दिल क्या चाहता है (Dil Kya Chahta Hai)

Nov 01, 2018
दिल अपने आपको संतुष्ट करना चाहता है — जिसके लिए उसे खुद को जानना जरूरी है।

प्रेम रावत:

आप उन्नति करना चाहते हैं। आप ब्राइट फ्यूचर चाहते हैं। और आपको अच्छी नौकरी मिले। और आपको अच्छा जॉब मिले, ताकि आप खूब धन कमा सकें, फिर मज़ा ही मज़ा होगा, क्योंकि पैसा ही पैसा होगा! होता क्या है ?

साक्षात्कार:

पुरुष: Before the job hobbies were different, घूमना काफी पसंद था, क्रिकेट खेलता था नॉर्मली, दोस्तों के साथ ज्यादा टाइम स्पेंड होता था।

पुरुष: तब मेरी हॉबीज़ बहुत डिफरेंट थी now they are totally different.

पुरुष: दोस्त हैं काफी जो लोग बोलते हैं कि भाई, तू बड़ा आदमी बन गया है, बिज़ी हो गया है। ऐसा कुछ नहीं है। लाइफ के साथ होता है। कम हो गये हैं दोस्त थोड़े।

पुरुष: हमें जॉब भी देखनी पड़ती है, साथ-साथ अपनी पर्सनल लाइफ भी मेंटेन करनी पड़ती है, तो बैलेंस बना के चलना पड़ता है।

महिला: जब तक पढ़ाई किया तब तक तो इतना स्ट्रगल नहीं था। बट एक अच्छी लाइफ पाने के लिये जब हम जॉब ज्वॉइन करते हैं तो स्ट्रगल्स ऑटोमेटिकली बढ़ जाती है।

प्रेम रावत:

होता क्या है कि एक आदमी है, ग्रेजुएट किया, अच्छी जॉब, नौकरी ढूंढी, कंपनी के पास गये तो कंपनी ने कहा कि ठीक है, आप हमको अपनी एक्सपर्टीज़ ऑफर कीजिए, हम आपको पैसा ऑफर करेंगे। क्योंकि आपके हैं सपने, जो आप पूरा करना चाहते हैं।

साक्षात्कार:

पुरुष: मैं तो अपने आप को बी एम डब्लू में देखना चाहता हूं पांच साल बाद। अब एनी हाउ वो कैसे अचीव होता है that’s depend on.

महिला: फैमिली, बंगलो, कार एक्सट्रा, एक्सट्रा ।

महिला: मेरे लिये तो अभी सबसे बड़ी खुशी मेरा बेबी है। तो आप कितने भी थक के जाओ घर पर तो जब वो देखते हो तो लगता है हां, this is the best part of my life.

पुरुष: मैं अपने आप को पांच साल बाद इस कम्पनी में एक ऐसी पोजीशन पर देखता हूं, जहां पर मैं एक टीम को लीड कर रहा हूंगा।

महिला: मैं अपने आप को एक इंडिपेंडेंट सक्सेसफुल वूमेन बनाना चाहती हूं।

प्रेम रावत:

आप अपना समय, अपना दिमाग, अपना एफर्ट उस कंपनी को देंगे और वो कंपनी आपको देगी पैसा, ताकि आप अपने ड्रीम्स को पूरा कर सकें। कॉन्ट्रैक्ट साइंड! आपके मुँह में स्माइल! यस!

साक्षात्कार:

महिला: जॉब से मेन फायदा है हमारी जो बेसिक नीड्स होती हैं हमें लाइफ में आगे बढ़ने के लिये, हमारी खुशियों को पाने के लिये, जॉब से हमारी वो चीजें फुलफिल होती हैं।

पुरुष: थोड़ा बहुत प्रेशर है जॉब का, बट वही है कि कलीग्स का साथ है और बॉस का हेल्प है तो सबकुछ हो जाता है इज़ीली।

पुरुष: जब भी कोई अपना जॉब स्टार्ट करता है तो वो ये सोचता है कि मैं आगे चलके एक सक्सेसफुल एम्पलॉयी बनूंगा, बट जैसे-जैसे वो जॉब करता है तो उसको समझ में आता है कि यह इतना आसान नहीं है।

प्रेम रावत:

होगा ये कि कंपनी कहेगी, ‘‘आप हमको अपना 100% दीजिए!” पहली सेमिनार, जो आप अपनी कंपनी के लिए अटेंड करेंगे, उसमें आपको यही समझाया जायेगा —  you must give a hundred percent. किसी ने मैथ पढ़ी है ? अगर 100% गया कम्पनी के पास, आपके लिए क्या बचा?

साक्षात्कार:

पुरुष: ऑलमोस्ट 10 अवर्स हम शिफ्ट देते हैं ऑफिस में तो टाइम मिलता नहीं है।

पुरुष: जैसे कि छुटटी के लिये भी कभी-कभी जेन्यवन होता है लेकिन they don’t allow us to take the leaves.

पुरुष: अगर हम काम कर हैं तो हमें अपना 100% तो देना ही पड़ेगा। 

महिला: हमसे तो उनकी जो भी रिक्वाइर्मन्ट होती है, any how we have to fulfill.

महिला: दूर से हम बाहर के लोगों को देखते हैं तो ऐसा लगता है उनकी लाइफ़ हमसे, हमारी लाइफ़ से इज़ी है। बट पर्सनली अगर उनसे मिलो तो वो भी अपनी लाइफ़ से, अपनी जॉब से कहीं न कहीं वो भी दुखी हैं।

प्रेम रावत:

आदमी टायर्ड होता रहता है, टायर्ड होता रहता है, टायर्ड होता रहता है, टायर्ड होता रहता है और कंपनी कहती रहती है, ‘‘hundred percent please, hundred percent please, hundred percent please, hundred percent please!” अब उसके पास सिर्फ निन्यानबे बचा है देने के लिए, उसके बाद फिर अस्सी बचा है देने के लिए, उसके बाद फिर सत्तर बचा है देने के लिए और फैमिली के लिए जीरो! और फैमिली उससे अलग होने लगती है, एलीनेट होने लगती है। वो अपने से एलीनेट होने लगता है और फिर कंपनी को क्या जरूरत है ऐसे आदमी की ?

साक्षात्कार:

महिला: Actually I am a mother तो मेरे को वो प्रॉब्लम होती है weekend पर but I can’t do anything because मेरे को करना होता है।

पुरुष: वो लाइफ बैलेंस थोड़ा बिगड़ जाता है बिकॉज़ हम बिजी रहते हैं जॉब्स में।

महिला: हम अपनी पर्सनल लाइफ में स्पेस नहीं कर पाते, फैमिली को टाइम नहीं दे पाते।

पुरुष: कभी-कभी तो मन भी करता है कि अब तो छोड़ देना था।

पुरुष: बॉस के ऊपर भी प्रेशर होता है तो उसको दूसरों पर अपना लोड निकालना पड़ता है तो वो चीज हमें समझनी चाहिए।

पुरुष: कभी-कभी संडे को हमें आना पड़ता है तो हमें यह लगता है कि खुद तो घर पर बैठे हैं, ठीक है, और हमें फोन करके यहां बुला लिया।

पुरुष: Because in future we will become boss, हम भी वो ही चीज करेंगे और फिर हमारे नीचे वाला हमें गाली देगा। 

पुरुष: अपनी स्किल से ज्यादा हम कम्पनी को दे रहे हैं। हमारी जितनी क्षमता है उससे ज्यादा हम काम कर रहे हैं बट हमें लगता है कि इतना हमें इन रिर्टन नहीं मिल रहा।

महिला: I don’t think so, I have getting paid that much what I deserve.

पुरुष: कम्पनी के साथ भी है, जब तक आप उनके लिये युसफुल हैं तभी तक वो आपको मोटीवेट करते हैं, नर्चर करते हैं, otherwise they will throw you out.

प्रेम रावत:

उनको सिर्फ एक कागज का टुकड़ा फाड़ना है and the contract is finished! और वो कागज का टुकड़ा आपकी जिंदगी को रेप्रज़ेंट करता है। तो क्या मेरा मतलब है कहने का कि आपको पढ़ाई नहीं करनी चाहिए ? नहीं, मैं ये नहीं कह रहा हूं।

मैं कह रहा हूं — Be armed for reality. सच्चाई के लिए तैयार होकर के जाना। उस मैदान में, लड़ाई के मैदान में अच्छी बात नहीं है कि सिर्फ — ‘‘अजी! मैं तो देखने के लिए निकला था।’’ नहीं। तैयार हो के जाना। तैयार होने का क्या मतलब है? Yes, you need education — education होनी चाहिए साथ में। But you also need ‘you’ and you need the wisdom. और क्या विज़डम कि मैं सोऊंगा नहीं, मेरे को जगना जरूरी है। मेरे को जगना जरूरी है, मेरे को ये पहचानना जरूरी है कि — मेरी नीड्स क्या हैं ? मेरा हृदय, मेरा हार्ट मेरे से क्या मांगता है ?

संयम...स्वतंत्रता...शांति..

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