लॉकडाउन 54

पीस एजुकेशन प्रोग्राम की ओर अग्रसर (18 मई, 2020)
May 17, 2020
अच्छा कर्म करने का कोई व्रत नहीं रखता कि "आज के दिन मैं जो कुछ भी करूंगा, अच्छा करूंगा! आज हम एक-दूसरे से अच्छा व्यवहार करेंगे।" ये व्रत रख के देखो! —प्रेम रावत / प्रेम रावत जी "पीस एजुकेशन प्रोग्राम" कार्यशालाओं की वीडियो श्रृंखला को आप तक प्रस्तुत करने की तैयारी कर रहे हैं। इस दौरान हम उनके कुछ बेहतरीन कार्यक्रमों से निर्मित लॉकडाउन वीडियो आप के लिए प्रसारित करेंगे।

प्रेम रावत:

एक बात है सोचने की, क्योंकि मैं जगह-जगह जाता हूं। और मेरे पास काफी प्रश्न भी आते हैं लोगों के, जो सिर्फ हिन्दुस्तान से ही नहीं, सारे देशों से। कई लोग हैं, जो जेलों में हैं, उनसे भी आते हैं। तो इन सब प्रश्नों को पढ़कर मुझे क्या लगता है ? तो मेरे को यही लगता है कि सब मनुष्य इस संसार के अंदर ओवरलोड हो रखे हैं। सब! छोटे हैं, उनको भी ओवरलोड किया हुआ है। बड़े हैं, उनको भी ओवरलोड किया हुआ है। परिवार के सारे सदस्य — ओवरलोड! देश के नागरिक — ओवरलोड! देश के नेता — ओवरलोड! देश के सिपाही — ओवरलोड! देश की पुलिस — ओवरलोड! सबके साथ यही हाल है। क्योंकि जब ओवरलोड होता है, जब बोझ ज्यादा हो जाता है तो दुःख होता है। जब इतना वजन पड़ने लगता है इन कंधों पर, इस गरदन पर, जो सहा नहीं जा सकता, तो फिर दुःख होता है। और इसके लिए क्या कहा है कि — भूले मन! समझ के लाद लदनियां।

अखबार उठाया मैंने एक दिन, उसमें लिखा हुआ था कि ‘‘आप अच्छी सेहत के लिए ये खाइए! ये खाइए! आप अच्छी सेहत के लिए ऐसा योग कीजिए! आप असली सेहत के लिए, अच्छी सेहत के लिए ये करिए, वो करिए!’’ और कहीं नहीं लिखा था कि — भूले मन! समझ के लाद लदनियां।।

और दरअसल में जड़ सारे मुश्किलों की वही है! आज जो मनुष्य तड़प रहा है, कहां भागता है ?

कोई मंदिर भागता है। पर किसी भी धर्म का व्यक्ति हो, वो अपने भगवान की ओर भागता है। क्यों भागता है ?

क्योंकि ‘‘मुझे दुःख से बचा लो! मेरी विनती सुन लो! कुछ करो!’’ परंतु उसको ये समझाने वाला कोई नहीं है —

भूले मन! समझ के लाद लदनियां।।

नए कानून बन गए! नए कानून बन गए कि इतनी कक्षा से इतनी कक्षा तक विद्यार्थियों को गृहकार्य नहीं करना पड़ेगा। परंतु उनको ये समझाने वाला फिर भी कोई नहीं है कि —

भूले मन! समझ के लाद लदनियां।।

थोड़ा लाद, बहुत मत लादे, टूट जाए तेरी गरदनियां।

भूले मन! समझ के लाद लदनियां।।

यही समझाने के लिए मैं यहां आया हूं कि — भूले मन!

ये बात मैं सिर्फ तुम्हारे लिए नहीं कह रहा हूं। ये बात मेरे पर भी लागू होती है। लोगों को मैं देखता हूं, अपने आपको मैं देखता हूं। कई बार चिंतित पाता हूं।

तब, जब याद आती है कि ‘‘भूले मन! समझ के लाद लदनियां।’’

क्या-क्या लाद रहा है अपने गर्दन पर तू ?

और — भूखा हो — भूख लगी है अगर — और किस चीज की भूख ?

हर एक व्यक्ति को परमानंद की भूख है। वो आनंद में रहना चाहता है, उस सच्चिदानंद से मिलना चाहता है, अपने जीवन को सफल करना चाहता है। और कई बार उसको यह भी नहीं मालूम कि वो ये करना चाहता है। क्योंकि लगा हुआ है, इतना लगा हुआ है, इतना लगा हुआ है — बोझ है! तो —

भूखा होय तो भोजन पा ले, आगे हाट न बनियां।।

दो दीवाल हैं। एक दीवाल से तुम आए — जब तुम पैदा हुए। कहां थे तुम ? किसी को नहीं मालूम! क्या कर रहे थे तुम ? किसी को नहीं मालूम! पर उस दीवाल से निकले! आज जिंदा हो। एक दूसरी दीवाल है और तुमको उस दीवाल से भी जाना है। और जब जाओगे, कहां जाओगे ? किसी को नहीं मालूम। कोई तुमसे संपर्क नहीं रख पाएगा। सेलफोन तुम ले जा नहीं सकते अपने साथ कि वहां से फोन कर लें, ‘‘मैं यहां हूं!’’ कुछ नहीं। पर अगर जो कुछ करना है, इन दीवालों के बीच में करना है। तो अगर भूखे हो तुम — ये भोजन की बात नहीं हो रही है सिर्फ। ये खाने की बात — दाल की, भात की, रोटी की, चटनी की, सब्जियों की, अचारों की बात नहीं हो रही है। जो भूख लगी है तुम्हारे हृदय में, तुम्हारे अंदर, उसको अगर पूरा करना है तो अब कर लो! ‘‘आगे हाट न बनियां।’’ कोई खिलाने वाला, कोई देने वाला नहीं है।

प्यासा होय तो पानी पी ले, आगे देश निपनियां।।

आगे कुछ नहीं मिलेगा। आगे कोई सुराही देने वाला नहीं है, कोई मटका रखने वाला नहीं है, कोई पानी देने वाला नहीं है। कोई नदी नहीं है, कोई झरना नहीं है, कोई कुआं नहीं है, कोई नलका नहीं है। जो कुछ है, यहां है। और जो तेरे को करना है, यहां करना है।

कहत कबीर सुनो भाई साधो, काल के हाथ कमनियां।।

आखिर में किसने पकड़ना है तुमको ?

काल ने पकड़ना है। वो ले जाएगा।

अब लोग अपने ख्यालों में विचार करते हैं कि हम अगर ये काम करें, ये काम करें, ये काम करें तो हम स्वर्ग जाएंगे।

धारणाएं हैं मनुष्य की। मनुष्य है जमीन पर, ऊपर की तरफ देखता है। क्या देखता है ? वो ऊपर वाला! कौन ऊपर वाला ? कौन ऊपर वाला ? कौन ऊपर वाला ?

अरे! वो ऊपर वाला तो तुम्हारे अंदर वाला भी है। पर ऊपर ही देखते रहोगे या अंदर की तरफ भी झांकोगे ? अंदर की तरफ झांकना नहीं आता है ? मैं दावे से कहता हूं कि लोगों को अंदर की तरफ झांकना नहीं आता है। बाहर घूर-घूर के देखते रहते हैं — कहां है ? कहां है ? कहां है ? कहां है ? कहां है ? ... और क्या कहते हैं ? ‘‘अगर भगवान! तू है तो सामने आ!’’

भगवान है, पर वो अंदर है। और जबतक तुम अंदर झांक के नहीं देखोगे, तुमको दिखाई नहीं देगा। तुमको पता नहीं लगेगा। बाहर की तरफ देखोगे, क्या मिलेगा ? इस दुनिया का क्लेश मिलेगा। लोग लड़ते हुए मिलेंगे!

जबतक तुम हर दिन, जिसमें तुम जिंदा हो, उसको अगर तुम नहीं समझोगे कि ये क्या है, तबतक तुमको भगवान की असली लीला क्या है, कभी समझ में नहीं आएगी। भगवान क्या है, ये भी तुमको समझ में नहीं आयेगा। चाहे तुम किसी भी धर्म को मानने वाले हो — हम तो कहते हैं, तुमको समझ में ही नहीं आएगा। परंतु जिस दिन तुम समझना शुरू करोगे कि ये क्या आशीर्वाद मिला है — असली त्योहार, वो त्योहार है, जिसमें मनुष्य अपने आपको समझने लगता है, वो त्योहार असली है। औरों का नहीं, अपना त्योहार!

व्रत रखते हैं ? व्रत रखते हैं, क्यों रखते हैं ?

ये {दिमाग की तरफ इशारा करते हुए} कहता है। ये {दिमाग की तरफ इशारा करते हुए}!

ये नहीं{हृदय की तरफ इशारा करते हुए}, हृदय काहे के लिए कहेगा व्रत रखो ? ये {दिमाग की तरफ इशारा करते हुए} कहता है — व्रत रखो तो कुछ अच्छा हो जाएगा। और पेट क्या कहता है ? खिला दे भाई! खिला दे! खिला दे, खिला दे! सारे दिन पेट क्या कहता है ?

‘‘गुर्रऽऽऽऽऽ! घुर्रऽऽऽऽऽऽऽऽ! गुर्रऽऽऽऽऽऽऽऽ! घुर्रऽऽऽऽऽऽ! मैंने तेरा क्या बिगाड़ा ? मुझे क्यों नहीं खिला रहा है ?’’ और खाना क्या है ? वही खाना है, जो भगवान बनाता है। क्या उल्टी गंगा है!

कहते हैं — किसान, ‘‘फसल को उपजाता है।’’ उपजाता है ? परंतु उसको, उस बीज को धरती से कौन निकालता है ? किसान ? वही, जिसके लीले की बात कर रहे हैं, वही-वही —

कामिल काम कमाल किया, तैंने ख्याल से खेल बनाय दिया।

वो! वही! वही किसान है! वही खाने वाला है, वही बनाने वाला है। वही बनाता है, वही भूख बनाता है, वही खाना बनाता है और उसी के नाम पर तुम व्रत करते हो।

परंतु व्रत भी रखेंगे। मैं नहीं कह रहा हूं कि मत रखो! रखो! शौक से रखो! पर ज्यादा लम्बा मत रखना, नहीं तो तुम कहीं और पहुंच जाओगे। अच्छा कर्म करने का कोई व्रत नहीं रखता कि आज ये नहीं कि ‘‘आज के दिन मैं जो कुछ भी करूंगा, अच्छा करूंगा! ये कोई नहीं करता। आज के दिन मैं अपनी पत्नी से अच्छा व्यवहार करूंगा।’’ ये व्रत रखना है, ये रख के देखो! और पत्नी कहे, ‘‘मैं आज के दिन पति से अच्छा व्यवहार करूंगी।’’ और माता-पिता कहें, ‘‘आज हम अपने बच्चों से अच्छा व्यवहार करेंगे!’’ और बड़े-बड़े लीडर, ‘‘आज हम अपने देशवासियों से अच्छा व्यवहार करेंगे।’’ देशवासी — ‘‘आज हम पुलिस से अच्छा व्यवहार करेंगे। आज हम एक-दूसरे से अच्छा व्यवहार करेंगे।’’

एक दिन तो होगा नहीं तुमसे। एक घंटे से चालू करो कि अगले एक घंटे में — और पड़ोसी से नहीं, सिर्फ अपने परिवार में। देखो, क्या असर होता है! अब एक घंटे काम किया तो फिर दो घंटे कर लेना। दो घंटे काम किया तो तीन कर लेना। फिर चार, फिर पांच!

देखो! जब तुम गुस्सा होते हो तो तुम्हारे शरीर को हानि होती है। और जब तुम प्रसन्न होते हो तो तुम्हारे शरीर को कोई हानि नहीं होती है। इसका मतलब समझे ? पहले प्रश्न तो ये होना चाहिए कि क्या तुम अपने शरीर को हानि पहुंचाना चाहते हो ? हां या नहीं ?

{श्रोतागण} — नहीं।

नहीं ? ऐं ? नहीं ? नहीं!

तो अगर शरीर को हानि नहीं पहुंचाना चाहते हो तो इसका क्या मतलब हुआ ? प्रसन्न रहना अच्छा है। नहीं ? बजाय नाराजगी करने के। नफरत करोगे, तुम्हारे शरीर को हानि पहुंचेगी। प्यार करोगे, तुम्हारे शरीर को हानि नहीं पहुंचेगी। तो इसका मतलब क्या हुआ ? अभी भी तुम्हारा कम्प्यूट करने की जरूरत है इसको!

प्यार करना तुम्हारा स्वभाव है। इसलिए तुमको हानि नहीं पहुंचेगी। नफरत करना तुम्हारा स्वभाव नहीं है, इससे तुमको हानि पहुंचेगी। जो तुम करोगे, जो तुम्हारे स्वभाव में नहीं है, उससे तुमको हानि पहुंचेगी। अज्ञानता में रहोगे, तुमको हानि पहुंचेगी। ज्ञान में रहोगे, तुमको हानि नहीं पहुंचेगी। आनंद में रहोगे, तुमको कोई हानि नहीं पहुंचेगी। क्योंकि ये तुम्हारा स्वभाव है। तुमको बनाया ही इसलिए गया है।

अनुभव करो! मालूम करो! जानो! अपने जीवन की क़दर जानो! अपने जीवन के अंदर क्या संभावना है, इसको जानो! सीखो!

Log In / Create Account




TimelessToday

Log In or Create an Account



OR




Accounts created using Phone Number or
Email Address are separate. 
Account Information




  • You can create a TimelessToday account with either your Phone Number or your Email Address. Please Note: these are separate and cannot be used interchangeably!

  • Subscription purchase requires that you are logged in with a TimelessToday account.

  • If you purchase a subscription, it will only be linked to the Phone Number or Email Address that was used to log in at the time of Subscription purchase.

Please enter the first name. Please enter the last name. Please enter an email address. Please enter a valid email address. Please enter a password. Passwords must be at least 6 characters. Please Re Enter the password. Password and Confirm Password should be same. Please agree to the privacy policy to continue. Please enter the full name. Show Hide Please enter a Phone Number Invalid Code, please try again Failed to send SMS. Please try again Please enter your name Please enter your name Unable to save additional details. Can't check if user is already registered Please enter a password Invalid password, please try again Can't check if you have free subscription Can't activate FREE premium subscription Resend code in 00:30 seconds
Activate Account

You're Almost Done

ACTIVATE YOUR ACCOUNT

You should receive an email within the next hour.
Click on the link in the email to activate your account.

You won’t be able to log in or purchase a subscription unless you activate it.

Can't find the email?
Please check your Spam or Junk folder.
If you use Gmail, check under Promotions.

Activate Account

Your account linked with johndoe@gmail.com is not Active.

Activate it from the account activation email we sent you.

Can't find the email?
Please check your Spam or Junk folder.
If you use Gmail, check under Promotions.

OR

Get a new account activation email now

Need Help? Contact Customer Care

Activate Account

Account activation email sent to johndoe@gmail.com

ACTIVATE YOUR ACCOUNT

You should receive an email within the next hour.
Click on the link in the email to activate your account.

Once you have activated your account you can continue to log in

You haven't marked anything as a favorite so far. Please select a product Please select a play list Failed to add the product. Please refresh the page and try one more time.