लॉकडाउन — बारहवाँ दिन

प्रेम रावत के साथ (हिंदी में अनुवादित)
Apr 01, 2020
“अपने मूल्यवान गुणों की सराहना करें: धैर्य, समझ, स्पष्टता — ये वो शक्ति हैं, वह प्रकाश है जो आपके अंदर है।" — प्रेम रावत जी / प्रेम रावत जी "पीस एजुकेशन प्रोग्राम" की वीडियो श्रृंखला को प्रस्तुत करने की तैयारी कर रहे हैं। इस दौरान आपके लिए उनके पूर्व प्रकाशित अंग्रेजी लॉकडाउन वीडियो जो हिंदी में अनुवादित है, प्रस्तुत हैं।

प्रेम रावत:

सबको नमस्कार!

उम्मीद है कि आप सब ठीक हैं। उम्मीद है कि इन परिस्थितियों में भी आप सब खुश हैं। क्योंकि सच्ची खुशी लॉकडाउन में नहीं है, सच्ची खुशी वह आपके भीतर है। शांति जो आप तलाशते हैं वह आपके भीतर है। सवाल है कि जो चल रहा है उसे सच में समझने का कि "यह है क्या!"

तो आप इसे देख सकते हैं कि "हां मैं बंद हूं, लॉकडाउन में हूं मेरी यह स्थिति है, मेरी ये परेशानियां है, यह कोरोनावायरस की दिक्कत आ गई है।" मेरा मतलब सबकुछ पता है ना इसके साथ आ चुका है। और मैं समझ सकता हूं लोग गुस्सा हैं, वो नाराज हैं, आरोप लगा रहे हैं "उसने ये किया; उसने वो किया; उसने यह किया; इसने वह कर दिया!" और हां बिल्कुल आरोप लगाना आसान है और खासकर नेताओं पर कि वो क्या कर रहे हैं उनमें से इतने सारे, उनमें से सब नहीं पर ज्यादातर कि वो किस तरह से बेवकूफियां करते जा रहे हैं।

अब आप क्या कर सकते हैं ? चाहे उन्हें भुगतना पड़े या नहीं भी पर लोगों के लिए तो मुश्किल है ही और सोचिये उन गरीबों के बारे में — मेरा मतलब उनके पास क्या है ? कुछ नहीं, कुछ भी नहीं जैसी यह दुनिया है गरीबों के पास कुछ नहीं बचा है अब। फिर भी हम ऐसे ही हैं। जो कुछ भी हमारे पास इस शॉपिंग सेंटर में मौजूद है हम उसे ले जा नहीं सकते। हम खाली हाथ आए थे और हम खाली हाथ ही जाएंगे वापस। ये कोई भी संपत्ति, ये कोई भी चीज हम नहीं ले जा पाएंगे अपने साथ। हम खुद को गरीब नहीं मानते लेकिन एक गरीब इंसान की तरह हम ऐसे ही जाएंगे, अपने साथ बिना कुछ लिए हुए। इसे देखते हुए, समझते हुए इसे कि आप क्या कर सकते हैं; क्या संभव है ? तो क्या है संभव, यह हमेशा संभव रहा है — इसमें पैसा नहीं चाहिए; इसमें संपत्ति नहीं चाहिए; इसमें कुछ भी नहीं चाहिए — इसमें आपकी जरूरत है बस। आपके पास ये कमाल, कमाल, कमाल की चीजें है जो सिर्फ आपकी हैं। कोई भी आपके कमरे में आकर इनको आपसे चुरा नहीं सकता।

एक कहानी है। यह एक जेन स्टोरी है और मुझे पसंद है। एक बार एक गुरु अपनी झोपड़ी में आए और उन्होंने देखा कि एक चोर वहां आया था और सभी कीमती चीजें ले गया है। हां, तो उन्होंने कुछ नहीं कहा और खिड़की के पास वाली कुर्सी पर बैठ गए। उन्होंने खिड़की खोली और — एक कमाल का दृश्य था उनके सामने। चांद ऊपर चढ़ रहा था और सितारे थे वो बस... बहुत सुंदर था तो उन्होंने कहा "शुक्र है वह चोर सबसे कीमती चीज ले जाना भूल ही गया जो मेरे पास है।" मुझे यह कहानी बहुत पसंद है, क्योंकि वो जिसकी सराहना हृदय कर सकता है; जो आप इंसान होने के नाते सराहना कर सकते हैं जिसकी; वह है जरूरी, वही सच है, बाकी सब तो बदलता रहता है। यह बदलेगा क्योंकि यही इसकी प्रकृति में है।

हमारी प्रकृति में क्या है, सोचिये आप ? और यह हमारी प्रकृति में नहीं, नासमझी है और हमारी नासमझी है, हम बदलाव नहीं चाहते। हम चाहते हैं चीजें वैसी रहें जैसी कि वो हैं। मेरा मतलब इंडस्ट्री को ही देखिये और यह इतनी बड़ी इंडस्ट्री है, जी हां "एंटी एजिंग इंडस्ट्री।" यह आपको वैसा दिखाना चाहते हैं जैसे कि आप नहीं है, मतलब — जवान। जवान ? जब आप छोटे थे किसे फिक्र थी ? आपके मुंह पर दाने थे पर फिर भी "ओके यह तो ऐसा ही है।" फिर आप बूढ़े हुए और आपने एक झुर्री देखी और कहा कि "अरे हे भगवान नहीं, नहीं! झुर्रियां आना शुरू हो गयी हैं, मुझे तो बस…" एंटी रिंकल क्रीम" लगानी है। इंडिया में एक क्रीम है जिसका नाम है "फेयर एंड लवली" तो मैं एक टीवी चैनल के साथ इंटरव्यू कर रहा था। उन्होंने मुझसे पूछा वह बोले कि "आप आये और इतनी चमक है आपके चेहरे पर यह चमक कैसे है आप में ?" मैंने कहा क्योंकि मैं एक क्रीम लगता हूँ "फेयर एंड लवली।" जी नहीं — वह बस हंसने के लिए एक मजाक था।

बस और यही तो है इसके बारे में। हम वो बनना चाहते हैं जो कि हम हैं नहीं और क्या चाहत है कि हम वो बनना चाहते हैं जो कि हम है नहीं! कोई भी इंसान नहीं रहना चाहता वैसा ही क्या मैं बस इंसान रहूँ ? क्या मैं इंसान बन सकता हूँ — जिसके पास सब्र की संपत्ति है ? यह है असली संपत्ति। पर देखिये, अब आपको इंसान बनना पड़ेगा यह समझने के लिए कि आपके पास सब्र की संपत्ति है क्योंकि इसके अलावा आप क्या करेंगे ? आपको सब्र रखना ही है जैसे कि "हे भगवान! हे भगवान, मैं बंद हूँ मैं ये नहीं कर सकता, वो नहीं कर सकता – ये गलत है; वो गलत है; ये गलत है।" और ये सूची बस बढ़ती जाती है, बढ़ती जाती है, बढ़ती जाती है। लेकिन एक बार आप इंसान के नाते सोचने लग जाते हैं और अपनी असल संपत्ति की सराहना करने लगते हैं — वो सब्र, समझदारी, स्पष्टता, वो ताकत जो आप में है, वो रोशनी जो आप में है। जो इस निराशा के समय में भी जहां निराशा है हर जगह पर उम्मीद को जगाती है। क्यों ?

क्योंकि एक साफ-साफ प्रमाण है। हर रोज जब आप उठते हैं, हर बार कि जरूरी क्या है ? आपको बस बैठकर यह नहीं कहना कि "सांस अंदर; सांस बाहर; सांस अंदर; सांस बाहर!" कुछ चीजें अपने आप होती हैं; एक है करुणा; कमाल की करुणा है; कमाल की करुणा है जो अस्तित्व में है आपको उसकी सराहना करनी है। वह करुणा आपको उम्मीद देती है, उम्मीद आगे बढ़ने की, उम्मीद कि "हां चाहे स्थिति जो भी हो, चाहे जो भी स्थिति आ जाए मैं ठीक रहूंगा, मैं ठीक रहूंगा।" आप इस सबको जो भी चल रहा है मेरा मतलब, इसका सबसे बुरा भाग मतलब कि — सबसे बुरा भाग कोरोना वायरस का है। यह नहीं कि कोरोना वायरस आ गया है। यह है कि गलत जानकारी है और लोगों में और वो गलत जानकारी जो कुछ नेताओं को भी है। मुझे नहीं पता नेताओं के साथ क्या चल रहा है लेकिन जानते हैं जैसे कि "अच्छा हम यह करने वाले हैं, हम वो नहीं; हम ये करेंगे; हम वो करेंगे।" मैंने कहा "क्या कर रहे हैं।"

आप यूनाइटेड स्टेट को देखिए और वो जानते थे कि क्या चल रहा है, वो जानते थे चाइना में क्या चल रहा है और लोग तो बस सब जगह जा रहे थे घूमना, घूमना, घूमना, घूमना, और वो चीजें जो हमें लगा कि कमाल की हैं अचानक से ही "हे भगवान यह खतरनाक है!" जी हां। पर हम इंसान हैं; हमारा काम क्या है ? हम सोचते थे हमारा काम है आविष्कार करना और मशीन बनाना और देखो कि "मैंने ये करा है और वो किया है....." क्या हम कोरोना से उभर पाएंगे ? हां हम इससे उभर पाएंगे। पर हम इसके साथ जीयेंगे कैसे ? हमने क्या सीखा है इन सबसे ? यह बन गया है एक परेशानी नहीं, लेकिन एक महामारी, वैश्विक स्तर पर हमने इससे क्या सीखा इतने वर्षों में, हमने बीते वर्षों में और उससे पहले से हमने क्या सीखा ? क्या हमने सीखा कि इसकी वजह से एक मौत ही बहुत है ? अगर इससे बचा जा सकता है, तो इससे बचिए। कहां है ? कहां है तैयारी ? कहीं नहीं। लेकिन इस परिस्थिति में भी, इन पलों में भी मैं चाहता हूं कि आप खुद को देखें और खुद को देखने में जवाब ढूंढिए। सवालों को नहीं — आप जवाब ढूंढिए, जो आपके हृदय में है, जो आपके अस्तित्व में है, जो कोई भी गलत जानकारी जैसे नहीं हो सकते हैं।

सोशल मीडिया की जो भी अच्छाई है उनमें से एक अच्छाई है कि — वह गलत जानकारी बहुत आसानी से फैला देती है और ये बात — मैं इसके बारे में पढ़ रहा था कि इससे लोगों को घबराहट होती है ऐंगज़ाइइटी, तो इसमें अच्छा क्या है, एक ऐसी चीज में जो घबराहट देती है। जो लोगों को डराती है। इससे उदासी आ जाती है ये सभी चीजें शुरू हो जाती हैं नकारात्मकता सी। देखिये और एक ही तरीका है कि आप इन्हें रोक सकते हैं — आप एक ही तरह से इन सबको रोक सकते हैं — भीतर देखकर। इतना सब कूड़ा इसको आप रोक सकते है — भीतर झांककर। और कोई कहेगा कि "ओह हमें तो यह करना है; हमें वो करना है; हमें क्या कुछ करना है...." लेकिन सच में क्या करना है आपको ? सबसे जरूरी बात क्या है जो आपको करनी है ? अपनी प्राथमिकता समझिये। अपने सिद्धांतों को समझें। अपनी प्राथमिकता को समझिए। आपकी प्राथमिकता है कि आप इस स्वांस को लें। आपकी प्राथमिकता है मेरे दोस्तों कि अपने हृदय को जानिए। आपकी प्राथमिकता मेरे दोस्तों कि आप संतुष्ट रहें। आपकी प्राथमिकता है मेरे दोस्त शांति से रहना है। आपकी प्राथमिकता है मेरे दोस्त खुश रहना है। चाहे आपके पास कोई भी परिस्थिति क्यों ना आ जाए।

उस बहुत ही सुंदर साधारण खुशी में, उस सुंदर समुद्र में तैरना जहाँ शांति है। संतुष्ट रहना; शांत रहना; समझदार बनना — आगे की दिशा में देखना; वर्तमान के बारे में भूले हुए बिना; आज की बात भूले बिना; यह भूले बिना कि आज में क्या है! यही तो समस्या है। हम भविष्य के बारे में इतने उत्सुक हैं कि हम आज को भूल जाते हैं और हम वर्तमान को जब भूलते हैं और फिर भविष्य संदेह में हो जाता है। हम कल से इतना खुश हो गए हैं कि हम आज को भूल जाते हैं और जब हम आज को भूल जाते हैं फिर वो बीता हुआ कल हमारी किसी तरह से मदद नहीं करता। आपको, जी हां, बिलकुल परिस्थिति की जागरूकता बनाई रखनी होगी कि आज में क्या हो रहा है, जी हाँ वर्तमान में।

जहाँ आप प्यार करते हैं उसे जताइए! एक बार जताना काफी नहीं है — एक बार काफी नहीं है उस प्यार को बार-बार फिर से बार-बार जताइए! जी हाँ ऐसे करना है! ऐसे ही होगा! पता है यह पटैटो चिप्स की तरह है आप खाते हैं एक, फिर आप एक नहीं खा पाते, आपको दूसरा लेना ही है और फिर दूसरा और फिर एक और एक और। जैसे कि आइसक्रीम होती है आप एक चम्मच खाते हैं और इतनी अच्छी लगती है वह आपको कि आप थोड़ी और लेते हैं, फिर थोड़ी और, फिर थोड़ी और, फिर थोड़ी और। आप देखते हैं एक छोटा बच्चा उसके पास एक आइसक्रीम है। वह उसको खा रहा है और वह खुशी में है। मेरा मतलब उसका ध्यान केन्द्रित है! पूरी तरह से — बिल्कुल, बिल्कुल पूरी तरह से वह वहीं उस आइसक्रीम पर ध्यान दे रहा है। फर्क नहीं पड़ता कि आसपास की दुनिया में क्या चल रहा है और मुझे बिल्कुल वैसा ही बनना है — मुझे वैसा होना ही है, आपको वैसा बनना है। आज की खुशी में इतना लीन, इतना मग्न हो जाइये जो आज की खुशी है उसमें — वह सुन्दरता जो हृदय में नृत्य करती है वह हैं आप।

क्या आप खुद को दूसरों की नजरों से देखते हैं ? तो आपको खुद को पहले अपनी आंखों से देखना चाहिये — आपको खुद को अपनी आंखो से देखना ही चाहिये, लेकिन दूसरों की आंखों से देखना खुद को आसान होता है "वो क्या सोच रहे होंगे ?" यह ताकतवर बात है! यह कितनी ताकतवर बात है। यह बाकी लोगों के बारे में नहीं है। आपका जीवन आपके बारे में है। यह आपके हाथ में है आपकी सारी मेहनत, वो कमाल की मेहनत जो आपने अपनी मां के गर्भ से निकलकर इस दुनिया में आने में की है। आपने ही की है वो। वह आपने की है मेहनत सारी। फिर जिस दिन आप जायेंगे आप ही हैं जो दीवार के पार जायेंगे और इसलिये इसे कहते हैं "आपका जीवन — आपका जीवन, आपका अस्तित्व" और इसकी सराहना करने के लिये कि आप में वो सब्र हो, समझने के लिये कि आप कौन हैं और जब मैं कहता हूं कि "वर्तमान से सारी खुशी निकाल लीजिये जो आपके लिये है।" एक तोहफा है यह। यह एक तोहफा है इसे स्वीकार करें। इसे समझें। वरना जीवन तो जैसे कई लोग कहते हैं "ओह! इसमें ये बुरा है; उसमें वो बुरा है।" और जो लोग भीतर मौजूद खुशी को समझ चुके हैं वो नहीं कहते कि "कुछ खराब है।" वो कहते हैं "सब सुन्दर है। यह एक तोहफा है। वो कृतज्ञ रहते हैं।" तीन बातें "खुद को जानिये; सचेत जीवन जीयें और हृदय को कृतज्ञता से पूर्ण रखें!"

तो आपका बहुत-बहुत धन्यवाद — मैं आपसे कल मिलूंगा।

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