बात जीवन की (Baat Jeevan Ki)

इस सारे डिप्रेसिंग संसार के बीच में एक खुशखबरी है! वह खुशखबरी है — यह जीवन!
Feb 05, 2019
हम जिस बात को करते हैं, उसका किसी मजहब से लेना-देना नहीं है। यह मनुष्य के लिए है। और सबसे जरूरी बात यह समझना है कि कौन-सी ऐसी चीजें हैं, जो हमारे जीवन में सबसे ज्यादा प्रभाव रखती हैं ?

प्रेम रावत:

बात है जीवन की। हम जिस बात को करते हैं, उसका किसी मजहब से लेना-देना नहीं है। वो मनुष्य के लिए है। और सबसे जरूरी बात समझना यह है कि क्योंकि हम जीवित हैं, कौन-सी ऐसी चीजें हैं, जो हमारे जीवन में सबसे ज्यादा प्रभाव रखती हैं, जो जरूरी हों ? क्योंकि अगर विषय होता कि आप धन और कैसे कमा सकते हैं — अगर विषय होता कि आप कैसे 50 परसेंट पैसे को बढ़ा सकते हैं, जो आपके पास है, तो यह जगह बहुत छोटी पड़ती। क्योंकि आजकल हम लोगों की जो समझ है, वो कुछ इसी प्रकार की हो गयी है।

एक छोटी-सी कहानी है कि एक बार पांडव भाई, जो वनवास में थे, तो उनको प्यास लगी —बहुत ही प्यासे थे तो खोजना शुरू किया और युधिष्ठिर खोजते-खोजते तालाब के किनारे पहुंचे तो उनको बड़ी खुशी हुई कि पानी मिल गया है। जैसे ही वह पानी की तरफ गए, उनका ध्यान गया कि सारे उनके भाई जमीन पर लेटे हुए हैं, मरे हुए हैं। तो जैसे ही युधिष्ठिर ने हाथ अपना पानी में डाला पानी पीने के लिए, तो जो वहां गंधर्व था, उसने कहा, ‘‘रुको! पानी मत पीओ! मेरे सवालों का पहले जवाब दो, फिर मैं पानी पीने दूंगा।’’

उसने कहा, ‘‘नहीं, मेरे को प्यास लगी है, पानी पीने दो!’’

बोला, ‘‘नहीं! तुम्हारे भाइयों के साथ यही हुआ है। उन्होंने मेरी बात नहीं सुनी, पानी पीने लगे। मेरे सवालों का जवाब नहीं दिया और सब मरे पड़े हैं। तुम्हारे साथ भी यही होगा।’’

तो युधिष्ठिर रुके, कहा ‘‘पूछो!’’

तो कई सवाल पूछे गए और उनमें से एक सवाल था कि ‘‘सबसे अद्भुत् चीज क्या है ? पीक्यूलियर, स्ट्रेन्ज! अद्भुत!’’

तो युधिष्ठिर कहते हैं, ‘‘मनुष्य है! मनुष्य है!’’

फिर पूछा जाता है उनसे, ‘‘क्यों ? क्यों मनुष्य अद्भुत है ?’’

कहा कि ‘‘इसलिए कि कोई ऐसा मनुष्य नहीं है, जिसको यह नहीं मालूम कि एक दिन उसको मरना है, पर वह जीता ऐसे है कि कभी मरेगा ही नहीं। इसलिए अद्भुत है!’’

बात मरने की नहीं है, बात जीने की है — किस प्रकार जी रहा है ? किस प्रकार जी रहा है ? बात धन कमाने की नहीं है। कमाइए, खूब कमाइए! जितना हो सकता है, उतना कमाइए! बात धन कमाने की नहीं है, पर जिस तरीके से आप कमा रहे हैं, बात उसकी है कि आप किस तरीके से कमा रहे हैं, कि आप उस धन को अपने साथ ले जाएंगे और यह होगा नहीं।

हर एक चीज का एक लिहाज़ होता है। जब आप अपने घर से कहीं जाने के लिए निकलते हैं, दूर सफर करने के लिए निकलते हैं — तीन दिन के लिए जाना है, चार दिन के लिए जाना है, पांच दिन के लिए जाना है, छः दिन के लिए जाना है, उसी तरीके से तो आप पैक करते हैं अपने सूटकेस को ? इस प्रकार से सूटकेस पैक होता है कि उसमें सबकुछ, सबकुछ, सबकुछ! ये तो नहीं करते हैं! दो दिन के लिए जाना है, तीन दिन के लिए जाना है, उसी चीज को देख के — क्या होना है, क्या करना है ? ये सब देखकर के ही तो आप पैक करते हैं? पर अपने जीवन में किस तरीके से पैक करते हैं?

जो आपके नाते हैं, रिश्ते हैं — और मैं यह चर्चा इसलिए कर रहा हूं आजकल, जब मैं यहां पहुंचा, मेरे पास एक रिक्वेस्ट आयी कि ‘‘जी! एक व्यक्ति हैं और वो अपने जीवन के आखिरी दौर पर हैं — डॉक्टरों ने कह दिया है। और वो आपसे बात करना चाहते हैं।’’ तो मैंने फोन किया।

तो सबसे पहले उन्होंने कहा कि ‘‘हां, मेरे को कह दिया है कि मैं जा रहा हूं!’’

मैंने कहा कि असलियत तो यह है कि हम सब जा रहे हैं। कोई ऐसा नहीं है, जो नहीं जा रहा है। सिर्फ इतना है कि डॉक्टर ने अभी नहीं कहा है। मतलब, डॉक्टर कह दे — अपशगुन! डॉक्टरों का तो मुंह भी नहीं देखना चाहिए, वो ऐसी चीज कह सकते हैं। पर डॉक्टर कह देते हैं तो हमारा सारा सोचने का तरीका बदल जाता है। डॉक्टर कह देते हैं तो हमारे सोचने का तरीका बदल जाता है। जीने का तरीका बदल जाता है। और डॉक्टर ने नहीं कहा है, फिर भी हकीकत तो वही है।

तो संत-महात्माओं का इसके बारे में यह कहना है कि हम आपने आपको — अब मैं पैराफ्रेज़ कर रहा हूं। अंग्रेजी में जो शब्द होगा कि हम अपने आपको cheat कर रहे हैं — और कोई नहीं, हम अपने आपको cheat कर रहे हैं। जो फैक्ट्स हैं, जो हकीकत है, उसको स्वीकार नहीं कर रहे हैं। परंतु एक ऐसी हकीकत अपने दिमाग में बनाए हुए हैं, जो हकीकत नहीं है। जो हकीकत नहीं है।

तो फिर क्या रह गया ? मतलब, अगर मैं इसी तरीके से बोलता रहूं, थोड़ी देर के बाद आप लोगों को तो रोना आना लगेगा। इतना डिप्रेसिंग बन जाएगा ये सारा सब्जेक्ट — ‘‘जाना है, जाना है, जाना है! इसकी परवाह मत करो! उसकी परवाह मत करो! ये क्या होगा ? वो क्या होगा?’’

नहीं, नहीं, नहीं, नहीं! मैं डिप्रेसिंग बात करने के लिए नहीं आया हूं। डिप्रेसिंग बात करनी है तो आपको मेरी क्या जरूरत है ? टेलीविजन चालू कीजिए, न्यूज चैनल देखिए, डिप्रेशन अपने आप आ जाएगा! अखबार खोल के बैठ जाइए!

परंतु बात कुछ ऐसी है कि इस अंधेरे के बीच में एक रोशनी है। बात कुछ ऐसी है कि इस डिप्रेसिंग न्यूज के बीच में — इस सारे डिप्रेसिंग संसार के बीच में एक खुशखबरी है! और वो खुशखबरी है — यह जीवन! वो खुशखबरी है — यह स्वांस! वो खुशखबरी है — तुम्हारा जिंदा होना!

On screen text:

इस सारे डिप्रेसिंग संसार के बीच में एक खुशखबरी है!

वो खुशखबरी है — ये जीवन!

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