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The Vast Ocean Within 00:11:17 The Vast Ocean Within Video Duration : 00:11:17 One 2 One with Prem Rawat | No. 21

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All stories begin with “Once upon a time.” The story that I really want to tell you also begins like this, but there is a small difference—and the difference is, “Once upon this time there lives you.”

Hello everyone; Prem Rawat here. So, I have been here in India and doing a lot of interviews, did a couple of events—virtual, of course, and it was very interesting. (And it’s always fun to come to India, whatever the circumstances.)

And I would just like to say a few things. And one of them is that, you know, there are a lot of changes that we notice around us. And the world isn’t the same place anymore. Maybe you got up in one of the mornings in 2017, 2018—and even the earlier part of 2019, and the world was a different place.

And all of a sudden, you find yourself in this, caught up in this thing of the pandemic—and so many changes due to that, yeah, restrictions and.... You know, we were all moving in a particular direction, and then all of a sudden, it’s just like, “No, that’s not going to happen, and no, that’s not going to happen, and no, that’s not going to happen.”

So, it comes down to this. That those things that change, they change because they can. And if they can, they will. And then there are those things that don’t change. And those things that don’t change, won’t change. And the question really becomes, “In what do you invest?”

Being here, being on the face of this earth for as long as you are—here, the whole idea of death kind of floats, hovers in so many places, in so many countries that had made themselves the “idyllic land of milk and honey” and “free of disease” and, you know, so many things. And yet even those have been victimized. But that is because it is changeable. It did change—because it can change. And it is changeable—and it will change.

But then there is something that doesn’t change. And that thing that doesn’t change is what is your reality, what you need to invest in, what you need to be a part of, what you need to court in your life—and allow yourself to be filled with that, with that understanding that you want to attach yourself to that which is real. So, that’s definitely one thing that we have to remember.

You have to invest, you have to court that one thing that is real in your life, not all the other things. They may be distracting. And you might get distracted. There’s no harm in getting distracted if you can find your way back. And that’s what’s important.

—Prem Rawat

The Power Within (Video) 01:14:48 The Power Within (Video) Video Duration : 01:14:48 On-Demand LiveStream Replay

On Sunday, November 22nd Prem Rawat spoke in Hindi to a small, socially distanced audience in Delhi, India, while a global audience joined via a TimelessToday LiveStream.

The Replay in Hindi with English translation is now available. Spanish, Italian, Portuguese, and French will follow as quickly as possible.

अनंत से नाता 00:31:40 अनंत से नाता Video Duration : 00:31:40 साथ साथ, न० : 8, श्रृंखला, श्री प्रेम रावत द्वारा

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जो आप हैं, जैसे आप हैं, इस पृथ्वी पर ऐसा न कभी कोई था और न कभी कोई होगा। आप जिस प्रकार रोते हैं वह आपका रोना है। जब आप हंसते हैं तो जिस प्रकार आप हंसते हैं, वह आपका हंसना है। ये जो सिग्नेचर आप हैं यह फिर कभी नहीं होगा। आप जैसे बहुत हैं, पर आप जैसा कोई नहीं है।

(प्रेम रावत) हमारे सभी श्रोताओं को हमारा नमस्कार। धीरे-धीरे चीजों में परिवर्तन आ रहा है। धीरे-धीरे मौसम में परिवर्तन आ रहा है। कल मैंने देखा कि यहां हवा में थोड़ी-थोड़ी ठंडी चालू हो गयी है। और ये सारे परिवर्तन आयेंगे। पहले भी आये थे। अब भी आ रहे हैं। और आगे भी आयेंगे। मैं एक चीज की चर्चा कर रहा हूं आजकल। और बात यह है कि कोई भी चीज है उसको हमारे देखने का तरीका, हमारा नज़रिया कैसा है! हम उस चीज को किस प्रकार देखते हैं। क्या, कोई भी चीज होती है

कबीरा कुंआ एक है, पानी भरे अनेक। भांडे का ही भेद है, पानी सबमें एक।

एक ही कुंआ है। एक ही कुंए के पास आते हैं। एक ही कुंए से सब लोग पानी भरते हैं। पानी वही है। हां, भांडे अलग-अलग हैं। किसी ने किसी तरीके से सजाया हुआ है। किसी ने किसी तरीके से सजाया हुआ है। किसी ने किसी तरीके से सजाया हुआ है। सबके अलग-अलग हैं, पर पानी सबमें एक ही है। यही बात है समझने की कि ये जो है, ये भांडा ये सब अलग-अलग हैं। पर इसके अंदर जो बैठा है वो एक ही है। वो सबके लिए एक है। और बात उसी से शुरू होती है, उसी से शुरू होती है।

अब लोग हैं घबरा जाते हैं। अभी मैं पढ़ रहा था किसी ने चिट्ठी लिखी कि “मेरा भाई भी बीमार है। मेरा दूसरा भाई भी बीमार है और मैं क्या करूं ?”

तो देखिये, दुखी होने की बात तो ये है। परंतु दुख से ही सारा काम नहीं होगा। दुख से ही सारा काम नहीं होगा, हिम्मत से भी काम लेना है। तो दुखी होना कि “हां, ये अच्छा नहीं हो रहा है कि मेरा भाई बीमार है या मेरा दूसरा भाई भी बीमार है।” परंतु अगर तुम भी बैठ जाओगे, तुम भी रोने लगोगे तो उनका क्या होगा ? क्योंकि जब किसी के जीवन के अंदर दिक्कत आती है तो उसको और दिक्कत वाले नहीं चाहिए। उसको ऐसा व्यक्ति चाहिए जो खुद परेशान न हो ताकि वो उनको हिम्मत दे सके, उनकी मदद कर सके। और जो मदद कर सकता है उसकी उनको जरूरत है। समझने की बात है।

तो लोगों के सामने समस्याएं आती हैं लोग घबराने लगते हैं अब क्या होगा ? पर एक के साथ तुमने अपना तार नहीं जोड़ा, वो क्या ? जो था, जो है, जो रहेगा। और जो वो है, क्या वो भी ये सोचता है कि आगे क्या होगा ? उसके लिए तो सबकुछ है। तुम्हारे लिए, अगर तुम उसको पहचान लो अपने जीवन में तो तुम्हारे लिए भी सबकुछ है। क्योंकि तुम्हारे लिए वो है चौबीसों घंटे तुम्हारे अंदर वो है। क्योंकि वो है तुम जीवित हो और जिस दिन वो नहीं रहेगा तुम भी नहीं रहोगे। क्या उससे नाता जोड़ा ? क्या उससे जो नाता जुड़ना है, क्या उस नाते को तुम समझे ?

तीन चीजें हैं। और इनके बारे में मैं आगे वीडियो में आपसे चर्चा करूंगा। एक तो वो है जो अनंत है — जो था, जो है, जो रहेगा। दूसरे हैं आप — जो नहीं थे, अब हैं और आगे नहीं रहेंगे। नहीं थे, हैं और आगे नहीं रहेंगे। अब लोग हैं “हां जी हम तो, हम तो थे, पहले थे हम, थे!”

आपने कभी अखबार पढ़ा है ? अखबार में एक हिस्सा होता है उसे कहते हैं — Obituaries तो उसमें लिखा जाता है कि फलां-फलां चले गये। फलां-फलां चले गये। फलां-फलां चले गये। श्री राम दयाल शर्मा हमको छोड़कर चले गये। श्री पंकज श्रीवास्तव चले गये। फलां-फलां के बारे में हम आपके परिवार आपको बहुत मिस कर रहे हैं। चले गये। चले गये। चले गये। चले गये। चले गये। तो जाने वालों का तो सारा एक वो बना हुआ है, पेज। फलां-फलां चले गये। फलां-फलां चले गये। फलां-फलां चले गये। फलां-फलां चले गये। पर कभी आपने अखबार में वो वाला पेज देखा है कि वो फलां-फलां वापस आ गये। वो फलां-फलां वापस आ गये। वो फलां-फलां वापस आ गये। श्रीवास्तव जी वापस आ गये। अब उनका नाम ये है। वो नहीं मिलेगा आपको। क्यों ? क्यों नहीं मिलेगा ? गये। कहां गये ? किसी को नहीं मालूम। कहां गये, किसी को नहीं मालूम। पर इन तीन चीजों के बारे में चर्चा करना चाहता हूं मैं। और इसके बारे में और भी चर्चा करूंगा — जो था, जो है, जो रहेगा।

पहला — था, है, रहेगा। उसका कभी नाश नहीं होता है। एक आप हैं — जो नहीं थे, हैं, हैं पर आगे नहीं रहेंगे। ये भी समझने की बात है। और तीसरा, तीसरी बात है इस माया की। जिसके पीछे आप लगे हुए हैं — देखिये तीन चीजें जो हो गयीं। एक तरफ तो वो है जो था, जो है, जो रहेगा। और बीच में हैं आप — जो नहीं थे, हैं, नहीं रहेंगे। और तीसरी चीज क्या है इसके बीच में आप हैं — जो नहीं थी, जो नहीं थी। और संत महात्माओं का कहना है — जो नहीं है। सबसे बड़ी बात — जो नहीं है। और तीसरी — नहीं रहेगी। और आप पड़े हुए हैं उसके पीछे जो नहीं थी, जो नहीं है, जो नहीं रहेगी। और पड़ना चाहिए आपको किसके पीछे — जो था, जो है, जो रहेगा। क्योंकि आप नहीं थे, अब हैं और आगे नहीं रहेंगे। पर उसके पीछे नहीं पड़े। पड़े किसके पीछे? जो नहीं थी, नहीं है, और नहीं रहेगी। इसीलिए उसको माया कहा। ये माया है। ये सब माया का खेल है।

तिजोरी में सोना पड़ा है। लाला क्या सोचता है कि “ये मेरा है।” ये तुमसे पहले किसी और का था, आज तुम्हारा है, कल तुम्हारा नहीं रहेगा। नहीं रहेगा। सारी चीजों के बारे में अगर देखा जाये। यही सब जगह हो रहा है। ये तुम्हारा था! नहीं, ये तुम्हारा नहीं था, इससे पहले किसी और का था, अब तुम्हारा है और आगे नहीं रहेगा। जबतक तुम हो तुम्हारा असली में है क्या ? ये माया या वो जो था, है और रहेगा। और उसको जान लो, उसको समझ लो, तो तुम्हारे जीवन में आनंद ही आनंद है। और उसको नहीं समझ पाए, उसको नहीं समझ पाए तो भटकते रहोगे। खोजते रहोगे क्या चीज तुमको खुशी लाती है ? क्या चीज तुम्हारे जीवन के अंदर तुमको खुश करेगी ? और तुम लग जाओगे पीछे जैसे रोमांस होता है और जब उम्र हो जायेगी तो कैसा रोमांस! तुम समझते हो जब यम आता है लेने के लिए तो वो भी देखेगा कि “हां, दोनों रोमांटिक हैं जरा बीस मिनट और छोड़ देते हैं।” ना, उसके लिए तो एक भजन है —

हंसा निकल गया पिंजरे से, खाली पड़ी रही तस्वीर।

और यमदूत के लिए क्या है —

जब यमदूत लेन को आवे, तनिक धरे नहीं धीर।

मार-मार के प्राण निकाले, बहे नैन से नीर।

हंसा निकल गया पिंजरे से खाली पड़ी रही तस्वीर।

वो थोड़ी देखेगा। ये है, वो है, ये रिश्ता है, वो रिश्ता है, ये नाता है, वो नाता है। ना, कुछ नहीं।

तो समझने की बात है। हिम्मत लेने की बात है। हिम्मत से काम करने की बात है। और उसको पहचानने की बात है — जो था, जो है, और जो रहेगा।

अपना ख्याल रखें, आनंद से रहें। इस कोरोना वायरस बीमारी से बचें।

और सभी लोगों को मेरा बहुत-बहुत नमस्कार!

The Power Within (Audio) 01:14:48 The Power Within (Audio) Audio Duration : 01:14:48 On-Demand Replay

On Sunday, November 22nd Prem Rawat spoke in Hindi to a small, socially distanced audience in Delhi, India, while a global audience joined via a TimelessToday LiveStream.

The Replay in Hindi with English translation is now available. Spanish, Italian, Portuguese, and French will follow as quickly as possible.

मेरा साहस मेरे अंदर (ऑडियो) 01:14:48 मेरा साहस मेरे अंदर (ऑडियो) Audio Duration : 01:14:48 ऑन-डिमांड लाइवस्ट्रीम पुनः प्रसारण (हिंदी)

रविवार, 22 नवंबर को प्रेम रावत जी ने भारत में एक सीमित समूह को हिंदी में सम्बोधित करते हुए से टाइमलेस टुडे के लाइवस्ट्रीम के माध्यम से, वैश्विक हिंदी भाषी दर्शकों को भी सम्बोधित किया ।

यह कार्यक्रम, जिसका शीर्षक है: "मेरा साहस मेरे अंदर" - अब आपकी सदस्यता के साथ हिंदी में अब उपलब्ध है।

मेरा साहस मेरे अंदर (वीडियो) 01:14:48 मेरा साहस मेरे अंदर (वीडियो) Video Duration : 01:14:48 ऑन-डिमांड लाइवस्ट्रीम पुनः प्रसारण (हिंदी)

रविवार, 22 नवंबर को प्रेम रावत जी ने भारत में एक सीमित समूह को हिंदी में सम्बोधित करते हुए से टाइमलेस टुडे के लाइवस्ट्रीम के माध्यम से, वैश्विक हिंदी भाषी दर्शकों को भी सम्बोधित किया ।

यह कार्यक्रम, जिसका शीर्षक है: "मेरा साहस मेरे अंदर" - अब आपकी सदस्यता के साथ हिंदी में अब उपलब्ध है।

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