लॉकडाउन — बाईसवां दिन

प्रेम रावत के साथ (हिंदी में अनुवादित)
Apr 11, 2020
“मैं अपने अंदर शांति चाहता हूँ; मैं आज अपने अंदर शांति महसूस करना चाहता हूं।” — प्रेम रावत जी / प्रेम रावत जी "पीस एजुकेशन प्रोग्राम" की वीडियो श्रृंखला को प्रस्तुत करने की तैयारी कर रहे हैं। इस दौरान आपके लिए उनके पूर्व प्रकाशित अंग्रेजी लॉकडाउन वीडियो जो हिंदी में अनुवादित है, प्रस्तुत हैं।

प्रेम रावत:

नमस्कार! आशा करता हूं आप सब ठीक से होंगे। अभी भी दुनिया में कितना कुछ हो रहा है — लेकिन आज मैं फिर आपके अस्तित्व के बारे में बात करना चाहूँगा — इस धरती की पहचान होने के नाते आपके, अपने, हमारे अस्तित्व की। और इसका क्या मतलब है ? मतलब है कि यह एक भेंट है — सच में क्योंकि हममें से कोई भी ऐसा नहीं है जो वेंडिंग मशीन में अपने पैसे डाल कर यह कहेगा कि "ठीक है मुझे यह चाहिए” और बटन दबाया और बस हम यहाँ हैं। यह कितना अच्छा है, क्योंकि सिर्फ प्रशंसा से ही आप यह समझ पाएंगे कि ये सब किस बारे में है। अब आप इसे “प्रबोधन” कहें या “सबको जानने वाला” कहें, आप इसे जो चाहे कहें जैसा लोग कहते हैं — लेकिन बस थोड़ी-सी प्रशंसा, अपने अस्तित्व के लिए सराहना, प्रशंसा जीवन के लिए, प्रशंसा स्पष्टता के लिए, प्रशंसा खुशी के लिए…

इस खूबसूरत रचना में शामिल होने के लिए प्रशंसा — लाखों, लाखों, लाखों और लाखों, लाखों वर्षों के प्रयोग, एक प्रजाति से दूसरी प्रजाति में तीसरी प्रजाति में चौथी प्रजाति में विकसित होने के लिए है। और उनमें से हर एक प्रजाति कुछ ना कुछ योगदान करती है कि एक इंसान के रूप में हम आज क्या हैं, तो इससे काफी कुछ संभव हुआ है। हाल ही में बहुत पहले की बात नहीं है उन्हें यह पता चला कि वहां शायद दूसरी प्रजातियां भी मौजूद थीं। बहुत हद तक — होमो इरेक्टस, लेकिन हमारे साथ रहने वाली अन्य प्रजातियां और यह मन को लुभा देने वाली बात है वहां से लेकर यहां तक, जहां हम आज हैं वह सारे बदलाव जो हजारों सालों से लाखों वर्षों से करोड़ों वर्षों से बदलता आ रहा है कुछ नया और बेहतर करने की तलाश में। और कुछ बेहतर करने के प्रयास में हम खुद को इस चौराहे पर खड़ा पाते हैं। और इस चौराहे पर काफी खतरा है। एक बात तो स्पष्ट है और वह यह कि हम बहुत ही नाजुक हैं और यह सब साफ-साफ दिख रहा है। जैसे ही यह लॉकडाउन शुरू होता है यहां नहीं जा सकते, वहां नहीं जा सकते, लोग परेशान हो रहे हैं। चारों ओर इतना कुछ हो रहा है और लोग डरे हुए हैं, पूरी मानवजाति यह सोचकर डरी हुई है कि "अब उनका क्या होने वाला है ?"

तो हमने अपने चारों तरफ जितना कुछ भी बनाया है वह सब हमें कोई गारंटी नहीं देती। अचानक आज हम साल 2020 में हैं। जब आप 2020 को एक “कल्पना” जैसा सोचते हैं, जो एक सुंदर कल्पना है, एक महान कल्पना। और 2020 के बीच में जब इतनी परेशानी, इतना डर, इतनी गलत जानकारी, इतना संदेह उठा — जिसने आपको सोचने पर मजबूर कर दिया कि "एक मिनट रुको; क्या हम एक प्रजाति, मानवजाति — असल कोई बदलाव ला पाए ? क्या हम किसी भी तरह विकसित हो पाए ?" और अब तक क्या हम विकसित नहीं हुए — सिर्फ अगर हम यह मान लें कि वास्तविकता कितनी साधारण और सुंदर है — यह सच कि हम हैं और हो सकता है बाहर हम एक सही दुनिया बनाने की कोशिश करें। (हो सकता है हम बना पायें या शायद नहीं भी।)

कोरोना वायरस के बारे में एक चीज यह तो है ही कि — किसी भी हाल में यह हमारे लिए वरदान तो नहीं है। लेकिन मैं आपको एक बात बता दूं इसने वातावरण की हवा को शुद्ध होने का अवसर दिया। इसने पूरे प्राकृतिक जीवन को एक विराम दिया। अचानक ही हर वो चीज, जो हमारे वातावरण को मैला कर रही थी, गाड़ियों से खचाखच भरी सड़कों पर धुआं, प्रदूषण पैदा करने वाले कारखाने, दूषित करने वाली हर वो चीज सब अचानक थम गयी एक सही दुनिया की खोज में। हमने असल में अविश्वसनीय रूप से एक अपूर्व दुनिया का निर्माण कर दिया। क्या हम कभी भी इस बात को मानेंगे ? शायद नहीं! क्योंकि उसके लिए हमारे अंदर गड्स होना चाहिए; ऐसा कहने के लिए काफी हिम्मत होनी चाहिए, “हां, शायद हम एक सही दुनिया की खोज के लिए सही रास्ते पर नहीं जा रहे थे।” क्योंकि ये सब लालच की वजह से है। तब भी अगर हम पीछे मुड़कर लेखन को देखना शुरू करें — उदाहरण के तौर पर कबीर के लेखन, नानक के लेखन और कई लोगों के लेखन जिन्होंने अपने मन में यह बात बैठा ली थी कि “इस धरती पर हम सिर्फ अपने लालच को पूरा करने के लिए नहीं आए हैं।” फिर ये महान लोग बहुत ही खूबसूरत तरीके से मन के अंदर झांकते हैं और ये बताते हैं "नहीं, लालच पूरा करने की बिल्कुल जरूरत है — अगर आप किसी चीज के लिए लालच करते हैं तो उसे पाने की लालच रखें। अगर आपको लालच करना ही है तो शांति का लालच रखिए।"

यह वास्तव में एक अलग मानसिकता है; यह एक बहुत ही अलग तरह की सोच है कि “मेरे अंदर जो शांति है मैं उसकी तलाश बाहर कर रहा हूं। मैं उसे बाहर उत्पन्न करने की कोशिश कर रहा हूं।” क्योंकि जब लोग मुझसे शांति की बात करते हैं तो वो अपने मन के अंदर की शांति के बारे में नहीं सोच रहे होते हैं; वो बाहर की शांति के बारे में सोचते हैं। “क्या बाहर शांति हो सकती है ?” मैं नहीं जानता। क्या हमारे अंदर शांति मिल सकती है; हां, यह मैं जानता हूं। और वह शांति जो मेरे अंदर है वही मुझे बनाती है, वही शांति मेरी पहचान है; मेरे मन की अंदरूनी शांति। बाहर की शांति नहीं। अगर मैं एक ऐसे कमरे में जाऊं जो बहुत ही शांत है तो क्या मेरे अंदर भी कोई आवाज नहीं आएगी; शांत रहेगा सबकुछ ? नहीं, क्योंकि उस कमरे की शांति मेरे बारे में नहीं बताती। मैं जो हूं वह मेरे अंदर की शांति ही बता सकती है। मेरी जो पहचान है क्या वह उस जगह की खूबसूरती बताती है, जहां मैं हूं — या वह गुस्सा जो मेरे अंदर है ?

मैं खुद को यह सोचने से रोक नहीं पाता कि हम सबको जागरूक होकर जीने का वक्त आ गया है। अभी लॉकडाउन में, इस परिस्थिति में हमें हर एक दिन जागरूक होकर जीने की आदत डाल लेनी चाहिए। यह अभ्यास करना चाहिए, जागरूक होना चाहिए, “जिस परिस्थिति में हम अभी हैं हमारे अंदर इस वक्त क्या चल रहा है ?” जब गुस्सा आता है — और मैं यह जानता हूं कि गुस्सा कब आता है। गुस्सा बहुत जल्दी बाहर निकलता है इससे पहले कि आप ब्रेक लगायें वह बाहर निकल चुका होता है — और नुकसान कर चुका होता है। मैं इस गुस्से को कैसे रोक सकता हूं ? तो मैं आपको बता दूं वहां तक पहुंचने के लिए, मतलब अपने गुस्से पर काबू करने के लिए मुझे बहुत अभ्यास करना पड़ा, धीरे-धीरे लेकिन लगातार, धीरे-धीरे लगातार। अब शायद वक्त आ गया है कि हम इस मौके का फायदा उठायें और कुछ अलग चीजों का अभ्यास करें। जागरूक होकर जीने का अभ्यास देखने के लिए, जानने के लिए “वह क्या है — क्या है वह जिसे मैं पाना चाहता हूं ? मेरे पास आज जो मुझमें है मैं उसका इस्तेमाल कैसे कर सकता हूं ? आज की परिस्थिति में मेरे अंदर जो चीजें पहले से ही मौजूद हैं मैं उसका इस्तेमाल कैसे करूँ ? कैसे मैं अपने अंतर्मन में शांति पैदा करूं ?”

क्योंकि किसी और को इसके लिए दोषी ठहराना तो बहुत ही आसान है " ये लोग हैं जो मेरी शांति भंग कर रहे हैं; इन लोगों को शांति बनाए रखने की जरूरत है।" लेकिन यह उनके बारे में नहीं है; किसी दूसरे के बारे में नहीं, बल्कि आपके अपने बारे में है। जागरूक होकर आपको जीना जरूरी है; बाकी लोगों की जागरूकता के लिए आपको नहीं सोचना। इस चीज के लिए आपको अभ्यास की जरूरत है, बाकी सभी चीजों की तरह ही। अगर कोई फिट नहीं दिखता और उन्हें फिट रहना है तो उनके लिए एक दिन काफी नहीं है। और उससे कोई फायदा भी नहीं… अगर वह व्यायाम वाली साइकिल का इस्तेमाल करते हैं, ट्रेडमिल पर चलते हैं — दौड़ते हैं, दौड़ने की कोशिश करते हैं तो — सच तो यह है कि अगर वह फिट नहीं हैं तो वो लोग इतना भी नहीं कर पाएंगे।

लेकिन सब लोग ये बात जानते हैं कि हर दिन, बार-बार, अगर अभ्यास किया जाए तो एक दिन वो अपनी मंजिल पाने में सफल हो ही जाएंगे; वो लोग अपने अभ्यास और लगन से उस मुकाम तक पहुंच जाएंगे जहाँ वो जाना चाहते हैं। लेकिन उसके लिए बहुत धीरज रखने की जरूरत पड़ेगी; उस मेहनत और लगन की जरूरत पड़ेगी; हर एक दिन को जागरुक होकर जीने की जरूरत पड़ेगी — यह कहने के लिए ठीक है "मैं अपने अंदर शांति पैदा करना चाहता हूं; मैं आज अपने अंदर शांति महसूस करना चाहता हूं। आज मैं इसके लिए क्या कर सकता हूं ? आज जो भी मेरे साथ होगा उसके लिए मेरी प्रतिक्रिया अंदर से क्या होगी ?" सबसे जरूरी बात, अंदर से क्या होगी।

बहुत-बहुत ही आसान, अगर हम थोड़ा-थोड़ा करके इसे देखें। शांति पाने के लिए ऐसी धारणा है, अच्छे इंसान बनने के लिए ऐसी धारणा है कि यह एक ही झटके में हो सकता है। लेकिन यह एक ही झटके में नहीं होता। क्योंकि बुरा होने के लिए भी अभ्यास की जरूरत होती है। बुरा बनने के लिए भी वक्त लगा था। बुरा बनने के लिए भी काफी प्रयास करना पड़ता है। तो अच्छा बनने के लिए भी भरपूर अभ्यास की जरूरत तो पड़ेगी ही।

क्या यह हो सकता है ? हां, हो सकता है। लेकिन यह आपके ऊपर निर्भर करता है। क्या आप अपने अंदर की उन चीजों को पुकार सकते हैं ? मैंने अपनी किसी बातचीत में इसी के बारे में पहले भी बताया है। “क्या आप अपने आप में खुश हैं।” क्या आप अंदर से खुश हैं ?

क्योंकि अगर आप खुद से खुश नहीं हैं, अगर आप चाहते हैं कि आप कोई और हों, अगर आप खुद को कोई और समझते हैं — अगर यही आपका लक्ष्य है, (आप खुद की तरह नहीं आप किसी और की तरह) तब समस्या हो सकती है। क्योंकि आप कोई दूसरे व्यक्ति नहीं हो सकते। आप तो आप ही हैं। और आप जो हैं उसी में आपको खुश रहना ही है। आपकी गलतियों या किसी और कारण की वजह से नहीं, लेकिन सिर्फ एक मौलिक तरीके से, एक सरल तरीके से आप कल्पना कर सकते हैं खुद से खुश रहने की। इसके लिए बस इतना ही करना है। आपको इस तरह की समझ को बस हासिल करना है।

मैं भी यह समझता हूं कि हम सबके लिए यह बहुत अच्छा समय नहीं है — लॉकडाउन में रहना, इस स्थिति में रहना यह बिल्कुल 'ग्राउंडहॉग डे' की तरह है, (जो मैं जानता हूं कि महज़ एक पिक्चर है जिसमें हर दिन एक जैसा ही होता है, एक ही दिन, एक ही दिन हमेशा दोहराता रहता है।) इस पिक्चर में, दरअसल वो दिन बार-बार आता रहता है, एक ही दिन बार-बार — और वह उससे बहुत बोर हो गया था। वह यही चाहता था कि उसके लिए एक अलग दिन आए। वह कई बुरी चीजें करने की कोशिश करता है। अचानक एक दिन उसे यह अहसास होता है कि “ठीक है” शायद हर दिन एक जैसा ही हो, लेकिन मैं उसमें कुछ बदलाव, कुछ नयापन ला सकता हूं। वह खुद में बदलाव ला सकता है। और जब वह ऐसा करना शुरू करता है तब वह इन सबसे बाहर निकल जाता है फिर से वही दिन और फिर कुछ ऐसा होता है जो उसे पूरी तरह से बदल देता है, ग्राउंडहॉग डे फिल्म में।

कभी-कभी पता है जब मैं — वह मेरी पसंदीदा फिल्मों में से एक है, इसलिए मैं इस फिल्म को काफी देखता हूं। क्योंकि कभी-कभी जब हम फंस जाते हैं — और फिर ऐसा लगता है “ओह हां, आज फिर से एक बार वही दिन है वापस पहले दिन की तरह।” लेकिन जब आप अपने अंदर झांकते हैं और खुद को बदलने की चुनौती लेते हैं, तब आप अपनी जिंदगी को जागरूक होकर जीने की चाह रखते हैं, आप अपने जीवन को जागरूक होकर जीने का अभ्यास करने की चाह रखते हैं। तब आपके साथ कुछ खास होने वाला होता है, आप में कोई बेहतरीन बदलाव आता है और वह शांति आपको इतनी प्यारी लगेगी जिसकी आपने कभी कल्पना भी नहीं की होगी। आपके आंगन में खुशियां नाचेंगी, दरवाजा खटखटाएगी। आपकी जिंदगी खूबसूरत हो जाएगी — बहुत खूबसूरत। तब आपको यह बात समझ में आ जाएगी कि क्यों कई लोगों ने यह बात कही है कि "जिंदगी एक भेंट है।" आप समझ पाएंगे कि वो यह सब बातें क्यों किया करते थे शांति के लिए, खुशी के लिए, अपनी बेहतरीन जिंदगी के लिए। क्योंकि आप अब समझते हैं और अब आप अपनी जिंदगी को उस नज़रिये से देख सकते हैं जिसकी आपने कल्पना की थी।

आपकी सभी समस्याओं की सूची, इच्छाओं की सूची, विफलताओं की सूची और उन सभी चीजों की सूची जिसे आप “सफलता” मानते हैं, इन सबसे आप नहीं नापते हैं लेकिन किसी और चीज से इसकी तुलना करते हैं जो वास्तव में है, असल में है। जिंदगी को जिंदगी की नजरों से ही देखना, इस दुनिया को देखना जिसमें आप रहते हैं, उस दुनिया को जिसमें सूरज है, जिसमें चंद्रमा है, जिसमें सागर है, जिसमें अनगिनत तारे हैं उन सब चीजों को बनाने वाले की नजरों से देखना, उसकी प्रशंसा करना, हर एक दिन की प्रशंसा करना जिस दिन को आप जीते हैं। हर उस पल की प्रशंसा करना कि हम आज जिंदा हैं। क्या होता अगर उस प्रशंसा के लिए आपके सिर पर जुनून सवार होता; आप पर उस खुशी का जुनून सवार होता; आभार देने का जुनून सवार होता ? कैसा होता अगर आपके अंदर जो शांति बसती है आप पर उसका जुनून सवार होता और आपका मन खुशी से नाचता ? तब तो यह दुनिया आपके लिए, मेरे लिए, हम सबके लिए बिल्कुल ही अलग दुनिया होती।

धन्यवाद! सुरक्षित रहें; स्वस्थ रहें!

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