लॉकडाउन — उन्नीसवां दिन

प्रेम रावत के साथ (हिंदी में अनुवादित)
Apr 08, 2020
“हमें अपने आप से एक होने की जरूरत है, समझें कि हम कौन हैं, ताकि हम आगे बढ़ सकें और हर एक के लिए यह संसार बेहतर बन सके।” — प्रेम रावत जी / प्रेम रावत जी "पीस एजुकेशन प्रोग्राम" की वीडियो श्रृंखला को प्रस्तुत करने की तैयारी कर रहे हैं। इस दौरान आपके लिए उनके पूर्व प्रकाशित अंग्रेजी लॉकडाउन वीडियो जो हिंदी में अनुवादित है, प्रस्तुत हैं।

प्रेम रावत:

हेलो नमस्कार सभी को।

उम्मीद है आप सब ठीक हैं और इन परिस्थिति में भी ठीक रहने का प्रयास कर रहे हैं। मुझे आपसे ऐसी ही आशा है हम यही कर सकते हैं — एक-एक कदम लें एक-एक दिन करके एक-एक पल यह जीवन का सही तरीका है। तो हर बात को आराम से देखें। हां, हमारी क्षमता है कल का सोचने की। हां, हमें कल का सबकुछ याद भी है। पर हम यह भी समझ सकते हैं कि आज का महत्व क्या है ? हमारे भीतर एक कमाल की ताकत है वर्तमान को समझने की। जबतक हम यह समझदारी प्रयोग में नहीं लाते, वह क्षमता जिससे हम वर्तमान को समझ पाते हैं कि आज का अर्थ क्या है। कल की तैयारी करने को बेमतलब क्यों समझते हैं हम लोग और कल तो जा चुका है और वह वापस नहीं आने वाला और वो कभी नहीं आएगा यह समझ लेना।

लेकिन आज यह पल आपके लिए संदेश लाया है और वह संदेश बहुत गहरा है। यह संदेश बहुत आसान है और यह संदेश बहुत स्पष्ट है और यह संदेश कहता है “आप अस्तित्व, आनंद!” और इस संसार का आनंद नहीं — वह आनंद नहीं जिसकी बात अक्सर आम लोग करते हैं "हां, चलो समुद्र किनारे चलें” या “चलो ऐसा करते हैं, चलो वैसा करते हैं।" वह आनंद जो आपके भीतर छुपा है — वह आनंद जो आपके अस्तित्व में है; वह आनंद जो जीवित होने में है; वह आनंद जो यह समझने में आता है कि यह पल आपके जीवन में क्या बातें या चीजें ला रहा है! क्या यह जीवन, क्या यह अस्तित्व एक तोहफा है ? यह तोहफा है अगर आप समझें कि यह खास है। अगर आप समझें, अगर आप यह तोहफा स्वीकारने को तैयार हैं, अगर आप यह तोहफा लेने को तैयार हैं, अगर आप यह तोहफा खोलना चाहते हैं तो फिर यह तोहफा है। वरना इसका कोई अर्थ नहीं है। मेरा मतलब, आपसे पहले कितने ही लोग और आपके बाद कितने ही लोग इस दुनिया में आए और चले गए हैं और इससे बताइए क्या फर्क पड़ा है ? कोई और इंसान….

आजकल सब कुछ आंकड़ों में है और हर रोज जब मैं उठता हूं मैं एक वेबसाइट देखता हूं और इसका नाम है "वर्ल्डओमीटर्स।" मैं इस वेबसाइट पर देखता हूं कि आंकड़े और संख्या ही हैं। संख्या पैदा हुए लोगों की, वो लोग जो मर गए हैं — सभी लोग सबकुछ और फिर कोरोना वायरस की भी जानकारी होती है वहां पर। मैं उन आंकड़ों को देखता हूं कि "हां यह संख्या इंसानी जिंदगी की है। लेकिन क्या है सच में जो ये आंकड़े दर्शाते हैं कि असल में क्या चल रहा है। जो जीवन पर खतरा है।" आप कहते हैं, " ओह, हां इतने सारे लोग मर गए और वो बुजुर्ग थे।" यह गलत बात है। उदास करने वाली बात। क्योंकि एक पूरी पीढ़ी उस ज्ञान के बिना बड़ी होगी और वो सारी बातें और वो सारी जानकारी जो उनके दादा-दादी उन्हें देते। मेरा मतलब यह कितना कीमती है, कितना जरूरी है यह। कोई बताने वाला तो होता "यह ऐसा करना होता है। कोई बात नहीं।” सबकुछ ठीक हो जाएगा हमेशा हमारे हिसाब से काम नहीं होते हैं; यह तो किसी ने नहीं सोचा था।

कई बार मां-बाप उनके पास समय नहीं होता। लेकिन दादा-दादी के पास समय होता है और वह ज्ञान आगे जाता है एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी से अगली पीढ़ी और यह है मूल्य — यह संख्या नहीं है, लेकिन मूल्य उस व्यक्ति की जो यहां पर है, जीवन की। क्योंकि इनमें से एक संख्या (शायद वह हजारों में हो), लेकिन वह प्रतिनिधि है इंसानों की। वह आपको दर्शाती है; मेरे बारे में नहीं। दर्शाती है सच में इस स्वांस का सही मतलब, जो हमारे भीतर आ रही है। हमें एक मौका मिला है जीने का — एक मौका मिला है कुछ अच्छा करने का। और मैं आपसे ये सभी बातें बोल रहा हूं क्योंकि मुझे लगता है कि कभी-कभी हमें अपना सिर रेत से बाहर निकालना चाहिए (एक शुतुरमुर्ग की तरह) और आसपास देखना चाहिए उस सच्चाई को, वह सुंदरता जो अस्तित्व में है। क्योंकि हां — हां कई बुरी चीजें हो रही हैं। कुछ विश्व नेता बिल्कुल सक्षम नहीं हैं। उन्हें सच में कुछ भी नहीं आता। उन्होंने यह तूफान आता हुआ देखा और फिर भी कुछ नहीं किया जबतक देर नहीं हो गई। और इस सबकी इतनी बड़ी सजा मिली है, बुरी हालत, खतरनाक माहौल है…. लेकिन इस परेशानी में भी आपको अपना सिर रेत से बाहर निकालना है और सच्चाई को देखना है। सच क्या है ? सुंदर क्या है; वह जो अच्छा है।

क्योंकि आपके भीतर वो भेड़िये हैं — एक अच्छा भेड़िया और एक बुरा भेड़िया और वह लड़ते हैं। पर कौन-सा भेड़िया जीतेगा ? प्रत्यक्ष है — जिसे आप जीतायेंगे। अगर इस परिस्थिति में आप बुरे भेड़िए को जीता रहे हैं तो वही जीतने वाला है और मेरी सच मानिए जब बुरा भेड़िया जीतता है यह आपका जीवन बुरा बना देता है और यह इतने बुरे वक्त में और भी ज्यादा बुरा हो जायेगा। लेकिन अगर आप अच्छे भेड़िए को जीताते हैं… वह अच्छा भेड़िया क्या चाहता है ? वह चाहता है करुणा। वह चाहता है स्पष्टता। वह चाहता है खुशी, पूर्ण होना। और अगर ये चीजें उस भेड़िए को दी जाती हैं वह मजबूत बनता है और फिर यह बुराई पर और बुरा नहीं होगा यह कुछ अच्छा होगा, कुछ सीखा जाएगा, कुछ समझा जाएगा।

एक कहावत है "जब आप झुके हुए हों कुछ उठा लीजिए। आप इतने करीब तो हैं ही; कुछ उठा लीजिए।" और मैं यह मानता हूं जब आप जीवन में झुके हों, तो कुछ उठाइए। समझे! यह बात हमेशा रही है “जब बुराई का समय होता है आपने इसकी तैयारी तभी कर लेनी चाहिए जब समय अच्छा हो।” बुरे वक्त की तैयारी करने में आप उसकी तैयारी तभी कर लें जब वक्त अच्छा है। और सवाल यह आता है, “क्या आपने किया ? क्या आपने समय रहते तैयारी की ?” या फिर आप बस कह रहे थे "हां, सबकुछ ठीक है; कुछ बुरा नहीं होगा। देखिए, यहां पर..."

यही तो होता है कई बार सभ्यताओं में। और यह पहली बार नहीं होगा कि सभ्यता के इतना विकसित होने के बाद इस ऊंचाई पर लोग खो गए। लोग सोचने लगे कि "हे भगवान, हम इतने ताकतवर हैं; हम ये हैं; हम वो हैं। मतलब कि कुछ बुरा नहीं होगा…” सब लोग अलग सच्चाई में हैं, सब। अब अलग सच्चाई को देखा — काश! हम देख पाते! क्योंकि यह सच्चाई इतनी अच्छी नहीं है। कुछ अलग सच्चाई ही अच्छी थी। इस बात से इंसानों की मदद कैसे होगी ? इसलिए मैं लोगों से कहता रहता हूं, लोग हमेशा मुझसे कहते थे "यह क्या है; इसका अर्थ बताएं ?" और मैं कहता था, “रुकिये, रुकिये, रुकिये, रुकिये, रुकिये, रुकिये, रुकिये आप एक इंसान हैं।” तुलनात्मक रूप से हमने सच में इस आधुनिक रूप में, यह आधुनिक व्यक्ति होने के नाते हमें ज्यादा समय नहीं हुआ है यहां पर। हमने अभी सबकुछ समझा भी नहीं है। हम अब भी पुरानी-सी दुनिया में रहते हैं और हम मतलब कि हम सोच सकते हैं कि इस आधुनिक 2020 में और इस तकनीकी के बीच रह रहे हैं, लेकिन सच्चाई है कि महिलाओं को आज भी हमारे समाज में बराबरी नहीं मिलती है और यह अकल्पनीय है।

ज्यादा समय पहले नहीं कुछ वर्षों पहले ही और मुझे यकीन है कि इंडिया जैसे देशों में यह अब तक चल रहा होगा कि अलग समुदाय में आप शादी नहीं कर सकते। इसका प्यार से कोई लेना-देना नहीं है। लेकिन यह है कि "नहीं, नहीं यह व्यक्ति इससे शादी नहीं कर सकता।" हालांकि समाज काफी बदल गया है लेकिन अब भी काफी बदलाव बाकी हैं और एलजीबीटी समुदाय के लोग हैं — जिन्हें इतनी नफरत का सामना करना पड़ता है और हम उन्हें जैसे वो हैं, उन्हें वैसे अपनाते नहीं, इंसान की तरह भी नहीं अपनाते। और समाज अब भी इतना ज्यादा बंटा हुआ है — बुरा लगता है। मुझे यह बात पता है कि टीवी पर ऐसे शोज़ हैं जहां पर लोगों द्वारा जमाखोरी को दिखाया जाता है और उनके पास इतना कुछ है कि यदि आप उनके कमरों में जाएंगे तो जगह भी नहीं मिलेगी। लेकिन आपको क्या लगता है बड़ी कंपनियां क्या कर रही हैं ? और जब वह जमा करती हैं (पैसे इकट्ठा करती हैं), उनकी तारीफ होती है, "आपने तो बहुत अच्छा किया!" लेकिन वह तो बस पैसे को जमा कर रहे हैं। जब, “लेकिन अच्छा, देखिए, देखिए कैसे वह इंसान इतना कामयाब हो गया।" शायद उस इंसान ने, उनके पास क्या है, उन्होंने भी किसी से लिया ही होगा।

जब भ्रष्टाचार होता है तब ऐसा ही होता है। किसी गरीब के मुंह से छीनकर खाना ले लेते हैं। हम जितना उगाते हैं, उससे कहीं ज्यादा बर्बाद कर देते हैं। यह है वह समाज जिसकी रचना हमने अपने लिए की है ? अब वक्त है सच में, सोचने का इस सब पर, यह समझना कि “हमें क्या चाहिए ? क्या हम इस धरती पर बंटकर रहना चाहते हैं या फिर हम एक साथ मिलकर रहना चाहते हैं ? क्या हम ऐसी दुनिया चाहते हैं जिसमें सभी लोग सुरक्षित महसूस कर पायें या हम ऐसी दुनिया चाहते हैं जहां पर सबको खतरा और खतरा और खतरा और खतरा ही महसूस होता रहे ?”

इन सवालों के जवाब मेरे दोस्तों आपके हृदय में है और सभी इंसानों के हृदय में है। यह कोई अनोखे विचार नहीं हैं जो 2020 में अभी-अभी दिमाग में आए हैं। यह वो बातें हैं और विचार हैं जो बहुत लंबे समय से रहे हैं। दरअसल तब से जब से दुनिया में समाज रहे हैं। आजाद होने की इच्छा; आगे बढ़ने की इच्छा; बेहतर होने की इच्छा और एकता लाने की इच्छा। और पूरी मानवता की बेहतरी के लिए काम करते रहना। जिस दुनिया का निर्माण हम आज करेंगे, वही दुनिया कल भी रहेगी और उसके बाद भी और उसके बाद भी और उसके बाद भी। चाहे आपको पसंद हो या नहीं, आप ही कल के रचयिता हैं। लेकिन मेरी मानिए आप कभी यह नहीं समझ पाएंगे कि भविष्य का अर्थ क्या है अगर आप वर्तमान को नहीं समझते। आप कल का मूल्य नहीं जान पाएंगे अगर आप आज का मूल्य नहीं जान पाए। अगर वर्तमान आपके लिए रहस्यमय है तो भविष्य भी रहस्यमय ही रहेगा।

इसलिए यही समय है; यह समय है एक कदम लेने का, भीतर देखने का, अनिश्चितता के बारे में सोचने का नहीं। लेकिन निश्चितता के बारे में सोचना जो हम ला सकते हैं। एकजुट होने का समय है जैसे हम पहले कभी नहीं थे। और बाकी पूरी दुनिया के साथ होने से ज्यादा जरूरी होगा कि हम अपने आपके साथ जुड़ें। हम दो नहीं हो सकते, हम तीन नहीं हो सकते, चार नहीं हो सकते — हमें एक होना है अपने आप में। हमें जानना है कि हम कौन हैं; हमें समझना है कि हम कौन हैं ताकि हम आगे बढ़े और सभी के लिए एक बेहतर दुनिया बना पाएं। ताकि हम समझें — हम समझें वह मतलब “मानवता का, मानवता”, करुणा पूरी दुनिया के सभी लोगों के लिए — सबके लिए।

तो आप सभी का धन्यवाद! मैं आपसे फिर बात करूंगा। उम्मीद है आपको कुछ सोचेंगे इस बारे में। और सबसे जरूरी सुरक्षित रहें; ठीक रहें और खुश रहें।

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