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News 24 के साथ संवाद (वीडियो) 00:30:04 News 24 के साथ संवाद (वीडियो) Video Duration : 00:30:04 ऐसी शांति, जो निजी शांति हो, जो उसके जीवन के अंदर हो, चाहे वो किसी भी धर्म का हो...

एक झलक

ऐंकर : यही चीजें आपको औरों से अलग बनाती हैं। आपकी जो मुझे कैटेगरी नजर आती है, जिस तरीके से मैंने आपको सुना — यूट्यूब पर भी सुना और साक्षात् सुनकर आया मैं, तो औरों से अलग हैं आप। तो कैसे आप अपने आपको अलग मानते हैं उन सबसे ?

प्रेम रावत जी : देखिए! एक तो मैं अपने आपको मनुष्य मानता हूं।

ऐंकर : जी!

प्रेम रावत जी : और मनुष्य होने के नाते मुझे इसमें गर्व है। और लोगों को जो देखता हूं, वो समझते हैं कि मनुष्य सबसे नीचे है। मैं समझता हूं कि मनुष्य सबसे ऊपर है।

ऐंकर : बहुत अच्छे!

प्रेम रावत जी : तो यह बात अलग है। तो लोग कहते हैं कि "हमको पूजो"!

हम कहते हैं, "नहीं, तुम अपने आपको पूजना शुरू करो! जो तुम्हारे अंदर है, उसको पूजना शुरू करो!"

लोग कहते हैं, "हमको आशीर्वाद दीजिए!"

मैंने कहा कि "जिसका आशीर्वाद तुम्हारे सिर पर है, तुम चाहते हो कि मैं उसका हाथ हटाकर के अपना हाथ रखूं ? मेरे में, तुम में कोई अंतर नहीं है। मेरे को भी दुःख होता है, तुमको भी दुःख होता है। इसीलिए मैं तुमसे बात कर सकता हूं। क्योंकि मेरा अनुभव है कि मनुष्य होने के नाते हम उस चीज का भी अनुभव कर सकते हैं, जो हमारे जीवन में शांति लाए और उस चीज का भी अनुभव कर सकते हैं, जो अशांति लाए।"

News 24 के साथ संवाद 00:30:04 News 24 के साथ संवाद Video Duration : 00:30:04 ऐसी शांति, जो निजी शांति हो, जो उसके जीवन के अंदर हो, चाहे वो किसी भी धर्म का हो...

एक झलक

ऐंकर : यही चीजें आपको औरों से अलग बनाती हैं। आपकी जो मुझे कैटेगरी नजर आती है, जिस तरीके से मैंने आपको सुना — यूट्यूब पर भी सुना और साक्षात् सुनकर आया मैं, तो औरों से अलग हैं आप। तो कैसे आप अपने आपको अलग मानते हैं उन सबसे ?

प्रेम रावत जी : देखिए! एक तो मैं अपने आपको मनुष्य मानता हूं।

ऐंकर : जी!

प्रेम रावत जी : और मनुष्य होने के नाते मुझे इसमें गर्व है। और लोगों को जो देखता हूं, वो समझते हैं कि मनुष्य सबसे नीचे है। मैं समझता हूं कि मनुष्य सबसे ऊपर है।

ऐंकर : बहुत अच्छे!

प्रेम रावत जी : तो यह बात अलग है। तो लोग कहते हैं कि "हमको पूजो"!

हम कहते हैं, "नहीं, तुम अपने आपको पूजना शुरू करो! जो तुम्हारे अंदर है, उसको पूजना शुरू करो!"

लोग कहते हैं, "हमको आशीर्वाद दीजिए!"

मैंने कहा कि "जिसका आशीर्वाद तुम्हारे सिर पर है, तुम चाहते हो कि मैं उसका हाथ हटाकर के अपना हाथ रखूं ? मेरे में, तुम में कोई अंतर नहीं है। मेरे को भी दुःख होता है, तुमको भी दुःख होता है। इसीलिए मैं तुमसे बात कर सकता हूं। क्योंकि मेरा अनुभव है कि मनुष्य होने के नाते हम उस चीज का भी अनुभव कर सकते हैं, जो हमारे जीवन में शांति लाए और उस चीज का भी अनुभव कर सकते हैं, जो अशांति लाए।"

संवाद: 94.3 रेडियो वन के साथ 00:29:58 संवाद: 94.3 रेडियो वन के साथ Video Duration : 00:29:58 जीवन में हृदय का भी मुनाफा हो — आनंद का, सुख का, चैन का और शांति का!

ऐंकर मीनल : प्रेम जी! मुझे बताइए! एक इंसान अपनी जिंदगी में पीस कैसे प्राप्त कर सकता है ?

प्रेम रावत जी : सबसे बड़ी बात यही है कि हम जब शांति के बारे में सोचते हैं तो हम यही सोचते हैं कि कहीं और से आएगी हमको प्राप्त करना है।

ऐंकर मीनल : जी!

प्रेम रावत जी : सबसे बड़ी बात तो यह है और यही लोगों को बड़ी अचम्भे की बात भी लगती है, जब मैं लोगों से ये कहता हूं कि शांति तो पहले से ही आपके अंदर है। आपको कहीं खोजने की जरूरत नहीं है। आपको अपने आपको पहचानने की जरूरत है कि आप हैं कौन ?

"सॉक्रटीज़ ने कहा था कि — Know thyself." आज उसका मायने क्या है ?

आज मनुष्य हर एक चीज को जानने की कोशिश करता है, पर अपने आपको जानने की कोशिश नहीं कर रहा है। उसके सर्कल में बहुत सारे फ्रैण्ड्स हैं, ट्विटर में हैं, फेसबुक में हैं, व्हाट्सअप में हैं, परंतु उसमें क्या ऐसा भी कुछ है कि जिसमें वो इन्क्लुडेड है ? और अपने आपको समझने की कोशिश कर रहा है, अपने आपको जानने की कोशिश कर रहा है। अगर मनुष्य अपने आपको जानने की कोशिश करे तो उसको शांति अपने ही अंदर मिलेगी।

संवाद: 94.3 रेडियो वन के साथ 00:29:58 संवाद: 94.3 रेडियो वन के साथ Audio Duration : 00:29:58 जीवन में हृदय का भी मुनाफा हो — आनंद का, सुख का, चैन का और शांति का!

ऐंकर मीनल : प्रेम जी! मुझे बताइए! एक इंसान अपनी जिंदगी में पीस कैसे प्राप्त कर सकता है ?

प्रेम रावत जी : सबसे बड़ी बात यही है कि हम जब शांति के बारे में सोचते हैं तो हम यही सोचते हैं कि कहीं और से आएगी हमको प्राप्त करना है।

ऐंकर मीनल : जी!

प्रेम रावत जी : सबसे बड़ी बात तो यह है और यही लोगों को बड़ी अचम्भे की बात भी लगती है, जब मैं लोगों से ये कहता हूं कि शांति तो पहले से ही आपके अंदर है। आपको कहीं खोजने की जरूरत नहीं है। आपको अपने आपको पहचानने की जरूरत है कि आप हैं कौन ?

"सॉक्रटीज़ ने कहा था कि — Know thyself." आज उसका मायने क्या है ?

आज मनुष्य हर एक चीज को जानने की कोशिश करता है, पर अपने आपको जानने की कोशिश नहीं कर रहा है। उसके सर्कल में बहुत सारे फ्रैण्ड्स हैं, ट्विटर में हैं, फेसबुक में हैं, व्हाट्सअप में हैं, परंतु उसमें क्या ऐसा भी कुछ है कि जिसमें वो इन्क्लुडेड है ? और अपने आपको समझने की कोशिश कर रहा है, अपने आपको जानने की कोशिश कर रहा है। अगर मनुष्य अपने आपको जानने की कोशिश करे तो उसको शांति अपने ही अंदर मिलेगी।

ई. टी. वी. रांची - इंटरव्यू (E.T.V. Interview) वीडियो 00:45:27 ई. टी. वी. रांची - इंटरव्यू (E.T.V. Interview) वीडियो Video Duration : 00:45:27 अपने आपको जानो! अगर आप अपने आपको नहीं जानते हैं तो यह समझिए कि आपके पास नक्शा है...

ऐंकर : तो ये आपको हजारों लोग, लाखों लोग सुनने आते हैं और आप उनको शांति का, प्रेम का, मानवता का संदेश दे रहे हैं। क्या कुछ ऐसे उदाहरण आप हमारे सामने रख सकते हैं कि आपकी बात से, आपकी सोच के कारण कई लोगों के जीवन में बदलाव आया ?

प्रेम रावत जी : देखिए! मैं अपनी प्रशंसा अपने मुंह से नहीं करना चाहता हूं। पर मैं आपको एक बात बताता हूं, जो मैंने देखा है कि बहुत सारे जेलों में हमारे वीडियोज़ जाते हैं और ‘पीस एजुकेशन प्रोग्राम’ एक हमारा है, जो कि जेलों में दिखाया जाता है। 

ऐंकर : अच्छा!

प्रेम रावत जी : अब ये क्यों ?

ऐंकर : जी!

प्रेम रावत जी : हम धर्म की बात नहीं करते हैं। हम कर्म की बात नहीं करते हैं। हम विचारने की बात करते हैं, क्योंकि एक बार आप सोचें, फिर क्या करना है, ये आप अपने जीवन में निर्णय ले सकेंगे और सही निर्णय ले सकेंगे।

ई. टी. वी. रांची इंटरव्यू (E.T.V. Interview) ऑडियो 00:45:27 ई. टी. वी. रांची इंटरव्यू (E.T.V. Interview) ऑडियो Audio Duration : 00:45:27 अपने आपको जानो! अगर आप अपने आपको नहीं जानते हैं तो यह समझिए कि आपके पास नक्शा है...

ऐंकर : तो ये आपको हजारों लोग, लाखों लोग सुनने आते हैं और आप उनको शांति का, प्रेम का, मानवता का संदेश दे रहे हैं। क्या कुछ ऐसे उदाहरण आप हमारे सामने रख सकते हैं कि आपकी बात से, आपकी सोच के कारण कई लोगों के जीवन में बदलाव आया ?

प्रेम रावत जी : देखिए! मैं अपनी प्रशंसा अपने मुंह से नहीं करना चाहता हूं। पर मैं आपको एक बात बताता हूं, जो मैंने देखा है कि बहुत सारे जेलों में हमारे वीडियोज़ जाते हैं और ‘पीस एजुकेशन प्रोग्राम’ एक हमारा है, जो कि जेलों में दिखाया जाता है। 

ऐंकर : अच्छा!

प्रेम रावत जी : अब ये क्यों ?

ऐंकर : जी!

प्रेम रावत जी : हम धर्म की बात नहीं करते हैं। हम कर्म की बात नहीं करते हैं। हम विचारने की बात करते हैं, क्योंकि एक बार आप सोचें, फिर क्या करना है, ये आप अपने जीवन में निर्णय ले सकेंगे और सही निर्णय ले सकेंगे।

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