View as
लॉकडाउन — आठवां दिन 00:18:31 लॉकडाउन — आठवां दिन Video Duration : 00:18:31 प्रेम रावत के साथ (हिंदी में अनुवादित)

प्रेम रावत:

सबको नमस्कार! मुझे उम्मीद है आप ठीक होंगे बिल्कुल और दोबारा आज भी हम सवालों के जवाब देंगे। एक और सवाल है आज के लिए कहते हैं "मैं अपनी पत्नी के साथ, सास और बेटी के साथ हूं और 8 साल की लौरा। लौरा और मैं इस समय का पूरा फायदा उठाते हैं। और मैं उसे बताता हूं आपके विचार और आपकी बातें उसे पसंद आती हैं लेकिन मेरी पत्नी और सास काफी घबराए हैं। मैं उनकी मदद करना चाहता हूं, लेकिन मुझे पता नहीं कैसे क्या आप बताएंगे? शुक्रिया!" यह सवाल भेजा है पेड्रो ने।

अच्छा सवाल है पेड्रो, क्योंकि मुझे लगता है कि कई लोग काफी डरे हुए हैं कि क्या होने वाला है और यह काफी बड़ी बात नहीं है। जब इसके बारे में आप सोचते हैं आपको बस कुछ सावधानियां बरतनी है। अब जो मैं समझा हूं वह ये कि यह वायरस एक कॉमन-कोल्ड वायरस है और इसके काफी हल्के लक्षण होते हैं अगर परेशानी ना हो पहले से ही तो यह काफी बिगड़ सकता है। यही है मेरी समझ जो मैंने डॉक्टर से बात करके समझा है। लेकिन असल में अगर आप अपने हाथ साफ रखें और मुंह को न छुएं, उस व्यक्ति से दूर रहें जिसे शायद यह बीमारी हो सकती है और ऐसी जगह में ना रहें जहां उनकी छींक की वजह से कीटाणु फैल गए हों। फिर आपको चिंता करने की जरूरत नहीं है बिल्कुल।

तो अगर आप अलग हैं और बाहर नहीं निकल रहे और दूरी बनाई हुई है सभी से। आप हाथों को साफ रख रहे हैं, अपनी नाक मुंह और आंखों को नहीं छू रहे तो आपको डरने की जरूरत नहीं है। इस बात से हो सकता है कि किसी के जीवन में फर्क पड़े या ना पड़े, लेकिन सच में जो बात उन्हें समझनी है वह यह है कि यह जीवन ही है और इस जीवन के प्रति सराहना होना अब भी एक अहम बात है। परेशानी नहीं होगी अगर वह सावधानी रखें वह ठीक रहेंगे लेकिन पता है और शायद ऐसी परिस्थितियों में लोग काफी भ्रमित हो जाते हैं। लेकिन सुनिए, आपको सड़क पर जाते हुए ये सावधानियां रखनी है।

बहुत बार जब अमेरिकी इंग्लैंड जाते हैं और वह सड़क की दूसरी तरफ ड्राइव करते हैं और यह मुमकिन है कि वो ट्राफिक को देखने के लिए गलत दिशा में देखें और वह देखते हैं कि “ओह हां! खाली है” और वह आगे चलते हैं जबकि हो सकता है कि गाड़ी सामने से आ रही हो। तो सावधानियां हमें ध्यान में रखनी ही है अगर हम यह सावधानी नहीं रखेंगे, हम वो एक अहम काम नहीं कर पाएंगे जो हमें करना है। तो यह मुद्दा है बातों को प्राथमिकता देने का। डरना हमारी प्राथमिकता नहीं हो सकता, क्योंकि यह आपके शरीर को और थका देगा यह ठीक नहीं होता। और जब ऐसा होगा मेरा मतलब —घबराहट, लोग इस बात पर घबराए हुए हैं और वह सो नहीं पा रहे हैं। यह शायद आपके इम्यून सिस्टम के लिए सबसे बुरा है। आपको अच्छी नींद लेनी जरूरी है ताकि रोग प्रतिरोधी क्षमता अच्छी रहे ताकि आप बीमार ना हों। देखिये! अच्छी खबर यह है कि आप सावधानी ले सकते हैं और इससे आप सुनिश्चित होंगे की बीमारी आपको नहीं लगेगी। यह इतना ही आसान है बस और इसलिए डरने की कोई वजह नहीं है।

"प्रिय प्रेम! मेरा एक सवाल है। कृपया हम क्या दे सकते हैं खासकर बच्चे और पोते-पोतियों को ऐसे समय में करुणा, प्यार और अपनेपन के अलावा ?" — यह पूछा है बारबरा ने विएना से।

हैलो बारबरा! अच्छा सवाल है आपका। "हम उन्हें क्या दे सकते हैं ?" पहली बात हमारा परिवार जिनके साथ हम इस स्थिति में बंद हैं। एक बात मैं बताना चाहता हूं "सबको थोड़ी-थोड़ी जगह दीजिए, सबको एक स्पेस दीजिए।" यह बात अगर हम नहीं करते हैं अगर पालन नहीं करते हैं (खासकर अगर हम घर की छोटी जगह में बंद हैं तो) यह सच में सभी को पागल कर सकता है। तो कृपया उस कोमलता के साथ कुछ अच्छा करें और यह नहीं कि "ओह हां, मैं आपसे अच्छा व्यवहार करूंगा!” पर इसका असल मतलब देखें और इसका असल मतलब तब निकलेगा जब आप एक-दूसरे को समझेंगे, एक-दूसरे को कुछ जगह देंगे और यह बहुत-बहुत-बहुत जरूरी है। तो मैं बस कहता हूं कि एक-दूसरे के साथ खुश रहिए। बैठे रहने के अलावा और एक-दूसरे में गलती निकालने से अच्छा, क्योंकि परिवारों को गलती निकालना बहुत अच्छे से आता है। वह बस बैठे-बैठे — "अच्छा! यह तरीका नहीं है काम करने का यह गलत है, वह गलत है "..... और ऐसे ही यही सब और यह किसी को अच्छा नहीं लगता है। बिल्कुल भी नहीं।

यह करने से अच्छा है कि आप सबको स्पेस दें, सबकी इज्जत करें। हम घर के बाहर सबकी इज़्जत करने को आतुर रहते हैं, लेकिन यह एक अच्छा समय है खुद को आपस में इज्जत देने का। एक-दूसरे को कुछ स्पेस दें, एक दूसरे को समझिये; एक-दूसरे को अपनापन दें, जब भी जरूरी हो। एक-दूसरे को समझिए आप सभी लोग और उनके साथ होने की सराहना कीजिए। जब आप किसी की सराहना करते हैं कुछ बहुत ही सुंदर निकल कर आता है और आपको एक-दूसरे के साथ की सराहना करनी चाहिए इसलिए नहीं क्योंकि आप उन्हें पसंद करते हैं, पर आप बताते नहीं लेकिन आप पसंद तो करते ही हैं ना। तो यह एक अच्छा समय है यह सब करने का। जब आप ऐसी परिस्थिति में हैं जब लॉकडाउन की स्थिति है।

"मेरा सवाल है मैं कुछ चैट ग्रुपस में हूं और लोग काफी परेशान हैं और सभी के मन में निराशा और उदासी है। मैं उन्हें बताना चाहता हूं कि बहुत कुछ सुंदर है आसपास लेकिन मैं थोड़ा चिंतित हूं क्योंकि उनका नज़रिया मुझसे अलग है वह सराहना नहीं कर पाएंगे और मैं किसी को बुरा महसूस नहीं करवाना चाहता इस गंभीर बात को कुछ छोटा बताकर। क्या सिर्फ उन्हीं के साथ अपने मन की बात साझा करूं जिनको मैं जानता हूं और मेरा नज़रिया भी जानता हूं या उनके साथ साझा करूं जिन्हें मैं नहीं जानता ?" और यह सवाल डेविड ने पूछा है। मैं नहीं जानता आप कहां से हैं डेविड, पर यह अच्छा सवाल है।

और यह वजह भी कि यह अच्छा सवाल है वह ये कि "क्या आप लोगों को अच्छी खबर देते हैं ?" और आप इसे आसान नहीं समझते काफी लोगों के लिए बहुत गंभीर स्थिति है और यह बहुत ही गहन बात है। क्योंकि यह उन वायरस में से एक है, जो वैसे तो हमें वायरस का पता है जैसे कॉमन-कोल्ड होता है — पर यह वह है जिसके बारे में हमने कुछ नहीं जानकारी ली। इसका तज़ुर्बा नहीं है हमें और यह प्रबल हो गया है बहुत ज्यादा बढ़ गया है और यह एक-दूसरे पर आरोप लगाने का समय बिल्कुल नहीं है। इन बातों में पड़ना लेकिन यह समय है एक-एक कदम देखकर रखने का और यह उदास और परेशान होने का समय बिल्कुल नहीं है लोग इनसे छुटकारा चाहते हैं। पता है मेरा सुझाव आपके लिए यह होगा कि कोशिश करें कि यह कैसा जाता है शायद आपको 100% न मिले, शायद आपको 10% मिले, शायद आपको 5% सफलता मिले। लोग सकारात्मक संदेश की सराहना करते हैं। यह बहुत अच्छा होगा, क्योंकि यह परेशान और उदास होने का समय नहीं है। मेरा मतलब यूं ही बैठकर परेशान होते रहना। "मेरी नाव डूब रही है, मैं डूब रहा हूं; मेरी नाव डूब रही है, मैं डूब रहा हूं" ऐसा बोलने से आप बचेंगे नहीं। कुछ करिए! भगवान के लिए कुछ कीजिए! और सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि इस बात पर एक सच्चाईपूर्ण दृष्टिकोण रखिये। सभी बातों पर गौर कीजिए सिर्फ एक बात पर ही नहीं।

क्योंकि देखिये मैं यह कई बार कहता हूं आप गाड़ी चला रहे हैं और आपको एक चिह्न दिखता है जिस पर लिखा है "गति सीमा।" "50 मील प्रति घंटा" आप क्या करते हैं ? आप क्या करते हैं ? क्या आप अपना सिर स्पीडो मीटर के ऊपर रखकर आप कहते हैं कि यह है सीमा और इसने दाएं या बाएं या ऐसे या वैसे की बात नहीं की थी। दूसरी गाड़ी को मारना भी नहीं कहा था मैं सुनिश्चित करूंगा कि 50 मील प्रति घंटे पर ही चलाऊं और यह बिल्कुल सही करूं तो यह आपको किसी परेशानी में जरूर डाल देगा और यही होता है।

कई बार लोग सिर्फ एक ही बात पर ध्यान देने लगते हैं और जानते हैं जैसे कि मैं हमेशा एक सवाल उठाता हूं "लोगों को डरावनी पिक्चर देखना क्यों पसंद है ?" मेरा मतलब, उनमें से कुछ बहुत बुरी होती हैं, पर लोगों को अच्छा लगता है। उन्हें डरना अच्छा लगता है और यह एक "सुरक्षित डरना" होता है। पर उन्हें डरना ही है और इसलिए शायद यह एक और बात है जो लोगों के मन में है "ओह! जैसे कि, हां उदासी और परेशानी ही है इसमें और जैसे कि यह बुरा है, यह खराब है, हम सब मरने वाले हैं.... और ऐसा ही कुछ।" लेकिन बात यह है इंसानों ने बहुत कुछ देखा है। महामारियां पहले भी फैली हैं ऐसी चीजें हुई हैं जिन्हें औषधि विज्ञान कुछ भी नहीं कर पाया उनको। हम आज काफी-काफी अच्छी स्थिति में हैं कम से कम हम इससे समझ सकते हैं और हमारे पास यह समझने के लिए अच्छा तरीका है। अब क्या सभी सरकारें वही करती हैं जो उन्हें करना चाहिए मुझे नहीं लगता। और देखिये मैं उनकी बुराई करने के लिए यहां नहीं आया। हमें स्थिति से बाहर निकलना ही है और बस यही बात जरूरी है।

और इसलिए हां, "उदासी और परेशानी" के ही बारे में नहीं है। मैं जानता हूं ऐसे लोग भी हैं मैं उनसे मिलता ही रहता हूं कि आप एक ट्रैफिक पर रुकें हैं तो आप पाएंगे कि वह संगीत बजा रहे हैं और वह मेरी गाड़ी से नहीं आ रहा वह किसी दूसरी गाड़ी से आ रहा है। वह अपने संगीत को लेकर बहुत ही खुश हैं और वह चाहते हैं कि पूरी दुनिया उसे सुने। मेरा मतलब उनकी खिड़की के शीशे नीचे हैं। वह बस तेज-तेज संगीत चला रहे हैं। और जैसे ही देखते हैं कि "मेरे पास क्या है वह गाना बजाकर खुश हैं...।"

आप मजे करें। हम मजे करते हैं। आप इस संदेश का आनंद लें, मजे लीजिए। आप "उदासी और परेशानी" का हिस्सा मत बनिए। बिल्कुल भी नहीं! अगर लोगों की मदद करना चाहते हैं, हां, बिल्कुल मदद कीजिये शायद सराहना करेंगें वो लोग। शायद ना करें अगर नहीं करते तो आप चुप हो जाएं। अगर करते हैं तो मदद कीजिये। यह इतना ही आसान है शायद मैंने इसे ज्यादा ही आसान बना दिया है। तो उम्मीद है आपको मदद मिलेगी।

एक और है — इनका सवाल है "यह कैसे समझें कि आप दोबारा अचेतना में जा रहे हैं इससे पहले कि आप समझें और आप ड्रामा और भावनाओं में बह जाते हैं ?" धन्यवाद! कैरेन ने पूछा है।

हैलो कैरेन! यह अच्छा सवाल है! काफी अच्छा सवाल है यह। और मैं बता दूं कि यह स्थिति के हिसाब से है जो आज हमारे समक्ष आ गई है। यह हर रोज के संदर्भ में है जो हम देखते हैं। तो सवाल है "हम कैसे पहचानें कि आप अचेतना में जा रहे हैं?"

क्योंकि आप बहुत तेजी से जा रहे हैं, चीजें बहुत तेजी से हो रही हैं। इसे धीमा करें, धीमा करें, एक-एक कदम करके बढ़िए आप लोग। जीवन ऐसे ही जीया जाना चाहिए सिर्फ इसलिए क्योंकि दुनिया एक ही बात मानती आई है कि "देखते हैं आप कितना कर सकते हैं, आप कितना आगे बढ़ते हैं, आप कितना हासिल कर सकते हैं।" देखिए मैं उन लोगों में से था जो कहते थे कि 150%, 200%, पर सच्चाई है ऐसी कोई चीज नहीं है 200% जैसी। तब से मेरी समझ है कि आराम से कीजिए, एक-एक कदम करके चलिए! आप क्या कर रहे हैं ? आप क्या करने वाले हैं ? कुछ दिमाग लगाइए यही तो है सचेत होना। मेरा तज़ुर्बा क्या है ? मेरी भावना क्या है ? मैं कहां जा रहा हूं ? मैं जो करने वाला हूं उसका परिणाम क्या होगा ? अगर लोग ऐसा कर पाते हे भगवान! अचानक से आपको जेलों की जरूरत ही नहीं पड़ती आपको इन सबकी जरूरत नहीं पड़ती। बंदूके निकालना और यह सभी चीजें जो आजकल होती हैं।

अगर लोगों के जीवन में बस इतना होता बहुत ही आसान से धीमे-धीमे चलना, बहुत आराम से करना, आंखों को खोलकर काम करना, बंद आंखों से नहीं। समझना कि आप क्या करने वाले हैं और यह हैं तरीके। क्योंकि जब वह गति आएगी, गति यही तो करती है आप जो करने वाले हैं उसके प्रति आपको अंधा बना देती है। क्या कमाल का तरीका है अभ्यास करने का। क्या कमाल का तरीका है हर रोज अभ्यास करने का। जबतक आप लॉकडाउन में हैं ताकि आप धीमे होने का अभ्यास करें। आप मत कीजिए ऐसे नहीं कि इतनी तेज आखिर जाना ही क्यों है। इसकी कोई वजह नहीं है।

तो यह कमाल का सवाल था। आप धीमे चलिए। इसे समझिए और देखिए कि आप क्या कर रहे हैं। ध्यान दें कि क्या चल रहा है! सोचकर कीजिए वह काम जो आप करने वाले हैं उन्हें बस कर देना और परिणाम के बारे में बाद में सोचना। तो उम्मीद है इससे मदद मिलेगी। यह रही एक और बात जो सोचने लायक है। "अचेत जीवन की वजह से विनाश!" “क्या यह संभव है कि परिस्थिति खराब होने की वजह से हम आज खुश होना छोड़ ही दें ? कहने की जरूरत नहीं है, मुझमें बहुत खालीपन आ गया है इस समय ?" — मिशेल

देखिए मुझे बुरा लगा कि आप में खालीपन आ गया है, नहीं होना चाहिए। क्योंकि आप तो सचेत थे। आप इससे बच सकते थे। पूरा मुद्दा यह है कि जीवन में — बात यह नहीं कि चीजों को गायब कैसे किया जाए कि आपकी मुश्किलें चली जाएं। बात यह है उनके पास से निकलने की, अपनी मुश्किलों के पास से होकर गुजर जाना। जी हां! सच में आसपास से! आपको पर्वत को देखकर नहीं कहना होता कि "मुझे तो पर्वत के ऊपर से जाना होगा।" जी नहीं! उसके आसपास का तरीका निकालिए यह कितना आसान होगा, कितना अच्छा होगा, करने में कितनी सरलता होगी और ऐसा ही होना चाहिए।!

बेहोश मत रहिए क्योंकि जीवन आपको ऐसे नहीं देखना चाहता। जीवन चाहता है कि आप सचेत रहें और सराहना करें हर रोज सबकुछ जो आपके आसपास चल रहा है। मुझे नहीं पता अगर मैंने कभी कहा हो "बेहोशी का परिणाम सर्वनाश है" — और मैं मानता हूं कि यह काफी-काफी करीब बात है सच्चाई के। और हमेशा एक बात ध्यान रखें कि आप कुछ भी बदल नहीं सकते। आपके पास विकल्प है किसी भी क्षण आप पहाड़ से नीचे आ सकते हैं और कह सकते हैं कि मैं इसके पास से जाने का रास्ता निकालूं, इसके आसपास। मैं अपनी परेशानी के पास से होकर निकल जाऊंगा। इनके समाधान निकाल कर ही रहूंगा। यह विकल्प आप कभी भी चुन सकते हैं — हमेशा ही और क्या इससे समय बर्बाद होगा ? जी नहीं! यह शायद आपको कहीं ज्यादा समय बचाकर देगा।

तो उम्मीद है इस जवाब से मदद मिले और कृपया एक जगह फंसिये नहीं; परेशान मत रहिए आप बाहर निकल सकते हैं। आपने इसमें फंसना सीखा है तो आप बाहर भी निकलना सीख सकते हैं और फिर एक बार बाहर आए ? सबसे जरूरी बात होगी कि "बचिये-बचिये और बचिये।"

तो आज केवल इतना ही समय है हमारे पास आपसे कल बात करूंगा। धन्यवाद!

लॉकडाउन — सातवां दिन 00:19:30 लॉकडाउन — सातवां दिन Video Duration : 00:19:30 प्रेम रावत के साथ (हिंदी में अनुवादित)

प्रेम रावत:

हैलो! हैलो! नमस्कार सभी को! उम्मीद है आप ठीक हैं। और इस वीकेंड में मुझे लगा कि कुछ जवाब देने का यह अच्छा समय है। तो मेरे पास कुछ सवाल हैं और सबसे पहला सवाल जो भेजा है वह है संजय की ओर से जो हैं (मुझे नहीं पता वह कहां से हैं उन्होंने नहीं लिखा) — पर वह कहते हैं "मैं आपका धन्यवाद देता हूं कि लॉकडाउन में आपने विचार साझा किए इससे मुझे सच्चाई समझने में बहुत मदद मिली है। यह अच्छा है हिम्मत और उम्मीद मिली है और यही तो चाहिए था मुझे कि आपको हिम्मत मिले और आपको उम्मीद मिले। सरकारी कर्मचारी और कई लोग निर्देश दे रहे हैं और सुझाव ताकि कोरोना वायरस से बचा जा सके। अगर आप भी ऐसा ही कुछ बताएंगे तो अच्छा रहेगा — संजय!"

लिखने के लिए धन्यवाद संजय और मैं जो आपको बताऊंगा वह यह है कि देखिए! मैं डॉक्टर नहीं हूं और मैं किसी भी तरह से वायरस विशेषज्ञ नहीं मैं यह नहीं कहता, लेकिन मैं आपको एक बात जरूर बता सकता हूं कि जो भी मैंने सुना है और समझा है वह दो बातें हैं "किसी को भी बीमारी ना दें और किसी से भी बीमारी ना लें!" बस इतना ही अगर आप बीमार हैं तो किसी को मत दीजिए संक्रमण और किसी से बीमारी मत लीजिए अगर वह बीमार हैं। इसमें जो भी हो बहुत-बहुत आसान है — अपने हाथ धोएं, आप बाहर जाते हैं अपने हाथ धोएं, आराम से रहें, अच्छा सोचिए, सुरक्षित रहिए, धैर्य रखिए, आपको धैर्य की जरूरत पड़ने वाली है धैर्य की जरूरत है और धैर्य रखें। आप अच्छा सोचें और इसे हिम्मत से लड़ें कमजोरी से नहीं, लेकिन हिम्मत से। तो उम्मीद है और हां मैं जो बात कर रहा हूं वह यह है कि आप इस स्थिति में भी मज़े कर सकते हैं, क्योंकि अच्छा समय जिसकी मैं बात कर रहा हूं वह आपके भीतर है उसे खोजिये। तो अच्छा समय बिताएं, हमेशा अपने साथ हिम्मत और धैर्य रखें और वह उद्देश्य हो आपका कि किसी को बीमार नहीं करना है चाहे जो भी हो जाए बस इतना।

"उनका क्या जो अहम सेवाएं दे रहे हैं। आपके पास उनके लिए कुछ शब्द हैं इस बार ?" — केसी ने पूछा है!

लिखने के लिए धन्यवाद दोबारा। वह कमाल की सेवा कर रहे हैं। वह अपने जीवन को खतरे में डाल रहे हैं ताकि इस स्थिति में हमें कुछ अच्छा मिल पाए कुछ साधारण जीवन की तरह। पहली बात, मैं दुनिया के उन सभी लोगों का धन्यवाद कहना चाहता हूं जो यह काम कर रहे हैं और दूसरा, शायद जैसा कि मैंने संजय को कहा, हम सभी को हिम्मत और धैर्य दिखाना होगा और यही दो बातें इस धरती पर इंसान होने के नाते हमें अभ्यास में लानी होंगी खासकर कोरोना वायरस के चलते — ऐसा होगा यह समाधान। अलग रहकर ठीक होने में लगभग 14 दिन लगते हैं और उस समय को बिताना पागल जैसा ना होना इसमें धैर्य लगता है, काफी पेशेंस!

तो सच में पहली बात दोबारा मैं धन्यवाद कहता हूं सभी लोगों का जो इस समय सेवाएं दे रहे हैं। सुरक्षित रहिये आप लोग बिल्कुल! मैं आप में बहुत हिम्मत देखता हूं और कृपया धैर्य रखिए! करते रहिए जो काम आप कर रहे हैं ताकि हम सब जीवित रह पाएं और हमारा जीवन साधारण बन पाए और दोबारा मेरी ओर से आप सभी को धन्यवाद!

"इस ज्ञान को साझा करने के लिए आपका धन्यवाद! मेरा एक सवाल है हालांकि लोगों को अभी जबरदस्ती अलग रहना पड़ रहा है। कई लोगों को यह समय एक छोटे बच्चे के साथ बिताना है या बच्चे के साथ और अपने लिए समय नहीं निकाल पा रहे और ज्यादा परेशानी है, खीझ रहे हैं बच्चों को समझ नहीं आता कि यह क्या चल रहा है वह बाहर जाना चाहते हैं और दोस्तों के साथ खेलना चाहते हैं। मैं आपकी मां-बाप के लिए सलाह की सराहना करता हूं और इस समय के लिए आपके पास कोई सलाह है ? सप्रेम और धन्यवाद वेंडी!"

मेरी सलाह है कि अगर आप परेशान होंगी और बच्चे यह देखेंगे तो वह समझ जाएंगे। ऐसे मत कीजिए अगर आप ऐसा करेंगी तो कुछ गलत है। जब उन्हें लगता है कि कुछ गलत चल रहा है तो बस खत्म! मेरी मानिये खत्म है और उस समय एक परेशान माँ-बाप बच्चे को लेकर कहता है "तुम मत रोओ!" मेरा मतलब, वह बच्चा रोएगा ही, तो धीरज रखिए सब ठीक है। यह आपके बच्चे हैं, आप इनके आसपास हैं जो भी उनके साथ जुड़िये। इनका सबको देखने का एक अलग नज़रिया होता है वह समस्या को नहीं देखते, वह तो बस समाधान ही देखते हैं और समाधान है हम अच्छा समय क्यों नहीं बता सकते! आप अच्छा समय बिता सकते हैं कोरोना वायरस नहीं कर सकता, यह किसी भी तरह से अच्छे समय पर वार नहीं करता। आपको केवल जानना होगा कि अच्छा समय क्या है और हम आमतौर पर इतने व्यस्त रहना सीख गए हैं कि इस समय में अच्छा वक्त हम देख ही नहीं पा रहे हैं।

एक समय था जब टीवी नहीं होता था, एक समय था जब यह सारे मनोरंजन के साधन नहीं थे (समझते हैं ना)। एक समय था कोई आईपैड नहीं थे, कोई आईफोन नहीं थे और सेलुलर फोन, कोई सुपर कम्प्यूटर्स भी नहीं थे कुछ नहीं था। और तब लोग क्या करते थे ? तो लोग खुद सोचते थे और शांत समय का भी अहमियत जानकर उसका इस्तेमाल करते थे, पर अब इसे सज़ा की तरह देखा जाता है। मेरा मतलब, सच में अजीब है पर एक बच्चा कुछ गलत करता है और हम कहते हैं कि "अपने कमरे में जाओ और बैठो और सोचो इस बारे में।" क्या कहा इसमें सज़ा क्या है यह तो अच्छी बात है। आपको लगता है यह सजा है पर यह अच्छी बात है। कोई बैठकर सोचे, अच्छे से सोचे अपने दिन के बारे में, क्योंकि सब इतना तेज है आजकल तो आपको शायद दोबारा सोचना पड़े जो आपको और सभी को पता था, पर अब आप भूल गए हैं। तो बात है उस बच्चे के साथ समय को खोजना और फिर अच्छा समय बिताना उसके साथ या शायद एक कहानी लेकर उसे अलग-अलग ढंग से सोचना और अलग-अलग चीजें समझना, सोच को बढ़ाना, बच्चे को बस यही तो चाहिए। जबतक उनकी सोच खुली रहती है तब तक सबकुछ अच्छा रहता है। मैं तो ऐसा ही सोचता हूं हमेशा, तो ऐसा नहीं कि मां-बाप को सलाह देने में मैं विशेषज्ञ हूं, पर मुझे उम्मीद है आप समझेंगे कि मैं क्या कह रहा हूं और धन्यवाद — धन्यवाद लिखने के लिए।

यह रहा एक और सवाल "मैं स्पष्टता को कैसे चुनूं, मैं शांति को कैसे चुन सकता हूं ? करुणा, समझ, प्यार को मैं कैसे एक अच्छा जीवन जीयूं जिसमें सुरक्षा, शांति, खुशी और आनंद हो। स्पष्ट सच्चाई की बात पर ध्यान रहे और ज्यादा ?"

देखिए! अब आप जो भी हैं धन्यवाद! आपका नाम यहां नहीं है लेकिन यह अच्छा सवाल है और सबसे जरूरी बात यह है कि जिन बातों के बारे में आपने कहा — करुणा, अपनापन यह आपके भीतर ही हैं। यह आप में ही हैं। आप जानते हैं कि गुस्सा क्या है और गुस्सा कैसा दिखता है यही है यह भावना यह भीतर आकर फैलती है आप लाल हो जाते हैं, रक्तचाप बढ़ जाता है, दिल धड़कने लगता है, आप गुस्से में हैं। आपको मालूम है गुस्सा क्या है और गुस्से के खत्म होने के बाद आप भी पता है सोच कर कह सकते हैं कि "हां मुझे गुस्सा आया था", लेकिन करुणा से भी वाकिफ़ हैं आप। आप जानते हैं नफरत क्या है पर आप जानते हैं कि जितना नफरत को जानते हैं क्या आप उतना ही करुणा को जानते हैं ? क्या आप अपनेपन को उतना ही जानते हैं ? क्या आप शांति को जानते हैं ? क्या आप उतना ही खुशी को जानते हैं ? क्या आप वैसे ही आनंद को जानते हैं ? अगर नहीं जानते तो यह है समस्या, क्योंकि आपको पता होना चाहिए यह बातें हर समय आप में ही हैं। यह सभी बातें आपके भीतर हैं, हर क्षण। ऐसा नहीं कि आप अपनी खुशी पीछे छोड़ देते हैं, ऐसा नहीं कि अपनापन पीछे छोड़ देते हैं, ऐसा नहीं कि खुशी को पीछे छोड़ देते हैं, जहां भी जाते हैं, जो भी करते हैं यह सब आपके भीतर रहता है सबकुछ। गुस्से की तरह, नफरत की तरह, भ्रांति की तरह हमें इन बातों को गहराई से समझना है और जब हम इन्हें सच में समझना शुरू कर देते हैं फिर हमारे भीतर कुछ होता है, जो इन बातों को चुनना शुरू कर देगा बाकी चीजों से पहले, अपने आप ही चुन लेगा जो हैं गुस्सा और डर और बाकी सबकुछ।

इतने सारे लोगों को कोरोना वायरस हो गया है यह बड़ी बात है लोग डरे हुए हैं। और लोग क्यों डरे हुए हैं ? "ओह! मेरे साथ क्या होने वाला है और जब आप संख्या को देखते हैं — और मैं इसे आज सुबह देख रहा था कहीं ज्यादा लोग प्राकृतिक कारणों से मरे हैं, इस कोरोना वायरस के मुकाबले। लेकिन यह सही नहीं, यह अच्छा नहीं — मैं नहीं बोल रहा, पर जब आप देखते हैं उन संख्या को जो हर रोज दिख रही है यह कोई बहुत बड़ी बात नहीं है। यह संख्या इतनी बड़ी नहीं है हालांकि यह बढ़ते जा रहे हैं और बढ़ते जा रहे हैं और भी ज्यादा बढ़ रहे हैं, दोबारा विश्व के नेता इतना अच्छा काम नहीं कर रहे जितना उन्हें करना चाहिए। लेकिन बावजूद इस सबके क्या लगता है इस चीज से, डरने से इस कोरोना वायरस से क्या होगा! कुछ भी नहीं। आपको क्या करना है, जैसा मैंने कहा एक लक्ष्य होना चाहिए, "बीमारी किसी को ना दें और किसी से ना लें!"

तो हम कुछ बातों को अच्छे से जानते हैं, लेकिन हम कई ऐसी बातें हैं जिन्हें नहीं भी जानते। खुद को जानने से ऐसा होता है कि आप इन बातों को जान जाएंगे। “जी हां! कहिए मुझमें गुस्सा है और मुझे गुस्सा नहीं पसंद है, लेकिन मुझमें अपनापन है एक खुशी है” और जैसे-जैसे आप जानेंगे यह चुनने में और आसान होता जाएगा समझ यही है आपकी अहमियत और यही उदाहरण मैं देता हूं वह यह कि — “एक छोटे डिब्बे की क्या अहमियत है, एक छोटा डब्बा ?” और शायद इसमें क्या है, इस डिब्बे में पता है इसमें सिर्फ एक अंगूठी है और उसकी कीमत होगी लगभग 2 लाख डॉलर तो फिर डिब्बे की कीमत क्या हुई ? अब शायद डिब्बे की कीमत है 50 डॉलर (10 डॉलर, 20 डॉलर या जो भी) लेकिन जबतक अंगूठी उस डिब्बे में है उस डिब्बे की कीमत भी 2 लाख डॉलर है।

यही है जो आपको समझना है। उस डिब्बे से अंगूठी निकालें और उस डिब्बे की कीमत है 50 डॉलर (5 डॉलर, 10 डॉलर या जो भी) पर जबतक अंगूठी डिब्बे में है तो डिब्बे की कीमत भी अंगूठी जितनी ही है और फिर ? यही बात आपके साथ भी होती है। जबतक आप में वह चीज है जिसे कहते हैं “जीवन”, आपकी कीमत असंख्य है और उसे हटा दें और हां बिल्कुल कुछ नहीं बस यह एक डिब्बा है और फिर यही रहेगा तो उन बातों से परिचित रहें जो आप में है उन बातों से प्यार करें और फिर आप इस जीवन का आनंद ले पाएंगे और ज्यादा और ज्यादा।

एक और सवाल — "धन्यवाद प्रेम! क्या आप उनसे कुछ कहेंगे जिन्हें यह बीमारी हो गई है ? मैं लॉकडाउन क्लिप्स कई लोगों को भेज रहा हूँ, जो आपको नहीं जानते हैं यह कितना अच्छा है, सबके लिए।"

जी हाँ! अब मैं यह कह सकता हूं दोबारा वही पुरानी बात यह कीजिए — अगर आपको बीमारी है उन्होंने आपको बताया होगा कि वायरस है धैर्य रखें, अच्छा सोचें, अच्छी नींद ले और इसका हिम्मत से सामना करें। हौसला रखिए इस समय, डर नहीं इसका सामना हिम्मत से करें आप बेहतर हो जाएंगे। बहुत से लोग चाहते हैं कि आप ठीक हों, लेकिन वह उम्मीद आपके भीतर से आनी चाहिए। यह सब हिम्मत से करें, यह धैर्य से करें, इसे पूरा होने दें, जरूरी कदम उठाते रहिए। अच्छा सोचें और वह सब करें जो जरूरी हैं और मुझे उम्मीद है कि आप जल्द ठीक होंगे और वह बहुत अच्छा दिन होगा।

अब किसी और ने भी लिखा है — "हाय प्रेम! मैं आपका धन्यवाद करता हूं उसके लिए जो आपने समझाया और मदद करने के लिए!” “मेरी बेटी ने मुझसे कुछ वर्षों पहले पूछा था कि वह 7 या 8 साल की थी कि पापा जब मैं मर जाऊंगी तो आपको याद रखूंगी और जब आप मर जाएंगे तो मुझे याद रखेंगे ? मैं कुछ गलत नहीं कहना चाहता था तो मैंने उससे कहा कि अच्छा सवाल है लेकिन मैं नहीं जानता था मैं तब से काफी सोच रहा हूं तो मेरे लिए यह सवाल बन गया है — क्या हृदय की यादें होती हैं या यह सिर्फ अभी के पल में ही जीता है!"

देखिए जब आप किसी से प्यार करते हैं और उस व्यक्ति के साथ होते हैं आपको उनसे क्या मिलता है ? वह क्या देते हैं आपको जब आप उन्हें देखते हैं ? आप उनसे प्यार करते हैं वह आपको खुशी देते हैं तो इसका मतलब क्या हुआ “खुशी — वह खुशी लाते हैं ?”

अब खुशी कैसे दिखती है ? क्या उस पर उनका नाम लिखा होता है ? या यह आपको अच्छा महसूस करवाती है ? उस व्यक्ति के साथ होना, उनके बारे में सोचना और यही बात हृदय अच्छे से जानता है वह भावना, वह अच्छाई, वह खुशी जो दूसरा व्यक्ति देता है आपको, शायद बढ़ावा देता है वह इस खुशी को बढ़ाते हैं। हां बिल्कुल, चाहे जो भी हो अगर आपने एक-दूसरे को खुशी दी है उन्होंने आपको और आपने उन्हें, फिर आपके साथ खुशी हमेशा रहेगी किसी लेबल या नाम के बिना हमेशा। क्योंकि हृदय तो पूर्ण है, जी हां भरा हुआ और शायद आप न ही लें। जब आप किसी के घर जाते हैं और कमाल का खाना खाते हैं। आप उस खाने को एक हफ्ते के बाद भी अपने साथ नहीं ले जाते हैं। 2 हफ्ते, 3 हफ्ते लेकिन खाते समय बिताया हुआ अच्छा समय आपको याद रहता है और जीवन भी बिल्कुल ऐसा ही है तो मुझे उम्मीद है इससे आपको जवाब मिला होगा।

मैं कोई एक बात नहीं बोल रहा मैं जानता हूं, पर हृदय पूर्ण होने के बारे में ही है और अगर वह आपको खुशी देती हैं और आप उन्हें और यही बात रिश्तों में अहम होती है कि हम यह समझते हैं कि इसमें आखिर है क्या! “मैं कैसे उस दूसरे व्यक्ति को खुशी दे सकता हूं और मैं कैसे उस व्यक्ति से मिलने वाली खुशी को ग्रहण कर सकता हूं!”

फिर बस यही महत्वपूर्ण बात रह जाती है! सिर्फ यह! और यह तोहफा आप उन्हें देंगें जिसकी कीमत नहीं है — रूपए के तौर पर इसकी कीमत नहीं लगाई जा सकती इसकी कीमत असंख्य है और वो खुशी जो आपको देती हैं वह उसकी अहमियत असंख्य है, इसकी कोई सीमा नहीं।

तो उम्मीद है मदद मिलेगी आपको। आपका धन्यवाद और मैं आपसे जल्द मिलूंगा। ऐसे कई और भी सवाल हैं असल में, लेकिन हम उनके लिए भी समय निकालेंगे!

तो मैं आपसे कल मिलूंगा धन्यवाद!

लॉकडाउन — छठा दिन 00:15:21 लॉकडाउन — छठा दिन Video Duration : 00:15:21 प्रेम रावत के साथ (हिंदी में अनुवादित)

प्रेम रावत:

नमस्कार! आप सभी को नमस्कार !

मुझे उम्मीद है आप ठीक हैं। मुझे पता है यह मुश्किल समय है हालांकि मैंने कुछ मुद्दों पर बात की है। जैसे-जैसे सवाल आने शुरू हुए हैं, वह इकट्ठे हो रहे हैं, लेकिन जो भी हो रहा है लोग उससे काफी डरे हुए हैं और मैं इस वक्त आपसे बस इतना कहना चाहता हूं कि देखिए, जानते हैं नियम आसान है "वायरस ना ही दीजिये, वायरस मत लीजिये" — इतना आसान है, पर आपको यह करना पड़ेगा। दूर रहना अच्छा है। पर सवाल आता है कि आप अकेलेपन में क्या करेंगे ?

यह अफसोस की बात है सबसे पहले यह कि हमें यह सब देखना पड़ रहा है, क्योंकि खुद के साथ रहना प्राकृतिक होना चाहिये। खुद के साथ रहना अच्छा लगना चाहिए, कमाल होना चाहिए यह बुरा नहीं होता है लेकिन, अफसोस ऐसा है बिल्कुल नहीं। यह है — "हे भगवान! अब मैं क्या करूंगा!" लोग पागल हो रहे हैं और यह हो रहा है और वह हो रहा है। लेकिन मेरी मानिये जो मुद्दा है वह यह है कि सबसे पहले तो आप यह वक्त कैसे बिताना चाहते हैं ? बहुत आसान है —"हिम्मत रखिए, डर को छोड़ दीजिए!" ऐसे नहीं कि हे भगवान! अब क्या होगा, अब क्या होगा, अब क्या होगा, अब क्या होगा!" नहीं, हिम्मत रखिए!

दो चीजें चाहिए आपको — अगर आप चाहते हैं कि यह समय आराम से निकल जाए, जल्दी भी, जो भी दो चीजें चाहिए। ‘धैर्य’ — आपने सोचा आप में है क्यों ? यह आपकी परीक्षा है ‘धैर्य’ और दूसरी बात 'हिम्मत' — बस यही दोनों चाहिए और यह समय बीत जाएगा। स्पष्टता आपके भीतर ही है, उसे ढूंढिए और बाहर मत देखिए उसे अंदर तलाशिये। खुशी आपके भीतर है, खुशी को तलाशें। वह सुंदर खजाने को जो दबे हुए हैं, अब आपको उसकी जरूरत है। देखिए! अब उनकी जरूरत है आपको। पहले पता है, मैं आता था, बैठता था, लोगों से बात करता था आपके भीतर है यह। लोग कहते थे “हां हां हां!” अब आपको उनकी जरूरत है, क्योंकि इसके बिना आप क्या करेंगे ? हम क्या करेंगे ? यह बुरा हो सकता है इसलिए ढूंढिए, उस धैर्य को खोजें, हिम्मत को खोजें। खुशी अब भी आप में ही है और आप इस समय को अच्छा बना सकते हैं, अकेलेपन में, हां आप इसे कमाल का समय बना सकते हैं।

यह सब मुझे हमेशा उस व्यक्ति की याद दिलाता है जो एक व्यक्ति — वह जेल में था और वह बंद था। वह पीस एजुकेशन प्रोग्राम को सुन रहा था और वह मानता भी था। और मैं हमेशा स्वांस की बात करता हूं और यह कैसे शांति देती है और स्वांस हमारी कितनी सुंदर है और ये सब चीजें। एक दिन वह गया और अपने कारावास के बिस्तर में लेट गया और यह तज़ुर्बा वह किसी को सुना रहा था और उसने कहा कि "प्रेम हमेशा स्वांस की बात करते रहते हैं, तो मैं स्वांस पर ध्यान दे रहा था। मैंने जैसे ही स्वांस पर ध्यान देना शुरू किया और ध्यान दिया, मैं शांति से भरने लग गया — कितना सुंदर है यह, कितना कमाल का, जबरदस्त है। उसने कहा, अचानक से ही इतनी शांति मिली मुझे, शांति का एहसास हुआ, जो पहले मुझे कभी नहीं हुआ था।"

मेरे लिए यह हमेशा से था कि "हे भगवान! इस व्यक्ति को शांति का तज़ुर्बा हुआ जेल में बंद रहते हुए भी।" उनका क्या जो जेल में बंद नहीं हैं। हां, वो — वह भी तज़ुर्बा कर सकते हैं। मैं कुछ करने के लिए तत्पर हूं और हम इसकी संभावना को देख रहे हैं कि जितने भी लोग लॉकडाउन में हैं, शायद हम सभी मेरे साथ पीस एजुकेशन प्रोग्राम को देख सकते हैं और मैं मदद करूंगा उनकी, पीस एजुकेशन प्रोग्राम को करने में। मेरा मतलब, यह कमाल की बात होगी सच में। क्योंकि यह उन पर कमाल का काम करता है, जो जेल के अंदर बंद हैं और एक तरह से हम सभी जेल के अंदर बंद हैं। यह ऐसा है कि हम सभी घरों में हैं, लेकिन बंद ही तो हैं, तो हम इसकी संभावना को देख रहे हैं मेरा मतलब, यह कमाल का हुआ, यह कमाल होगा।

लेकिन उस वक्त तक कृपया डरिये नहीं, बिलकुल मत डरिये, हिम्मत रखिये आप सभी लोग, धैर्य रखिये; समझ रखिये यह भी गुजर जायेगा वक्त। जी बिलकुल, यह चला जाएगा। और जहां तक सवाल है आपके परिवारजनों का और उनके साथ समय बिताने का — चाहे पसंद हो या ना हो वह आपका ही हिस्सा हैं और ठीक है, यह अच्छा है कि आप उन्हें स्वीकारें, उन्हें प्यार करें। आपको केवल उनके प्रति एक जिम्मेदारी का भाव ही नहीं रखना है कि “देखिए मुझे यह करना है; मुझे वह करना है; अब मुझे यह पता करना है; मुझे ऐसे पता करना है; यह करना है।” नहीं! बस वह रहिये, जो आप हैं और उन्हें वैसा रहने दीजिए जैसे वह हैं। बहुत-बहुत अच्छे तरीके हैं सब से जुड़ने में।

क्या लगता है कि लोग पुराने समय में क्या करते थे उस वक्त ? मेरा मतलब, हम वह सब भूल गए हैं "आइए! यहां आइए एक कहानी सुनते हैं या एक कहानी पढ़ते हैं, एक कहानी पर चर्चा करते हैं।" किसी बात पर खुश होते हैं। मैं खुशकिस्मत था लगता है मुझे — जब मैं बड़ा हो रहा था तब टीवी नहीं था, ऐसा नहीं कि इसका आविष्कार नहीं हुआ था। यह बस इंडिया में, यह नहीं आया था और मैं क्या करता था ? कहानी सुनता था मैं उनसे खुश होता था कोई भी ऐसा, जो मुझे कहानी सुना सकता था मैं उन पर ध्यान देता था। यह कितना अच्छा होता था। एक समय था जब टीवी नहीं था और उस समय इंडिया में जब रेडियो आया ही था, यह कभी-कभी आता था और यह कभी-कभी नहीं आता था। शायद एक घंटा या डेढ़ घंटा या फिर दो घंटे और फिर यह बंद हो जाता था — आप क्या करते थे उस समय ? कुछ समझते हैं, आप कुछ खोजते थे। आजकल तो इतना कुछ आता ही रहता है कि हम अपने आपको भूल गए हैं। इस तकनीकी का प्रयोग किए बिना रहना और इस फोन के बिना रहना और सोशल मीडिया के बिना रहना — हम यह सब बातें भूल गए हैं और एक समय की बात है लोग बस ऐसे ही थे और वह खुश भी थे। मेरा मतलब, कुछ बुरी बातें थीं, क्योंकि नालियां नहीं थीं शायद और सबकुछ बदबू देता था थोड़ी-सी लेकिन उन सबके अलावा, हे भगवान, लोग कहते हैं "मैं तो पागल हो रहा हूं!"

पर आप पागल कैसे हो सकते हैं, आप जीवित हैं। यहां पर कुछ कमाल का चल रहा है और फिर ऐसे लोग हैं जो उम्मीदों में बंधे हुए हैं कि उनकी उम्मीदें क्या हैं और एक-दूसरे से उनकी उम्मीदें और फिर वह साथ नहीं आ पाते। क्योंकि उम्मीदें बीच में आ जाती हैं। यह समय उम्मीदों का नहीं है। यह समय है जीने का। आप हो सकते हैं, जी हां! रह सकते हैं। आप एक इंसान हैं सबसे पहली चीज जो आप हैं वह, "आप एक इंसान हैं" और अब यह कहना ही अजीब-सा लगता है, पर मुझे कहना ही पड़ेगा, क्योंकि यही तो आप भूल गए हैं कि "आप एक इंसान हैं" और अगर हम यही भूल जाएं कि हम इंसान हैं तो हम क्या बन गए ?

बहुत-सी कंपनियां हैं, वह सब ज्यादा तकनीकी बनाती जा रही हैं, बनाती जा रही हैं और भी ज्यादा और असल में उनमें से एक — पर बात यह है हमें फर्क नहीं पता कि “जरूरत और चाहत क्या है ?” हम चाहत के गुलाम बन चुके हैं यह हम भूल गए हैं कि हमारी जरूरत क्या है ? एक बहुत ही बड़ी कंपनी है, यह दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी में से एक है और वह बहुत-सी चीजें बनाते हैं और उसमें से एक भी चीज की हमें जरूरत नहीं है और वह बहुत-बहुत बड़ी कंपनी है। मेरा मतलब, बहुत ही बड़ी, आर्थिक रूप से बहुत बड़ी। लोग बस उनके लिए पागल से हैं और उनकी बनाई गई एक भी चीज हमें असल में चाहिए। यह हैरानी की बात है, चौंकाने वाली बात है और इतनी सारी चीजें जिन पर हम आकर्षित होते रहते हैं। हम नहीं समझते कि वह चीजें, जिन्हें हम सच में आकर्षण कहते हैं वह हमें भटकाती हैं। क्योंकि अगर वह आपको खुद से दूर ले जाती हैं — यही परिभाषा है ध्यान भटकाने की, जो आपसे आपको दूर ले जाए। यही है परिभाषा ध्यान भटकाने की।

आपको खुद के पास घर लौटना ही होगा। आपको वह अच्छाई महसूस करनी है, जो आपके हृदय में है; वह खुशी, जो हृदय में है; वह स्पष्टता, जो आप में नृत्य करती है; वह शांति, जो आपके भीतर है; वह धैर्य, जो आप में है; वह हिम्मत, जो आपके भीतर है; आपको उन चीजों को जानना ही है और यही वह मौका है यह सब करने का। यही मौका है वह करने का। जब मैं यह देखता हूं जैसे कि "हे भगवान! यह कोरोना वायरस अच्छा कैसे है ?" यह अच्छा नहीं है, सच मानिये अच्छा नहीं है। पर फिर मैंने एक फुटेज देखी — एक मछली पोर्पोइस (Porpoise) वेनिस इटली में प्रदूषण इतना कम हो गया है कि यह पोर्पोइस मछली यहां पर वापस आ गई है। आप पानी के भीतर देख सकते हैं, आप समुद्र की गहराई देख सकते हैं। जी हां! आप मछलियां देख सकते हैं; आप स्वॉनस (Swans) देख सकते हैं और ऐसा है, “हम्म!” फिर मैंने देखा जैसे चाइना का प्रदूषण बिल्कुल चला गया है जैसे कि “हम्म!”

हमने क्या किया है ? हमने क्या बनाया है ?” हमने अपनी चाहत की वजह से एक दैत्य बनाया है और यह धरती को नष्ट कर रहा है, हमें तबाह कर रहा है और इसके अलावा कुछ नहीं।

जब आप इस कोरोना वायरस के कुछ आंकड़ों को देखते हैं, हजारों-हजारों-हजारों की तादाद में लोग ठीक भी हुए हैं और कुछ लोगों को कम लक्षण दिखते हैं, काफी कम। कुछ जगह हैं जहां पर लोग मर रहे हैं वह मर रहे हैं हॉस्पिटल्स के ना होने की वजह से और इसलिए क्योंकि सही चिकित्सक उपकरण नहीं है वहां पर। पर, जो भी हो रहा है शायद यह एक तरीका है याद दिलाने का कि हम इंसानों की तरह हमें लौटना है उस कमाल की चीज पर जो कहलाती है "इंसानियत!" हमें दोबारा इंसान बनना है, हमें समझना है कि हम कौन हैं और जरूरतें हमारी क्या हैं ? चाहत नहीं, हमारी जरूरतें। शायद यही एक बढ़िया तरीका है पुरानी चीजों पर लौटने का, उस तक लौटने का जो हमारे भीतर पहले से है।

तो मेरे दोस्तों चाहे जो भी हो बस याद रखिए — “धैर्य रखें; हिम्मत से काम लें!” आपके भीतर कमाल की चीजें हैं वह। अब समय है उसे साझा करने का, उसे बाहर लाने का, समय है खजाना निकालने का और यही है संभावना; यह मौका। तो ख्याल रखिये; सुरक्षित रहिए; सेहतमंद रहिये — और सबसे जरूरी बात खुश रहिये आप सभी!

लॉकडाउन — पांचवा दिन 00:17:09 लॉकडाउन — पांचवा दिन Video Duration : 00:17:09 प्रेम रावत के साथ (हिंदी में अनुवादित)

प्रेम रावत:

सबको नमस्कार! उम्मीद है कि इस ड्रामा और ट्रामा में आप ठीक हैं। मैं हूं प्रेम रावत।

एक और दिन, एक और मौका आपसे बात करने का इस अजीब स्थिति में जहां गलत फैसले, विचार और डर और बाकी सबकुछ यूं ही फैल रहे हैं और फैलते जा रहे हैं और फैलते जा रहे हैं। पर, मैं जो बात करना चाहता हूं इस सबके बीच में वह है स्पष्टता — आपके पास स्वांस के रूप में एक तोहफा है आप जीवित हैं। आप इस सुंदर धरती पर हैं।

सूरज नहीं बदला है वह वही है। हम खबरें सुन रहे हैं “कोरोना वायरस” वही न्यूज़, केंद्रित न्यूज़: “यह गलत है; वह गलत है। यह इस तरीके का नहीं हो रहा; यह उस तरीके से नहीं हो रहा।”

हर रोज संक्रमित लोगों की संख्या बढ़ती रही है और बढ़ती जा रही है और बढ़ती जा रही है और फिर मैं कुछ पढ़ रहा था 'न्यू ऑरलियंस' के बारे में जहां उनके पास मार्डी ग्रास है और सभी लोग बाहर आ गए और अब काफी लोग बीमार हो गए हैं। ऐसे बहुत सारे लोग हैं आज जवान लोग जो कह रहे हैं “कोरोना वायरस होने से फर्क नहीं पड़ेगा मुझे तो बस मजे करने हैं।” और जिस उम्र के लोग बीमार पड़ रहे हैं अमेरिका में वह बहुत-बहुत अलग है। सच मानिये, बाकी जगह के मुकाबले अमेरिका में जवान लोग ही बीमार पड़ रहे हैं। हां! सच है यह!

तो आप सोचते होंगे “हम क्या करने में समर्थ हैं ?” यह आसान-सी बात है आपको दूर रहना है। अगर दूर रहेंगे संक्रमण नहीं लगेगा। आज नहीं तो कल यह बीमारी खत्म होगी आपको बीमार नहीं पड़ना है। आपको बाकियों से दूरी बनानी ही है। बस दूर रहना है सिर्फ इतना। यह लोगों के लिए मुश्किल है बहुत ज्यादा कि वह बाकियों से दूरी बनायें। वह तो बस होना चाहते हैं। “हमें यह भी करना है; हमें वह भी करना है” उनकी ऐसी आदत है। लेकिन उनको आदत पड़ चुकी है और अचानक से ही कुछ होता है और सब जो आपको साधारण लगता है वह साधारण नहीं रहता और आप नहीं कर पाते असल में तो अगर आप करेंगे तो वह आपके लिए बुरा होगा। तो इससे मुझे एक कहानी याद आती है “कौन-सा सच्चा है ?”

तो एक बार काफी समय पहले एक राजा था वह बहुत अमीर था और एक सुंदर राज्य था और सबकुछ अच्छा था और एक दिन उसने एक सपना देखा और उस सपने में उसने देखा कि वह पड़ोसियों से लड़ रहा है और एक जंग चल रही है — यह बहुत-बहुत बड़ी जंग है और अचानक ही वह सबकुछ हार जाता है।

उसे जंग के मैदान से भागना पड़ता है और उसे दूर जाना है जितना दूर हो सके उतना दूर जिंदा रहने के लिए और वह भागता है, भागता है, भागता है, और अंत में एक जंगल में पहुंचता है और उस जंगल के बीच में वह यह बात सोचता है कि वह थक गया है; वह घायल है; वह बहुत देर से भाग रहा था; वह भूखा है। यह अच्छा दृश्य बिल्कुल नहीं है और अचानक से उसे एक झोपड़ी दिखती है वह उस झोपड़ी में जाता है और उसमें वहां एक बूढ़ी महिला है। वह उनके पास जाकर कहता है "क्या आप मुझे कुछ खाने को दे सकती हैं ?"

वह कहती हैं, "देखो तुम्हें देने के लिए ऐसा कुछ भी नहीं है जो पका हुआ हो, पर यह रहे थोड़े-से चावल और यह रही थोड़ी-सी दाल। तुम दोनों को पका लो, खिचड़ी बना लो और भूख मिटा लो अपनी!"

राजा कहता है — धन्यवाद! चावल लेता है, दाल लेता है, एक भगोना लेता है। अब उसे लकड़ियां चाहिए — बारिश की वजह से लकड़ियां गीली हैं और वह आग जलाने की कोशिश करता है उसे बहुत वक्त लगता है। पर, अंत में आग जल जाती है तो, बहुत भूखा है वह। बहुत थका है, परेशान है, उसका राज्य खो गया है मतलब कि सब कुछ उस पर हावी है और बस अंत में चावल बन ही जाते हैं, दाल बन जाती है लेकिन खाने के लिए अभी गर्म है तो वह एक पत्ता ढूंढता है और उस पर दाल और चावल रख लेता है उसे ठंडा होने के लिए। इसी बीच यह दो बैल — जो आपस में लड़ रहे हैं वह उस जगह आ जाते हैं, जहां खाना ठंडा हो रहा है और फिर उसके बाद क्या हुआ ? वह ले लेते हैं उस सबको जो उसने बनाया है और सबकुछ मिट्टी में मिला देते हैं, नष्ट कर देते हैं और यह उसके लिए बहुत ज्यादा हो जाता है।

तो अंत में वह रोने लगता है और आंसू टपकने लगते हैं। वह उठ जाता है। उसका चेहरा गीला है, चेहरे के आंसू उसे उठा देते हैं और वह उठ जाता है। वह आस-पास देखता है और अचानक से वह देखता है वह अपने कमरे में है और उसके पास यह सुंदर मखमल का बिस्तर है और सजे हुए खंभे हैं, दीये और उसके पास सुरक्षाकर्मी — यह सब लोग हैं और वह हैरान हो जाता है यह सपना उसके लिए सच था।

वह वाकई हैरान है और वह उठकर कहता है कि "हे भगवान कौन-सा वाला सपना है कि जंग हारना, जंगल में होना; वह खाना बनाना, क्या वह सपना था — और यह सच है ? या यह दूसरी बात सच है कि यह सब सपना है कि मैं राजा हूं और सब कुछ ठीक है और वह सच था कि मैं जंग में हारा; मैं कोई नहीं हूं; मैं उस स्थिति में फंसा हुआ हूं, वह सच था, वह?"

वह उससे घबरा जाता है तो अगले दिन वह उठकर अपनी सभा में जाता है और उसी समय वह घोषणा करता है। वह कहता है "मैं जानना चाहता हूं, मुझे एक सपना आया और मुझे पता करना है कौन-सा वाला सच था ? यह है सच या वह था सच कि मैं फंसा हुआ हूँ, वह सच था ? या फिर मैं राजा हूँ यह सच है?"

बहुत से लोग (और मैं कहानी को छोटा करता हूं) कि कई लोगों ने कहा कि "हां वह सपना था। यह सच है आप राजा हैं, आप चाहे कुछ भी सोचें।” पर वह संतुष्ट नहीं होता और अंत में यह बच्चा जिसका नाम था — अष्टावक्र, जो असल में (जिसका मतलब है शरीर से अजीब-सा) और वह राजा को बताता है और यह कहता है वह बच्चा (क्योंकि मुझे लगता है थोड़ा बहुत ड्रामा है) वह आया और जब वह आया सबने उसे सभा में आते हुए देखा कि सबको लगा कि क्या यह जवाब देगा ? सभी लोग हंसने लग गए जैसे कि "कैसे हो सकता है कि ऐसा व्यक्ति जो कि ऐसा अजीब-सा है! यह कैसे इस सवाल का जवाब दे सकता है?"

अचानक से उसने राजा को देखा और उसने कहा कि “राजा आपने मुझे इन लोगों के बीच, इनके समक्ष बुलाया है जो मुझे देखकर ही मेरे बारे में कह रहे हैं, मेरी चमड़ी को देखकर (चमड़ी मतलब खाल) यह लोग यही देखते हैं और इन्होंने पहले ही सोच लिया है कि मैं कौन हूं! इन्होंने मुझसे बात भी नहीं कि इन्होंने देखा भी नहीं कि मेरे भीतर क्या है और बस मुझे बाहर से देखकर अंदाजा लगा रहे हैं।”

राजा को एहसास हुआ कि यह कोई आम आदमी नहीं है मतलब आम नहीं है, यह खास है और वह उसे सिंहासन दे देता है यह कहकर कि "यहां पर बैठें।" उसका स्वागत करता है और फिर वह बच्चा कहता है कि "राजा यह सवाल पूछने के बाद कि वो जब आप जंग हार गए थे और आप जंगल में थे, वह एक सपना था राजा।" और आपका सवाल कि "आप राज्य देख सकते हैं; आप देख सकते हैं; महल, बिस्तर; यह देख सकते हैं क्या यह सपना है ?"

बच्चा कहता है “यह भी सपना ही है। सच्चाई इन दोनों से परे है सच्चाई, वह सच्चाई है जो आपके भीतर है उसमें नहीं जो आप देखते हैं पर आप जो समझते हैं यह सब बदल जाएगा।”

इसलिए इन समय में मैं उसी कहानी के बारे में सोच रहा हूं कि जो भी हम समझते हैं वह सब एक सपना है (सच्चाई जैसा ही एक सपना)। यह सपना है दो दीवारों की वजह से — जिस दीवार से हम आए और जिस दीवार में हम गायब हो जाएंगे। उसकी दूसरी तरफ, यही इससे एक सपना बनाता है, सच्चाई जैसा सपना… पर, कई-कई संतों ने अपने-अपने समय में कहा है कि “यह बस एक सपना ही है। क्योंकि एक दिन आप उठेंगे और यह ऐसा नहीं रहेगा। यह कुछ और ही बन जाएगा सब बदलता रहता है, सब बदलता रहता है और बुरे सपने आते हैं और यह होता है और वह होता रहता है तो आप क्या करेंगे ?

अब आपको किसी तरह उस असल सच्चाई तक पहुंचना ही है और वह असल सच्चाई है, वह सच्चाई जो आपके भीतर है। कोई विचार नहीं, कोई बात नहीं और शायद, शायद इस समय में परिस्थिति की वजह से यह कहानी थोड़ी ज्यादा सच्ची लगती है। बाकी साधारण आम दिनों से जहां सब हमारे हिसाब से हो रहा होता है और अब जब हमारे हिसाब से नहीं हो रहा है, पर आपको कहना ही है कि "हां मैं यहां हूँ सबसे जरूरी बात है — यह स्वांस मुझसे अंदर और बाहर जा रही है। मैं हूं! अस्तित्व है! सबसे बड़ा जादू हो रहा है यह। मैं यहां हूं और क्योंकि मैं हूं, क्योंकि मैं जानना चाहता हूं कि मैं कौन हूं! मुझे भीतर जाकर पता लगाना होगा कि यह प्रक्रिया क्या है जानने की, कि मैं कौन हूं! यह सब बदलेगा। चीजें पहले जैसी हो ही जाएंगी।”

वह जीवन जब सब साधारण-सा था। और जब जीवन नीरस हो जाए तो आप खुद से संपर्क में नहीं रहते क्योंकि हर रोज कुछ ना कुछ मजेदार होता ही है। हर एक क्षण मजेदार हो रहा है और आप में आती है वह स्वांस जो मजेदार है और यह आप की सच्चाई है — यह है आप की सच्चाई जो आप देख रहे हैं, जो आप समझ रहे हैं यह ऐसा नहीं है। यह तो नहीं रहेगा ऐसा, यह है इसकी सच्चाई और फिर कुछ ऐसा है जो था और वह ऐसा ही रहेगा। मेरा मतलब अंत में इस धरती और बाकी चीजों का बनना ज्यादा पुराना नहीं है। हम यहां पर तुलनात्मक रूप से हम यहां उतने लंबे समय से नहीं है। हां! हमने काफी तरक्की की है पर, वह तरक्की, वह हमारे लिए क्या करती है ? अचानक से हम देखते हैं कि आम इंसानी जरूरतें और आवश्यकताएं आ गई हैं।

आम बातें साधारण-सी, जो बहुत साधारण-सी हैं और आप इन साधारण बातों से क्या समझते हैं ? क्या आपको यह पसंद है ? क्या आप इनसे मजे ले सकते हैं ? क्या आप हैं, आपका अस्तित्व ? क्या आप में समझ है ? क्या आप आज के लिए कृतज्ञता महसूस करते हैं ? यह ऐसा है कि आप हैरान हैं कि "हे भगवान हमारी यह समस्या है और हमारी वह समस्या है और क्या आपने वह खबर सुनी और यह सब — हां, सब जगे हुए हैं, सब जानते हैं, सब लोग जानते हैं कि यह नकारात्मक खबर है, वह नकारात्मक खबर है! यह समझते हैं आप कि “सब ठीक है”, सब ठीक है। अस्तित्व है, शुक्रगुज़ार रहें, सकारात्मक रहें, सच्चे रहें, सच्चाई को समझें क्योंकि आप एक हिस्सा हैं जो आपके आस-पास चल रहा है। उसके भाग हैं, आप उसके एक हिस्से हैं और जब आप चमक सकते हैं तब अंधकार किनारे हो जाता है और यह बहुत जरूरी है और यह हर रोज जरूरी है।

कोरोना वायरस हो या ना हो, हर एक रोज उस अंधकार को दूर रखना, भ्रान्ति को दूर रखना, स्पष्टता को भीतर आने देना और जीवित होने के लिए हर रोज कृतज्ञता महसूस करना, क्या आसान है ?

हे भगवान! आसान है, बिल्कुल आसान है यह। यह बेहद-बेहद आसान है। फिर भी मुझे पता है कि यह बहुत मुश्किल हो जाता है यह गहन है — पर मुश्किल भी है कि हर एक क्षण उस सच्चाई के साथ आपका रह पाना। तो उस राजा की तरह नहीं जो भ्रमित हो गया था, लेकिन स्पष्टता के साथ आगे बढ़ें हर रोज और उस सुंदर जगह में रहें।

तो मैं जल्द बात करूंगा आपसे। ध्यान रखिये; खुश रहिए और सेहतमंद — आप सभी लोग। नमस्कार!

लॉक डाउन , चौथा दिन 00:18:11 लॉक डाउन , चौथा दिन Video Duration : 00:18:11 प्रेम रावत के साथ (हिंदी में अनुवादित)

प्रेम रावत:

सबको नमस्कार! मैं हूं प्रेम रावत। भरोसा नहीं हो रहा कि इन ब्रॉडकास्ट का चौथा दिन आ गया है। मुझे उम्मीद है कि जो भी हैं आपको अच्छा लग रहा होगा। आज मैं आपसे बात करूंगा “कृतज्ञता के बारे में।”

तो पता है मैं सोचता हूं कि लोग कहेंगे “क्या ? आप कृतज्ञता के बारे में क्यों बता रहे हैं। मेरा मतलब, इसे देखिए जानते हैं यह दुनिया अनिश्चितता, इसका अर्थशास्त्र आपको नहीं पता कि कल क्या होगा। नेता भी नहीं जानते हैं। पूरा देश परेशान है; समाज परेशान है। तो ऐसा क्या है जिसका हम धन्यवाद करें इस वक्त।”

अब इस बात को शुरू करें सबसे पहले कल आपने देखा होगा कि — कल के वीडियो में मैं नहीं दिख रहा था बस पिक्चर्स थीं रुकी हुई। तो क्या हुआ था ?

तो मैंने सोचा मैं कुछ बेहतर करने की कोशिश करूं। और अब (मुझे नहीं पता कि आपको पता भी है) मैं फोन से ही रिकॉर्ड कर रहा हूं — और यहां कोई बड़ा सेटअप नहीं है। बस एक छोटा-सा ट्राइपॉड है, मेरा फोन — पीछे की पिक्चर साफ की है और बस यहां खड़ा हूं कोई रोशनी नहीं है; यह सुबह की रोशनी है बस!

तो क्या हुआ था ? अब यह हुआ था कि यहां फोन के पीछे वाला बेहतर लेंस इस्तेमाल करने के लिए मैंने फोन को घुमा दिया ताकि खुद को ना देख पाऊं — और बिल्कुल जानते हैं इसमें जो भी सॉफ्टवेयर इन्होंने डाला है, यह एक चेहरा पहचान कर नहीं कहता, “ओके मैं यहीं फोकस करूंगा।”

इसे खत्म करके मैंने फुटेज को देखा और यह थी, "वाह! यह क्या हो गया! यह फोकस से बाहर था, अच्छा नहीं था। पर मैंने जो कहा था वह उसी वक्त था, उसी क्षण में था।

फिर पहले तो — पहले मैंने भी वही किया, “हे भगवान, यह बहुत बुरा हुआ! और यह क्यों हुआ और ऐसी ही बातें।” कुछ आएगा और आपको परेशान करेगा जैसे कि “आप कैसे कर सकते हैं।” “यह तो बेवकूफी की बात थी” और ऐसे ही बातें।

और फिर मैंने उसके बारे में सोचा और कहा "देखिए! यह तो हो चुका है आपने कुछ बहुत ही अच्छा कहा है। आपके हृदय से निकला था और इसका लाभ उठाइए।” तो मैंने वह भेज दी — और मैंने कहा, "इसमें बस कुछ पिक्चर लगाकर चला दें” क्योंकि मैं दोबारा नहीं कह पाऊंगा; ऐसा नहीं कि स्क्रिप्ट से पढ़ रहा हूँ; यह सब इसी वक्त कहता हूं मैं।

और यह हमेशा मुझे एक कहानी याद दिलाता है, महाभारत के बाद महाभारत की महाजंग खत्म हुई। कृष्ण बात करने गए अर्जुन के साथ और कहा "मुझे बताओ सब ठीक है!"

तो अर्जुन ने कहा — "जी हां! सबकुछ ठीक है। वनवास में रहने से तो अच्छा ही है जंगल में रहने से, मैं अब महल में हूं और सबकुछ ठीक है।”

और फिर कृष्ण बोले — "तो मैं तुम्हारे लिए कुछ कर सकता हूं ?"

तो अर्जुन ने कहा — "अब असल में वह जो ज्ञान आपने मुझे युद्धभूमि में दिया था, मैं लगभग भूल गया हूं और वह काफी मुश्किल समय था। तो क्या आप मुझे वह सब दोबारा बता सकते हैं ?”

और कृष्ण बोले, “जानते हो! उसी वक्त मेरे मन में आया था वह सब! मुझे नहीं पता अगर मैं वह याद कर पाऊंगा की नहीं” — लेकिन जो भी उन्होंने अर्जुन के लिए उस ज्ञान का एक अंश उन्होंने अर्जुन को बता दिया और वह कहलाती है "अनुगीता” — “छोटी गीता!"

तो ऐसी बात है जैसे कि “मैं इस फुटेज को फेंक दूं ?” या मैंने जो कहा था वह अच्छा था; मेरे हृदय से गया था; बहुत ही शुद्ध था, तो उसी वक्त आया था और मैंने रख लिया उसको। मैं शुक्रगुज़ार हूं कि वह हुआ। मैं खुश नहीं कि मैंने गलती कर दी। और कैमरे से गलती हुई और फोन से भी यह हुआ पर मुझे खुशी है — उस बात पर नहीं जो होनी थी, पर नहीं हुई। पर मैं उसके लिए खुश नहीं हूं, मैं खुश हूं कि हृदय से क्या निकला या जो महसूस किया और आपसे सचेत जीवन की बात कर पाया। क्योंकि “सचेतना से जीना” इसी का नाम है।

सबकुछ देखना जो आसपास है इस दुनिया में है जो भी हो रहा है वह समझना। क्योंकि आप से मतलब है आपके अस्तित्व से वह जुड़ा हुआ है, क्योंकि जो आप देखते हैं, अपनी आंखों से देखते हैं, जो देखते हैं अपने दृष्टिकोण से देखते हैं जो भी आपके साथ हुआ है वह सबकुछ आपके नज़रिये का हिस्सा बन जाता है।

अब कोई हमेशा पहाड़ ही देखता हो, तो वह पहाड़ को देखकर ज्यादा खुश नहीं होंगे। कोई ऐसा जो पहाड़ नहीं देखता हो, वह समुद्र के किनारे रहता हो वह पहाड़ को देखकर बहुत खुश होते हैं, जैसे कि "वाह! देखो यह पहाड़ है वहां पर!" और इसके विपरीत कोई ऐसा जो समुद्र के पास रहता है और वह कहता है कि "अच्छा यह रहा समुद्र!" और कोई जो समुद्र के पास नहीं रहता है या फिर वह रेगिस्तान में रहता है और वह समुद्र देखे तो कहे, वाह! यह देखो समुद्र!"

सबका अलग नज़रिया होता है। हर कोई बात को समझने में बिलकुल अलग होता है और इसलिए यह जीवन एक जैसा नहीं होता। यह बहुत-बहुत भिन्न है। आप कैसे समझते हैं, आप कैसे देखते हैं!

तो आसान है जैसे कि — एक बार मैं जेल गया था और यह ऑस्ट्रेलिया में था, वॉल्सटन जेल में और वहां के कैदी उनमें से एक, जब सवाल-जवाब का वक्त आया तो उसने कहा कि "आपको कैसे पता आप तो जेल में रहते नहीं हैं। आप क्या जानते हैं इसके बारे में!"

और उसके बारे में मैं काफी सोचता हूं और जैसे कि “हां जीवन में उसका नज़रिया, आजादी क्या है इन सभी बातों के साथ मुझसे बिल्कुल अलग होगा।” पर ऐसा ही है और मैं सबकुछ एक जैसा करने की कोशिश नहीं कर रहा। मैं नहीं कहता यह सब ऐसा होना चाहिए, जो तज़ुर्बा आपको जीवन में मिला है वैसा ही बाकियों को मिलेगा। नहीं! वह अलग होगा और इसलिए क्योंकि वह अलग है। कृतज्ञता भी अलग होगी सबके लिए हर व्यक्ति का धन्यवाद देने का तरीका अलग ही होगा — क्योंकि तज़ुर्बा अलग-अलग है।

तो अगर आप सचेत जीवन जीते हैं, आपको खुद को जानने का महत्व पता चल जाएगा और फिर जब खुद को जान जाएंगे और जीवन सचेत ढंग से जीयेंगे सबकुछ अलग होगा। आपकी कृतज्ञता अलग होगी, क्योंकि अब आप उसे अलग ढंग से देखते हैं। आप उसे पहले की भांति नहीं देख रहे और वह कृतज्ञता एक फल की तरह है जो एक अच्छा पेड़ उसे उगाता है। सचेत जीवन एक फूल की तरह है और आपका अस्तित्व एक सुंदर से पेड़ की तरह है — और यह फलता है और फिर जब सचेत जीवन जीयेंगे आप एक उद्देश्य पूरा कर पाएंगे और अपने आपको जानने का उद्देश्य पूरा होगा और जब आप खुद को जानेंगे बहुत ज्यादा कृतज्ञता आएगी और वही है फल और फिर आप फल को साझा करेंगे। आप कृतज्ञता साझा करेंगे आप जिसके लिए कृतज्ञ हैं!

तो क्या आप कोरोना वायरस के लिए शुक्रगुज़ार हैं — मुझे नहीं लगता, मुझे नहीं लगता कोई भी इसके लिए धन्यवाद दे रहा है। पर, आप किसी और चीज के लिए कृतज्ञ हो सकते हैं — और वह है कि आपके पास मौका है, आपके पास एक संभावना है, सोचने की, समझने की, बताने की, महसूस करने, और देखने की।

और देखिए — यही जरूरी है कि आप यह कर सकते हैं और यह कृतज्ञता कितनी ज्यादा जरूरी है ? क्योंकि देखिए “कृतज्ञता” का क्या मतलब होता है — कृतज्ञता का मतलब आप उस फल को लेते हैं। आपका हृदय भरा हुआ है। आप अभिव्यक्त करते हैं; महसूस कर सकते हैं; आप समझ सकते हैं और इसलिए कृतज्ञता इतनी अहम है, क्योंकि कृतज्ञता के बिना कृतज्ञता सेहत मापने का एक तरीका है। अगर आप देखें, अगर आप वह फल लेते हैं — "वाह! अच्छा है, बहुत अच्छा।” सेहतमंद हो जाएंगे। और अगर नहीं तो कुछ कमी हो गई है कुछ ठीक नहीं है; शायद सराहना नहीं है। यहां पर शायद समझते नहीं खुद को जानने का मतलब। शायद आप खुद को नहीं जानते — और खुद को जानने की अहमियत क्योंकि मैं देख सकता हूं कि घर पर बंद होने से और आप बाहर नहीं जा रहे दूसरों से दूर हैं क्यों और हम “सामाजिक जंतु” तो हैं ही। ओके! आप टीवी देख सकते हैं, आप एक हद तक ही देख सकते हैं। लेकिन अभी या बाद में यहां होंगे बस आप और आप ही — सिर्फ आप!

मैं टीवी को देख रहा था, जब किसी ने कहा कि "ओह! एक व्यक्ति था एक देश के अंदर और उसे जेल में डाल दिया, बीवी बच्चों के साथ और वह भी तीन दिनों के लिए और चौथे दिन वह भाग गया।" वह यह झेल नहीं पाया। पर, जब आप झेल नहीं पाते, सच में वह झेल नहीं सकते जो सच में आपके ही अंदर है, वरना अगर खुद से खुश हैं आप संतुष्ट हो सकते हैं काफी हद तक किसी भी स्थिति में। लेकिन जब खुद से संतुष्ट नहीं होते फर्क़ नहीं पड़ता कि किस परिस्थिति में हैं!

आप असंतुष्टि में ही रहेंगे और खुद को जानना बस इतना ही है। जीवन को सचेतना से जीना जरूरी है, क्योंकि देख पायें, आप सोच पायें तोहफे को समझना; तोहफे को लेना जो आपको मिला है यही तो है सचेत जीवन में — जैसे मैं बोलता हूं पर हां, जो भी, आपके भीतर जो भी है, वह लें ताकि अस्तित्व बड़ा हो सके “जिंदा रहने में।”

और अगर आप यह कर पाते हैं, तो “वाह!” आप सच में समझ लेंगे कि मतलब क्या है इस सबका, इस सबका — आप देखिए कभी-कभी “यह अच्छे फोटोग्राफर हैं” और यह व्यक्ति अच्छा फोटोग्राफर क्यों है ? क्योंकि जो भी होता है वह उसे असल में पकड़ लेते हैं। वह असल में कहानी को दिखा पाते हैं। क्या आपने अपनी कहानी बना ली ? क्या आपने अस्तित्व को थाम लिया ? क्या आप यहां होने का मतलब समझ पाए ? और शायद हर रोज के काम में सभी चीजें जो जीवन में चलती हैं हम सब नहीं समझ पाते। क्योंकि हम ऐसे सोचने में व्यस्त हैं, लेकिन आपके पास एक मौका है उन सभी व्यस्त रखने वाली बातों को ना करने का और बस कुछ और करने का। इसके विपरीत कुछ सोचने का वक्त, जानने का, ध्यान लगाने का, समझने का और इस अस्तित्व की अहमियत को समझना; जीवन में खुशी की अहमियत को जानना; जीवन में स्पष्टता होने की अहमियत को समझना; एक भरा हुआ हृदय होने की अहमियत; जीवन में शांति होने की अहमियत; वह भावना होने की अहमियत जिसमें लगे कि आप पूर्ण हो गए हैं। हर वह पल जब आप जीवित हैं आप उसका पूरा लाभ उठा रहे हैं — इस तोहफे का लाभ! और यह — जब सबकुछ साथ में आता है, जब सारी उलझन खत्म होती है छोटे-छोटे तरीके से जब साथ आते हैं फिर आती है कृतज्ञता और यह बात कि आप अस्तित्व के लिए धन्यवाद दें कि आप जीवन के लिए धन्यवाद कहें — वाह! कितनी अच्छी है इससे बेहतर और क्या हो सकता है ? हर एक दिन जो आता है उसके लिए धन्यवाद देना! इससे बेहतर क्या हो सकता है ? हर घंटे के लिए आप शुक्रगुजार हों! इससे बेहतर और क्या हो सकता है! हर स्वांस के साथ ताकि आप पूर्ण होना महसूस कर सकें, भरे हुए, इससे बेहतर क्या हो सकता है ?

तो मैं और कुछ नहीं सोच सकता जो इससे बेहतर हो, क्योंकि वह करिश्मा, सराहना वह और बढ़ जाती है। महानता, सराहना के बिना छुपी हुई रहती है, अधूरी रहती है और हालांकि यह सुंदर है, हालांकि यह कमाल की है यह हमेशा रहेगी। हर सितारा, रेत का हर टुकड़ा, इस दुनिया में सब कुछ, हर रोज सूरज का चमकना, बादल आते हैं; बारिश आती है। सूरज की रोशनी होती है; गर्मी आती है; सर्दी जाती है; सर्दी आती है। फिर पतझड़, सभी मौसम, सबकुछ और फिर — आपके मौसम, आप समझें कि आप में बहुत कुछ है; समझिये कि आप में भी एक ब्रह्मांड है। आप ब्रह्मांड की सराहना करें। आप ब्रह्मांड को देखकर, सितारों को देखकर, आप चांद को देखते हैं, आप सूरज को देखते हैं और आप अपने सूरज को देखते हैं। हृदय की रोशनी को भी अपने चांद को देखते हैं, अपने सितारों को देखते हैं, अपना ब्रह्मांड देखते हैं।

आप देखिए! वह खुशी जो हृदय में नाचती है, वह संगीत जो भीतर चलता रहता है; वह नृत्य जो आप में चलता है; वह खेल जो भीतर चलता है; वह पिक्चर जो चलती है, जिसमें आप ही सितारे हैं — वाह!

जैसा कि बाहर है और हमारे पास कैमरा है और साथ ही स्टीरियो उपकरण है और हम सबकुछ रख लेना चाहते हैं। यह कमाल की रिकॉर्डिंग है और हम सुनना चाहते हैं उसे फिर से और फिर से…

पर, फिर भी आप ही अपना कैमरा हैं, आप भीतर के ब्रह्मांड का इकलौता कैमरा हैं। और अगर आप समझ पाएं, अगर आप सराहना करें फिर कृतज्ञता आएगी। जैसे कि आप सुंदर संगीत सुनते हैं और नृत्य करना चाहते हैं और उसे पसंद करते हैं आप हंसते हैं, उसमें खो जाते हैं और अच्छा महसूस करते हैं — तो जब आप अंदरूनी ब्रह्मांड को समझेंगे तो ऐसा ही होगा। यही तो है कृतज्ञता — यह वहां सब जीवित हो जाता है। और मैं कहता जाऊंगा शायद लेकिन मुद्दा है कि अगर आपने तज़ुर्बा किया है; अगर आपने कभी भी तज़ुर्बा किया है, चाहे छोटा ही सही फिर आप जानते हैं मैं क्या कह रहा हूं! अगर नहीं किया तो यह समझ नहीं आएगा — फिर इस बात का कोई मतलब नहीं है।

जो भी, मुझे उम्मीद है आपने premrawat.com पर सवाल भेजे हैं — और बिल्कुल अगर आप टाइमलेस टुडे पर सवाल भेजना चाहें। वह भी ठीक है, वह मुझे मिल जाएंगे।

तो मुझे उन सवालों का इंतजार है। कई ऐसे सवाल हैं जो मुझे भेजे जा चुके हैं, लेकिन मैंने सोचा दोबारा, यह अनोखा समय है और इस परिस्थिति में लोगों के अलग-अलग सवाल हो सकते हैं, तो मैं अपनी पूरी क्षमता के हिसाब से उनका जवाब देना चाहता हूं।

तो सबसे अहम बात जो होगी दोस्तों कि, सेहतमंद रहें — आराम से रहें और सुरक्षित यह सबसे जरूरी है! जी हां!

तो बहुत-बहुत धन्यवाद — आपसे फिर मिलूंगा!

लॉकडाउन 57 00:16:27 लॉकडाउन 57 Video Duration : 00:16:27 पीस एजुकेशन प्रोग्राम की ओर अग्रसर (21 मई, 2020)

प्रेम रावत:

तो जो बात मैं कहना चाहता हूं कि यहां आप इस जेल में हैं और मैं कई जेलों में जाता हूं अपनी बात कहने के लिए और मेरे को अच्छी तरीके से मालूम है कि आप लोगों के ध्यान में सबेरे से लेकर शाम तक एक ही बात रहती है — और वो यह है कि ‘‘यहां से कैसे निकलें ?"

क्यों, मैं ठीक कह रहा हूं ? शर्माइए नहीं आप! मेरे को मालूम है। पर इस जेल से निकलने में मैं आपकी मदद नहीं कर सकता, पर एक और जेल है, जिसमें सभी लोग बंद हैं। और वो जेल ऐसी है कि इससे भी खतरनाक। यहां से एक दिन न एक दिन तो आपको जाना है, पर एक ऐसी जेल है, जिसके ताले इतने बड़े हैं कि उनको खोलना बहुत मुश्किल है। और उस जेल से — वो, जो दूसरी जेल है, उससे मैं आपको बाहर निकाल सकता हूं। और यही मैं करता हूं। और उस जेल में सब बंद हैं। जो अपने को स्वतंत्र भी समझते हैं, वो भी उस जेल में बंद हैं। और वो क्या जेल है ? वो ऐसी जेल है, जिसमें मनुष्य अपनी अच्छाई को नहीं, पर अपनी बुराई को आगे लेता है। शांति को नहीं, वो अशांति का साथ देता है। प्रकाश का नहीं, वो अंधेरे का साथ देता है। और इसी वजह से जहां भी आप देख लो, इस संसार के अंदर हाहाकार मची हुई है। जहां भी आप देख लो, इस संसार के अंदर लोग एक-दूसरे को मारने के लिए तैयार हैं। आखिर होगा क्या ? एक तरफ हमको यह मनुष्य शरीर मिला है। एक तरफ हमको यह मनुष्य शरीर मिला है और यह क्या है ?

घट घट मोरा सांइयां, सूनी सेज न कोय।

बलिहारी उस घट की, जिस घट परगट होय।।

ऐसा कोई व्यक्ति नहीं है, ऐसा कोई व्यक्ति नहीं है, जिसके घट में वो सांई न बसा हो! ऐसा कोई व्यक्ति नहीं है इस संसार के अंदर! बस, इतनी बात है कि — बलिहारी उस घट की, जिस घट में उस सांई को प्रगट होने का मौका मिला है।

आपने अपने जीवन में — या कोई भी हो यहां। ऐसा आप क्या करते हैं एक दिन में, ऐसा आप क्या करते हैं अपने जीवन में, जिससे वो अच्छाई, वो सच्चाई जो आपके अंदर व्यापक है, वो बाहर उभरकर के आए ?

भीखा भूखा कोई नहीं, सबकी गठरी लाल।

गठरी खोलना भूल गए, इस विधि भए कंगाल।।

कितने लोग हैं यहां, जो अपनी तकदीर को कोसते हैं ? ‘‘क्या हो गया मेरे साथ ?’’ जेल में ही नहीं, जेल से बाहर भी बहुत हैं, जो अपनी तकदीर को दोष दे रहे हैं कि ‘‘मेरे साथ क्या हो रहा है ?’’ अपने को अभागा महसूस करते हैं। कोई ऐसा नहीं है, जो अपने को अभागा महसूस न करता हो। चाहे थोड़े ही क्षण के लिए करता हो, पर अपने को अभागा महसूस करता है। बच्चा फेल हो जाता है। उसके मां-बाप उसको कोसते हैं और वह अपने को अभागा मानना शुरू कर देता है। किसी की नौकरी निकल जाती है, वह अपने भाग्य को कोसता है। किसी से गलती हो जाती है, वह अपने भाग्य को कोसता है। और एक तरफ तो यह बात है कि मनुष्य अपने भाग्य को कोस रहा है और दूसरी तरफ कबीरदास जी कहते हैं कि —

भीखा भूखा कोई नहीं, सबकी गठरी लाल।

गठरी खोलना भूल गए, इस विधि भए कंगाल।।

किस गठरी की बात हो रही है ? क्या भूल गए हम ऐसी चीज ?

तो सबसे पहले क्या भूल जाते हैं हम कि हम मनुष्य हैं।

तुम जब इस संसार के अंदर आए तो कैसे आए ? तुम किसी भी धर्म के हो, तुमने अपने जीवन में कुछ भी किया हो, पर आए कैसे इस संसार के अंदर ? पहली स्वांस — पहली स्वांस जो तुमने ली, वो क्या ली ? बाहर से अंदर! पहली जो स्वांस तुमने ली, वो ली, बाहर से अंदर! और जब तुम इस दुनिया से जाओगे, जो तुम्हारी आखिरी स्वांस होगी, वो क्या होगी ? अंदर से बाहर! अंदर से बाहर! बाहर से अंदर नहीं, अंदर से बाहर! आए कैसे थे ? अंदर से बाहर नहीं, बाहर से अंदर वो स्वांस ली और जब जाओगे तो जो अंदर से बाहर आएगी, वो तुम्हारी आखिरी स्वांस होगी।

जब तुम आए थे संसार के अंदर, किसी ने — एक समय था, जिसमें किसी ने ये नहीं पूछा — तुम लड़का हो, लड़की हो, सिर्फ एक ध्यान था — स्वांस ले रहे हो या नहीं ले रहे हो ? सिर्फ! उसके बाद — लड़का है, लड़की है। ये है, वो है! स्वांस ले रहे हो या नहीं ले रहे हो। और जब तुम्हारा अंतिम समय आएगा तो डॉक्टर क्या देखेगा ? स्वांस ले रहे हो या नहीं ले रहे हो ? कभी ख्याल गया है इसके ऊपर ? कभी ख्याल गया है इसके ऊपर ? नहीं। अपनी समस्याओं का हल ढूंढ़ना है। मेरी क्या समस्या है ? ‘‘आज यह समस्या है। आज यह समस्या है। आज यह समस्या है, आज यह समस्या है। मेरे साथ यह बुरा हुआ, मेरे साथ यह बुरा हुआ, मेरे साथ यह बुरा हुआ। अब मैं यह कैसे करूंगा ? अब मैं यह कैसे करूंगा ? अब मैं यह कैसे करूंगा ?’’ और यह जो स्वांस आ रहा है, जा रहा है, इसके ऊपर एक सेकेंड का ध्यान नहीं है। और इसके बिना तुम हो क्या ?

यह जो जीवन मिला है, आज जो तुम जीवित हो, इसका क्या मायने है तुम्हारे जीवन के अंदर ? आज जो तुम जीवित हो! फिर मैं एक कबीरदास जी का भजन है, मुझे बहुत अच्छा लगता है यह भजन। और आप ने हो सकता है, सुना हो कि —

पानी में मीन पियासी, मोहे सुन सुन आवे हाँसी।

मीन का मतलब है — मछली! पानी का मतलब तो आप लोग जानते हैं।

पानी में मीन पियासी, मोहे सुन सुन आवे हाँसी।

वो मीन है कौन ? वो मीन तुम हो! हम सब लोग हैं वो मीन। वो मछली, जो पानी में रहते हुए भी प्यासी है। पानी में रहते हुए भी प्यासी है और कबीरदास जी कहते हैं — यह सुनकर के मेरे को हँसी आती है।

आतमज्ञान बिना नर भटके, क्या मथुरा क्या काशी।

आतमज्ञान बिना नर भटके, क्या मथुरा क्या काशी।।

मृग नाभि में है कस्तूरी, बन बन फिरै उदासी।।

सुनिए बात! आत्मज्ञान! अब जिसने अपने आपको नहीं समझा, वो भाग रहा है। कुछ कर रहा है, कुछ कर रहा है, कुछ कर रहा है!

क्या मथुरा, क्या काशी। मृग नाभि में है कस्तूरी

उस कस्तूरी को वो खोज रहा है।

मृग नाभि में है कस्तूरी!

सबसे बड़ी बात क्या ? बन-बन — हर एक-एक वन से लेकर, एक जंगल से लेकर दूसरे जंगल तक। बन बन फिरै — कैसे ? उदासी! उदास होकर के! यही नहीं बात है कि वो खोज रहा है। नहीं! वो उदास भी है, क्योंकि जिस चीज को वो खोज रहा है, वो मिल नहीं रही है। वो मिल नहीं रही है। और जब मनुष्य अपने आपको नहीं समझता है — जब मनुष्य अपने आपको नहीं समझता है तो वो भी इस संसार में रहते हुए भी उदास है, क्योंकि जो है उसके पास, वो नहीं जानता है कि वो कहां है, क्या है ?

जल बिच कमल, कमल बिच कलियां, जा में भंवर लुभासी।

तालाब के बीच में कमल का फूल, उसमें कलियां होती हैं।

जल बिच कमल, कमल बिच कलियां, जा में भंवर लुभासी।

उसमें भौरें घूमते रहते हैं उस कमल के आसपास — भौं, भौं, भौं, भौं! भौं, भौं, भौं, भौं करके!

सो मन बस तिरलोक भयो सब, यती सती संन्यासी।।

जैसे वो भौरें कमल के फूल के पास घूमते रहते हैं, भँवरते रहते हैं, वैसे ही तुम्हारा मन तीनों लोकों में जाता रहता है, भ्रमण करता रहता है — कभी कहीं, कभी कहीं, कभी कहीं, कभी कहीं।

कभी कहीं भाग रहा है, कभी कहीं भाग रहा है, कभी कहीं भाग रहा है, कभी कहीं भाग रहा है। तो —

विधि, हरि, हर जाको ध्यान करत हैं, मुनिजन सहस अठासी।

सब मुनिजन जिसका ध्यान करते हैं। ब्रह्मा, विष्णु और महेश भी जिसका ध्यान करते हैं। यह बात पहले कभी नहीं सुनी होगी आपने। जिसका सब ध्यान करते हैं — ब्रह्मा, विष्णु, महेश।

.....मुनिजन सहस अट्ठासी।

सोई हंस तेरे घट माहीं —

सोई हंस तेरे घट माहीं, अलख पुरुष अविनाशी।।

ये क्या कह दिया ? जिसका ध्यान ब्रह्मा, विष्णु और महेश भी करते हैं, जो अलख पुरुष है, जो अविनाशी है, वो तुम्हारे घट में विराजमान है। कबीरदास जी तो यही कह रहे हैं।

सोई हंस तेरे घट माहीं, अलख पुरुष अविनाशी।।

समझे आप इस बात को ? मतलब, वो कह रहे हैं कि वो जो चीज है, जिसका सब ध्यान करते हैं, वो जो अलख पुरुष है, वो — जिसका सब ध्यान करते हैं, वो आपके घट में मौजूद है। आपके अंदर मौजूद है। समझ में आई बात ?

तो आप अपने को अभागा समझते हैं ? मैं पूछता हूं, जिसके अंदर वो विराजमान है — जबतक आप जीवित हैं, जिसके अंदर वो विराजमान है, आपको कमी किस चीज की है ? पर नहीं जानते न ? नहीं जानते हैं उसको ? नहीं जानते इस स्वांस की कीमत ? नहीं जानते कि क्या मिला है ? नहीं जानते कि यह मनुष्य शरीर जो मिला है, इसका सच में सदुपयोग कैसे किया जाए, क्योंकि यह कितनी सुंदर चीज है।

अगर जो बात मैं कह रहा हूं, यह समझे कि जो हो गया, सो हो गया, पर आगे क्या करना है ? यह आपके ऊपर निर्भर है। आप स्वर्ग बना सकते हैं या नरक बना सकते हैं। यह बात सिर्फ जेल की नहीं है। यह बात तो परिवार की भी है। परिवार में माता, बहन, पति, बेटे, बच्चे, जो कुछ भी हैं, ये भी नरक बना सकते हैं, वो भी स्वर्ग बना सकते हैं। अगर हम चाहें तो सारे संसार के अंदर स्वर्ग स्थापित कर सकते हैं। तो यही मैं आपसे कहना चाहता था। मेरे को आशा है कि आप कम से कम इस बात पर विचार करेंगे और अपने जीवन को सफल करेंगे।

Log In / Create Account




TimelessToday

Log In or Create an Account



OR




Accounts created using Phone Number or
Email Address are separate. 
Account Information




  • You can create a TimelessToday account with either your Phone Number or your Email Address. Please Note: these are separate and cannot be used interchangeably!

  • Subscription purchase requires that you are logged in with a TimelessToday account.

  • If you purchase a subscription, it will only be linked to the Phone Number or Email Address that was used to log in at the time of Subscription purchase.

Please enter the first name. Please enter the last name. Please enter an email address. Please enter a valid email address. Please enter a password. Passwords must be at least 6 characters. Please Re Enter the password. Password and Confirm Password should be same. Please agree to the privacy policy to continue. Please enter the full name. Show Hide Please enter a Phone Number Invalid Code, please try again Failed to send SMS. Please try again Please enter your name Please enter your name Unable to save additional details. Can't check if user is already registered Please enter a password Invalid password, please try again Can't check if you have free subscription Can't activate FREE premium subscription Resend code in 00:30 seconds
Activate Account

You're Almost Done

ACTIVATE YOUR ACCOUNT

You should receive an email within the next hour.
Click on the link in the email to activate your account.

You won’t be able to log in or purchase a subscription unless you activate it.

Can't find the email?
Please check your Spam or Junk folder.
If you use Gmail, check under Promotions.

Activate Account

Your account linked with johndoe@gmail.com is not Active.

Activate it from the account activation email we sent you.

Can't find the email?
Please check your Spam or Junk folder.
If you use Gmail, check under Promotions.

OR

Get a new account activation email now

Need Help? Contact Customer Care

Activate Account

Account activation email sent to johndoe@gmail.com

ACTIVATE YOUR ACCOUNT

You should receive an email within the next hour.
Click on the link in the email to activate your account.

Once you have activated your account you can continue to log in

You haven't marked anything as a favorite so far. Please select a product Please select a play list Failed to add the product. Please refresh the page and try one more time.