कह रहा; ये मैं आपके अपने लिए कहता हूं।” जी हां; यही तो है माफ करना आप अपने लिए करेंगे ये किसी और के लिए नहीं। तो यह ऐसा नहीं कि “अच्छा मैं दूसरों को अच्छा ही दिखूंगा।” यह बंदिश हटाने के बारे में है ताकि आप आजाद हो पायें अपने मन में।

यह अब ग्रीस से आया है (सोचिए जरा), महिलाओं की जेल है वहां पर। “मैं पीस एजुकेशन प्रोग्राम के बारे में उत्सुक थी और सोच के देखूं। सबसे पहले, मुझे समझ नहीं आया। पर समय के साथ, प्रोग्राम जरूरी-सा लगने लगा और मैं खुद को प्यार करना शुरू करने लगी। और मैंने समझा कि मैं इसकी वजह से दूसरों से अच्छे से बोलती हूं, मैं इज्जत करती हूं सबकी।”

देखिए! मैं यही तो बोल रहा था समझिए कि — सब लोग आपसे क्या चाहते हैं वह आपको बताते हैं कि आपको क्या करना है। लेकिन यह ऐसे काम नहीं करता। क्योंकि अगर आप खुद को नहीं जानते तो यह काम नहीं करेगा। पर जैसे ही आप खुद को जानने लगेंगे, आप संपूर्ण हो जाते हैं, आप पूरे हो जाते हैं, भर जाते हैं। “इसकी वजह से मैं अच्छे से बात करती हूं और लोगों से तमीज से पेश आती हूं मुझे इस कार्यक्रम का सकारात्मक प्रभाव नजर आ रहा है और जो मैंने सीखा वह मेरे लिए हर रोज के जीवन का भाग बन गया है।”

और एक और इंसान कहते हैं “जेल में घुसते हुए अपने सबसे प्रिय परिवारजन को खो देने के बाद मैंने खुद से कहा कि ‘सबकुछ खत्म हो गया है।’ मैंने सोचा, वह क्यों मैं क्यों नहीं ? मेरी खुशी पर एक काला पर्दा पड़ गया था और मैं अपनी आत्मा को उदास देखती थी। मेरे अंदर से आवाज आई कि ‘कुछ करो मेरी बच्ची’ तब मैंने पीस एजुकेशन प्रोग्राम में शामिल होने का फैसला लिया।”

“मैंने एक दिन प्रेम को कहते हुए सुना कि ‘इंसान औसतन 25550 दिन जीते हैं।’ यह है धरती पर हमारा समय। फिर मुझे एहसास हुआ कि मेरे पास समय है। उन्होंने कहा कि चिंताओं से परेशान न हों, जबतक इस स्वांस का तोहफा मुझमें आ रहा है, मुझे आगे बढ़ना ही होगा। तो मैं आगे बढ़ी यह सोचकर कि शांति मेरे भीतर ही है। मैं एक अच्छे कल का सोचती हूं याद रखती हूं कि मेरी सच्चाई यह वर्तमान है।”

अगर आप जान सकते हैं कि — आज आपकी सच्चाई है, कल शानदार होगा आपका, मेरी मानिये। क्योंकि कल जब वह कल आएगा वह आज की तरह आएगा और आप क्या करते हुए व्यस्त होंगे कल को ? जो आज की तरह देखते हुए उस सच्चाई में जो आप में है। यही तरीका है काम करने का।

“मैंने पीस एजुकेशन प्रोग्राम अटेंड किया और इसने मुझे जीवन में कई अच्छी बातें करने को प्रोत्साहित किया। मुझे अपने भीतर ही शांति मिल गई यह छोटा-सा बीज ही सही पर महत्वपूर्ण है। मैंने इसे आलिंगन या प्यार के रूप में अपना लिया है क्योंकि यह मुझे ऐसा ही महसूस करवाता है। इस प्रोग्राम में जो भी सिखाया गया उसने मुझे पूर्ण महसूस करवाया और आशा करती हूं सबको ऐसा ही शांति का भाव मिल पाएगा।”

“प्रेम को सुनकर, अपने भीतर शांति मिली। जब मैंने शांति का बीज का सोचा। इससे मेरे रोज के जीवन पर प्रभाव पड़ा। अब मैं हर रोज उठती हूं और शांति की तलाश है। अब मुझे पता है कि मैं कहां देखना चाहती हूं। देखिए! अब मैं क्या कहूँ ? यही तो तरीका है जीने का। यही तरीका है जीने का।

अब यह नॉर्थ कैरोलीना से सवाल है महिलाओं की जेल से दोबारा। “पीस क्लास से मेरी आंखें खुल गईं हैं। मैंने भीतर के खजाने को और संतुष्टि को समझा है। चाहे जो भी परिस्थिति हो। धन्यवाद।”

एक और है सवाल “बस प्रेम को सुनकर ही मुझे शांति का एहसास होता है। धन्यवाद।” और मैंने पीस एजुकेशन प्रोग्राम से सीखा मेरे भीतर शांति है और अपनी किस्मत बनाने की ताकत भी।” जी हां।

“पीस क्लास में आना मेरे दिन का सबसे अच्छा समय होता है; यह कमाल है। इस वक्त जब हमारी फसिलिटी बाहर की दुनिया से लॉकडाउन में है इस बात का पता चल रहा है कि आपकी सेवाएं महिलाओं के लिए इस जेल में कितनी अहम है। ये प्रोग्राम क्लासेज़ जो आप देते हैं मैं उन्हें मिस कर रही हूँ मुझे याद आ रहा है।” इस करेक्शनल प्रोग्राम सुपरवाइजर की ओर से यह बात थी।

तो मैंने सोचा क्यों ना उस वर्तमान की बात आपसे की जाए, क्योंकि यह भाव आते हैं और हमें इन्हें साझा करने का मौका नहीं मिलता तो मैंने सोचा “आज कुछ पल निकालकर आपके साथ साझा करूं ये बातें।” तो ये लोग वह हैं, एक तरह से, जो लॉकडाउन में ही रहे हैं, लॉकडाउन में ये हैं। और शायद, बहुत जल्द यह कोरोना वायरस खत्म हो जाएगा और हम बाहर जा पाएंगे और हम घूम पाएंगे — पर ये लोग लॉकडाउन में ही रहेंगे जेल में और इनके लिए शांति महसूस करना कितना जरूरी है।

तो उम्मीद है आप शांति महसूस करेंगे। उम्मीद है आप ठीक रहेंगे। तो अच्छे रहें; सुरक्षित रहें आप सभी लोग! धन्यवाद!

लॉकडाउन — तेरहवां दिन 00:23:52 लॉकडाउन — तेरहवां दिन Video Duration : 00:23:52 प्रेम रावत के साथ (हिंदी में अनुवादित)

प्रेम रावत:

सबको नमस्कार!

उम्मीद है आप सब बिल्कुल ठीक हैं। इन सब बातों के अलावा जो कोरोनावायरस और बाकी सब आजकल चल रहा है कि आप ठीक रहें। इस सबके बीच और — यही बात जरूरी है सच मानिये। तो आज मैं क्या बात करना चाहता हूं और मैं कल रात इसके बारे में सोच रहा था और मैंने सोचा ऐसा जो बहुत ही कमाल का होगा। कम से कम बात और सोचने के बारे में और कुछ नहीं तो मैं इस कहानी से बात शुरू करता हूं।

एक आदमी ने कॉलेज पूरा किया और वह अपने घर जा रहा था। बहुत ही खुश था कि कॉलेज पूरा कर लिया है और जानता था कि अब उसे नौकरी ढूंढनी है और सभी वो बातें जो कॉलेज पूरा करने के बाद आप करना चाहते हैं। तो वह अपने घर जा रहा था और रास्ते में वह देखता है एक बूढे व्यक्ति को और उस बूढे व्यक्ति ने कन्धों पर बहुत, बहुत, बहुत बड़ा लकडी का टुकड़ा रखा हुआ है और वह झुका हुआ है और वह धीरे-धीरे चल रहा है। यह देखकर इस आदमी को विचार आता है, वह कहता है कि "अब मैं भी जीवन की शुरूआत ही कर रहा हूं और यह बूढा व्यक्ति इन्होंने तो जीवन की राह पर काफी कुछ देखा ही होगा काफी लम्बे समय से। तो इससे ही क्यों ना मैं पूछूं कि दुनिया में कैसे जीना चाहिये, सभी बेहतरीन चीजों का लाभ कैसे ले सकता हूं मैं ? क्योंकि यह बहुत अच्छा होगा, क्योंकि मुझे इससे फायदा होगा।"

तो जैसे ही वह उनके पास पहुंचा उन्होंने उनसे पूछा कि "सुनिये बाबा! मैं अपने जीवन में अच्छा कैसे करूं क्योंकि मैं तो शुरुआत ही कर रहा हूं और बिल्कुल आप तो काफी वक्त बिता चुके हैं। आपके पास मुझे बताने योग्य कुछ तो होगा।"

उस बूढे व्यक्ति ने रूककर अपने कन्धों से वो बड़ा लकड़ी का टुकड़ा उठाया नीचे रखकर सीधा खड़ा हुआ। उसके बाद उस भार को उसने अपने कन्धों पर फिर से रखा और चलने लग गया। वह आगे चला गया और बस चलता गया। और बस यही कहानी का अन्त है। क्या उस बूढे व्यक्ति ने इस आदमी को कुछ संदेश दिया कि "जीवन कैसे जीना है ?" और वह संदेश यह है कि "जीवन में हम चलते हैं और हम झुकते हैं अपने ऊपर भार लेकर, एक बहुत भारी सामान लेकर और उन चीजों का भार वो ऐसा है और इस व्यक्ति ने मुझे ये कहा; उसने मुझसे ये कहा और उसने मुझसे ऐसा व्यवहार किया; उसने मेरी ये समस्या नहीं समझी और हां वह व्यक्ति मुझे इसलिये पसन्द नहीं करता क्योंकि ये है और ऐसा करता है" और ये सभी बातें जो हम इकट्ठा कर लेते हैं अपने ऊपर।

ओह जानते हैं "मैं फेलियर हूं, मैं सफल इंसान नहीं हूं।" "मैं फेलियर इसलिये हूं क्योंकि मैंने ऐसा किया; मैं इसमें अच्छा नहीं हूं और मैं ये नहीं कर सकता; मैं वो नहीं कर सकता…मैं सोच रहा था कि हे भगवान, जानते हैं हम अपने ऊपर कितना बोझ लिये हुए चलते रहते हैं।"

और अब जब हम लॉकडाउन की इस स्थिति में हैं, कोई जगह नहीं हमारे पास जाने के लिये। हम क्या वो कैसा होगा और कुछ नहीं कि — हम पीछे लौट चलें बस। बटन को रिसेट कर दें कैसा रहेगा ? बस जाने देना और मान लेना ? उस सुन्दर साधारण अस्तित्व को, उसकी सच्चाई को, वो एक बच्चे की तरह जो हर रोज उठता है.... और मुझे याद है कि जब मैं एक बच्चा था — और मैं दिन के लिये तैयार होता था; मैं दिन को स्वीकारने के लिये तैयार था। मैं उस दिन की चुनौतियों के लिये तैयार होता था। कुछ भी एक जैसा नहीं होता कुछ भी ऐसा नहीं था कि "मुझे ये करना है, फिर वो करना है, फिर ये।" फर्क नहीं पड़ता था। चाहे दिन जैसा भी होने वाला था, मैं उसके लिये तैयार था; उसे स्वीकार करने के लिये और मैं खुश था। मैं उत्सुक था, जीवित होने के लिये उत्सुक था, उस सुबह के मौके के लिये उत्सुक था, उस सुन्दर मौके के लिये — और उन मौकों को अपनाना ताकि मैं एक खुले हृदय के साथ और मन के साथ उसे स्वीकारना। वो पहले से मैला नहीं कि "हे भगवान, आज क्या होगा; आज बुरा होगा; आज ये होगा; वैसा ही होगा नहीं।"

एक दिन एक राजा था। वह अपनी बालकनी में आया और वह नीचे देख रहा था और उसने एक आदमी को देखा और वह आदमी वहां से जा रहा था और उसने राजा को देखा और उसने झुककर सलाम किया और उस दिन राजा का दिन बहुत ही बुरा गया, बहुत ही बुरा दिन। तो राजा ने उस आदमी को बुलवाया और शाम को ही राजा ने उस आदमी से कहा कि "इसे मौत की सजा दो" और उस आदमी ने कहा "लेकिन आप मुझे मरवाना क्यों चाहते हैं ? आप मुझे सजा क्यों दे रहे हैं ?" राजा ने कहा "क्योंकि मैंने आज सुबह उठकर तुम्हारा चेहरा देखा और मेरा दिन बहुत ही खराब गया और इसलिये मैं तुम्हें मरवा रहा हूं।" उस आदमी ने राजा को देखा और कहा कि "राजा आपका दिन बहुत ही बुरा गया पर मैं तो मरने वाला हूं और मैंने आपका चेहरा देखा था और सुबह सबसे पहले आपको ही देखा था तो मुझसे भी कहीं ज्यादा बदकिस्मत आप हैं" — देखने के लिये, क्यों।

ऐसे ही जानते हैं न जैसे कि जब हम उठते हैं और वही टेप-रिकॉर्डर बजना शुरू हो जाता है "आपको ये करना है; आपको वो करना है; आप लेट हो गये हैं; आप ऐसे हैं; आप वैसे हैं। वह इंसान आपको पसन्द नहीं करता; आपको इस इंसान को ये बताना है; आपको ये करना है और आपको वो भी करना है। और यह आपके परिवार और दोस्तों और साथ काम करने वालों के साथ ऐसा ही चलता है, "हमें इसका जबाब देना है; उसका जबाब देना है; हमें ये करना है; हमें वो करना है। कितनी ही चीजें — मैं जानता हूं ऐसे लोग हैं वो सन्देश लिखते हैं और उससे वो एक्स्पेक्ट करते हैं, उम्मीद रखते हैं कि जवाब उसी वक्त मिले। अगर ना मिले तो वो कहते हैं कि "अरे कुछ तो गड़बड़ है।" वो घबरा जाते हैं और आप दुनिया में देखते हैं सबकुछ कि "हमें ये करना है; हमें वो करना है; इसका जबाब देना है। हे भगवान, हमें ये साझा करना है।" और यह टेप-रिकॉर्डर बस चल पड़ता है अचानक से।

एक तरह से क्या मैं किसी पर आरोप लगाऊं, क्या मैं सोचूं कि यह गलत है ? एक तरह से मैं समझ सकता हूं कि इसमें कुछ भी गलत नहीं है। यह बिल्कुल सही है सबकुछ, लेकिन इस सब में सिर्फ एक ही बात जो मुझे गलत लगती है वो यह कि सबकुछ ये सब मुझे खुद से दूर ले जाता है। अब मुझे एक फैसला लेना है और शायद मैं इसे हर रोज ना सुनूं और हां, जब मैं दुनिया की सारी परेशानियों से घिरा हुआ हूं शायद मैं इस पर ध्यान ना दूं लेकिन एक फैसला तो है — एक फैसला जो मेरे भीतर से आयेगा 24*7, साल के 365 दिन। और वह फैसला कह रहा है कि "आप पूर्ण रहें, आप सच्चे रहें, ईमानदार रहें। समझिये। आप स्पष्टता लायें। आप सभी चीजों को जीवन का हिस्सा बनाइये।" और यह करने का फैसला होगा हृदय का। और हमारा फैसला है कि "हम जबाब दें; मेल मिला है क्या; जाइये मेसज़ को देखिये; न्यूज़ को देखिये और ये कीजिये और वो कीजिये और इसका जबाब दीजिये और उसका जबाब दीजिये।" और यही सब — कितनी ही सारी जिम्मेदारियां।

तो सवाल यह है कि क्या हम एक बटन दबाकर रीसेट कर सकते हैं ? और शायद ऐसा कोई रीसेट करना ना हो पाये। पर शायद यहां पर हम इस बात की सराहना कर सकते हैं। सराहना करना शुरू कर सकते हैं कि जीवन हमें कुछ बता रहा है कि मैं खुद को कुछ बताऊं कि हां, यह ब्रह्माण्ड भी मुझे कुछ बता रहा है। और जब मैं देखता हूं — सबकुछ देखता हूं मैं। जब मैं गंदगी को देखता हूं — और मैं यही तो हूं। मैं ही वो गंदगी हूं। इन चीजों से ही, यही चीजें जिन्हें देखकर मैं "गंदगी" कहता हूं इन्हीं सबसे मैं बना हूं। यह है — ये खाल, ये हड्डियां, ये खून, ये मांसपेशियां, ये अंग हम इन्हीं से तो बने हैं। और जिस दिन मैं दूसरी दीवार से टकराऊंगा; मैं खत्म हो जाऊंगा, मैं बस यही तो बन जाऊंगा — धूल। धूल से ही हम आये हैं और धूल में ही हम मिल जायेंगे। और फिर भी जीवन क्या है ?

अब कई लोग कहते हैं कि "जीवन क्या है ?" और सवाल ये आता है कि "जीवन का क्या ?" क्योंकि कोई भी इस पर ज्यादा ध्यान नहीं देता। कोई नहीं कह रहा कि "यह है जरूरी।" वो सारी बातें नहीं जो आप कर रहे हैं। जरूरी क्या है ? जरूरी है इस स्वांस का आना और जाना। कितनी मधुर और ताकतवर है यह स्वांस! कितनी कमाल की है यह स्वांस — जो आप में आती है और आपको क्या देती है ये ? कोई साधारण तोहफा नहीं — एक अनोखा उपहार और यह है स्वयं जीवन का उपहार। प्यार से, आराम से यह आप में आती है, आपको भरती है, ताकि आप जीवित रह पायें। आप ही सोचिये और इसकी कोई सीमा नहीं है जो आप सोच सकते हैं; आप जो चाहें उसके बारे में सोच सकते हैं। आपको पूछना चाहिये, जी हां आपको सोचना चाहिये कि आपकी मूलभूत जरूरतें आखिर क्या हैं ? मैंने इन्हें "जरूरत" कहा है, चाहत नहीं जरूरत। आपकी एक जरूरत है कि आप पूर्ण हो जायें। आपकी जरूरत है कि आप सन्तुष्ट हो जायें। आपकी जरूरत है कि आप खुश रहें। ये हैं आपकी जरूरतें। और इनके बिना नतीजे बहुत ही बुरे होंगे। इनके बिना उदासी छा जायेगी; निराशा होगी; भ्रांति छा जायेगी।

यह ऐसी ही बात है; जैसे कि हम संदेह की बात करते हैं और संदेह — अच्छा। क्या आपको कभी संदेह नहीं होना चाहिये ? जी नहीं! हर एक बावर्ची को हर कोई आप एक चीज करता देखेंगे वह अपना खाना बनाने के बाद, वह चखते हैं उसे और वह चखते क्यों है ? वह चखते हैं क्योंकि उन्हें संदेह है। वह जानना चाहते हैं कि जो पका है वह कैसा है कि नमक ठीक है, स्वाद ठीक है। संदेह करते हैं, शक करते हैं, पर सन्देह से निकलने के लिये कुछ करते हैं वो लोग ? और वो उन्हें बस चखना होता है। उसे चखकर अब कोई सन्देह नहीं कि अच्छा है या नहीं है या स्वाद ठीक है कि जैसा स्वाद चाहिये था वैसा मिला या नहीं मिला कि नमक ठीक डाला है, मिर्च सही डाला है जो भी — मसाला सही है "सबकुछ ठीक है।"

तो सन्देह कोई मुद्दा नहीं है। बात है सन्देह को खत्म करने की और जब आप दूसरी तरफ फंसे हैं और दिमाग में है बस शक, शक, शक, शक, सन्देह, सन्देह, सन्देह ही….। मेरा मतलब कि फिलहाल क्या आप शक कर रहे हैं ? नहीं करना चाहिये, इससे बाहर निकलिये, क्योंकि यही एक मौका है। आप जानते हैं कोई है जो बैठकर कह रहा है कि "यह मेरे साथ क्यों होता है ?" अब आप बैठकर खुद को सवाल कर सकते हैं जबतक गाय वापस नहीं लौट आती। सोचते रहें, सोचते रहें और यह बात कि "मेरे साथ ये सब क्यों हुआ" या फिर आप कह सकते हैं कि "मैं इसके बारे में क्या करूं जिससे मुझे इस वक्त का सबसे ज्यादा फायदा मिल पाए, मैं बेहतर कैसे बन सकता हूं ?" मुझे यकीन है ऐसे भी लोग हैं जिन्हें लगता हैं कि बेहतर बनने की गुंज़ाइश नहीं है, पर मेरी बात मानिये हर इंसान बेहतर बन सकता है। क्या आप अपने हृदय में बेहतर बनना चाहते हैं ? क्या आप मान सकते हैं अपने दिमाग में कि आपके पास एक विकल्प है कि आप चुन सकते हैं, आप चुन सकते हैं कि आपकी जरूरतें क्या हैं आप उन पर ध्यान नहीं देते हैं।

और क्या कमाल का तरीका है वापस जाने का, सुनकर, सिर्फ सुनकर — और फिर कुछ करने से अपनी जरूरतों के बारे में सोचना, खुशी की जरूरत…। वो बाहर जाना, यह कोई जरूरी नहीं, यह चाहत है। जरूरत है कि आपको सुरक्षित रहना है। लेकिन बाकी जरूरतें भी होती हैं; जरूरत है पूर्ण होने की और इसका बाहर जाने से कोई लेना-देना नहीं इसके लिये आपको भीतर जाना है। उस स्पष्टता के लिये आपको भीतर झांकना है। उस सुन्दर समझ के लिये आपको अन्दर देखना है। क्योंकि भीतर ही आपको ये मिलेगी। आप में — आपके अन्दर वो सब बातें मौजूद हैं जो आप खुद से दूर समझते थे। यही है व्यंग।

इसे कबीर कितना अच्छे से बताते हैं कि "वह जो हिरण है, वह हिरण अपनी नाभि की महक ढूंढ रहा है — और वह जंगल ढूंढता है पर वो महक उसकी अपनी नाभि में होती है।" वहीं तो है वो महक हिरण में। और यह है दुर्घटना। और कैसे ? कबीर कहते हैं "जैसे कि आग लगती है चमकते पत्थर में...." जैसे तेल है तिल में। छोटे बीज, तिल के बीज, आपको लगता है कि उसमें कोई तेल नहीं है लेकिन उनमें से कुछ को निचोड़ें तो काफी सारा तेल निकल जाता है, तिल के बीज का तेल और "चमकते पत्थर की तरह जहां आग है वैसे ही दैविक है आपके भीतर। और अगर आप उसके साथ जग पायें, अगर अपनी आंखें उस पर खोल पायें।" तो देखेंगे और वह कहां है दैविक, वह है स्पष्टता; वह है शांति; वह है समझ — वह सब जो आप में अच्छा है वह हमेशा से रहा है, हमेशा रहेगा भी। आप उसे बाहर देखेंगे क्योंकि यह आपकी आदत है। अब कोई भी जेब में आइसक्रीम नहीं रखता जब आपको आइसक्रीम चाहिये आप उसे बाहर ढूंढते हैं। लेकिन जो दैविक है वह आपके भीतर है। वह स्पष्टता, आपके भीतर है। वह समझ, आपके भीतर है। वह खुशी, आप खुद में लेकर चलते हैं। पूर्ण होना आप भीतर लेकर चलते हैं — वह सच्ची पूर्णता और वहीं तो आपको देखना है। वहीं तो आपको खोजना है। यही बात तो आपको समझनी है।

यह सवाल नहीं है कि "ओह हां, मुझे पता है!" यह सवाल नहीं है कि "ओह हां, मैं जानता हूं।" सवाल यह है कि इसका क्या कर रहे हैं आप — अगर आप जानते हैं कि दैविक आपके भीतर है आप उसका क्या कर रहे हैं ? क्या आप उत्सुक हैं ? आपको कितना उत्सुक होना चाहिये ? दैविक आपके भीतर है इस बात कि खुश होने की कोई सीमा नहीं होनी चाहिये। आपको इतना खुश होना चाहिये कि जो आप ढूंढ रहे हैं वह आपको चाहिये, वह आपके भीतर ही है कि वो सब — वह दूसरी सच्चाई है। हम इस दुनिया की सच्चाई को मानते हैं — लेकिन एक और सच्चाई भी मौजूद है। और यह उतनी ही सच है जैसे वो। पर कभी-कभी सच्ची नहीं रहती।

मेरा मतलब, मेरे सबसे अच्छे प्लान्स थे। अगर किसी ने कहा होता कि "2020 में एक लम्बा होगा समय ऐसा जब आप कोई इवेंट नहीं कर पायेंगे।" तो मैं कहता कि "यह सच नहीं है। मैं इवेंट करना चाहता हूं।" लेकिन परिस्थिति बदल गयी है। मैं लोगों को इस तरह से बुलाकर उनको बीमारी नहीं देने वाला हूं मैं। तो मैं यहां पर हूं अच्छा करने की कोशिश में, जानते हैं आप तक पहुंचना इन विडियोज़ के जरिये आपसे बात करना। ऐसा नहीं कि कमरे में कई लोग हैं; मेरे अलावा यहां पर कोई भी नहीं है। बस मैं हूं; मैं आता हूं; लाइट जलाता हूं; कैमरा चलाता हूं; शूट करता हूं। और फिर कार्ड को लेकर अपलोड कर देता हूं और यह, बस चला जाता है। मुझे वीडियो में बात करने की आदत तो है लेकिन हमेशा काफी लोग होते हैं यहां पर — कोई कैमरा संभालता है; कोई लाइट्स को देखता है; कोई ये करता है; कोई ऑडियो को सुनता है। लेकिन ये सारा सेटअप बना होता है — मैं बस अपना काम करता हूं। तो कौन-सा वाला सच है; क्या है सच्चाई ?

अप्रैल 2019 में कोई ऐसी बात नहीं थी (कम से कम हमारे पास) कोरोनावायरस की कोई खबर नहीं थी। सब ठीक था। और फिर अचानक से ये सब हो गया। दिसम्बर के आसपास हमने सुना कि ये शुरू हो रहा है "कोरोनावायरस, कोरोनावायरस, कोरोनावायरस" और सबकुछ बदलने लगा। फिर अगली बात जो पता चली कि लॉकडाउन हो रहे हैं। लॉकडाउन यहां पर, लॉकडाउन वहां, सब जगह। लेकिन इस स्वांस की सच्चाई नहीं बदली है। और क्योंकि मैं आज ही किसी से फोन पर बात कर रहा था तो उन्होंने कहा कि "इसकी वजह से सब कुछ बदल गया है।" मैंने कहा "नहीं, यह बस एक रूकावट के जैसा है शायद हमारे प्लान में। लेकिन सच्चाई यह है वह असलियत अभी नहीं बदली है।" स्वांस अब भी आप में आती है और इसी से आप पहले भी जीवित थे और इसी से आप अब भी जीवित हैं — और उम्मीद है, अगर सावधानी बरतेंगे तो यह आपको कहीं लम्बे समय तक जीवित रख पायेगी, जैसे आप रहना चाहते हैं। यह अच्छी बात होगी। है ना!।

तो आपका जीवन, आपका अस्तित्व — अच्छा समय है रीसेट करने के बारे में। जाने दें; छोड़ दें वो सब बातें जो आपके कंधों पर हैं वो भार। और एक बार के लिये सीधे खड़े हो जाइये और जीवन में चलिये आगे। इस वक्त से कुछ सीखिये और मजे कीजिये। जीवित रहना इस स्थिति में, इस अजीब स्थिति में रहना। परेशान न हों; कोई जरूरत नहीं परेशान होने की आपको। यह है जो है। आपको क्या करना है कि बस सावधानी बरतिये। और अगर आप सावधानी रखेंगे तो आप ठीक रहेंगे। अच्छे रहेंगे आप।

तो अपना ख्याल रखें आप। सुरक्षित रहें! ठीक रहें! और हां, आप रहिये खुश।

मैं आपसे कल मिलूंगा। धन्यवाद!

लॉकडाउन — बारहवाँ दिन 00:17:40 लॉकडाउन — बारहवाँ दिन Video Duration : 00:17:40 प्रेम रावत के साथ (हिंदी में अनुवादित)

प्रेम रावत:

सबको नमस्कार!

उम्मीद है कि आप सब ठीक हैं। उम्मीद है कि इन परिस्थितियों में भी आप सब खुश हैं। क्योंकि सच्ची खुशी लॉकडाउन में नहीं है, सच्ची खुशी वह आपके भीतर है। शांति जो आप तलाशते हैं वह आपके भीतर है। सवाल है कि जो चल रहा है उसे सच में समझने का कि "यह है क्या!"

तो आप इसे देख सकते हैं कि "हां मैं बंद हूं, लॉकडाउन में हूं मेरी यह स्थिति है, मेरी ये परेशानियां है, यह कोरोनावायरस की दिक्कत आ गई है।" मेरा मतलब सबकुछ पता है ना इसके साथ आ चुका है। और मैं समझ सकता हूं लोग गुस्सा हैं, वो नाराज हैं, आरोप लगा रहे हैं "उसने ये किया; उसने वो किया; उसने यह किया; इसने वह कर दिया!" और हां बिल्कुल आरोप लगाना आसान है और खासकर नेताओं पर कि वो क्या कर रहे हैं उनमें से इतने सारे, उनमें से सब नहीं पर ज्यादातर कि वो किस तरह से बेवकूफियां करते जा रहे हैं।

अब आप क्या कर सकते हैं ? चाहे उन्हें भुगतना पड़े या नहीं भी पर लोगों के लिए तो मुश्किल है ही और सोचिये उन गरीबों के बारे में — मेरा मतलब उनके पास क्या है ? कुछ नहीं, कुछ भी नहीं जैसी यह दुनिया है गरीबों के पास कुछ नहीं बचा है अब। फिर भी हम ऐसे ही हैं। जो कुछ भी हमारे पास इस शॉपिंग सेंटर में मौजूद है हम उसे ले जा नहीं सकते। हम खाली हाथ आए थे और हम खाली हाथ ही जाएंगे वापस। ये कोई भी संपत्ति, ये कोई भी चीज हम नहीं ले जा पाएंगे अपने साथ। हम खुद को गरीब नहीं मानते लेकिन एक गरीब इंसान की तरह हम ऐसे ही जाएंगे, अपने साथ बिना कुछ लिए हुए। इसे देखते हुए, समझते हुए इसे कि आप क्या कर सकते हैं; क्या संभव है ? तो क्या है संभव, यह हमेशा संभव रहा है — इसमें पैसा नहीं चाहिए; इसमें संपत्ति नहीं चाहिए; इसमें कुछ भी नहीं चाहिए — इसमें आपकी जरूरत है बस। आपके पास ये कमाल, कमाल, कमाल की चीजें है जो सिर्फ आपकी हैं। कोई भी आपके कमरे में आकर इनको आपसे चुरा नहीं सकता।

एक कहानी है। यह एक जेन स्टोरी है और मुझे पसंद है। एक बार एक गुरु अपनी झोपड़ी में आए और उन्होंने देखा कि एक चोर वहां आया था और सभी कीमती चीजें ले गया है। हां, तो उन्होंने कुछ नहीं कहा और खिड़की के पास वाली कुर्सी पर बैठ गए। उन्होंने खिड़की खोली और — एक कमाल का दृश्य था उनके सामने। चांद ऊपर चढ़ रहा था और सितारे थे वो बस... बहुत सुंदर था तो उन्होंने कहा "शुक्र है वह चोर सबसे कीमती चीज ले जाना भूल ही गया जो मेरे पास है।" मुझे यह कहानी बहुत पसंद है, क्योंकि वो जिसकी सराहना हृदय कर सकता है; जो आप इंसान होने के नाते सराहना कर सकते हैं जिसकी; वह है जरूरी, वही सच है, बाकी सब तो बदलता रहता है। यह बदलेगा क्योंकि यही इसकी प्रकृति में है।

हमारी प्रकृति में क्या है, सोचिये आप ? और यह हमारी प्रकृति में नहीं, नासमझी है और हमारी नासमझी है, हम बदलाव नहीं चाहते। हम चाहते हैं चीजें वैसी रहें जैसी कि वो हैं। मेरा मतलब इंडस्ट्री को ही देखिये और यह इतनी बड़ी इंडस्ट्री है, जी हां "एंटी एजिंग इंडस्ट्री।" यह आपको वैसा दिखाना चाहते हैं जैसे कि आप नहीं है, मतलब — जवान। जवान ? जब आप छोटे थे किसे फिक्र थी ? आपके मुंह पर दाने थे पर फिर भी "ओके यह तो ऐसा ही है।" फिर आप बूढ़े हुए और आपने एक झुर्री देखी और कहा कि "अरे हे भगवान नहीं, नहीं! झुर्रियां आना शुरू हो गयी हैं, मुझे तो बस…" एंटी रिंकल क्रीम" लगानी है। इंडिया में एक क्रीम है जिसका नाम है "फेयर एंड लवली" तो मैं एक टीवी चैनल के साथ इंटरव्यू कर रहा था। उन्होंने मुझसे पूछा वह बोले कि "आप आये और इतनी चमक है आपके चेहरे पर यह चमक कैसे है आप में ?" मैंने कहा क्योंकि मैं एक क्रीम लगता हूँ "फेयर एंड लवली।" जी नहीं — वह बस हंसने के लिए एक मजाक था।

बस और यही तो है इसके बारे में। हम वो बनना चाहते हैं जो कि हम हैं नहीं और क्या चाहत है कि हम वो बनना चाहते हैं जो कि हम है नहीं! कोई भी इंसान नहीं रहना चाहता वैसा ही क्या मैं बस इंसान रहूँ ? क्या मैं इंसान बन सकता हूँ — जिसके पास सब्र की संपत्ति है ? यह है असली संपत्ति। पर देखिये, अब आपको इंसान बनना पड़ेगा यह समझने के लिए कि आपके पास सब्र की संपत्ति है क्योंकि इसके अलावा आप क्या करेंगे ? आपको सब्र रखना ही है जैसे कि "हे भगवान! हे भगवान, मैं बंद हूँ मैं ये नहीं कर सकता, वो नहीं कर सकता – ये गलत है; वो गलत है; ये गलत है।" और ये सूची बस बढ़ती जाती है, बढ़ती जाती है, बढ़ती जाती है। लेकिन एक बार आप इंसान के नाते सोचने लग जाते हैं और अपनी असल संपत्ति की सराहना करने लगते हैं — वो सब्र, समझदारी, स्पष्टता, वो ताकत जो आप में है, वो रोशनी जो आप में है। जो इस निराशा के समय में भी जहां निराशा है हर जगह पर उम्मीद को जगाती है। क्यों ?

क्योंकि एक साफ-साफ प्रमाण है। हर रोज जब आप उठते हैं, हर बार कि जरूरी क्या है ? आपको बस बैठकर यह नहीं कहना कि "सांस अंदर; सांस बाहर; सांस अंदर; सांस बाहर!" कुछ चीजें अपने आप होती हैं; एक है करुणा; कमाल की करुणा है; कमाल की करुणा है जो अस्तित्व में है आपको उसकी सराहना करनी है। वह करुणा आपको उम्मीद देती है, उम्मीद आगे बढ़ने की, उम्मीद कि "हां चाहे स्थिति जो भी हो, चाहे जो भी स्थिति आ जाए मैं ठीक रहूंगा, मैं ठीक रहूंगा।" आप इस सबको जो भी चल रहा है मेरा मतलब, इसका सबसे बुरा भाग मतलब कि — सबसे बुरा भाग कोरोना वायरस का है। यह नहीं कि कोरोना वायरस आ गया है। यह है कि गलत जानकारी है और लोगों में और वो गलत जानकारी जो कुछ नेताओं को भी है। मुझे नहीं पता नेताओं के साथ क्या चल रहा है लेकिन जानते हैं जैसे कि "अच्छा हम यह करने वाले हैं, हम वो नहीं; हम ये करेंगे; हम वो करेंगे।" मैंने कहा "क्या कर रहे हैं।"

आप यूनाइटेड स्टेट को देखिए और वो जानते थे कि क्या चल रहा है, वो जानते थे चाइना में क्या चल रहा है और लोग तो बस सब जगह जा रहे थे घूमना, घूमना, घूमना, घूमना, और वो चीजें जो हमें लगा कि कमाल की हैं अचानक से ही "हे भगवान यह खतरनाक है!" जी हां। पर हम इंसान हैं; हमारा काम क्या है ? हम सोचते थे हमारा काम है आविष्कार करना और मशीन बनाना और देखो कि "मैंने ये करा है और वो किया है....." क्या हम कोरोना से उभर पाएंगे ? हां हम इससे उभर पाएंगे। पर हम इसके साथ जीयेंगे कैसे ? हमने क्या सीखा है इन सबसे ? यह बन गया है एक परेशानी नहीं, लेकिन एक महामारी, वैश्विक स्तर पर हमने इससे क्या सीखा इतने वर्षों में, हमने बीते वर्षों में और उससे पहले से हमने क्या सीखा ? क्या हमने सीखा कि इसकी वजह से एक मौत ही बहुत है ? अगर इससे बचा जा सकता है, तो इससे बचिए। कहां है ? कहां है तैयारी ? कहीं नहीं। लेकिन इस परिस्थिति में भी, इन पलों में भी मैं चाहता हूं कि आप खुद को देखें और खुद को देखने में जवाब ढूंढिए। सवालों को नहीं — आप जवाब ढूंढिए, जो आपके हृदय में है, जो आपके अस्तित्व में है, जो कोई भी गलत जानकारी जैसे नहीं हो सकते हैं।

सोशल मीडिया की जो भी अच्छाई है उनमें से एक अच्छाई है कि — वह गलत जानकारी बहुत आसानी से फैला देती है और ये बात — मैं इसके बारे में पढ़ रहा था कि इससे लोगों को घबराहट होती है ऐंगज़ाइइटी, तो इसमें अच्छा क्या है, एक ऐसी चीज में जो घबराहट देती है। जो लोगों को डराती है। इससे उदासी आ जाती है ये सभी चीजें शुरू हो जाती हैं नकारात्मकता सी। देखिये और एक ही तरीका है कि आप इन्हें रोक सकते हैं — आप एक ही तरह से इन सबको रोक सकते हैं — भीतर देखकर। इतना सब कूड़ा इसको आप रोक सकते है — भीतर झांककर। और कोई कहेगा कि "ओह हमें तो यह करना है; हमें वो करना है; हमें क्या कुछ करना है...." लेकिन सच में क्या करना है आपको ? सबसे जरूरी बात क्या है जो आपको करनी है ? अपनी प्राथमिकता समझिये। अपने सिद्धांतों को समझें। अपनी प्राथमिकता को समझिए। आपकी प्राथमिकता है कि आप इस स्वांस को लें। आपकी प्राथमिकता है मेरे दोस्तों कि अपने हृदय को जानिए। आपकी प्राथमिकता मेरे दोस्तों कि आप संतुष्ट रहें। आपकी प्राथमिकता है मेरे दोस्त शांति से रहना है। आपकी प्राथमिकता है मेरे दोस्त खुश रहना है। चाहे आपके पास कोई भी परिस्थिति क्यों ना आ जाए।

उस बहुत ही सुंदर साधारण खुशी में, उस सुंदर समुद्र में तैरना जहाँ शांति है। संतुष्ट रहना; शांत रहना; समझदार बनना — आगे की दिशा में देखना; वर्तमान के बारे में भूले हुए बिना; आज की बात भूले बिना; यह भूले बिना कि आज में क्या है! यही तो समस्या है। हम भविष्य के बारे में इतने उत्सुक हैं कि हम आज को भूल जाते हैं और हम वर्तमान को जब भूलते हैं और फिर भविष्य संदेह में हो जाता है। हम कल से इतना खुश हो गए हैं कि हम आज को भूल जाते हैं और जब हम आज को भूल जाते हैं फिर वो बीता हुआ कल हमारी किसी तरह से मदद नहीं करता। आपको, जी हां, बिलकुल परिस्थिति की जागरूकता बनाई रखनी होगी कि आज में क्या हो रहा है, जी हाँ वर्तमान में।

जहाँ आप प्यार करते हैं उसे जताइए! एक बार जताना काफी नहीं है — एक बार काफी नहीं है उस प्यार को बार-बार फिर से बार-बार जताइए! जी हाँ ऐसे करना है! ऐसे ही होगा! पता है यह पटैटो चिप्स की तरह है आप खाते हैं एक, फिर आप एक नहीं खा पाते, आपको दूसरा लेना ही है और फिर दूसरा और फिर एक और एक और। जैसे कि आइसक्रीम होती है आप एक चम्मच खाते हैं और इतनी अच्छी लगती है वह आपको कि आप थोड़ी और लेते हैं, फिर थोड़ी और, फिर थोड़ी और, फिर थोड़ी और। आप देखते हैं एक छोटा बच्चा उसके पास एक आइसक्रीम है। वह उसको खा रहा है और वह खुशी में है। मेरा मतलब उसका ध्यान केन्द्रित है! पूरी तरह से — बिल्कुल, बिल्कुल पूरी तरह से वह वहीं उस आइसक्रीम पर ध्यान दे रहा है। फर्क नहीं पड़ता कि आसपास की दुनिया में क्या चल रहा है और मुझे बिल्कुल वैसा ही बनना है — मुझे वैसा होना ही है, आपको वैसा बनना है। आज की खुशी में इतना लीन, इतना मग्न हो जाइये जो आज की खुशी है उसमें — वह सुन्दरता जो हृदय में नृत्य करती है वह हैं आप।

क्या आप खुद को दूसरों की नजरों से देखते हैं ? तो आपको खुद को पहले अपनी आंखों से देखना चाहिये — आपको खुद को अपनी आंखो से देखना ही चाहिये, लेकिन दूसरों की आंखों से देखना खुद को आसान होता है "वो क्या सोच रहे होंगे ?" यह ताकतवर बात है! यह कितनी ताकतवर बात है। यह बाकी लोगों के बारे में नहीं है। आपका जीवन आपके बारे में है। यह आपके हाथ में है आपकी सारी मेहनत, वो कमाल की मेहनत जो आपने अपनी मां के गर्भ से निकलकर इस दुनिया में आने में की है। आपने ही की है वो। वह आपने की है मेहनत सारी। फिर जिस दिन आप जायेंगे आप ही हैं जो दीवार के पार जायेंगे और इसलिये इसे कहते हैं "आपका जीवन — आपका जीवन, आपका अस्तित्व" और इसकी सराहना करने के लिये कि आप में वो सब्र हो, समझने के लिये कि आप कौन हैं और जब मैं कहता हूं कि "वर्तमान से सारी खुशी निकाल लीजिये जो आपके लिये है।" एक तोहफा है यह। यह एक तोहफा है इसे स्वीकार करें। इसे समझें। वरना जीवन तो जैसे कई लोग कहते हैं "ओह! इसमें ये बुरा है; उसमें वो बुरा है।" और जो लोग भीतर मौजूद खुशी को समझ चुके हैं वो नहीं कहते कि "कुछ खराब है।" वो कहते हैं "सब सुन्दर है। यह एक तोहफा है। वो कृतज्ञ रहते हैं।" तीन बातें "खुद को जानिये; सचेत जीवन जीयें और हृदय को कृतज्ञता से पूर्ण रखें!"

तो आपका बहुत-बहुत धन्यवाद — मैं आपसे कल मिलूंगा।

लॉकडाउन — ग्यारहवां दिन 00:18:04 लॉकडाउन — ग्यारहवां दिन Video Duration : 00:18:04 प्रेम रावत के साथ (हिंदी में अनुवादित)

प्रेम रावत:

सबको नमस्कार! उम्मीद है सब ठीक हैं, अच्छे हैं!

मैं आज आपसे बात करना चाहता हूं उम्मीद के बारे में अच्छा महसूस करना। क्योंकि यह ऐसा है जो आप कर सकते हैं। आपको इससे डरना बिल्कुल नहीं है; जी नहीं आपको ऐसा नहीं लगना चाहिए कि "हे भगवान पता नहीं यह सब क्या हो रहा है” — हालांकि यह बहुत बुरी चीज है, लेकिन आपको इससे झुकना नहीं है। आपको जानना होगा कि आप ही हैं अपने खजाने के स्रोत और आपके भीतर एक बहुत कमाल का खजाना है। आपके भीतर उम्मीद है; आपके भीतर स्पष्टता है; आपके भीतर समझ है; और यही वह चीजें है जो आपको इस वक्त चाहिये। मेरा मतलब आपके पास और क्या विकल्प हैं ?

तो कुछ तो होना ही है; सच है आपको महसूस करनी है। मेरा मतलब यही तो है वह कि आप क्या करने वाले हैं ? हालात कुछ ठीक नहीं लग रहे हैं। आप जानते हैं कि हम लगभग पूरा नहीं पर लगभग 8 लाख पार कर चुके हैं, बहुत जल्द हम 10 लाख को भी पार कर जाएंगे और बहुत ज्यादा मृत्यु दर है इतना बुरा नहीं, लेकिन फिर भी बहुत ज्यादा है मेरी मानिये। और बहुत-सी बुरी खबरें आ रही हैं "यह भी बुरा है; वह भी बुरा है और बाकी सबकुछ" और हां, यह सच है कि हम नेताओं पर इतना ज्यादा निर्भर रहते हैं समाधान देने के लिए और वो लोग बस और उनमें से नेता तो अच्छे हैं, कुछ नेता अच्छे हैं इसमें सवाल नहीं। पर कुछ नेता अपने में व्यस्त हैं और ध्यान नहीं दे रहे फिलहाल कुछ नहीं कर पा रहे वो लोग। क्योंकि वह जो भी करें और वो सिर्फ और ज्यादा भ्रमित हो जाते हैं — मेरा मतलब सच में कोई नेतृत्व नहीं है उनके पास।

तो आगे क्या होगा ? आपको दूर ही रहना है हां, स्थिति इतनी अच्छी नहीं है। "पैसा कहां से आने वाला है ? नौकरियों की सुरक्षा कहां से मिलेगी ? इन सारी बातों का क्या होने वाला है ?" जी हां, यह अच्छे सवाल हैं। सच में बहुत अच्छे सवाल हैं और मैं क्या कर सकता हूं ? मैं कोई कारखाना खोलकर सबको नौकरियां नहीं दे सकता हूं — काश मैं ऐसा कर पाता। तो मैं क्या कर सकता हूं ? अब शायद मैं आपको उम्मीद का एक स्रोत बता सकता हूँ, स्पष्टता का एक स्रोत, समझ का एक स्रोत, रोशनी का एक स्रोत, जो आपके भीतर है। हालांकि ऐसा नहीं है कि आपके सभी सवालों के जवाब मिल ही जाएंगे, लेकिन आप एक इंसान के नाते कहीं ज्यादा पूर्ण हो जाएंगे, आगे बढ़ने को ज्यादा तैयार होंगे आप, इस कोरोना वायरस से लड़ने में ज्यादा सक्षम होंगे आप, असल में चाहे जो भी हो उसका सामना कर पाएंगे और यह कमाल की बात होगी।

यह कितना अच्छा होगा ना, क्योंकि जीवन में बुरे दिन तो आते ही हैं, वह बात जिससे कोई भी खुश नहीं रहता। बातें जो हमें पसंद नहीं हैं, वो होती हैं और जब वो होती हैं हम गिर जाते हैं। हम कहते हैं कि "हे भगवान अब क्या होने वाला है ?" और यही सब तो है असल सवाल कि "अब क्या होने वाला है ? मैं बर्बाद हूं; मैं खत्म हो गया हूँ; मैं ऐसा हूं; मैं वैसा हूँ!" और कितना आसान है हम लोगों के लिए नकारात्मकता की ओर चले जाना और शायद हम कहते हैं कि "अब यही हमारी सच्चाई है!" लेकिन एक और सच्चाई भी है और मैं आपको उस सच्चाई से अवगत करवाऊंगा। इस बुरी स्थिति में इतने अंधकार के बीच में भी आपको असल में क्या होना चाहिए, एक रोशनी की किरण और एक बात कहूं और यह रही अच्छी खबर वह रोशनी, वह किरण, वह स्रोत आप में हैं — आप ही हैं वह देवदूत जो आए हैं और जो कि बचाएगा अपने आपको आप ही! आप ही वह आशा की किरण हैं जिसे आप ढूंढ रहे हैं, वह उम्मीद, वो पता होना कि "हाँ यह रही वो किरण!" और जब आप समुद्र में जाते हैं और आप जमीन देखते हैं तो अलग खुशी मिलती है। यह एक अलग ही भावना होती है — आप जमीन देख सकते हैं। आप जानते हैं कि आप कहां हैं "यह रही जमीन और अगर कुछ होता है तो हमें इस जगह जाना है; हम यहीं पर जाएंगे।" लेकिन जब आप और आगे बढ़ते हैं और कोई जमीन नहीं होती और आप देखते हैं सिर्फ पानी, पानी और पानी हर जगह, पानी, पानी, पानी हर एक जगह पर और यह सब एक जैसा ही दिखता है! हां बिल्कुल सब एक जैसा ही दिखता है तो "हम कहां जा रहे हैं ?"

अब इस क्षण में आपको एक बात पर ध्यान देना होगा और अगर आपके पास अच्छा नहीं है। ऐसा कुछ भी अगर आपके पास कम्पस नहीं है — क्योंकि वह कम्पस हमेशा चुंबकीय उत्तर की दिशा में दिखाएगा और चुंबकीय उत्तर क्या है ? यह आपको बताता है कि "यहां उत्तर उस दिशा में है और आपको इस दिशा में पूरब में देखना है और उसी दिशा में जाएं और पूरब में जाएं और फिर आप दक्षिण में जाएंगे और फिर आप पश्चिम में जाएंगे और आपको उत्तर जाना होगा तो इस तरफ घुमियेगा, बस कम्पस की मानिये।" आपके पास कम्पस है ? जी हां, आपके पास एक कम्पस है आपके ही भीतर, यहाँ नहीं वहां पर — वह कम्पस जो हमेशा सच्चाई की ओर दिखाता है। केवल सच्चाई! सच्चाई है कि "आप जीवित हैं" सच्चाई है "आपका अस्तित्व" और जबतक आपका अस्तित्व है आपके पास कमाल की उम्मीद है आप जो चाहें वह कर सकते हैं। आपको जो भी पसंद ना हो वह आप बदल सकते हैं यह है संभावना।

एक उदाहरण जो मैं हमेशा देता हूं — जानते हैं राम के जीवन में सबकुछ अच्छा नहीं था। कुछ हजार वर्ष पहले उनके जीवन में सबकुछ अच्छा नहीं था — आपने कहानी तो सुनी है जिस दिन उनका राज्याभिषेक होना था उनको कह दिया गया कि "आपको राजा नहीं बनाएंगे पर आपको 14 वर्षों के वनवास के लिए चले जाना है।" जी हां, 14 वर्षों तक के वनवास के लिए! उनकी बस अभी-अभी शादी हुई थी और उन्होंने अपनी पत्नी से कहा कि "सुनो सीता मैं तुमसे 14 वर्षों के बाद मिलूंगा।" तो उन्होंने कहा "जी नहीं मैं आपके साथ ही आउंगी।" और उन्होंने अपने भाई को देखा तो वह भी बोले "हाँ भैया मैं आपके साथ ही रहूंगा।"

तो यह तो बहुत बुरा था, है ना! आप राजा भी नहीं बनेंगे और आपको वनवास के लिए भी 14 वर्षों के लिए वन में जाना है, आपको वहीं पर रहना है, कोई तकनीकी नहीं, अब आपको इस जंगल में जाना है, आप कहां जा रहे हैं ? किसी एक जगह नहीं बस घूमते रहना है, खाना ढूंढना है सच में! पेड़ों से खाना या झाड़ियों से कोई बेर, फल, सब्जियां जो भी आपको मिले वो। यह है वनवास! क्या इससे और बुरा हो सकता है ? जी हाँ और बुरा होता है। क्या होता है फिर ?

अब इस सबके बीच में सीता जी का अपहरण हो जाता है और उन्हें रावण उठा ले जाता है और चला जाता है लंका। अब राम को यह भी नहीं पता कि सीता कहाँ है। तो वह कुछ लोगों से मिलते हैं और उनको पता लगता है कि "देखिये सीता लंका में है। रावण उन्हें वहां ले गया है तो आप वहां क्यों नहीं जाते ?" फिर वह चले जाते हैं और आपको लगेगा यह काफी बुरा है ? जी नहीं, अब इसके आगे और क्या होने वाला है ? यह राजा, रावण, लंका का राजा, वह बहुत ताकतवर है, विशाल है, वह शक्तिशाली है। वो युद्ध कैसे हो पाएगा ? उसकी तो सेना है; राम के पास कोई सेना नहीं है। राम के पास कोई सेना नहीं है। रावण की बहुत बड़ी सेना है और सिर्फ इतना ही नहीं रावण की सेना में दैत्य हैं, राक्षस! तो अब राम इस चुनौती का सामना कैसे कर पाएंगे किस तरह से ?

तो बातें बिगड़ती जाती हैं, बिगड़ती जाती हैं, बिगड़ती जाती हैं, बिगड़ती जाती हैं, लेकिन राम उम्मीद नहीं हारते। वह हार नहीं मानते। वह खुद को संभालते हैं और एक सेना इकट्ठी करते हैं और वह — इस बात पर आप हंसना मत शुरू कीजिएगा — जो सेना राम इकट्ठी करते हैं उसमें वानर और भालू हैं। जी हां, और उनके पास पुल बनाने की कोई तकनीक नहीं है, तो वह पत्थर लेते हैं और वह उनसे एक पुल बनाते हैं ताकि लंका जा पाएं, इस टापू पर, लंका जाने के लिए। उम्मीद न हारना बहुत जरूरी हो जाता है और उम्मीद हारने की कोई वजह नहीं है और इसलिए आपको वह कंपस चाहिए। वह कम्पस जो हमेशा एक दिशा में दिखाता है कहते हुए कि "वह रही, वह रही, वह रही आपकी किरण, वह रही आपकी रोशनी, वो रही, वो रही, वह है जहां आपको जाना है।” आपको हारना नहीं है। आपको झुकना नहीं है, आपको नकारात्मकता से डरना नहीं है, यह बहुत-सी बार ऐसा होगा।

पता है जब हमें नकारात्मकता ही दिखती रहेगी "अरे यह समस्या है, वह समस्या है", लोग डरे हुए हैं और फिर आप समझते हैं, जानते हैं कि सोशल मीडिया मददगार नहीं है। इससे कोई भी मदद नहीं मिलती है और आपको वह फैसला लेना है, आपको समझना है कि क्या है नकली और क्या है असली। और मैं यहाँ आपको बुराई के बारे में बताने नहीं आया, मैं आपको अच्छाई के बारे में बताने आया हूँ। हमेशा आपको बताने कि जीवन में आपके एक संभावना है कि आप पूर्ण हो सकते हैं। संभावना है कि आगे बढ़ सकते हैं आप सब लोग हमेशा, हमेशा जबतक यह स्वांस आप में है आप आगे बढ़ते रहें। यह कितना कमाल है, यह कितना अद्भुत है कि इस वक्त में भी जब सारी उम्मीद खत्म हो जाती है और बहुत सारे लोग मुझे भरोसा है बैठे हुए हैं कि "हे भगवान क्या पता इससे बुरा तो और कुछ हो नहीं सकता।” हाँ शायद, इससे बुरा कुछ नहीं हो सकता पर इसकी वजह से आपको ज्यादा प्रयास करना है। ये और प्रयास करने की बात पर — आपके साथ क्या-क्या हुआ था जब आप पैदा हुए थे ? क्या आपको पता है आपके साथ क्या हुआ था ? आपने क्या कुछ झेला है मुझे किसी ने बताया यह रॉकेट के चलने जैसा है, एक बहुत बड़ा रॉकेट चलता है इतनी ताकत लगती है इसमें — आप इतनी ताकत लगाते हैं गर्भ से बाहर आने के लिए इस दुनिया में।

जो बदलाव आप देखते हैं सच में, जो शायद करोड़ों सालों के बाद हुआ है वो एवोलूसशन कि पानी में पूरी तरह से डूबे हुए होने से लेकर ऑक्सीजन तक ऐसा सिर्फ कुछ घंटों में ही हो जाता है और इसमें खतरा बहुत ज्यादा होता है। इसमें काफी खतरा होता है। सबकुछ आपके विरुद्ध होता है, एक तरह से सबकुछ आपके विरुद्ध होता है। आप कमजोर हैं; आप हल्के हैं; आप इस दुनिया में पहले कभी नहीं आए होते और अनजान होने की बात करें तो आप कदम रखते हैं। आप जा रहे हैं एक अनजान जगह पर बिल्कुल आपको कुछ नहीं पता। आपका दिमाग भी काम नहीं कर रहा, उस तरह नहीं जैसे काम करना चाहिए जब आप फैसले ले सकते हैं और ऐसे ही बाकी चीजें यह बस एक एहसास है और आप आगे बढ़ते हैं और इसमें यह कमाल की ताकत लगती है और आप गर्भ से बाहर आते हैं। इतना सारा पानी होने के साथ और मां पर निर्भर होने के अलावा और मां से जुड़ा होना उस अम्बिलिकल कॉर्ड के जरिए आपको सबकुछ अपने आप करना होता है। आपको अपने आप स्वांस लेनी होती है।

तो आपको यह बताने की वजह क्या है ? आप मुश्किलों से जूझ चुके हैं। आपने संकट पहले भी देखे हैं तो इस चुनौती का सामना करें और इस बेहद अंधकार भरे समय में भी अपनी रोशनी को खोजिये, खुशी को ढूंढिए, उम्मीद ढूंढिए; समझ ढूंढिए; स्पष्टता ढूंढिए अपने हृदय में और आपका अस्तित्व जी हां, और सिर्फ रहिये नहीं विकास कीजिए, अच्छा महसूस करें और कृतज्ञता रखें! तीन बातें — खुद को जानें, जीवन सचेतना से जीयें और हृदय को कृतज्ञता से पूर्ण रखें। इन्हें मत भूलिए, इन्हें मत भूलिए ये बहुत ही जरूरी बातें हैं। जानिए कि आप कौन हैं क्यों ? ताकि आपको पता हो कि ये खजाना आपके भीतर है इससे आपको और शक्ति मिलेगी; यह आपको सशक्त करेगा आगे बढ़ने के लिए आपको यही तो करना है। इससे अच्छा है कि आप पागल हो जाते हैं कि "हे भगवान जानते हैं अब मैं कहां जाऊंगा और दिमाग काम करना और सोचना बंद कर देता है मुझे वहां जाना है, मुझे यहां जाना है।”

देखिये आप ही अपनी परिस्थिति के निर्माता हैं या तो आप खुद के लिए स्वर्ग बना सकते हैं या फिर अपने लिए नरक बना सकते हैं यह आपके ऊपर है। मेरा सुझाव क्या है ? अपने लिए स्वर्ग बनाइये, उसकी स्थापना कीजिये और मज़े करें। आनंद लें! सभी बातों का! अस्तित्व की खुशी इस पर विचार करें! इस पर विचार करें कि धरती हजारों-हजारों मील प्रति घंटे की रफ्तार से घूम रही है और हम बिल्कुल सुरक्षित हैं। यहाँ सब कुछ ठीक है। आप समझिये इसे यह स्वांस आप में आ रही है यह आपकी ताकत है बाकि सबसे ज्यादा शक्तिशाली है।

तो उम्मीद है आपका दिन अच्छा बीते और बढ़िया तरीके से बीते। आप सुरक्षित रहें; सेहतमंद और खुश रहें। यह सब बहुत जरूरी है, जी हां!

मैं आपसे फिर मिलूँगा। धन्यवाद!

लॉकडाउन — दसवां दिन 00:21:06 लॉकडाउन — दसवां दिन Video Duration : 00:21:06 प्रेम रावत के साथ (हिंदी में अनुवादित)

प्रेम रावत:

हेलो, हेलो, हेलो, सभी को! उम्मीद है आप सब ठीक हैं, सुरक्षित भी और सेहतमंद हैं कोरोना वायरस के इस समय में। तो मैं कुछ बातें करना चाहता हूँ पता है वो बातें जो मैं पूरा दिन सुनता रहता हूं। काफी अनिश्चितता है। कई गलतफहमी फैली हुई हैं। एक हाथ पर, हाँ, जो भी होता है उसका प्रभाव हम पर पड़ रहा है। जी बिल्कुल होता है और उनमें से कुछ गलत फैसले, हाँ बिल्कुल प्रभाव डालते हैं। क्योंकि आप देखिए अमेरिका को, पहले स्थान पर पहुंच गया है गलत कारणों की वजह से, पहले नम्बर पर और जब आप चीन और अमेरिका की आबादियों की तुलना करते हैं तो यह चीन से काफी कम है पर चीन काफी बेहतर है अमेरिका से, (और फिर हाँ मैं संख्या को देख रहा था, मैं राजनीतिक स्थिति में नहीं जा रहा हूं।)

तो हमें खुद ही कुछ फैसले लेने होंगे और वो कौन से फैसले होंगे जो हमें लेने हैं ? अब इस परिस्थिति में मैं निर्धारित बातें नहीं कह सकता, लेकिन खुद से एक वादा जरूर कर सकता हूं कि खुद में अच्छा महसूस करूंगा यह सुनिश्चित कर सकता हूँ मैं। क्योंकि मैं इस बारे में कुछ कर सकता हूं। मैं शायद कोरोना वायरस के बारे में कुछ ना कर पाऊं। मैं शायद परीक्षण के बारे में कुछ ना कर पाऊं। मैं लाखों और चीजों के बारे में शायद कुछ ना कर पाऊं, पर अर्थव्यवस्था भी है उसमें एक, पर जो भी हो मैं जहां भी जाऊं, जहां भी जिस भी परिस्थिति में मैं चला जाऊं, क्योंकि पता है यह आसान नहीं है और सब जानना चाहेंगे यह बात। सबको बहुत अच्छा लगेगा यह कहना कि “हां यही तो होगा यह।” पर बहुत मुश्किल है, क्योंकि इसमें है एक गलती फिर एक गलती फिर एक गलती — और मुझे भरोसा है कि वो गलतियां करते ही जायेंगे।

पर काफी समय पहले से जब अरब क्रांति हुई और मैं कुछ राजनैतिक नेताओं से मिल रहा था वहां पर। मैं इटली में था, मुझे याद है एक महिला वह अरब क्रांति की घटनाओं से बहुत प्रभावित थीं और उन्होंने मुझसे कहा कि “लोग कैसे जीवित रहेंगे ? लोग कैसे ठीक रह पाएंगे ? यह कितना बुरा है।” और मैंने कहा, “यही तो एक बात है अंत में जो सही होती ही है, वह है जनता। हम संभल जाते ही हैं कई राज्य, कई राजा, कई शासक आए और चले गए, कई सभ्यताएं आईं और चली गईं, लेकिन अंत में जनता जीवित रही।” और यह बहुत बड़ी बात है।

जानते हैं आप, जब आप इन महान साम्राज्य को देखते हैं जो नष्ट हुए हैं, पर लोग आगे बढ़े और वो बदल गये। उन्होंने खुद को जीवित रहने दिया है। तो मैं क्या कर सकता हूं ? अब सबसे पहले मुझे हिम्मत से काम लेना होगा, कमजोर बनकर नहीं। क्योंकि कमजोरी की वजह से हो सकता है कि मैं उस वक्त में मौजूद संभावनाओं को देख ही ना पाऊं। और दूसरी बात यह है, सबसे जरूरी बात — परिवर्तनशील बनना होगा।

कल रात मैं इसी बारे में सोच रहा था जैसे कि आप इन पेड़ों को देखें कुछ पेड़ बहुत ही सख्त होते हैं। वह लचीले नहीं होते वो टूट जाते हैं, बस खत्म, कट जाते हैं। और वो पेड़ जो हवा में भी लचीले रहते हैं तूफान में भी बचते हैं। क्योंकि वो मुड़ सकते हैं। क्योंकि वो झुक सकते हैं, क्योंकि वो हिल सकते हैं। अब हां बिल्कुल, जानते हैं जिस तरह हम खुद को देखते हैं “अब मैं हिल नहीं सकता मैं तो बस मैं ऐसा ही हूं।” हम अपने आपको एक पत्थर की भांति देखते हैं, पर जब वह तूफान आता है पत्थर बने रहना अच्छा नहीं हैं। सबसे अच्छी बात होगी लचीला बनना।

मैं आपको उदाहरण देता हूं। जब मैं ब्राजील में था हां बिल्कुल, मैं स्पेन से निकला और ब्राजील तक गया और स्पेन छोड़ने की बजह थी अर्जेन्टीना में जाना और फिर अर्जेन्टीना के बाद मुझे युरग्वे जाना था। और सबकुछ तय था और हम कुछ इवेंट्स करने वाले थे। एक जेल में जाने वाले थे और सबकुछ बढ़िया होने वाला था। तो मैं इसके इंतजार में था और मैं बार्सिलोना से उड़कर ब्राजील तक गया और मैं ब्राजील में था और फिर अचानक से यह ऐसा था कि शायद दूसरे दिन मुझे अर्जेंटीना जाना था, अर्जेंटीना की फ्लाइट लेनी थी मैं शायद साढ़े 4 घंटे या 4 घंटे दूर था ब्यूनस आयर्स (Buenos Aires) से और फिर अचानक से यह हुआ कि “अर्जेंटीना कोई नहीं जा रहा लॉकडाउन हो गया है।” और अब मुझे युरग्वे नहीं जाना क्योंकि मैं वहां जाकर इवेंट्स करूं और सभी लोग मुझे देखें और फिर इस कोरोना वायरस के फैलने की और संभावना बढ़े मैं यह नहीं चाहता था। यह कोविड-19 मुझे नहीं चाहिए, तो मैंने ना जाने का फैसला लिया।

तो अब मैं क्या करूंगा शायद वह हमें ले जाएं, शायद कुछ होने वाला है और यह परेशान करने वाला था, क्योंकि यह ऐसा था कि “ओके तो चलिए अफ्रीका चलते हैं। हम दक्षिण अफ्रीका चलते हैं!”

“नहीं आप दक्षिण अफ्रीका नहीं जा सकते।” क्योंकि जब तक उन्हें पता चला कि हम दक्षिण अफ्रीका जा रहे हैं अगले दिन खबर आ गयी कि “आप दक्षिण अफ्रीका नहीं जा सकते वहां पर लॉकडाउन है” और मैंने कहा कि “अब एक मिनट रुकिए। मैं क्या करूंगा ? अब मैं यहां पर क्या करूंगा ?” और फिर अचानक से ही मैंने देखा एक परिस्थिति बदल रही है। यह पानी की तरह है यह बदलती है, बदलती है, बदलती है, बदलती है, बदलती है, बदलती रहती है और जैसा कि आप जानते हैं बदलाव ऐसी ही चीज है। ज्यादातर लोग बदलाव से डरते हैं वो नहीं समझते इस बदलाव में क्या है। वो बस कह देते हैं “मुझे नहीं बदलना। मैं नहीं बदलना चाहता।”

इस पल में मेरी मानिए मैं भी बदलाब नहीं चाहता था। मेरा एक प्लान था! मेरा प्लान था मैं कई चीजें करूं सिर्फ मैं ही नहीं था। उसमें वो सब लोग भी शामिल थे अर्जेंटीना में जो मुझे देखने आने वाले थे। प्लान में वो लोग भी थे। उसमें वो सभी लोग थे जो वहां पर मंच लगाने वाले थे, माइक लगाने वाले लोग, ऑडियो ठीक करने वाले, वीडियो वाले, वो सब लोग जो वहां काम करने वाले थे और फिर जेल में जाने की जितनी अनुमति ली थी हमने वहां, मेरी विजिट के लिए। इसमें बहुत सारी तैयारियां की गई थीं। और वो बहुत देर से इंतजार कर रहे थे, काफी वक्त से कि मैं वहां पर आऊं, राह देख रहे थे, लेकिन “देखिए स्थिति को देखें यह आपके हिसाब से नहीं चल रही है समझ सकते हैं प्लान।” तो क्या था प्लान ?

हमारे पास कैमरा है और कैमरा यहां है और यह कैमरा पिक्चर बनाता है मैं नहीं कहता “पिक्चर लेता है” ध्यान रहे मैंने कहा “पिक्चर बनाता है” तो यह कैमरा यहां पिक्चर बनाता है और यह पिक्चर बहुत-बहुत ताकतवर होती हैं इन्हें कम नहीं समझना चाहिए — और यही वह वजह है कि मेरी उम्मीदें हैं उन पिक्चर्स की वजह से जो यहां बनती हैं तो मेरी ये सभी उम्मीदें थीं तो सबसे पहले प्रतिक्रिया “इसे करने की कोशिश करो पर यह तो नहीं हो सकता। आप नियंत्रण से बाहर हैं स्थिति बदल रही है। आप को पानी की तरह बनना ही है।”

जब आप पैक करें और सफर पर जायें पैक करके आपको तरल चीजों का ध्यान रखना होता है क्योंकि अगर आप ढक्कन ढंग से बंद ना करें तो पानी बह जाएगा। सबकुछ बह जाएगा, क्योंकि यही तो पानी की विशेषता है। इसे बहुत कम जगह चाहिए होती है। यह ऐसा ही है। कोई भी मौका मिलते ही यह बह जाता है और जहां जाना है वहां चला जाएगा। तो अचानक से ही यह ऐसा था। “अब एक मिनट रूकिये मैं इससे लड़ क्यों रहा हूं क्योंकि असल में मुझे वैसा ही बन जाना है जैसे कि परिस्थिति की मांग हो फिर कोई समस्या नहीं होगी। फिर कोई समस्या नहीं होगी।”

अब एक पायलट की तरह हम ऐसा हमेशा करते हैं। मेरा मतलब, अगर आपके रास्ते में एक तूफान आने वाला है आप आगे नहीं जाते आप कहेंगे “मैं इसके आस-पास घूम के जाऊंगा।” आप अपने रेडार पर देखते हैं, अपनी सैटेलाइट पिक्चर को देखते हैं और आप जानते हैं एक अच्छा जानकारी पूर्ण फैसला लेते हैं कि कौन-सा रास्ता सबसे अच्छा है। आप एक बार हवा को देखेंगे और अगर हवा एक तरफ बह रही है तो आप तूफान वाली दिशा में नहीं जाएंगे। अगर आप जा सकते हैं तो विपरीत दिशा में जायें और अगर उसी दिशा में गये तो आपको काफी आगे जाकर घूमने का मौका मिलेगा और आप एक अच्छा जानकारी पूर्ण फैसला लेते हैं कि पता करें कि पार होगा या नहीं होगा। “क्या आपको आस-पास से जाना है ?” और हां बिल्कुल इसमें से होकर गुजरना अच्छा फैसला नहीं होगा।

अगर यह छोटा है तो कोई बात नहीं, पर अगर बड़ा है तो आपके इंजन को नुकसान हो सकता है। फिर अगर जा सकते हैं तो इसके बीच से निकलकर जाएं। फिर आप क्या करेंगे इसमें नीचे तो आप जाना नहीं चाहते तो आप इसके आसपास से निकल कर जायें। इसके पास से निकलेंगे तो मैंने देखा “मुझे लचीला बनना होगा। मुझे जाना है, लेकिन इस स्थिति में एक ही काम करना है स्थिति मेरे अनुसार से काम नहीं करेगी मुझे इसके अनुसार चलना है।” और फिर मतलब साफ होने लग गया जैसे कि “हां मेरे जीवन में यही तो दिशा है, मुझे लचीला बनना है।”

अब इस परिस्थिति में कहना आसान है लेकिन जब ऐसी परिस्थिति नहीं होती क्या मैं तब भी समझूंगा कि मुझे लचीला होना है, सोचिए ? या मैं बस वहां पिक्चर बनाता रहूंगा यह जो ऊपर कैमरा है यह पिक्चर बनाता रहे यह पिक्चर लेता नहीं, यह पिक्चर बनाता है और पिक्चर काफी कमाल की होती हैं यह। मैं चाहता हूं कि चीजें एक निर्धारित ढंग से हों! बस इतना ही! “अगर उस तरह से काम नहीं हुआ तो मुझे बुरा लगता है।” और ऐसे लोग भी हैं जो कहेंगे कि “अमीर और ताकतवर लोग उनके पास एक पिक्चर है और वो इस पर काम करते हैं।” हां कुछ अमीर और ताकतवर लोगों ने अपनी सारी संपत्ति नष्ट कर दी। क्योंकि उनके दिमाग में एक पिक्चर थी और यह हर रोज चलती और बदलती रहती है। यह हर रोज चलती है, यह पिक्चर बनती है और फिर होता है कि “मैं उस तरह करने की कोशिश करूंगा जिस तरह यह पिक्चर बनी हुई है।”

पर यह इसके बारे में नहीं है। यह इस पिक्चर को दोबारा बनाने के बारे में नहीं कुछ और है जो बना के लिया जा चुका है। एक पिक्चर है जो पहले से ही ले ली गई है और वह पिक्चर है आपका अच्छा रहना। आपकी सुरक्षा, आपकी ताकत, आपकी हिम्मत, आप देखिए, यही-यही तो बात है इस दुनिया में हर कोई आपकी बुराईयों के बारे में जानता ही है। आपको भी इनके बारे में पता है, कोई सवाल ही नहीं। आपको गुस्से के बारे में पता है, आपको डर का पता है, आपको संदेह का पता है, अनिश्चितता के बारे में जानते हैं। दुनिया में किसी को भी यह समझाने की जरूरत नहीं है, लेकिन इन बाकी चीजों के बारे में नहीं जानते जो आप में ही हैं। और अफसोस की बात है ये बाकी बातें सच में ताकतवर होती हैं। करुणा — अपने आप में ही, अपने आप से, क्योंकि अगर यह करूणा आप में नहीं है, आप दूसरों के प्रति करुणा नहीं दिखा पायेंगे।

मैं जानता हूं कि आप सबसे अच्छा वर्ताव करना चाहते हैं क्योंकि यही आपको सिखाया गया है। पर इसकी शुरुआत कैसे होती है, करूणा आपके लिए भी होनी चाहिए। पहली बात वह स्पष्टता इससे पहले कि आप किसी और को स्पष्टता दिखाएं वह स्पष्टता आपके खुद के भीतर होनी चाहिए वरना अगर आप ही देख ना पाएं तो इसमें वाहन चालक के लिए कौन-सी अच्छी खबर है अगर बाकी सबकी नजर ठीक हो,पर उसी की ना हो ? इस तरह कब तक चलेगी वह गाड़ी; इस तरह कब तक चलेगी वह कार; इस तरह कब तक चलेगी वह फ्लाइट सुरक्षित ढंग से अगर पायलट को ही कुछ नहीं दिख रहा और बाकी सबको दिख रहा है ?

तो आप जानते हैं कि यह सावधानी उन्हें ऑक्सीजन मास्क के लिये बरतनी होती है। अगर आपके पास एक बच्चा है या बच्चे हैं तो आप पहले अपना मास्क पहनिये क्योंकि अगर ऑक्सीजन की कमी से आप बेहोश हो गए तो आप छोटे बच्चे की मदद कभी नहीं कर पाएंगे। तो सबसे पहले आप में स्पष्टता होनी चाहिए, सबसे पहले आप में करुणा होनी चाहिए, आप में वह समझ होनी चाहिए और फिर उसके बाद सिर्फ उसके बाद ही आप यह किसी और को दिखा पाएंगे। तो यह ऐसा बन जाता है; यह है उन बातों के बारे में आप एक इंसान होने के नाते आप में कुछ लक्षण हैं, लेकिन क्योंकि — जो भी आप जानते हैं शायद आपको किसी ने नहीं सिखाया कि आप में यह ताकत है लेकिन आपको पता है कि आप में है। अब समय है उन्हें इस्तेमाल करने का और अगर आप करेंगे अगर आप स्पष्टता रखें, अगर आप समझदारी दिखाएं, अगर आप सभी संदेह को निकाल दें और स्पष्टता हो फिर परेशानी नहीं हो सकती। समय बीतने पर परेशानी नहीं रहेगी आप कदम ले पाएंगे। कम से कम वो बातें जो आपके मन में बनती हैं अगर आप उन्हें ठीक तरफ से देख पायें। ऐसा होता है मैंने हर जगह देखा है, हर जगह मेरा मतलब और मैं यह उदाहरण की तरह बताता हूं।

एक बार मेरे पोते का जन्मदिन था और हम उसके लिए सोचकर कुछ तोहफे लेकर आए। हमने सोचा था कि हम उसे जन्मदिन की पार्टी के बाद देंगे और कुछ ऐसे तोहफे थे जो उसने पार्टी से पहले ही खोल लिए थे और वह मेरे पास आता है और वह कहता है “यह मेरा सबसे खराब जन्म दिवस था” और फिर मैंने कहा “क्या!” और फिर उसने अपना तोहफा खोलना शुरू किया और उसने कहा कि “अच्छा नहीं यह अच्छा जन्म दिवस था।” यह कहां से आया ? ये बात कहां से आयी ? क्योंकि उसके पास उसके दिमाग में कुछ था। उसके मन में था कि उसका जन्मदिन कैसा होना चाहिए! और वह उसके हिसाब से नहीं जा रहा था। वह कुछ बदल गया था।

आप उन लोगों को देखें जिनकी शादी होती है और एक नया शो हुआ करता था उसे कहते थे “ब्राइडजिल्लास” और दुल्हन पागल हो रही होती थी क्योंकि उनके मन में एक धारणा थी कि शादी ऐसे होती है और जब वह उसके हिसाब से नहीं जा रही होती थी तो यह कैमरा जो यहां ऊपर लगा हुआ है यह कुछ कमाल की पिक्चर लेता है और फिर आप सबकुछ इसके हिसाब से सोचने लगते हैं, “यह कैसे हुआ; यह कैसे हुआ; यह कैसे हुआ; यह कैसे हुआ; यह कैसे हुआ ?” और आपकी दुनिया इसके आसपास घूमने लगती है तो इन परिस्थितियों में भी यह शायद थोड़ा मज़ाकिया है क्योंकि इस समय आपको नहीं पता कि क्या उम्मीद रखनी है। इस स्थिति की कोई तस्वीर है ही नहीं लेकिन अब धीरे-धीरे जैसे समय बीत रहा है पिक्चर सामने आ रही हैं “यह ऐसा होना चाहिए; यह वैसा होना चाहिए; यह ऐसा होना चाहिए!”

क्यों परिवार एक साथ नहीं रह पाते और एक-दूसरे को नहीं झेल पाते इन्हीं तस्वीरों की वजह से “मेरी आपसे यह उम्मीद है, मेरी आपसे यह उम्मीद है” ऐसी उम्मीद थी, ये सब उम्मीदों के बारे में है।” और उन्हें हटा दें अगर तो अचानक से व्यक्ति सरल हो जाता है और स्थिति आसान हो जाती है, जो बदल सकती है, बदलती है जो साथ चल सकती है और यही तो हैं आप, यही तो है संभावनाएं आप ऐसे हो सकते हैं। आपको यह दूसरा व्यक्ति नहीं बनना है, जो हमेशा ही भ्रमित रहता है, जो सोचता है, परेशान है और अजीब-सा रहता है और खोजता रहता है कि “यह कहां है; वह कहां है; यह कैसे होता है; यह कैसे काम करता है और यह कैसे चलता है ?”

आपको ऐसा नहीं करना है। आपको हिम्मत रखनी है। आपको स्पष्टता रखनी है और जो भी परिस्थिति हो जो भी मुश्किलें आपकी ओर आयें, मैं यह आपको बताना चाहता हूं कि आप में इतनी हिम्मत और साहस है कि आप कोई भी परेशानी या कोरोना वायरस आपकी ओर अगर आए तो आप उसको झेल सकते हैं। आप सहन कर सकते हैं उसे; आप सामना कर सकते हैं; आप अपना ख्याल रख सकते हैं; आप सुरक्षित रह सकते हैं। हां बिल्कुल यह दो दीवारों के बीच में है, वो दीवारें जो आपका जीवन, आपका अस्तित्व, आपके लिए सबकुछ होना चाहिए। क्योंकि यह है। यह उनके बीच में है। यह सबसे कीमती तोहफा है, सबसे सुंदर तोहफा जो आपको दिया गया है पहले से ही आपको दिया जा चुका है और आप कर्ताधर्ता हैं। कितने खुशकिस्मत हैं आप कि आप कर्ताधर्ता हैं उस तोहफे के जिससे अच्छा और कुछ हो नहीं सकता और यह है जीवन — इसे कहते हैं इंसान होना, जो चाहता है आजाद होना, जो चाहता है संतुष्ट होना, जो चाहता है शांति से जीना! शांति से रहें। खुश रहें। हृदय की आकांक्षा पूर्ण करें और आप जीवन का महत्व समझ जायेंगे।

तो एक बार फिर उम्मीद है कि आप ठीक रहें। सुरक्षित रहें। आप सब सेहतमंद रहें। खुश रहें।

धन्यवाद।

लॉकडाउन — नौवां दिन 00:16:31 लॉकडाउन — नौवां दिन Video Duration : 00:16:31 प्रेम रावत के साथ (हिंदी में अनुवादित)

प्रेम रावत:

सबको नमस्कार! मुझे उम्मीद है आप सब ठीक हैं। मुझे पता है कि कुछ लोग यह वीडियो देख रहे हैं, ऐसे भी कई लोग हैं जो यह वीडियो देख रहे हैं जिन्हें बीमारी लग चुकी है। मुझे उम्मीद है कि आप जल्द ठीक हो जाएंगे। गंभीर समय, गंभीर मुद्दे, लेकिन अच्छा महसूस करना अब भी महत्वपूर्ण है। अच्छा सोचना अब भी जरूरी है। सुरक्षित होना अब भी जरूरी है और अच्छा होना अब भी जरूरी है।

"यह तो बस केवल इस समस्या के बारे में नहीं होना चाहिए?" नहीं, क्योंकि यह वह समस्या है जो हमारे लिए हद से ज्यादा बढ़ सकती है। जी हां! बिल्कुल हाथों से बाहर निकल सकती है, अगर हम इसे सही ढंग से नहीं देखते और इसके अनुपात हैं "हां यह गंभीर हैं लेकिन इसी समय में कुछ और भी चल रहा है। इस महामारी के अलावा भी एक आपातकालीन स्थिति है यह कोरोना वायरस महामारी और वह है आपका जीवन, आपका अस्तित्व, आप।" यह आपके जीवन के सफर में एक हिचकी है। आपकी समझ, आपका अपना रास्ता और वह मंजिल जो आपने अपने लिए चुनी है। तो सवाल यह उठता है, हां बिल्कुल है कि "वह क्या है जो आपने अपने लिए चुना है ?

बहुत सारे विचार हैं, बहुत सारे मुद्दे हैं, लेकिन इस समय वो बातें जो सच में जरूरी हैं उनके बारे में कुछ भी हो सकता है। क्योंकि यह नहीं है..... एक तरह से आप बीमारी के बारे में कुछ नहीं कर सकते हैं और कैसे यह फैलती है और बाकी चीजें भी, लेकिन फिर भी बिल्कुल सावधानियां लेते रहिए। जी हाँ! और यह बहुत सशक्त कर सकता है आपको — आपके लिए ही अपने हाथ धोएं, दूरी बनाए रखें, बीमारी ना लें और ना ही बाकी लोगों को बीमारी दें। बिल्कुल पहले बीमार ना हो जायें, लेकिन अगर बीमारी हो जाए फिर भी हिम्मत रखें और स्पष्टता और समझ भी। इनकी जरूरत पड़ेगी आपको। और मैं इन्हीं बातों पर चर्चा करना चाहता हूं।

तो मेरे लिए यह वो मुद्दा नहीं है जिसमें "क्या मैं भूकंप को रोक सकता हूँ ?" नहीं, लेकिन घर मजबूत करने में मदद जरूर कर सकता हूं और यही जरूरी है। तो अगर भूकंप आया या भूकंप नहीं भी आया कम से कम घर तो मजबूत है ना, लचीला है इतना कि जो भी हो वह ठीक रहेगा और हमें इसी बारे में बात करनी है। यही हमें समझना है। क्योंकि आपके पास क्या है ? आधार पर नजर डालिये — मूलभूत आधार पर। आपके पास जीवन है और आप इन परिस्थितियों में आपके पास अब भी आपका कमाल का अस्तित्व है। आप जीवित हैं! जी हाँ! आप महसूस कर सकते हैं, आप समझ सकते हैं, आपका एक हृदय है। आप नफरत से अधिक करुणा को मानते हैं। आप दर्द से ज्यादा खुशी को चाहते हैं। दुख से ज्यादा, आप संदेह से ज्यादा, स्पष्टता चाहते हैं — आप ऐसा ही करते हैं और आप यह इसलिए करते हैं, क्योंकि जो आप हैं, आप एक इंसान हैं। शायद आपका कोई निर्देश-पत्र नहीं है, लेकिन आपकी बहुत सारी पसंद जरूर हैं और इस दुनिया में आपको उथल-पुथल से ज्यादा शांति पसंद है।

यह बात है कि "अंत में हमें खुद पर नियंत्रण रखना ही है!" और इससे मेरा क्या मतलब है ? क्योंकि पूरा दिन हम अपने अच्छे होने की जिम्मेदारी को किसी और की वजह से दरकिनार करते हैं — "ओह! डॉक्टर मेरा ख्याल रखेगा, ओह! यह नहीं तो वह मेरा ख्याल रखेगा, सरकार मेरा ख्याल रखेगी।" इस वक्त कुछ जो नेता हैं (अब वह सभी नहीं बिल्कुल) पर कुछ नेता वह इतने बुरे हैं मेरा मतलब वह तो बस सोच ही नहीं रहे। अकल्पनीय है यह! ऐसे लोग भी हैं जो ज्यादा काम कर रहे हैं। स्वास्थ्य विभागों में वो लोग जो काम कर रहे हैं और उनकी तारीफ हो रही है और मैं भी उनकी तारीफ करता हूं और उन्हें कुछ नेताओं के फैसलों के परिणाम भुगतने पड़ रहे हैं जिन्हें कुछ नहीं पता कि वह क्या कहते हैं, उन नेताओं को कुछ नहीं पता कि वह क्या कर रहे हैं और अंत में यह एक मौका नहीं है आरोप लगाने का। यह मौका है अपने अस्तित्व को संभालने का।

मैं यह कहता आया हूँ आज नहीं — हमेशा से ही कि आपको अपना जीवन संभालना है। जी हां! आपको ही, आप ही वह देवदूत हैं जो खुद को बचाने आए हैं और मैं यह कितने समय से कहता आया हूं, कितनी बार कहा मैंने। पर अब इस पर कोई सवाल नहीं रहा और कोई भी संदेह नहीं रहा है। क्या आप की तकनीकी आपको बचाएगी ? जी नहीं! नया फोन खरीदने से कुछ नहीं मिलेगा। कोई व्यक्ति कुछ नया लाता है उससे ज्यादा फर्क नहीं पड़ता और अब आप आधार पर लौट आइए। क्यों ? जी हां! 6 फुट की दूरी रखें, अपने हाथ अच्छे से धोएं, दूरी, दूरी, दूरी! वाह! आपका मतलब, "और अब कोई सरकार मेरी मदद नहीं कर सकती अगर मैं दूर नहीं रहा ?" जी नहीं! "मुझे अपने खुद के साथ उठना होगा!" जी हां!, "क्या मुझे अपनी बातों को सुधारना पड़ेगा ?" जी हां! "और मैं इन सबको कैसे झेलूँगा, यह अलग रहने का समय और बाकी सब कुछ।" अब देखिए, यही तो आपको करना है।

अब सवाल आता है कि “अच्छा, लेकिन "अब क्या आपको पता है आप कौन हैं ?" और इसलिए मैं कहता हूं, पता है, तीन बातें कर सकते हैं "आप खुद को जानिये; अपने जीवन को सचेतना से जीयें......" और यह एक बड़ा मुद्दा बन गया है "जीवन सचेतना से जीयें।" आपको सिर्फ अपना जीवन जीने को नहीं मिलता पर आपको इसे सचेतना से जीना है, आपको जागरूक रहना है "मैं क्या चाहता हूं, मैं क्या कर रहा हूं और वह कौन है, क्या चल रहा है ?"

"अपने जीवन को अच्छे से जीयें" और तीसरी बात "जीवन में कृतज्ञता लाएं।" क्योंकि इससे सब झेलना मुमकिन हो जाता है — कृतज्ञता से! हृदय से धन्यवाद देना — इस सबके बीच में भी महसूस करना कि "वाह! मैं जीवित हूं" और हर रोज जब मैं जीवित हूं धन्यवाद दीजिये, सराहना कीजिये।

तो इस बात का यह रहा सार — आप! और आपको आना है और फिर आपको वयस्क बन जाना है। शायद ऐसी ही चीज के लिए — हम सब बिल्कुल किसी और को जिम्मेदारी सौंप देते हैं जैसे कि "कोई और मेरा ख्याल रखेगा।" बहुत सारे लोग हैं वह तो बस — "ओह हां! मेरी सारी समस्या हल हो जाएंगी, अगर मैं चर्च के भीतर चला जाऊं। मेरी सभी समस्याएं सुलझ जाएंगी, अगर मैं मंदिर चला जाता हूँ। मेरी सभी परेशानियां खत्म हो जाएंगी अगर मैं मूर्ति के समक्ष झुक जाता हूं।" लेकिन अब आप नहीं जा सकते। तो अब आप क्या करने वाले हैं ? यह कितना सरल है कि जिसकी आपको आराधना करनी है वह आपके भीतर ही है। वाह, मेरा मतलब, शानदार! ऐसी समस्या आ भी गई तो कोई बात नहीं। वह शांति का समुद्र आपके भीतर है — वाह बढ़िया! वह स्पष्टता का समुद्र आपके भीतर ही है, जबरदस्त! और यही समय है जानने का, समझने का और महसूस करने का।

वह एक बात कि समुद्र में एक बूंद है यह सभी जानते हैं, लेकिन एक बूंद में समुद्र है यह बहुत कम लोग जानते हैं। यह समय है बूँद में समुद्र ढूंढने का। क्योंकि वह बूंद कबीर के अनुसार आप स्वयं ही हैं! वह आप हैं। इस बूँद में समुद्र खोजिए। और इस समय जो कुछ भी चल रहा है यह रुक जाएगा। आपको तथ्य जानने होंगे, झूठ नहीं। हर कदम जो आप लेंगे वह तथ्य के साथ होना चाहिए, झूठ के साथ नहीं। आपको स्पष्ट होना है; आपको होना ही है — सच में यह समय है स्पष्टता की अहमियत समझने का। यह समय है सचेतना की अहमियत समझने का। यह समय है पूर्ण होने की अहमियत समझने का। और यही समय है अस्तित्व की अहमियत को समझने का और हिम्मत रखने का, कमजोरी नहीं। क्योंकि आप ये गलतियां करते हैं और ऐसे तो कोरोना वायरस का ही फायदा होने वाला है।

आदर्श स्थिति! हां! यही होगी एक आदर्श स्थिति कि आप महामारी से बच सकें और फिर अपनी सेहत का ध्यान रखें जबतक कि कोई समाधान या फिर कोई दवाई नहीं बन जाती और खत्म हो जाए यह बीमारी। वह होगी एक आदर्श स्थिति, पर कुछ लोग इतना इंतजार नहीं कर सकते; उनके पास तो है ही नहीं। लेकिन दोबारा, आपके पास — आप देखिए आपको समझना होगा आपके भीतर एक डॉक्टर है, सच में। वह सभी बातें जो आप में है आपके भीतर एक डॉक्टर भी है — और एक लैबोरेट्री है जिसमें लगातार परीक्षण होते रहते हैं। "अच्छा! मुझे ये नहीं पता! अच्छा! मुझे वो भी नहीं पता! मुझे कोरोना वायरस नहीं पता।" मुझे इसके लिए ऐन्टीबाडीज नहीं निकालनी होंगी और यही वह पहला डॉक्टर है जो कुछ भी करता है। और यह क्या करता है ? कई जगहों पर जहां यह देखते हैं, इसे पता है आपको यह लक्षण है तो यह भेजते हैं कि "घर जाइये, जी हां दूर रहिए!" ताकि आपका यह डॉक्टर आपका इलाज कर पाए।

पर वह डॉक्टर कब काम करेगा जब आप हिम्मत रखेंगे, जब आप भीतर से खुशी रखेंगे, जब आप में होगा आनंद, जब आप में होगी स्पष्टता। इन बुरी परिस्थितियों में भी और यह बहुत ताकतवर है; यह शक्तिशाली समय है। क्योंकि मैंने जो भी अब तक कहा वह सच हो रहा है और मैं नहीं कहता कि "मैं सही था और आप गलत" — यह मेरी बात नहीं है, पर मेरा कहना है कि "सुनिए जो मैंने कहा है, सुनिए जो मैं कह रहा हूं, क्योंकि जो मैं कह रहा था उससे आपको मदद मिलेगी।" और वो लोग जो बातें सुन रहे थे उनको पता है कि मैं क्या कह रहा था।

तो आपके भीतर की अच्छाई को उजागर कीजिए। उस अच्छाई को बाहर आना ही होगा इस वक्त। वह दो भेड़िए जो आप में लड़ते हैं — उसमें से अच्छे भेड़िए को बढ़ावा दीजिए। यह वह समय नहीं है कि आप प्रयोग कर रहे हैं कि "क्या होगा अगर मैंने बुरे भेड़िए को बढ़ावा दिया। ?" जी नहीं, यह समय है जब आप अच्छे भेड़िए को बढ़ावा दें। बस! यह समय सवालों का नहीं है; यह समय नहीं है उन लाखों मुद्दों को उठाने का; यह समय है जानने का, यह मानने का समय नहीं है; यह समय है कि आप जानिए, जानिए कि अहमियत क्या है जानने की। यह समय है कि आप उभरकर आएं, खुद में वयस्क बनें। अपनी समझ में आप विकास करें। अपनी समझ में — और खुद को तलाशें, खुद को आप जानें। सचेत जीवन जीयें और हृदय को कृतज्ञता से पूर्ण करें। मेरे लिए यह एक जीत का मंत्र है, एक कमाल का जीतने का मंत्र।

तो सुरक्षित रहिए; अच्छे रहिए आप! और मैं आपसे फिर से मिलूंगा! धन्यवाद!

Log In / Create Account




TimelessToday

Log In or Create an Account



OR




Accounts created using Phone Number or
Email Address are separate. 
Account Information




  • You can create a TimelessToday account with either your Phone Number or your Email Address. Please Note: these are separate and cannot be used interchangeably!

  • Subscription purchase requires that you are logged in with a TimelessToday account.

  • If you purchase a subscription, it will only be linked to the Phone Number or Email Address that was used to log in at the time of Subscription purchase.

Please enter the first name. Please enter the last name. Please enter an email address. Please enter a valid email address. Please enter a password. Passwords must be at least 6 characters. Please Re Enter the password. Password and Confirm Password should be same. Please agree to the privacy policy to continue. Please enter the full name. Show Hide Please enter a Phone Number Invalid Code, please try again Failed to send SMS. Please try again Please enter your name Please enter your name Unable to save additional details. Can't check if user is already registered Please enter a password Invalid password, please try again Can't check if you have free subscription Can't activate FREE premium subscription Resend code in 00:30 seconds
Activate Account

You're Almost Done

ACTIVATE YOUR ACCOUNT

You should receive an email within the next hour.
Click on the link in the email to activate your account.

You won’t be able to log in or purchase a subscription unless you activate it.

Can't find the email?
Please check your Spam or Junk folder.
If you use Gmail, check under Promotions.

Activate Account

Your account linked with johndoe@gmail.com is not Active.

Activate it from the account activation email we sent you.

Can't find the email?
Please check your Spam or Junk folder.
If you use Gmail, check under Promotions.

OR

Get a new account activation email now

Need Help? Contact Customer Care

Activate Account

Account activation email sent to johndoe@gmail.com

ACTIVATE YOUR ACCOUNT

You should receive an email within the next hour.
Click on the link in the email to activate your account.

Once you have activated your account you can continue to log in

You haven't marked anything as a favorite so far. Please select a product Please select a play list Failed to add the product. Please refresh the page and try one more time.