लॉकडाउन — सोलहवां दिन

प्रेम रावत के साथ (हिंदी में अनुवादित)
Apr 05, 2020
“प्रेम में बाधा या दूरी कोई मायने नहीं रखती। प्रेम है तो है - यही प्रेम की खासियत है। इसमें कोई सीमाएं नहीं होती। यह हमेशा ऐसे ही रहेगा।” — प्रेम रावत जी / प्रेम रावत जी "पीस एजुकेशन प्रोग्राम" की वीडियो श्रृंखला को प्रस्तुत करने की तैयारी कर रहे हैं। इस दौरान आपके लिए उनके पूर्व प्रकाशित अंग्रेजी लॉकडाउन वीडियो जो हिंदी में अनुवादित है, प्रस्तुत हैं।

प्रेम रावत:

आप सबको नमस्कार,

उम्मीद है आपकी सेहत बिल्कुल ठीक है। वीकेंड आ गया है और इसलिए हम कुछ सवालों के जवाब देंगे। “मैं किस तरह से सुंदरता और शांति ढूंढ सकता हूं जब दुनिया में इतना अंधकार फैला हुआ है और मुझमें भी ? मुझे अपने भीतर के जीवन से जुड़ने का तरीका नहीं मिल रहा है। मुझे पता है वह है जैसे आपके साथ शांति मिली है, मैं प्यार के माध्यम से बुरे विचारों और दर्द को मिटाना चाहता हूं ?”

यह बहुत ही आसान है कि यहां पर यह अजीब है कि मैंने अभी-अभी ऐसे ही सवाल का जवाब दिया ही था, बस मिलता हुआ। तो बात यह है कि आप समझें कि यह अंधकार यहां पर है लेकिन यहां पर रोशनी भी है और यह आप पर निर्भर करता है कि आप क्या चुनते हैं। पसंद आपकी होगी — आप अंधकार चुन सकते हैं और अंधकार आपको मिल जाएगा। और आप रोशनी चुन सकते हैं और रोशनी आपको मिलेगी, यह इतना ही आसान है बस। यह आसान है ना ?

अब आप सोचिए! जी हां, जब हम एक बुरी परिस्थिति में होते हैं कई बार तो हमें पता भी नहीं चलता कि हम उस स्थिति में जा रहे हैं, लेकिन हम धीरे-धीरे और यकीनन उस अंधकार की ओर जा रहे होते हैं। सचेत जीवन खो जाता है। हम सचेत होकर जीना नहीं चाहते हैं उसमें परेशानी होती है, वह मुश्किल भरा है तो हम क्या करना शुरू करते हैं ? सचेत जीयें! हम ध्यान नहीं देते — “यहां क्या होता है; वहां क्या होता है; यह क्या है; वह गलत; यह सही” और बस हम शुरू हो जाते हैं। हम यह कदम बनाते हैं, हम यह कदम चलते हैं और अंधकार की ओर जाते रहते हैं। हम अंधकार की ओर जा रहे हैं, हम यह बात ध्यान नहीं देते, सोचते नहीं कि हम खो रहे हैं और खोना एकदम से नहीं होता — यह एकदम से, अचानक से नहीं होता है। आपको लगता है कि आप सही जगह पर जा रहे हैं, लेकिन अचानक से ही ऐसा होता है कि “नहीं यह तो वह जगह नहीं, जहां पर मैं होना चाहता था।” और फिर अचानक आपको समझ में आता है और यह समझ में आना बहुत ज्यादा परेशान करने वाली चीज है कि “भाई क्या हुआ ? मैं कहां था ?” यह गलत सवाल है “मैं कैसे खो गया ?” पर सवाल होना चाहिए “मैं वापस कैसे जाऊं ?” यह नहीं कि “मैं कैसे खो गया!”

तो हम अंधकार की ओर जाते हैं। जीवन अचेतना में जीते हैं और यह आप इसे कह भी सकते हैं कि यह तो होने ही वाला है। लेकिन तब जीवन सचेत होकर जीने का भी विकल्प है आपके पास। मेरी भी एक पसंद है उन बातों को समझना, जो रोशनी के स्रोत हैं — वह मुझमें ही हैं। समझ के स्रोत मुझमें ही हैं। स्पष्टता के स्रोत — मेरे ही भीतर हैं और मुझे बाहर नहीं भटकना है, उसे देखते हुए और सोचना कि यह सब कहां पर है और बहुत सारे लोग वो कहते हैं कि “अरे! वह कितना अच्छा समय था लेकिन वह कहां चला गया ?”

देखिए! वह कहीं नहीं गया वह आप में ही है, हमेशा वह आप में ही है, हमेशा आप में ही था और हमेशा आप में ही रहेगा, आखिरी स्वांस तक। जी हां! क्या होता है हमारी स्थिति जो है — चाहे स्थिति जो भी हो ज्यादा भावुक कर देती है, पकड़ लेती है हमें, हरा देती है हमको, हमारी पसंद पर वह काबू पा लेती है। हमारी पसंद, हमारी समझ; हमारी स्पष्टता और उसे करने ही देते हैं हम लोग। क्योंकि तब ही इन चीजों पर काबू मिलता है उसे। और आपको इससे बिल्कुल विपरीत करना है, इससे उल्टा। आपको अपनी स्पष्टता को पकड़े रहना है। आपको उम्मीद को नहीं छोड़ना, आपको खुशी को नहीं छोड़ना, आपको समझ को नहीं छोड़ना, आपको अपनी शांति को नहीं छोड़ना और फिर एक तूफान की तरह तूफान चला जाएगा। सूरज फिर से उगेगा और सबकुछ ठीक हो जाएगा। तो यही बात आपको समझनी है कि ये ऐसे ही काम करता है और आप में वह सुंदरता है और वह सुंदरता हमेशा आप में ही रहेगी।

यह है एक और सवाल! “कई लोगों के सामने आर्थिक और नौकरी की परेशानी है। क्या आप हिम्मत की कुछ बातें उनसे कह सकते हैं जो लोग ऐसी स्थिति का सामना कर रहे हैं ?”

दोबारा, वही बात जो भी बाहर हो आपको आगे बढ़ने की ताकत रखनी ही होगी। वह हिम्मत ताकि आप आगे बढ़ें। अब दोबारा मैं आपको यह उदाहरण बताऊंगा जो मैं कई बार बताता हूं — जब आप अपनी मां के गर्भ से बाहर आए, जब आप पैदा हुए आपको जो करना था वह असंभव था। उस वक्त, जीवन के उस पल में आप सबसे कमजोर थे। हे भगवान! आप चल नहीं सकते थे, बात नहीं कर सकते थे, आप कुछ कह नहीं सकते थे, कुछ उठा नहीं सकते थे, आप बेहद कमजोर थे और सबकुछ, सबकुछ सच में आपके खिलाफ ही था। आपको तो उस समय में दुनिया बदलनी पड़ी थी असल में। मेरा मतलब, जी हां, वह सब जिसमें आप उस समय तक थे आपके लिए सबकुछ मां से ही मिल रहा था और अब वह सब चला गया था, बिल्कुल अलग। आपको स्वतंत्र बनना था जितनी ताकत आपको अपनी मां के गर्भ से बाहर निकलने में लगानी पड़ी होगी उतने में एक बड़ा रॉकेट धरती के वातावरण से बाहर निकल जाता, यह थी स्थिति। सोचिए! यह थी स्थिति।

आप अपनी मां के गर्भ में थे, पानी में डूबे हुए थे और अब आप बाहर आने वाले थे इस दुनिया में, जहां आपको हवा से सांस लेनी थी और मैं तो शारीरिक स्थिति की बात कर रहा हूं। यह बिल्कुल ही अलग होने वाली थी, बिल्कुल, बिल्कुल, बिल्कुल अलग। तो फिर आपने क्या किया ? आपने स्थिति की गंभीरता को देखा और फिर कहा कि “जी नहीं!” तो आप तो पैदा ही नहीं होते — ऐसे तो आप पैदा ही नहीं होते। तो आपने उस चुनौती का सामना किया। वह इच्छा आप में थी। जी हां, और हां बिल्कुल आपने उसे चुनौती की तरह नहीं देखा आपको बस वह सामने से मिल गई थी और बस यही था। तो क्या आपको लगता है ये जितनी भी चुनौतियां हैं जिनके बारे में आप आज सोच रहे हैं यह उस चुनौती से बड़े थे, जो आप पार करके आए हैं। मैं सोच भी नहीं सकता ऐसा कि ये उस बात से बड़े हो सकते हैं, किसी भी तरह।

मैं बात करता हूं बदलने की — अनचेंज। लोगों को बदलाव शब्द पसंद नहीं “मैं नहीं बदलना चाहता।” लोग खुद से कहते हैं “मुझे नहीं बदलना!” तो मैंने सोचा किसी तरह, किसी और तरह से बताया जाए। तो इसका मतलब जीवन में एक समय पर आप बहुत मजबूत थे। आप बहुत ज्यादा ताकतवर थे; आप स्पष्ट थे कि आपके उद्देश्य क्या हैं! आप उन्हें अच्छे से जानते थे और आप में कोई झिझक नहीं थी उन्हें पूरा करने में। तो यह बदलना, अनचेंज — बदलाव तो हुआ है और अब चीजें काफी बदल रही हैं तो शायद एक अलग बदलाव चाहिए हमें ताकि वह ताकत वापस मिल पाए। वह स्पष्टता वापस चाहिए; वह समझ वापस चाहिए — कमजोरी नहीं, उदासी नहीं, निराशा नहीं, ये बहस की बातें नहीं कि “ओह अब मेरे साथ क्या होगा ?” जो चुनौती आए उसे झूझिये और मेरी मानिए यह होगा! कई लोगों के लिए बस एक लंबा, लंबा सफर जो अभी शुरू ही हुआ है — अलग रहना और बाकी सब इसका एक भाग ही हैं। इसके बाद हमें देखना है कि क्या होता है, क्योंकि मैं बता सकता हूं सबकुछ ठीक नहीं लग रहा है।

कुछ नेता जो आज हमारे पास हैं दुनिया में वह अच्छे नहीं हैं, मैं किसी का नाम नहीं लूंगा। जी हां, पर वह अच्छे नेता नहीं हैं। वह बिल्कुल, आप उन्हें देख सकते हैं कुछ भी बोलते हुए। वह कुछ भी कहते हैं, जैसे काम के बीच में लंच करने गए हों और वापस आए ही ना हों। तो आप समझ सकते हैं कि वह कैसे हैं! उनको कुछ नहीं पता कि क्या चल रहा है! उनको लगता है कि मृत्यु और ये सब बातें सिर्फ एक संख्या है, यह ग्राफ है। पर मेरे लिए एक मृत्यु भी — मतलब एक नुकसान भी यह प्राकृतिक नहीं था, यह काफी था। यह बुरा था और हम इसके बारे में कुछ कर सकते थे। देखिए हमें मदद कहना नहीं आता। हम मदद कहना भूल गए है; हम मदद भूल गए हैं। हम यह कहना भूल गए हैं कि “मैं आपकी मदद कर दूं!” हम भूल गए हैं इंसानियत — इंसानियत अब खत्म हो रही है और जबतक इंसानियत कम होती रहेगी हम इंसानों के पास क्या बचेगा ? कुछ नहीं! हम किस पर निर्भर करेंगे ? कुछ नहीं! हम किसी की ओर देख भी पाएंगे उम्मीद से ? जी नहीं! तो यह एक बहुत-बहुत ही लंबा सफर होने वाला है।

तो यह है एक और जरूरी सवाल मेरे हिसाब से। “डियर प्रेम रावत! मुझे आपको सुबह-सुबह सुनना अच्छा लगता है। मेरी 95 वर्ष की दादी वृद्ध आश्रम में हैं और वहां जाना मना है। मुझे डर है उन्हें कुछ हो ना जाए अकेले में ही और मौका ना मिले मुझे उनको अलविदा कहने का।” (अच्छा है, अच्छा ये दादा की बात कर रहे हैं माफ कीजिएगा।) “अलविदा कहने का कोई मौका नहीं है। अंतिम-संस्कार करने का भी मौका नहीं है। मुझे पता है उनका जीवन अच्छा था, लेकिन इस तरह से जीवन अंत हो यह कौन चाहता है। मैं उनको क्या लिखूं ताकि उनकी मदद हो पाए इस समय ?”

सिर्फ एक बात लिखिये कि आप प्यार करते हैं उनसे। आप यही कह सकते हैं “मैं आपसे प्यार करता हूं। आप अच्छी रहिए; सुरक्षित रहिए। और मैं आपसे प्यार करता हूं और मैं आपको हमेशा प्यार करता रहूंगा। आप मेरी यादों में हैं और आप मेरी यादों में हमेशा ही रहेंगी; मेरे हृदय में और मैं आपसे प्यार करता हूं।” और आप क्या कह सकते हैं ? सच मानिए! क्या कह सकते हैं! आपको स्थिति स्वीकारनी होगी। कई बार जो रास्ता होता है वह वैसा नहीं होता, जैसा हमने सोचा होता है। सच मानिए, मेरी बात! आप इस बारे में कुछ नहीं कर सकते हैं। अफसोस की बात है। यह बुरा है। वह बीमारी को बढ़ने आप नहीं देना चाहते हैं इसलिए अलग किया हुआ है सबको। आप वहां नहीं जा सकते हैं। मुझे पता है आप कुछ सोच के ही बैठे हुए थे, लेकिन आपको वह मन की तस्वीर अब अलग रखनी होगी और एक सच्चाई को आपको देखना होगा। और सच्चाई भी सुंदर ही है कि आप प्यार करते हैं और वह भी आपसे प्यार करते हैं — यह सच बात है!

कोरोना वायरस हो या ना हो आप प्यार करते हैं उनसे और वह आपसे। कोई दीवार, कोई दूरी नहीं है। वो दो दीवारें भी प्यार को अलग नहीं कर सकती हैं, यही तो है प्यार! प्यार दीवार पार कर सकता है; प्यार लंबी दूरी तय कर सकता है; प्यार समुद्र की गहराई में पहुंच सकता है; प्यार ऊपर आकाश में स्वर्ग तक पहुंच सकता है। प्यार है और यही प्यार को खास बनाता है। इसकी कोई सीमा नहीं है। यह कभी नहीं खत्म होगा। जबतक आप जीवित हैं आप उन्हें रोज प्यार करते रहेंगे और वह आपको प्यार करते रहेंगे, यह कितनी कमाल की बात है, कितना अच्छा है ये। जो स्थिति है उसे अपनाइए और सबसे जरूरी बात उस प्यार को मानिए जो आप में है अपने प्रियजनों के लिए। ऐसा ही होना चाहिए। अपने मन में कोई ख्याली तस्वीर मत रहने दीजिए, बस उन्हें सच्चाई बनाइए। सच्चाई को देखिए जो है और शायद आपको उससे मदद मिलेगी।

तो आप सबका धन्यवाद! आज के लिए इतना ही समय है हमारे पास। हम कल कुछ और सवालों के साथ लौटेंगे। सुरक्षित रहें और रहिए खुश!

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