लॉकडाउन - पहला दिन

प्रेम रावत जी के साथ (हिंदी में अनुवादित)
Mar 21, 2020
एक दूसरे को दया और समझ प्रदान करें। यह सहानुभूति, स्पष्ट सोच और साहस का समय है। ” - प्रेम रावत “लॉकडाउन”, प्रेम रावत जी का संदेश, जो इन कठिन दिनों को संबोधित करता है।

प्रेम रावत:

सबको नमस्कार! मैं हूं प्रेम रावत। और जी हां! मुझे लगा कि इस वक़्त आपको, सभी को सम्बोधित करूं।

हम कोरोना वायरस में फंसे हुए हैं! और बहुत लोगों के लिए यह बेहद मुश्किल समय है और अगर किसी भी तरह से मैं भार कम कर सकूं, ये परेशानी, आपकी चिंता, तो जी हां, हम सभी चिंतित हैं। लेकिन अगर किसी तरह मैं वो भार कम कर पाऊं, जो लोग महसूस कर रहे हैं, तो बहुत अच्छा लगेगा।

तो क्या हो रहा है ? अब एक छोटा, छोटा-सा वायरस फैल रहा है और बहुत सारी बातें हैं; लोगों के कई विचार भी हैं; बहुत सारी गलत जानकारी भी है; अच्छी जानकारी भी है; बुरी जानकारी भी है……और देखा जाये तो स्पष्टता बिलकुल नहीं है। इस बारे में जानकारी नहीं है कि सच्चाई क्या है।

अब क्या कुछ बदला है ? देखिये! एक तरह से सबकुछ बदल गया है। लेकिन, हर व्यक्ति सुरक्षित महसूस करना चाहता है। सबको अच्छा महसूस करना है; आजादी महसूस करना चाहता है! तो उस तरह से कुछ भी नहीं बदला, क्योंकि इसमें तो जब सबकुछ ठीक था, जब कोरोना वायरस की परेशानी नहीं थी, लोग तब भी यही सोच रहे थे!

लेकिन आज, क्योंकि बोझ हमारे ऊपर है और अब है कि ये डर — ये डर आ गया है और बिलकुल आप डर को बढ़ने दे सकते हैं और ये डर भी यही चाहता है। लेकिन मैं आपको कुछ याद दिलाना चाहता हूं।

आपके भीतर कुछ कमाल का है, इसे कहते हैं “हिम्मत।” इस मुश्किल समय में, इस चिंतित करने वाले समय में हमें इस्तेमाल करनी चाहिए, अपनी हिम्मत, डर नहीं, इस वक़्त से निकलने के लिए। हमें वह रोशनी चाहिए, जो हमारे हृदय के भीतर चमकती है ताकि अँधेरे जंगल में उजियाला हो पाए।

हमें हर रोज एक उद्देश्य की भावना के साथ जीना होगा, स्पष्टता की भावना, समझ की भावना। भावना जो होगी, संदेह नहीं, पर स्पष्टता, और मैं इस बारे में हमेशा बात करता हूँ। लेकिन इस समय में हमारे भीतर के गुणों को हर रोज चमकना ही होगा, हर रोज!

ये इसके बारे में नहीं कि, जानते हैं “आज जरूरी नहीं।” नहीं, आज जरूरी है। अचानक से ही, पूरी दुनिया में हो गया है एक बंद, हर जगह एक बंद है। देखिये जैसे — तो आप क्या करेंगे? आप क्या सोचते हैं ?

और बहुत ज्यादा गलत जानकारियां हैं — टेलीविज़न पर, सोशल मीडिया में और ऐसे ही बाकी जगह पर। लेकिन आपके भीतर एक सत्य है — और आपको उस सत्य को बाहर आने देना है आपके भीतर एक सच्चाई है और आपको उस सच्चाई को बाहर आने देना है।

इसके विपरीत, मैं कहूंगा, सबकुछ अलग-सा है — क्योंकि इतना कुछ हो रहा है, जैसे एक परेशान करने वाली बात, ये कोरोना वायरस — और हमें सबसे अलग रहना है और ध्यान रखना है कि हम स्वस्थ रहें, लेकिन हमें स्वस्थ रहना ही है। सिर्फ शरीर से नहीं, लेकिन हमें यहाँ से भी स्वस्थ रहना है, दिमाग से।

ये सभी मुद्दे बहुत जरूरी हैं; जैसे कि “हम ये कैसे करेंगे ? हम कैसे अच्छाई को लेकर इसे पूरी तरह से बाहर आने दें ? हम इन मुश्किल हालातों में कैसे मजे करेंगे ?”

कभी-कभी जानते हैं, आपको बस पीछे हटना होता है और खुद से कहिये कि “ये सब किसलिए है ? मैं यहां हूँ, मैं इस पहेली का छोटा-सा हिस्सा हूं।” बिलकुल, आप बाकी लोगों को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहते, इसलिए आप नहीं चाहते कि आप बाकी लोगों में संक्रमण फैला दें और इसका सबसे अच्छा तरीका है कि दूर रहें, निर्देश दिए जा रहे हैं और इसमें कई बातें बिलकुल सही हैं।

आप किस पर निर्भर हैं ? देखिये! पहले तो आपको अपने भीतर देखना होगा। आपको खुद पर निर्भर रहना होगा, आपका हृदय, आपकी समझ, स्पष्टता के लिए चाह, खुश होने की उम्मीद, आपको इस पर निर्भर रहना ही होगा — आपको इसे अपनाना होगा कि यह एक बुनियादी सी चीज है!

डर में डूबना बिलकुल नहीं। लेकिन डूबना जैसे “हे भगवान! मेरे साथ क्या होने वाला है।” अब, आपको चिंता होनी चाहिए — लेकिन इस तरह से कुछ बहुत ही सुन्दर आपके हृदय द्वारा कहा भी जा रहा है, आपके द्वारा।

आपको इसमें खुद को शामिल करना है। खुद को अलग न करें, आपको खुद को इसमें शामिल करना है। आपको यहां उस सुंदरता को शामिल करना है, जो आपके हृदय के भीतर है।

क्योंकि क्या होने वाला है ? जानते हैं, हमने देखा, हमने चाइना की संख्या देखी है और यहीं से महामारी शुरू हुई है। लेकिन गौर से देखें तो उन्होनें बीमारी को रोका और उसे नियंत्रित कर पाए — उस वक़्त तक जबकि आज चलिए जो संख्या है लोगों की, जो मृत हो चुके हैं, नए लोग बीमार हो रहे हैं, वो संख्या कम है!

“क्या हम ये कर सकते हैं; क्या हम ये जंग जीत सकते हैं ?” हां हम ये जंग जीत सकते हैं। बात बस यही है अच्छा होता कि इतनी ज्यादा संख्या नहीं होती, जानते हैं कि मृत लोगों की संख्या, जो बढ़ती ही जा रही है!

लेकिन हम इंसानो को एक साथ रहना होगा; हमें एक साथ आना है और हमें एक अलग तरह से साथ में आना है, हमें मिलकर काम करना है — बस अपने ही साथ रहकर। आइसोलेशन में भी हमें पूर्ण होना है, हमें पूरा होना है और बेवकूफी भरी चीजें नहीं करनी हैं।

लेकिन इसी वक़्त, क्या इंसान इस दौर में जीतेंगे, इस जंग को ? और हां, हां जानते हैं, हां, हमें जीतना ही है; जीतना ही है। हमें आगे जाना है और हम कैसे जीत सकते हैं — समझदार होकर, स्पष्ट होकर, संदेह के बिना, गुस्से के बिना, उलझन के बिना, एक-दूसरे पर आरोप लगाए बिना। ये वक़्त है…

यह जो वायरस है, (जो जीवित वस्तु नहीं, बस चर्बी में लिपटा हुआ थोड़ा आर एन ए है।) इसने दुनिया में जो कुछ भी किया है वह सच में कमाल का है।

यह हमें बुला रहा है, अफसोसजनक और हानिकारक ढंग से कि हम साथ में आएं — हम सभी दुनिया भर में एक-दूसरे की मदद करें, अच्छी खबर फैलाएं, (अफवाह नहीं फैलाएं, गलत जानकारी नहीं फैलाएं), पर ये खबर देना कि “हिम्मत रखें! स्पष्टता रखें, अपने भीतर की अच्छाई का इस्तेमाल करें।”

और बस ऐसा ही करके मुझे लगता है कि हम इससे जीत सकते हैं और हम ये जंग सच में जीत सकते हैं। सच में जीतना और इससे हारेंगे नहीं, इसके सामने झुकेंगे नहीं, इससे चोट नहीं खाएंगे, पर साथ में आएंगे!

और यही वक़्त है खुद पर निर्भर करने का; करना, गलत बातें नहीं, पर जैसे निर्देश दिए गए हैं जानते हैं “आइसोलेट; घर पर रहें! बीमारी बाकी लोगों में न फैलाएं; दूरी बनाये रखें” — ये आसान निर्देश मानिये।

पर इसी वजह को देखते हुए, अपने हृदय पर ध्यान दें, खुद से मिलें, समझदारी लेकर आएं — और बस स्पष्टता से, स्पष्टता के जरिये देखें कि क्या चल रहा है, “हां! मैं जीवित हूँ और मेरी उम्मीदें नहीं बदली हैं!”

तो चाहे जो भी हो! और लोग जानते हैं उनके विचारों से “ये कैसे होगा और हम वो कैसे करेंगे!” और डॉक्टर्स, सच में साथ आ रहे हैं; मेडिकल स्टाफ एक साथ आकर लोगों की मदद कर रहा है। और हमें भी उनकी मदद करनी है। हमें एक-दूसरे की मदद करनी ही है।

यह वक़्त है कि इंसानियत काम करे और हम इंसान — उन सभी अच्छाइयों का अभ्यास करें, जो इंसानो में होती हैं। और एक-दूसरे के काम आएं, एक-दूसरे को कोमलता दिखाएं, एक-दूसरे को समझ दिखाएं, वक़्त है एक-दूसरे को समझने का, एक-दूसरे को संवेदना दिखाने का। यह वक़्त है स्पष्ट सोचने का। यह समय है हिम्मत का।

और अगर हम ऐसा कर पाएंगे तो मुझे लगता है हम बदलाव ला सकते हैं। अपने लिए, हर दिन जब हम जिंदा हैं। कोरोना वायरस के बिना भी, क्योंकि हमें अपनी दुनिया को बनाना है। कोरोना वायरस हो या न हो, हमें स्पष्टता में रहना है।

तो, उम्मीद है कि जितनी चीजें भी मैंने कहीं, आपको कुछ तो ठीक लगी होंगी और आप इसे हृदय तक ले जाएंगे। डरने की कोई भी जरूरत नहीं है, क्योंकि डर कुछ नहीं करता है, जानते हैं वह बस आपको झुका देता है।

आपको अभी चाहिए हिम्मत! परेशानी की जटिलता को समझिये; परेशानी की गंभीरता को समझिये, पर डर को बढ़ावा देने के बजाय स्पष्टता को बढ़ाइए; हिम्मत को बढ़ावा दें; समझ को बढ़ावा दें; संदेह को नहीं। और यहीं बातें हर रोज के जीवन में फर्क़ ला सकती हैं, जिन्हें हम जी रहे हैं।

अब, मुझसे जितना हो पायेगा, उतना संवाद करूँगा आपके साथ — और मेरी यह पहली कोशिश है मैं ये कर रहा हूँ। जानते हैं, बहुत ही आसान तरीके से मैंने अपना ट्राईपॉड सेट किया है; मैंने पाना आइफ़ोन इस पर लगाया है और ये ऐसे ही रिकॉर्ड हुआ है। मेरे पास अतिरिक्त लाइट्स नहीं है; मैं इस कमरे में हूं और ये बैकग्राउंड भी काफी सादा है।

मेरे लिए, पृष्टभूमि की अहमियत नहीं। जानते हैं, लाइटिंग से फर्क़ नहीं पड़ता — जबतक मैं आप तक पहुंचकर कुछ संतोष दे सकूं, कुछ समझ दे सकूं, आपको कुछ स्पष्टता दे सकूं। ताकि ये समय कुछ बेहतर हो पाए। जानते हैं क्योंकि ये मुश्किल समय है। इसमें कोई शक़ नहीं है।

और डर में जीना नहीं — लेकिन जीयें हिम्मत से, स्पष्टता के साथ, समझदारी के साथ। और हां, और हां, हम जीतेंगे, बिलकुल हम जीतेंगे, हम जीतेंगे।

मैं भी इससे प्रभावित हुआ हूँ बिलकुल वैसे ही, जैसे बाकी लोग। मैं यूरोप गया था। मैंने किये थे वहां पर कुछ इवेंट्स और फिर यूरोप एक लॉकडाउन में होने वाला था तो, मैंने सोचा कि चलिए, अब मैं साउथ अमेरिका में थोड़ा-सा वक़्त बिताऊंगा, क्योंकि उस वक़्त कोरोना वायरस के सिलसिले में वहां ज्यादा नहीं हो रहा था।

मैं ब्राज़ील में चला गया और मैं ब्राज़ील में ही था और फिर अगले दिन मुझे शायद अर्जेंटीना जाना था, पर अर्जेंटीना में भी लॉकडाउन लग गया।

फिर कुछ भी ना मीटिंग्स, ना कुछ और। और मैं उरुगुए नहीं जाना चाहता था, क्योंकि वहां पर भी मीटिंग करनी पड़ती मुझको और इस चीज को और फैलाऊं।

ऐसी कई सारी चीजें यहां पर हो रही हैं। और फिर, अंत में मुझे ज्यादा वक़्त पहले नहीं, मैं अमेरिका में आया और मैं अब तक घर नहीं गया हूँ। तो मैं अब भी 2000 मील दूर हूँ अपने घर से। पर मैं अमेरिका में हूँ। और मुझे उम्मीद है कि मैं घर जल्दी जा पाउँगा।

और हां, बिलकुल! बिलकुल! मैं अपने आपको अलग रखने वाला हूँ, पर इसका यह मतलब नहीं कि मैं आपसे बात नहीं कर सकता, इसका यह मतलब नहीं कि मैं संदेश नहीं दे सकता आपको, चाहे आप जहाँ भी हों।

और शायद, शायद मैं एक फर्क़ ला पाऊं और जितना भी हो पायेगा मैं उतना वक़्त आपके लिए उपलब्ध करूँगा। मुझे उम्मीद है कि ये ब्रॉडकास्ट आप तक पहुंचेंगे और आप मजे से सुनेंगे और आपका समय अच्छा बीतेगा। सच में!

धन्यवाद! आपसे फिर मिलूंगा।

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